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                <title>river - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>भिवंडी में भारी बारिश से तबाही, कामवारी नदी खतरे के निशान के ऊपर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में सोमवार को भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के चलते कामवारी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51133/heavy-rains-wreak-havoc-in-bhiwandi-kamwari-river-above-danger"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-04t143130.290.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भिवंडी:</strong> महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में सोमवार को भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के चलते कामवारी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए।</p>
<p> </p>
<p>सोमवार सुबह तक हुई तेज बारिश ने भिवंडी के कई हिस्सों में मुश्किलें बढ़ा दीं। कम समय में बड़ी मात्रा में बारिश होने के कारण जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हुई और निचले क्षेत्रों में पानी जमा होने लगा। कई रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई परिवारों को रातभर जागकर गुजारनी पड़ी। घरों में पानी भरने से फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू वस्तुओं को नुकसान पहुंचा। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोग अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने में जुटे रहे। कई इलाकों में लोग पानी कम होने का इंतजार करते रहे, ताकि सामान्य जीवन फिर से शुरू हो सके।</p>
<p>भिवंडी के कामवारी नदी क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही। लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और पानी किनारे के इलाकों तक पहुंच गया। नदी के तेज बहाव की चपेट में आकर कई वाहन डूब गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि नदी किनारे खड़ी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उफनती कामवारी नदी के पानी में एक मिनी बस बहती हुई दिखाई दे रही है। वीडियो में नदी का तेज बहाव और बाढ़ की भयावह स्थिति नजर आ रही है। इस दृश्य ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है और इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।</p>
<p>भारी बारिश के कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कई सड़कों पर पानी भर जाने से वाहनों की आवाजाही धीमी हो गई। कुछ स्थानों पर वाहन चालकों को लंबे समय तक जाम का सामना करना पड़ा। जलभराव के कारण पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी हुई और कई लोग जरूरी कामों के लिए घरों से बाहर नहीं निकल सके। मौसम की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकालना और लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।</p>
<p>भिवंडी में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या पहले भी सामने आती रही है। शहर के कई निचले इलाकों में बारिश के समय पानी जमा होने से स्थानीय लोगों को हर साल परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि बेहतर जल निकासी व्यवस्था और नालों की नियमित सफाई से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर शहरी क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। यदि नदी और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है, तो आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p>ऐसे में प्रशासन और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी होता है। बारिश के कारण प्रभावित लोगों ने प्रशासन से जल्द राहत और स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि हर साल मानसून में जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित होता है। लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस योजना बनाई जाए। फिलहाल भिवंडी में बारिश का असर कम होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, कामवारी नदी के बढ़े जलस्तर और जलभराव वाले इलाकों को लेकर प्रशासन अभी भी सतर्क है। भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था और बाढ़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 14:32:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई : करोड़ों खर्च हुए, पर नहीं बदला मुंबई की मीठी नदी का भाग्य, अब भी भरी खर-पतवार, प्लास्टिक और कचरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मीठी नदी खर-पतवार, प्लास्टिक और कचरे से भर गई है। BMC ने इस साल 10 जून तक मीठी नदी से गाद निकालने की मियाद तय की थी, लेकिन काम नहीं हो पाया। बाद में नए ठेकेदार को जिम्मा सौंपा गया, पर बारिश आने तक सिर्फ 64% गाद ही हटाई जा सकी। मुंबई की मीठी नदी से पांच मिनट की दूरी पर भारत का सबसे महंगा कारोबारी इलाका बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स है। प्रमुख बैंक, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के साथ-साथ यहीं पर नैशनल स्टॉक एक्सचेंज और बंबई स्टॉक एक्सचेंज भी हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50864/crores-were-spent-but-the-fate-of-mumbais-mithi-river"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-21t115032.349.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मीठी नदी खर-पतवार, प्लास्टिक और कचरे से भर गई है। BMC ने इस साल 10 जून तक मीठी नदी से गाद निकालने की मियाद तय की थी, लेकिन काम नहीं हो पाया। बाद में नए ठेकेदार को जिम्मा सौंपा गया, पर बारिश आने तक सिर्फ 64% गाद ही हटाई जा सकी। मुंबई की मीठी नदी से पांच मिनट की दूरी पर भारत का सबसे महंगा कारोबारी इलाका बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स है। प्रमुख बैंक, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के साथ-साथ यहीं पर नैशनल स्टॉक एक्सचेंज और बंबई स्टॉक एक्सचेंज भी हैं। यहां दफ्तरों का किराया हर महीने औसतन 350 रुपये प्रति वर्ग फुट है। इसके बावजूद, मीठी नदी बदहाल है।</p>
<p> </p>
<p><strong>समस्या जस की तस</strong><br />2005 की भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने मीठी नदी के लिए 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट तय किया था। इनमें से तकरीबन 2,200 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं। नदी अब भी प्रदूषित है। अधिकांश प्रदूषण बिना ट्रीट किए सीवेज से आता है। पानी की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। 2020-21 में नदी का वॉटर क्वॉलिटी इंडेक्स 100 में से 44 था। हर साल गाद निकालने, चैनल चौड़ा करने और दीवारें बनाने का काम दोहराया जाता है, लेकिन तय समय पर पूरा नहीं होता और समस्या जस की तस है।</p>
<p><strong>अधूरी परियोजनाएं</strong><br />पिछले साल मीठी नदी के लिए एक बार फिर कई परियोजनाओं की घोषणा हुई, लेकिन अधिकांश अब भी अधूरी हैं। 455 करोड़ रुपये की सीवेज टनल तैयार है, पर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू न होने से बेकार पड़ी है। नदी का प्रबंधन कई एजेंसियों के जिम्मे है। इस कारण समन्वय की कमी बनी रहती है।</p>
<p><strong>दुनिया से सबक</strong><br />दुनिया के कई शहरों ने साबित किया है कि बदहाल नदियों को दोबारा जीवित किया जा सकता है। सियोल ने 2005 में 50 बरस से दबी चेओंगग्येचेओन धारा को पुनर्जीवित करने के लिए करीब 38 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। 1970 के दशक के अंत तक सिंगापुर ने भी सीवेज व्यवस्था, उद्योगों के स्थानांतरण और सख्त प्रदूषण नियंत्रण के जरिये अपनी प्रदूषित नदी को एशिया के सबसे आकर्षक वॉटरफ्रंट में तब्दील कर दिया।</p>
<p><strong>रणनीति से बदलाव</strong><br />छत्रपति संभाजीनगर की खाम नदी भी कभी मीठी नदी जैसी बदहाल थी। सुनियोजित रणनीति से उसका कायाकल्प किया गया। परियोजना पर 4.5 करोड़ रुपये से अधिक रकम खर्च की गई, जो मीठी नदी की सालाना गाद सफाई लागत का एक फीसदी भी नहीं। असल में, समाधान केवल गाद निकालने में नहीं, सरकार, उद्योगों और विशेषज्ञों की साझेदारी वाले मॉडल में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल पर सवाल, वालधुनी नदी सफाई के लिए न फंड, न योजना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वालधुनी नदी की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कल्याण उप-प्रादेशिक कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में नदी से जुड़ी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर द्वारा पिछले 5 वर्षों की जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि इस अवधि में नदी के मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद कम पत्राचार किया गया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48769/question-on-mumbai-maharashtra-pollution-control-board-neither-fund-nor"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-28t105307.980.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>वालधुनी नदी की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कल्याण उप-प्रादेशिक कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में नदी से जुड़ी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर द्वारा पिछले 5 वर्षों की जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि इस अवधि में नदी के मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद कम पत्राचार किया गया। </p>
<p> </p>
<p>उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार केवल सुनील उतेकर और निशांत कांबले के दो पत्र ही दर्ज पाए गए हैं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने भी वालधुनी नदी के संबंध में शासन को कोई पत्र नहीं भेजा। यानी इस मुद्दे पर विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।</p>
<p><strong>नहीं खोला खर्च का खाता, न ही अलग बजट की व्यवस्था</strong><br />आरटीआई में यह भी खुलासा हुआ कि वालधुनी नदी की सफाई के लिए पिछले पांच वर्षों में कोई निधि (फंड) उपलब्ध नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, नदी से संबंधित कार्यों के लिए कोई अलग अकाउंट हेड या खर्च का खाता भी नहीं खोला गया है। </p>
<p><strong>विभाग की निष्क्रियता पर उठे सवाल</strong><br />इन तथ्यों के सामने आने के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था ने आरोप लगाया है कि अधिकारी केवल दफ्तरों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। मामले को लेकर संस्था ने कड़ा रुख अपनाते हुए जल्द ही तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : उपनगरीय ट्रेन से युवक नदी में गिरा, बचाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के बाहरी इलाके में एक उपनगरीय लोकल ट्रेन से फिसलकर 25 वर्षीय एक युवक नदी में गिर गया, लेकिन रेलवे के एक सतर्क कर्मचारी के समय रहते अधिकारियों को सूचित करने पर उसे तुरंत बचा लिया गया। मंगलवार रात को हुए बचाव अभियान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। यह हादसा उस समय हुआ जब उदय मंगेश वांगड एक लोकल ट्रेन से बोइसर से बोरीवली जा रहा था। वह ट्रेन के दरवाजे के पास खड़ा था और वैतरणा नदी पर बने पुल को पार करते समय उसका संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह पानी में गिर गया। रेल की पटरी के रखरखाव के लिए तैनात कर्मी रमेश सिंह ने यह हादसा देखा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47682/youth-rescued-after-falling-into-river-from-mumbai-suburban-train"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-12t172213.526.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के बाहरी इलाके में एक उपनगरीय लोकल ट्रेन से फिसलकर 25 वर्षीय एक युवक नदी में गिर गया, लेकिन रेलवे के एक सतर्क कर्मचारी के समय रहते अधिकारियों को सूचित करने पर उसे तुरंत बचा लिया गया। मंगलवार रात को हुए बचाव अभियान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। यह हादसा उस समय हुआ जब उदय मंगेश वांगड एक लोकल ट्रेन से बोइसर से बोरीवली जा रहा था। वह ट्रेन के दरवाजे के पास खड़ा था और वैतरणा नदी पर बने पुल को पार करते समय उसका संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह पानी में गिर गया। रेल की पटरी के रखरखाव के लिए तैनात कर्मी रमेश सिंह ने यह हादसा देखा। सिंह ने बताया कि उन्होंने तुरंत शोर मचाया और स्थानीय ग्रामीणों व अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया।</p>
<p> </p>
<p>सिंह ने बताया कि दो स्थानीय लोग अपनी नाव लेकर वांगड तक पहुंचे। वांगड़ पुल के एक खंभे से बाहर निकली एक धातु की छड़ पर बैठा हुआ था। सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने उसे नाव पर चढ़ाया और सुरक्षित रूप से किनारे पर ले आए। सिंह और अन्य लोगों ने बाद में वांगड के परिवार को घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘वह व्यक्ति सदमे में था।</p>
<p>उसे मामूली खरोचें आयी थीं जिसके लिए उसका एक स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार किया गया। मैंने बस अपना कर्तव्य निभाया। संकट में फंसे व्यक्ति को बचाना संतोषजनक था।’ एक अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें वांगड की मां ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘मेरे बेटे को दूसरा जीवन देने वाले देवदूत हैं।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 17:23:53 +0530</pubDate>
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