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                <title>Marathi language - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Marathi language RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मराठी सीखने के लिए ऑटो-टैक्सी चालकों को एक साल की मोहलत, मुंबई में ड्राइवरों ने मनाया जश्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत देने के फैसले के बाद मुंबई में कई चालकों ने खुशी जताई। ड्राइवरों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए जश्न मनाया और इसे राहत भरा कदम बताया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51581/auto-taxi-drivers-get-one-years-time-to-learn-marathi-drivers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/screenshot-2026-08-28-171500.jpeg" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समय-सीमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत देने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद मुंबई में कई ऑटो चालकों ने खुशी जताते हुए जश्न मनाया।</p>
<p><br />मुख्यमंत्री फडणवीस ने ऑटो और टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद यह निर्णय लिया। चालकों की ओर से बताया गया कि अलग-अलग उम्र के कई ड्राइवरों के लिए कम समय में मराठी सीखना मुश्किल है। यूनियन प्रतिनिधियों ने सरकार के मराठी सीखने के नियम पर सहमति जताते हुए इसे पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी।</p>
<p>फडणवीस ने इस दौरान RTO को ऐसे ऑटो और टैक्सी चालकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं, जो अभी तक मराठी भाषा की आवश्यक दक्षता हासिल नहीं कर पाए हैं। यानी चालकों को अपनी भाषा संबंधी योग्यता पूरी करने के लिए अब एक साल का अतिरिक्त समय मिलेगा।</p>
<p><br />मुंबई में ऑटो चालकों ने मनाया जश्न<br />फैसले की जानकारी सामने आने के बाद मुंबई के कुछ ऑटो चालकों में उत्साह देखने को मिला। वायरल वीडियो में ड्राइवर खुशी जताते और जश्न मनाते नजर आए। चालकों ने मुख्यमंत्री के फैसले को राहत देने वाला कदम बताया।</p>
<p><br />यह फैसला ऐसे समय आया है जब मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता को लेकर ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच काफी चर्चा और विरोध देखने को मिला था। कुछ चालकों ने भाषा परीक्षा और कम समय में तैयारी को लेकर अपनी परेशानियां भी सामने रखी थीं।</p>
<p><br />सरकार का क्या है उद्देश्य?<br />सरकार का कहना है कि ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए कार्यात्मक यानी रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाली मराठी भाषा का ज्ञान जरूरी है, ताकि वे यात्रियों से बेहतर संवाद कर सकें। वहीं, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम का उद्देश्य चालकों की आजीविका प्रभावित करना नहीं है, बल्कि उन्हें मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय देना है।</p>
<p><br />एक साल की यह अतिरिक्त मोहलत फिलहाल चालकों को तत्काल कार्रवाई से राहत देती है। हालांकि, तय अवधि के बाद भाषा संबंधी नियमों को किस तरह लागू किया जाएगा, इस पर आगे सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 20:38:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर साइनबोर्ड तोड़फोड़ का मामला, भाषा विवाद ने पकड़ा तूल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पालघर में मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर लगे साइनबोर्ड की तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने हिंदी को प्राथमिकता दिए जाने का विरोध करते हुए बोर्ड को नुकसान पहुंचाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। #Palghar #MumbaiVadodaraExpressway #Marathi #Hindi #MaharashtraNews #BreakingNews #LanguageRow #MumbaiNews</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50156/the-case-of-signboard-vandalism-on-mumbai-vadodara-expressway-language-dispute"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/hero-image-with-text-2026-06-09t140835.912.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>पालघर जिले में मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर लगे एक साइनबोर्ड की कथित तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने साइनबोर्ड पर हिंदी भाषा को प्रमुखता दिए जाने का विरोध करते हुए उसे नुकसान पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित व्यक्ति का कहना था कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक साइनबोर्ड पर मराठी भाषा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर उसने एक्सप्रेसवे पर लगे संकेतक बोर्ड पर आपत्ति जताई। घटना के दौरान साइनबोर्ड को नुकसान पहुंचाने का वीडियो भी सामने आया है।</p>
<p>मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>भाषा और साइनबोर्ड से जुड़े मुद्दे महाराष्ट्र में समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहे हैं। विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने राज्य में मराठी भाषा को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है, जबकि प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार आवश्यक भाषाओं का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों का समाधान कानूनी और संवादात्मक तरीके से होना चाहिए। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।</p>
<p>फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना में शामिल व्यक्ति की भूमिका तथा पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मलबार हिल में गुजराती नेम बोर्ड हटाए गए, मनसे की शिकायत के बाद BMC की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के मलबार हिल इलाके में गुजराती भाषा के नेम बोर्डों को BMC ने हटा दिया है। यह कार्रवाई मनसे की शिकायत के बाद की गई। मामले ने मुंबई में भाषा और साइनज नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। #MumbaiNews #MalabarHill #BMC #MNS #Marathi</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50092/gujarati-name-board-removed-in-malabar-hill-bmc-action-after"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/pudharinews_2026-06-03_l0jj0nf8_bmc-action-malbar-hill-6.jfif.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>मुंबई के मलबार हिल इलाके में लगे गुजराती भाषा के कुछ नेम बोर्डों को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने हटा दिया है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा की गई शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये बोर्ड महानगरपालिका के साइनज नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मलबार हिल के डुंगरसी रोड, स्वतंत्र सैनिक एस. एम. जोशी क्रीड़ांगण और अन्य स्थानों पर गुजराती तथा जैन भाषा में लगे नामफलक को लेकर मनसे ने आपत्ति जताई थी। पार्टी नेताओं का कहना था कि BMC के नियमों के अनुसार सार्वजनिक नामफलक और साइन बोर्ड निर्धारित भाषा मानकों के अनुरूप होने चाहिए।</p>
<p>मनसे ने इस मामले में पुलिस और BMC दोनों को शिकायत दी थी। शिकायत के बाद महानगरपालिका ने संबंधित पक्षों को नोटिस देकर बोर्ड हटाने के निर्देश दिए। बाद में इन बोर्डों को हटा दिया गया।</p>
<p>इस कार्रवाई के बाद भाषा और साइन बोर्ड नियमों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मनसे का कहना है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सभी सार्वजनिक बोर्ड निर्धारित नियमों के अनुसार होने चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।</p>
<p>BMC की ओर से संकेत दिया गया है कि शहर में साइनज नियमों के पालन को लेकर निगरानी जारी रहेगी। इससे पहले भी मुंबई के विभिन्न इलाकों में भाषा संबंधी साइन बोर्डों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।</p>
<p>फिलहाल यह मामला मुंबई में भाषा, स्थानीय पहचान और सार्वजनिक साइनज नियमों को लेकर चल रही बहस का नया केंद्र बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50092/gujarati-name-board-removed-in-malabar-hill-bmc-action-after</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:58:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सभी स्कूलों में कम से कम चार साल के लिए मराठी भाषा विषय को अनिवार्य बनाने की सिफारिश...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली एक समिति ने नीति तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी थी। नीति में मराठी संरक्षण के लिए 25 साल का मास्टर प्लान, महाराष्ट्र राज्य सांस्कृतिक भवन का निर्माण; आदिवासी जिलों में लोक कला अनुसंधान और संरक्षण केंद्र स्थापित करना और महाराष्ट्र लोक कला गैलरी का निर्माण करना; सभी बंद पड़े थिएटरों को फिर से शुरू करना और थिएटर से जुड़े मुद्दों के लिए विधायक निधि के इस्तेमाल की अनुमति देना; सभी बोर्डों के स्कूलों में शास्त्रीय नृत्य का पीरियड शुरू करना; सिंगल स्क्रीन फिल्म थिएटरों को पुनर्जीवित करना; स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में संतों के साहित्य को शामिल करना और राज्य की धार्मिक संस्कृति पर वृत्तचित्र बनाना।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/34397/it-is-recommended-to-make-marathi-language-subject-compulsory-for-at-least-four-years-in-all-schools"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-09/9666f.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने एक नई सांस्कृतिक नीति को मंजूरी दी, जिसमें राज्य भर के सभी स्कूलों में कम से कम चार साल के लिए मराठी भाषा विषय को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है। नीति में ड्राइंग को कक्षा 8 तक अनिवार्य विषय बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसमें नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए खेल की तर्ज पर अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सांस्कृतिक नीति के अनुसार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर लोक कला के संरक्षण के लिए विशेष मौद्रिक व्यवस्था की जाएगी। नीति में राज्य में राष्ट्रीय स्तर के 'संगीत विश्वविद्यालय' की भी सिफारिश की गई है। एक बयान में कहा गया है कि नीति ने 10 क्षेत्रों को लक्षित किया है, अर्थात् शिल्प कौशल, भाषा, दृश्य कला, किले और पुरातत्व, लोक कला, संगीत, रंगमंच, नृत्य, फिल्म और आध्यात्मिक संस्कृति और इसके संबंध में सिफारिशें की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली एक समिति ने नीति तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी थी। नीति में मराठी संरक्षण के लिए 25 साल का मास्टर प्लान, महाराष्ट्र राज्य सांस्कृतिक भवन का निर्माण; आदिवासी जिलों में लोक कला अनुसंधान और संरक्षण केंद्र स्थापित करना और महाराष्ट्र लोक कला गैलरी का निर्माण करना; सभी बंद पड़े थिएटरों को फिर से शुरू करना और थिएटर से जुड़े मुद्दों के लिए विधायक निधि के इस्तेमाल की अनुमति देना; सभी बोर्डों के स्कूलों में शास्त्रीय नृत्य का पीरियड शुरू करना; सिंगल स्क्रीन फिल्म थिएटरों को पुनर्जीवित करना; स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में संतों के साहित्य को शामिल करना और राज्य की धार्मिक संस्कृति पर वृत्तचित्र बनाना।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने ब्राह्मण और राजपूत समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निगम स्थापित करने के दो प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी। ब्राह्मणों के लिए परशुराम आर्थिक विकास निगम और राजपूतों के लिए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप आर्थिक विकास निगम में से प्रत्येक के पास 50 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Sep 2024 13:28:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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