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                <title>faction - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई: शिवसेना विवाद में उद्धव गुट का चुनाव आयोग पर निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि विधायी विंग में विभाजन को अपने आप में राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51305/uddhav-group-targets-election-commission-in-mumbai-shiv-sena-controversy"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/photo.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि विधायी विंग में विभाजन को अपने आप में राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश के अनुच्छेद 15 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग तभी कर सकता है जब राजनीतिक दल में विभाजन के परिणामस्वरूप दो प्रतिद्वंद्वी गुट बन जाएं। चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुच्छेद 15 के तहत चुनाव आयोग को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी समूहों या गुटों द्वारा दल के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किए जाने पर विवादों का निपटारा करने का अधिकार दिया गया है। आयोग का निर्णय सभी प्रतिद्वंद्वी गुटों पर बाध्यकारी होगा।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि विधायी दल की एक अलग बैठक इस तरह के विभाजन का कारण नहीं बन सकती। "चुनाव आयोग का कहना है कि शिवसेना में फूट पड़ने का संकेत विधायक दल की अलग बैठक का आयोजन था। विधायक दल की अलग बैठक का आयोजन कभी भी पार्टी में फूट का कारण नहीं बन सकता," सिबल ने कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ भारतीय चुनाव आयोग के शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देने के फैसले को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर भी सुनवाई कर रही थी।उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश होते हुए सिबल ने तर्क दिया कि वैधानिक योजना एक राजनीतिक दल और उसके विधायी विंग के बीच अंतर करती है।लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए और चुनाव चिह्न आदेश का हवाला देते हुए, सिबल ने प्रस्तुत किया कि विभाजन की आवश्यकता मूल राजनीतिक दल के स्तर पर पूरी होनी चाहिए।</p>
<p>सिबल के अनुसार, ईसीआई अनुच्छेद 15 के तहत कार्यवाही का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए नहीं कर सकता था कि पार्टी का संविधान स्वयं लोकतांत्रिक था या नहीं।उन्होंने कहा, "ईसीआई केवल एक न्यायाधिकरण है। यह संविधान के लोकतांत्रिक या अलोकतांत्रिक स्वरूप का फैसला नहीं कर सकता।"सिबल ने तर्क दिया कि भले ही पार्टी के संविधान को अलोकतांत्रिक माना जाए, इसका परिणाम केवल पार्टी के पंजीकरण से संबंधित कार्रवाई हो सकता है, न कि उसके चुनावी चिन्ह को ऐसे गुट को हस्तांतरित करना जो स्वयं उसी संगठनात्मक संरचना का हिस्सा हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 10:21:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नवी मुंबई : मेयर चुनाव में शिंदे गुट को बड़ा झटका, महापौर-डिप्टी मेयर पद पर BJP का कब्जा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मेयर चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को जीत मिली है. सुजाता सूरज पाटिल शिवसेना के प्रत्याशी को हराकर नवी मुंबई की नई मेयर चुनी गई हैं. नवी मुंबई मेयर चुनाव में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को झटका लगा है. यहां शिवसेना को न तो मेयर का पद और ना ही डिप्टी मेयर का पद मिला है. गुरुवार (05 फरवरी) को हुए मेयर चुनाव में बीजेपी की सुजाता सूरज पाटिल नवी मुंबई की नई मेयर चुनी गई हैं. पाटिल ने मेयर पद को लेकर चुनावी रेस में शिवसेना उम्मीदवार सरोज रोहिदास पाटिल को हराया.  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47512/big-blow-to-shinde-faction-in-navi-mumbai-mayor-elections"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-06t114245.083.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नवी मुंबई : </strong>मेयर चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को जीत मिली है. सुजाता सूरज पाटिल शिवसेना के प्रत्याशी को हराकर नवी मुंबई की नई मेयर चुनी गई हैं. नवी मुंबई मेयर चुनाव में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को झटका लगा है. यहां शिवसेना को न तो मेयर का पद और ना ही डिप्टी मेयर का पद मिला है. गुरुवार (05 फरवरी) को हुए मेयर चुनाव में बीजेपी की सुजाता सूरज पाटिल नवी मुंबई की नई मेयर चुनी गई हैं. पाटिल ने मेयर पद को लेकर चुनावी रेस में शिवसेना उम्मीदवार सरोज रोहिदास पाटिल को हराया.  </p>
<p> </p>
<p>बीजेपी के दशरथ भगत ने शिवसेना के आकाश बालकृष्ण माधवी को हराकर यहां डिप्टी मेयर के लिए चुने गए. 111 सदस्यीय नवी मुंबई महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी के 65 नगरसेवकों को जीत मिली थी. वहीं, शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के 42 पार्षद हैं. दोनों पार्टियों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था.  </p>
<p><strong>सुजाता सूरज पाटिल कौन हैं?</strong><br />सुजाता सूरज पाटिल बीजेपी की पार्षद और सूरज पाटिल की पत्नी हैं. सूरज पाटिल नवी मुंबई के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं और जमीनी स्तर पर अपने मजबूत प्रभाव के लिए जाने जाते हैं. सुजाता सूरज पाटिल दूसरी बार पार्षद बनी हैं, इसलिए पार्टी के अन्य सीनियर उम्मीदवारों की तुलना में वह अपेक्षाकृत नई हैं. <br />बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री गणेश नाइक ने अधिक अनुभवी पार्टी नेताओं के बजाय सुजाता पाटिल को चुना, जिसका मतलब है कि उनकी चयन प्रक्रिया में वफादारी और विश्वास ने अहम भूमिका निभाई. एचटी की पहले की रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले ने कई बीजेपी पार्षदों को भी चौंका दिया हैं. कई वरिष्ठ महिला नेताओं को इस पद के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा था. पार्टी पार्षदों ने बताया कि उन्हें नामांकन दाखिल करने की सुबह ही इस फैसले की जानकारी मिली.  <br /><strong>विपक्षी नेताओं का बीजेपी पर निशाना</strong><br />उधर शिवसेना समेत विपक्षी नेताओं ने बीजेपी पर निशाना साधा है. विपक्ष के नेता गणेश नाइक पर एकतरफा फैसला करने के साथ ही महायुति गठबंधन के साथियों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं. महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे. वहीं नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:43:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठाणे में शिवसेना को बड़ा झटका, जिस वार्ड में रहते हैं एकनाथ शिंदे वहां उद्धव गुट की जीत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ठाणे महानगरपालिका की वार्ड नंबर 13-अ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे यहीं रहते हैं और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. इस वार्ड में शिवसेना के उम्मीदवार और पूर्व मेयर अशोक वैती को उद्धव ठाकरे गुट ने हराया. उद्धव ठाकरे गुट के उम्मीदवार शाहजी खुपसे ने 667 वोटों से जीत हासिल की है. ठाणे महानगरपालिका में कुल 131 वार्ड हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47035/big-blow-to-shiv-sena-in-thane-uddhav-faction-wins"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-16t194053.593.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ठाणे : </strong>ठाणे महानगरपालिका की वार्ड नंबर 13-अ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे यहीं रहते हैं और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. इस वार्ड में शिवसेना के उम्मीदवार और पूर्व मेयर अशोक वैती को उद्धव ठाकरे गुट ने हराया. उद्धव ठाकरे गुट के उम्मीदवार शाहजी खुपसे ने 667 वोटों से जीत हासिल की है. ठाणे महानगरपालिका में कुल 131 वार्ड हैं. अभी तक के रुझानों के मुताबिक, बीजेपी गठबंधन 44 सीटों पर आगे चल रही है. उद्धव+ तीन सीटों पर आगे चल रही है. अन्य के खाते में 10 सीटें जाती दिख रही हैं और एनसीपी यानी अजित पवार की पार्टी पांच सीटों पर आगे चल रही है.</p>
<p> </p>
<p>ठाणे को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है. 2017 के चुनाव में यहां अविभाजित एनसीपी ने 35, बीजेपी ने 23 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत हासिल की थी. दो सीटों पर एआईएमआईएम और एक सीट पर निर्दलीय ने जीत हासिल की थी.</p>
<p><strong>महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव में कुल 54.77 फीसदी मतदान</strong><br />बता दें कि 15 जनवरी को महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के चुनाव हुए थे. आज नतीजे घोषित किए जा रहे हैं. इस चुनाव में 54.77 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने आज यह जानकारी दी. आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की नवगठित इचलकरंजी महानगरपालिका में सबसे ज्यादा 69.76 फीसदी, जबकि मीरा-भयंदर महानगरपालिका में सबसे कम 48.64 प्रतिशत मतदान हुआ. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 19:42:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिवारवाद पर शिंदे गुट के नेताओं का प्रहार, कार्यकर्ताओं को मौका देकर बनाई मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई और ठाणे में आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले एक दिलचस्प और सकारात्मक राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। आमतौर पर चुनावों में जहां नेता अपने परिवार और रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाते हैं, वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के कुछ प्रमुख नेताओं ने ‘परिवारवाद’ को दरकिनार कर सामान्य कार्यकर्ताओं के लिए अपनी दावेदारी छोड़ दी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले की पत्नी कामिनी शेवाले, मंत्री प्रताप सरनाईक के पुत्र पूर्वेश सरनाईक और सांसद नरेश म्हस्के के पुत्र आशुतोष म्हस्के ने उम्मीदवारी से पीछे हटकर एक राजनीतिक मिसाल पेश की है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46625/leaders-of-shinde-group-attack-on-familyism-and-set-an"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-01t113137.682.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई और ठाणे में आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले एक दिलचस्प और सकारात्मक राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। आमतौर पर चुनावों में जहां नेता अपने परिवार और रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाते हैं, वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के कुछ प्रमुख नेताओं ने ‘परिवारवाद’ को दरकिनार कर सामान्य कार्यकर्ताओं के लिए अपनी दावेदारी छोड़ दी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले की पत्नी कामिनी शेवाले, मंत्री प्रताप सरनाईक के पुत्र पूर्वेश सरनाईक और सांसद नरेश म्हस्के के पुत्र आशुतोष म्हस्के ने उम्मीदवारी से पीछे हटकर एक राजनीतिक मिसाल पेश की है।</p>
<p> </p>
<p><strong>टिकटों की होड़</strong><br />मुंबई नगर निगम चुनाव में टिकटों की होड़ के बीच कामिनी शेवाले मानखुर्द स्थित प्रभाग क्रमांक 142 से चुनाव लड़ने की इच्छुक थीं और उन्होंने जनसंपर्क भी शुरू कर दिया था। लेकिन नामांकन से ठीक पहले उन्होंने स्थानीय 25 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता कुमारी अपेक्षा गोपाल खांडेकर के पक्ष में अपनी दावेदारी वापस ले ली। कामिनी शेवाले ने कहा, “कार्यकर्ता चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूं, लेकिन अपेक्षा खांडेकर वर्षों से यहां सामाजिक कार्य कर रही हैं। इसलिए मैंने और मेरे पति राहुल शेवाले ने पार्टी से अनुरोध किया कि टिकट उन्हें ही दिया जाए।” पार्टी ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अपेक्षा खांडेकर को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया।</p>
<p><strong>‘राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा’</strong><br />ठाणे की राजनीति में विधायक प्रताप सरनाईक के पुत्र और पूर्व नगरसेवक पूर्वेश सरनाईक ने भी सबको चौंका दिया। उन्होंने प्रभाग क्रमांक 14 से चुनाव न लड़ने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर वायरल अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “राजा का बेटा ही राजा नहीं बनेगा, बल्कि जो हकदार होगा वही राजा बनेगा।” उन्होंने अपनी सीट एक वफादार शिवसैनिक के लिए छोड़ने की घोषणा की।</p>
<p><strong>पार्टी हित में त्याग</strong><br />ठाणे के प्रभाग क्रमांक 19 में सांसद नरेश म्हस्के के पुत्र आशुतोष म्हस्के का नाम भी टिकट की दौड़ में सबसे आगे था। हालांकि, पार्टी को अन्य वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करना था। अंततः आशुतोष की जगह किसी अन्य पुराने कार्यकर्ता को टिकट दिया गया। इस पर नरेश म्हस्के ने कहा, “पार्टी में कुछ मजबूरियां होती हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कोई असुविधा न हो, इसलिए हमने पार्टी हित में यह त्याग किया है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/46625/leaders-of-shinde-group-attack-on-familyism-and-set-an</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 11:32:39 +0530</pubDate>
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