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                <title>MACT - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>MACT RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई  : एमएसीटी ने दिलाया 21,00,00,000 रूपयों का मुआवाजा, एचयूएल मैनेजरों की मुंबई हाइवे दुर्घटना में हुई थी मौत, जानिए लीगल एंगल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>किसी भी परिवार के मुखिया की यदि सड़क हादसे में जान चली जाए, तो उसकी दुख वही परिवार जानता है। किसी कमाऊ सदस्य की मौत का असर केवल उसकी तत्काल आय के खत्म होने तक सीमित नहीं होता। परिवार की शिक्षा, आवास, बचत और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी प्रभावित होती है। इसी पहलू को मुंबई एमएसीटी ने एचयूएल के दो मैनेजरों की मौत से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण माना है। मृतक की कमाई परिवार के जीवन स्तर और आर्थिक सुरक्षा में योगदान करती थी।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51573/mumbai-mact-gave-compensation-of-rs-210000000-hul-managers-died"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-27t104001.929.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई  : </strong>किसी भी परिवार के मुखिया की यदि सड़क हादसे में जान चली जाए, तो उसकी दुख वही परिवार जानता है। किसी कमाऊ सदस्य की मौत का असर केवल उसकी तत्काल आय के खत्म होने तक सीमित नहीं होता। परिवार की शिक्षा, आवास, बचत और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी प्रभावित होती है। इसी पहलू को मुंबई एमएसीटी ने एचयूएल के दो मैनेजरों की मौत से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण माना है। मृतक की कमाई परिवार के जीवन स्तर और आर्थिक सुरक्षा में योगदान करती थी।</p>
<p> </p>
<p><strong>2018 में हुआ हादसा और विवाद की शुरुआत</strong><br />हादसा 1 जुलाई 2018 को मुंबई-गोवा नेशनल हाईवे 66 पर रत्नागिरी जिले के खेड़ तालुका में डाभिल स्कूल के पास हुआ था। गिरिश बारवे और राजेश वाडलकर दो अन्य सहकर्मियों के साथ कार में यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे टैंकर से कार की आमने-सामने टक्कर हो गई।</p>
<p>ट्रिब्यूनल के सामने पेश रिकॉर्ड के अनुसार टैंकर तेज गति से आ रहा था और वह अपनी लेन छोड़कर कार की दिशा वाली लेन में आ गया था। टक्कर के बाद टैंकर चालक मौके से चला गया और हादसे की सूचना नहीं दी।</p>
<p>बारवे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाडलकर को पहले स्थानीय स्तर पर उपचार मिला और बाद में मुंबई के अस्पताल ले जाया गया। कई दिनों के इलाज के बावजूद 11 जुलाई 2018 को उनकी भी मौत हो गई।</p>
<p>बाद में बीमा क्लेम के समय ट्रिब्यूनल के समक्ष परिवारों ने बताया कि दोनों मृतक उच्च शिक्षित और अपने-अपने क्षेत्र में सफल पेशेवर थे तथा उनके करियर की संभावनाएं भी मजबूत थीं। इसी कारण मुआवजे की गणना में केवल उस समय की आय नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक संभावनाओं का पहलू भी महत्वपूर्ण बना।<br />लेकिन बीमा कंपनी की ओर से मृतकों की पत्नियों की अपनी नौकरी और आय को मुआवजे में कटौती का आधार बनाने की कोशिश की गई।</p>
<p><strong>एमएसीटी में मुआवजे का फैसला औऱ बीमा कंपनी की आपत्ति</strong><br />इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार गिरिश बारवे की सकल वार्षिक आय करीब ₹95 लाख थी, जबकि राजेश वाडलकर की वार्षिक आय करीब ₹42 लाख बताई गई। इसी आय और आश्रित परिवार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एमएसीटी में मुआवजे की गणना की गई।</p>
<p>बीमा पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मृतकों की पत्नियां स्वयं कमाती थीं, इसलिए परिवार की वास्तविक आर्थिक निर्भरता कम मानी जानी चाहिए। लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस सोच को खारिज कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 10:41:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ठाणे : सड़क हादसे में एमएसीटी ने घायल महिला को 29.39 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मुंबई की निवासी हेमा कांतिलाल वाघेला 31 दिसंबर, 2017 को नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ एक निजी बस में मुंबई के नरीमन पॉइंट गईं थी। 1 जनवरी 2018 की सुबह वापस लौटते वक्त बस हादसे का शिकार हो गई और उसमें हेमा गंभीर रूप से घायल हो गईं। हेमा को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हेमा के वकील बलदेव बी राजपूत ने न्यायाधिकरण को बताया कि याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं और उन्हें जसलोक अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका लंबे समय तक इलाज चला।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39412/thane--mact-orders-compensation-of-rs-29-39-lakh-to-woman-injured-in-road-accident"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/965544-7thpaycommission.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ठाणे :</strong>  ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क हादसे में घायल एक महिला को 29.39 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। महिला साल 2018 में हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई थी। एमएसीटी की सदस्य एस एन शाह ने 18 मार्च को अपने आदेश में कहा कि ठाणे स्थित बस मालिक और बीमाकर्ता संयुक्त रूप से मुआवजे की राशि का भुगतान करेंगे। साथ ही न्यायाधिकरण ने याचिका दायर करने की तारीख से वसूली तक राशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने का आदेश दिया है।  <br /><br />मुंबई की निवासी हेमा कांतिलाल वाघेला 31 दिसंबर, 2017 को नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ एक निजी बस में मुंबई के नरीमन पॉइंट गईं थी। 1 जनवरी 2018 की सुबह वापस लौटते वक्त बस हादसे का शिकार हो गई और उसमें हेमा गंभीर रूप से घायल हो गईं। हेमा को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हेमा के वकील बलदेव बी राजपूत ने न्यायाधिकरण को बताया कि याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं और उन्हें जसलोक अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका लंबे समय तक इलाज चला।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्घटना के बाद, बस चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (तेज गति से गाड़ी चलाना), 337 (जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य से चोट पहुंचाना) और 338 (जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले काम से गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वाघेला ने 53.95 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए मोटर दुर्घटना दावा दायर किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के समय वह एक कंपनी में सलाहकार के रूप में कार्यरत थी, जहां उनकी मासिक आय 85,088 रुपये थी। हालांकि बीमाकर्ता ने दावे का विरोध किया और कहा कि याचिकाकर्ता को मामूली चोटें आईं और हादसे से कोई स्थायी विकलांगता नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि याचिकाकर्ता ने 30 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का प्रमाणपत्र पेश किया। इसके बाद न्यायाधिकरण ने याचिकाकर्ता के दावे को स्वीकार करते हुए 29 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि एक महीने के भीतर बस मालिक और बीमाकर्ता को एमएसीटी ठाणे के खाते में जमा करनी होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Mar 2025 11:08:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ठाणे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने दो भाइयों द्वारा दायर &quot;झूठे और तुच्छ&quot; दुर्घटना दावों को खारिज कर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[ठाणे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने दो भाइयों द्वारा दायर "झूठे और तुच्छ" दुर्घटना दावों को खारिज कर दिया है और एक टेम्पो चालक और दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/14490/thane-motor-accident-claims-tribunal--mact--dismissed-the-%22false-and-frivolous%22-accident-claims-filed-by-two-brothers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-10/images---2022-10-09t182646.679.jpeg" alt=""></a><br /><p>ठाणे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने दो भाइयों द्वारा दायर "झूठे और तुच्छ" दुर्घटना दावों को खारिज कर दिया है और एक टेम्पो चालक और दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है जिन्होंने दावा दायर करने में याचिकाकर्ताओं की सहायता की थी।</p>
<p>एमएसीटी सदस्य एच एम भोसले ने शनिवार को उपलब्ध कराए गए 6 अक्टूबर के आदेश में दोनों भाइयों अविनाश अर्जुन चिखले और देवेश अर्जुन चिखले पर 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।</p>
<p>भाइयों ने अपनी याचिका में ट्रिब्यूनल को सूचित किया कि 1 सितंबर, 2017 को वे महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार कस्बे में साखलेवाड़ी से मोटरसाइकिल पर घर लौट रहे थे। निकटवर्ती रायगढ़ जिले के पनवेल कस्बे के आप्टागांव के पास एक मोड़ पर विपरीत दिशा से आ रहा एक टेंपो उनके वाहन से टकरा गया.  नतीजतन, वे गिर गए और उन्हें चोटें आईं, जिनका इलाज किया गया।</p>
<p>उन्होंने घायलों के इलाज और मुआवजे की मांग की।  दोनों ने न्यायाधिकरण को बताया कि वे कार्यरत थे।  अविनाश, उस समय 19 वर्ष के थे, प्रति माह 8,000 रुपये कमाते थे, जबकि 23 वर्ष के देवेश ने प्रति माह 12,000 रुपये कमाए। मामले में प्रतिवादी आपत्तिजनक टेम्पो के मालिक थे, जिसके बारे में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्होंने उन्हें मारा था, और वाहन के बीमाकर्ता थे।</p>
<p>टेंपो मालिक ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ, इसलिए उसके खिलाफ मामला एकतरफा तय किया गया। बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि लाभ पाने के दावे में टेंपो को 'लगाया' गया था। यह तर्क दिया जाता है कि पुलिस द्वारा दर्ज अविनाश के बयान के अनुसार, किसी अज्ञात वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।  यह 'हिट एंड रन' का स्पष्ट मामला है।</p>
<p>बीमाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि न्यायाधिकरण के समक्ष याचिका विचारणीय नहीं है। इसने यह भी तर्क दिया कि दुर्घटना के 112 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी।  पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए हैं। </p>
<p>याचिकाकर्ताओं द्वारा भरोसा किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट कहीं भी यह नहीं दर्शाते हैं कि उन्हें सड़क यातायात दुर्घटना के इतिहास के साथ भर्ती कराया गया था।  बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना और अस्पताल में भर्ती होने के समय में असमानता यह दर्शाती है कि आपत्तिजनक वाहन "लगाया" गया है।</p>
<p>ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा, "उपरोक्त कारणों के संबंध में, यह बताने की जरूरत नहीं है कि याचिकाकर्ताओं को आपत्तिजनक टेंपो द्वारा दिए गए डैश के परिणामस्वरूप चोट नहीं लगी है। देवेश के नियंत्रण खो देने के कारण वे मोटरसाइकिल से नीचे गिर गए। इसलिए  याचिकाकर्ता मुआवजे के हकदार नहीं हैं और दावा याचिकाएं खारिज किए जाने के योग्य हैं।"</p>
<p>एमएसीटी ने याचिकाकर्ताओं पर लागत लगाई ताकि ऐसा कोई झूठा दावा ट्रिब्यूनल के सामने पेश न किया जाए। आदेश में कहा गया है, "यह एक सामाजिक कानून है। यह देखना सभी का कर्तव्य है कि न्यायाधिकरण के समक्ष केवल प्रामाणिक और वास्तविक दावे ही आने चाहिए।"</p>
<p>ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस फैसले की एक प्रति पुलिस अधीक्षक, रायगढ़ जिले को भेजी जाएगी, जिसमें टेंपो मालिक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने और एक पुलिस उप-निरीक्षक और एक हवलदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Oct 2022 18:27:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MACT का आदेश, बाइक दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिवार को 19.68 लाख का मुआवजा</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 2019 में सड़क दुर्घटना में मारे गए 24 वर्षीय व्यक्ति के परिवार को 19.68 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/13545/mact-order--compensation-of-19-68-lakh-to-the-family-of-the-person-killed-in-the-bike-accident"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-09/accident-5-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ठाणे :</strong> महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 2019 में सड़क दुर्घटना में मारे गए 24 वर्षीय व्यक्ति के परिवार को 19.68 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है.</p>
<p style="text-align:justify;">एमएसीटी के सदस्य एचएम भोसले ने मामले में याचिका दायर करने की तारीख से 8 प्रतिशत प्रति वर्ष के ब्याज के साथ याचिकाकर्ताओं को संयुक्त रूप से और अलग-अलग भुगतान करने का निर्देश दिया है.</p>
<p style="text-align:justify;">30 अगस्त को पारित एक आदेश में एमएसीटी ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को याचिका की लागत के लिए 2,000 रुपए का भुगतान किया जाए. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील एस एम पवार ने एमएसीटी को बताया कि पीड़ित अनिल विशे मुरबाड के एक होटल में रसोइया के रूप में कार्यरत थे और महीने के 21,000 रुपए कमाते थे.</p>
<p style="text-align:justify;">19 जुलाई 2019 को अनिल अपने दोस्त के साथ मोटरसाइकिल से घर जा रहे थे. तभी सामने से आ रही एक टेंपो ने उन्हें टक्कर मार दी. जिसके बाद दोनों गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए थे. एक अस्पताल में इलाज के दौरान अनिल की मृत्यु हो गई. पांच लोगों का परिवार पूरी तरह से अनिल पर निर्भर था. परिवार ने टेंपो के मालिक और बीमाकर्ता से मुआवजे की मांग की थी.</p>
<p style="text-align:justify;">टेंपो मालिक मामले की सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुआ और उसके खिलाफ मामले में एकतरफा फैसला किया गया. जबकि बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड सुनवाई के दौरान मौजूद थी. बीमा कंपनी ने अलग-अलग तथ्यों के आधारा पर परिवार के दावे का जोरदार विरोध किया.</p>
<p style="text-align:justify;">मुआवजे की राशि में परिवार के निर्भरता हानि के लिए 18.14 लाख रुपए शामिल है. वहीं संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के खर्च के लिए प्रत्येक को 16,500 रुपए. इसके साथ ही मुआवजे की राशि में स्पाउसल कंसोर्टियम के लिए 40,000 रुपए और पैरेंटल कंसोर्टियम के लिए 80,000 रुपए की राशि शामिल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 17:34:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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