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                <title>rules - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई: ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर ड्राइवरों के लिए 5 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य, सरकार ने तय किए नए नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य सरकार ने कैब एग्रीगेटर (जैसे ओला, उबर आदि) से जुड़े ड्राइवरों के लिए पांच दिन (30 घंटे) का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है। यह ट्रेनिंग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से करनी होगी। एग्रीगेटर को इस ट्रेनिंग का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा और उसकी जानकारी तय पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50965/mumbai-5-days-training-mandatory-for-aggregator-drivers-like-ola-uber"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/uber-ola-rapida-rides-cost-2x-during-peak-hours-with-new-govt-guidelines.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>राज्य सरकार ने कैब एग्रीगेटर (जैसे ओला, उबर आदि) से जुड़े ड्राइवरों के लिए पांच दिन (30 घंटे) का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है। यह ट्रेनिंग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से करनी होगी। एग्रीगेटर को इस ट्रेनिंग का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा और उसकी जानकारी तय पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। </p>
<p> </p>
<p><strong>यह सब होगा ट्रेनिंग में शामिल</strong><br />इस ट्रेनिंग में ड्राइवरों को एग्रीगेटर के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल, संबंधित कानूनों और नियमों, मोटर व्हीकल (ड्राइविंग) रेगुलेशन-2017, सावधानीपूर्वक वाहन चलाने, ट्रैफिक नियमों, वाहन रखरखाव, ईंधन की बचत करने वाली ड्राइविंग, यात्रियों के साथ व्यवहार और विभिन्न चीजों की जानकारी दी जाएगी। </p>
<p><strong>फर्स्ट रिस्पांडर की भी दी जाएगी ट्रेनिंग</strong><br />इसके अलावा, ड्राइवरों को कम से कम छह घंटे की फर्स्ट रिस्पांडर ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि सड़क दुर्घटना होने पर वे तुरंत मदद कर सकें। प्रशिक्षण में महिला सुरक्षा, दिव्यांगजनों की जरूरतों और उनकी सुरक्षित आवाजाही के प्रति संवेदनशीलता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी के साथ-साथ राज्य सरकार समय-समय पर अन्य जरूरी ट्रेनिंग भी निर्धारित करेगी। </p>
<p><strong>लाइसेंस मिलने के छह महीने में सर्विस नहीं शुरू होने पर लाइसेंस होगा रद्द</strong><br />सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लाइसेंस मिलने के छह महीने के भीतर एग्रीगेटर को अपना कारोबार शुरू करना होगा। ऐसा नहीं करने पर लाइसेंस स्वतः रद्द माना जाएगा। हालांकि, जमा की गई सुरक्षा राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन लाइसेंस शुल्क वापस नहीं मिलेगा। इसके अलावा, सभी एग्रीगेटर को स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। </p>
<p><strong>कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की भी ट्रेनिंग देना जरूरी</strong><br />नियमों के अनुसार, एग्रीगेटर को ड्राइवर और कंपनी के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की भी जानकारी ट्रेनिंग के दौरान देनी होगी। इसके लिए एग्रीगेटर को परिवहन आयुक्त के आदेश के एक वर्ष के भीतर सभी पुराने ड्राइवरों को मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे आईडीटीआर , आरडीटीसी और एडीटीसी में प्रशिक्षण दिलाने की योजना प्रस्तुत करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50965/mumbai-5-days-training-mandatory-for-aggregator-drivers-like-ola-uber</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:16:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: कृषि लोन माफी योजना के नियमों में ढील का शरद पवार ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की कृषि लोन माफी योजना के लिए पात्रता नियमों में बदलाव के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से बड़ी संख्या में किसान योजना के लाभ से बाहर होने से बच जाएंगे और उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50674/sharad-pawar-welcomed-the-relaxation-in-the-rules-of-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-11t113522.334.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की कृषि लोन माफी योजना के लिए पात्रता नियमों में बदलाव के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से बड़ी संख्या में किसान योजना के लाभ से बाहर होने से बच जाएंगे और उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी। शरद पवार ने जारी एक बयान में कहा कि राज्य सरकार ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण किसानों को राहत देने के उद्देश्य से लोन माफी योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि खेती लगातार संकटों से गुजर रही है और ऐसे समय में किसानों को आर्थिक सहायता की जरूरत है।</p>
<p> </p>
<p>पवार ने बताया कि योजना की शुरुआती व्यवस्था में कुछ ऐसे नियम शामिल किए गए थे, जिनके कारण कई किसान लाभ पाने से वंचित हो सकते थे। खासतौर पर उन किसानों के लिए पात्रता से जुड़ी सीमाएं तय की गई थीं, जिन्होंने 2018-19 की लोन माफी योजना का लाभ पहले लिया था। उन्होंने कहा कि यदि पुराने लाभार्थियों को नई योजना से बाहर रखा जाता तो बड़ी संख्या में जरूरतमंद किसान इस राहत से वंचित रह जाते। इसलिए पात्रता नियमों को सरल बनाने का फैसला किसानों के हित में है।</p>
<p>किसानों की आर्थिक स्थिति पर चिंता शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान पिछले कई वर्षों से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मौसम में लगातार बदलाव, बेमौसम बारिश, सूखा, फसल नुकसान और बाजार में कृषि उत्पादों की कम कीमतों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि कई किसानों को खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई जैसी बढ़ती लागत के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोन माफी जैसी योजनाएं किसानों को तत्काल राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p>सरकार के फैसले से राहत की उम्मीद पवार ने कहा कि पात्रता नियमों में बदलाव से अब अधिक किसान योजना के दायरे में आ सकेंगे। इससे उन किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, जो पहले बनाए गए नियमों के कारण योजना से बाहर हो रहे थे। उन्होंने सरकार के इस फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि किसानों को राहत देने वाली योजनाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना होना चाहिए। किसी भी प्रकार की जटिल शर्तें किसानों के लिए परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए।<br />कृषि संकट को लेकर उठाए सवाल एनसीपी प्रमुख ने राज्य में कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल कर्ज माफी से किसानों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। किसानों को स्थायी राहत देने के लिए फसल को उचित मूल्य, बेहतर बाजार व्यवस्था, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और कृषि लागत को नियंत्रित करने जैसे कदम भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक नीतियां तैयार करनी चाहिए।</p>
<p>प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसान महाराष्ट्र के कई इलाकों में हाल के वर्षों में बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है। पवार ने कहा कि ऐसे हालात में किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। एक ओर उत्पादन प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा घोषित राहत योजनाओं का लाभ समय पर और बिना कठिन प्रक्रिया के किसानों तक पहुंचना चाहिए। राजनीतिक नजरिए से भी अहम फैसला महाराष्ट्र में किसानों का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में कृषि लोन माफी योजना के नियमों में बदलाव को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों के बीच प्रतिक्रिया सामने आ रही है।</p>
<p>शरद पवार का समर्थन इस फैसले को किसानों के मुद्दे पर सरकार के प्रति नरम रुख के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है। फिलहाल सरकार के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में किसान इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। पात्रता नियमों में बदलाव से उन किसानों को राहत मिलने की संभावना है, जो पहले तकनीकी कारणों से योजना से बाहर हो सकते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:38:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> पुणे : महाराष्ट्र में UCC नियमों के लिए 7 सदस्यीय समिति गठित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की घोषणा की। इस कमेटी में कुल सात सदस्य होंगे, जिनमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के तीन पूर्व जज, एक संवैधानिक विशेषज्ञ, एक पूर्व नौकरशाह और सामाजिक क्षेत्र से दो सदस्य शामिल होंगे। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50658/7-member-committee-formed-for-ucc-rules-in-pune-maharashtra"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-10t142715.577.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे :</strong> महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की घोषणा की। इस कमेटी में कुल सात सदस्य होंगे, जिनमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के तीन पूर्व जज, एक संवैधानिक विशेषज्ञ, एक पूर्व नौकरशाह और सामाजिक क्षेत्र से दो सदस्य शामिल होंगे। </p>
<p> </p>
<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने आज महाराष्ट्र विधानसभा में यह घोषणा की। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरसी चव्हाण, हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसजी मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, महाराष्ट्र के पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री रमेश पतंगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल मुख्य सदस्य होंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सात सदस्यों वाली यह कमेटी यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन करेगी और अगले छह महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट फाइनल करेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागपुर में होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र में विधानसभा और विधान परिषद दोनों में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश करने और उसे पास कराने की कोशिश करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सभी जरूरी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ेगी, ताकि राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा सकें। इससे पहले पिछले हफ्ते, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी, जो भारत में पर्सनल लॉ और कानूनी एकरूपता पर चल रही बहस में एक अहम घटनाक्रम है।<br />इस मुद्दे पर बोलते हुए फडणवीस ने कानून लाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का विचार संविधान में शामिल 'राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों' (Directive Principles of State Policy) से समर्थन पाता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के विजन का जिक्र करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि एक समान नागरिक ढांचा शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समानता और एकरूपता के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखेगा।</p>
<p>यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पूरे देश में UCC पर चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। आज़ादी के बाद उत्तराखंड 'यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड' (UCC) लागू करने वाला पहला राज्य बना। उम्मीद है कि महाराष्ट्र अपना ड्राफ़्ट तैयार करते समय उत्तराखंड के अनुभव का बारीकी से अध्ययन करेगा। वहीं, मई में असम ने अपना UCC बिल पास किया। इसका मकसद धर्म से परे शादी, तलाक़, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक ही सिविल कानूनी ढांचा बनाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50658/7-member-committee-formed-for-ucc-rules-in-pune-maharashtra</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: सूचना के अधिकार नियमों पर रोक का स्वागत, अन्ना हजारे ने अनशन टाला लेकिन वापसी की मांग जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p> सूचना के अधिकार से जुड़े प्रस्तावित नए नियमों पर राज्य सरकार द्वारा रोक लगाए जाने के फैसले का सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए इन प्रस्तावित गाइडलाइंस को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50548/mumbai-uddhav-thackeray-announces-to-launch-ram-raksha-andolan-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-04t114008.634.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सूचना के अधिकार से जुड़े प्रस्तावित नए नियमों पर राज्य सरकार द्वारा रोक लगाए जाने के फैसले का सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए इन प्रस्तावित गाइडलाइंस को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए। अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार का यह कदम एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जब तक नए नियम पूरी तरह रद्द नहीं होते, तब तक संतोष नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे पर उन्होंने 5 जुलाई से प्रस्तावित अपने अनिश्चितकालीन अनशन को फिलहाल टालने की घोषणा की है।</p>
<p> </p>
<p>महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल ही में सूचना के अधिकार नियमों में कई बदलावों का प्रस्ताव रखा गया था, जिन्हें लेकर व्यापक विवाद खड़ा हो गया था। प्रस्तावित नियमों में आरटीआई आवेदन शुल्क बढ़ाने, पहचान पत्र अनिवार्य करने और यह शर्त रखने का सुझाव शामिल था कि प्रत्येक आवेदन केवल एक ही विषय से संबंधित होना चाहिए। इन बदलावों को लेकर सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई थी कि इससे आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन हो सकता है और पारदर्शिता पर असर पड़ेगा। </p>
<p>अन्ना हजारे, जिन्होंने देश में सूचना के अधिकार आंदोलन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो वह अनशन करेंगे। सरकार द्वारा फिलहाल नियमों पर रोक लगाने के बाद उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ अस्थायी राहत है और जब तक प्रस्तावित संशोधन पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र की मजबूती का आधार है और इसमें किसी भी तरह की कटौती जनता के हित में नहीं है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना के अधिकार नियमों में बदलाव को लेकर सरकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच संवाद जरूरी है, ताकि पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों संतुलित रह सकें। फिलहाल सरकार के फैसले के बाद इस मुद्दे पर जारी तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन भविष्य में नियमों के अंतिम स्वरूप को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:38:29 +0530</pubDate>
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