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                <title>US - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : अडानी के फैसले पर अमेरिका का विरोध: नवी मुंबई एयरपोर्ट पर कार्गो शिफ्टिंग को लेकर दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में अडानी ग्रुप का बढ़ता दबदबा अब एक अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप लेता दिख रहा है। आपको बता दें कि मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कार्गो विमानों को नवी मुंबई के नए एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने के अडानी ग्रुप के फैसले का अमेरिका ने कड़ा विरोध किया है। अमेरिकी परिवहन विभाग ने भारत सरकार को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि ये कदम द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते का उल्लंघन है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव आ सकता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49203/america-opposes-mumbai-adanis-decision-warns-about-cargo-shifting-at"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-14t112756.186.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में अडानी ग्रुप का बढ़ता दबदबा अब एक अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप लेता दिख रहा है। आपको बता दें कि मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कार्गो विमानों को नवी मुंबई के नए एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने के अडानी ग्रुप के फैसले का अमेरिका ने कड़ा विरोध किया है। अमेरिकी परिवहन विभाग ने भारत सरकार को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि ये कदम द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते का उल्लंघन है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव आ सकता है। </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या है पूरा विवाद</strong><br />अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने कार्गो ऑपरेटरों जैसे फेडेक्स को निर्देश दिया है कि अगस्त 2026 से मई 2027 के बीच वे अपना परिचालन नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शिफ्ट कर लें। अडानी ग्रुप का तर्क है कि मुख्य मुंबई एयरपोर्ट पर टैक्सीवे के नवीनीकरण का काम होना है, जिससे कार्गो क्षमता 25% तक कम हो जाएगी। हालांकि अमेरिका का मानना है कि ये फैसला तकनीकी मजबूरी कम और नए एयरपोर्ट को जबरन भरने की कोशिश ज्यादा है। </p>
<p><strong>फेडेक्स और द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन</strong><br />वर्तमान में अमेरिकी कंपनी फेडेक्स मुंबई के मुख्य एयरपोर्ट से संचालित होने वाली इकलौती अमेरिकी कार्गो एयरलाइन है। बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि शहर के केंद्र से दूर शिफ्ट करने से एयरलाइंस के प्राइम ऑपरेटिंग स्लॉट्स प्रभावित होंगे। डीओटी के अनुसार ये कदम भारत-अमेरिका हवाई परिवहन समझौते के तहत अमेरिकी वाहकों को मिलने वाले अधिकारों का उल्लंघन करता है। अमेरिका ने साफ किया है कि अगर दबाव बनाया गया, तो वह जवाबी कार्रवाई पर विचार कर सकता है। </p>
<p><strong>अडानी का दबदबा और सरकार की चिंता</strong><br />अडानी ग्रुप वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है। मुंबई के दोनों एयरपोर्ट्स पर ग्रुप का नियंत्रण होने के वजह से ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रैफिक का बंटवारा निष्पक्ष है। साथ ही इस विवाद के बीच भारत सरकार ने अडानी ग्रुप को पत्र लिखकर इस मामले का कोई सम्मानजनक समाधान खोजने को कहा है, जिससे ये मुद्दा बड़े राजनयिक संकट में न बदले।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 11:29:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : पुलिस ने 77.5 करोड़ के यूएस क्लब फ्रॉड केस में सीए को अरेस्ट किया; मैजिस्ट्रियल कस्टडी में भेजा गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>77.5 करोड़ के यूएस क्लब धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी बात सामने आई है। मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने चार्टर्ड अकाउंटेंट चंद्रप्रकाश पांडे को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक झूठी ऑडिट रिपोर्ट जमा की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर हुई फाइनेंशियल गड़बड़ियों को छिपाया गया था। इकोनॉमिक ऑफेंस विंग अधिकारियों के मुताबिक, पांडे, जो 2020 से क्लब के ऑडिटर थे, ने अगस्त 2024 में एक ऑडिट रिपोर्ट जमा की थी, जिसमें दावा किया गया था कि क्लब के अकाउंट्स में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48853/mumbai-police-arrested-ca-in-us-club-fraud-case-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-31t133611.879.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>77.5 करोड़ के यूएस क्लब धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी बात सामने आई है। मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने चार्टर्ड अकाउंटेंट चंद्रप्रकाश पांडे को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक झूठी ऑडिट रिपोर्ट जमा की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर हुई फाइनेंशियल गड़बड़ियों को छिपाया गया था। इकोनॉमिक ऑफेंस विंग अधिकारियों के मुताबिक, पांडे, जो 2020 से क्लब के ऑडिटर थे, ने अगस्त 2024 में एक ऑडिट रिपोर्ट जमा की थी, जिसमें दावा किया गया था कि क्लब के अकाउंट्स में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, जांच करने वालों का आरोप है कि फंड की भारी हेराफेरी को छिपाने के लिए रिपोर्ट बनाई गई थी। यह मामला कोलाबा के यूएस क्लब में हुए कथित फाइनेंशियल फ्रॉड से जुड़ा है, जिसमें पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी (फाइनेंस) बर्नाडेट भारत वर्मा और उनके पति भारतकुमार वर्मा को कथित तौर पर मुख्य आरोपी बनाया गया है। पांडे के साथ दोनों पर नकली वेंडर अकाउंट्स और जाली फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के ज़रिए ₹77.5 करोड़ की हेराफेरी करने का आरोप है।</p>
<p><br />ईओडब्ल्यू  के एक सीनियर अधिकारी ने फ्री प्रेस जर्नल को बताया कि इस मामले में चार्जशीट पहले ही फाइल हो चुकी है। फाइलिंग के समय, सीए पांडे फरार थे। बाद में उन्होंने कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया और उन्हें 30 मार्च तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। उनकी पुलिस कस्टडी खत्म होने के बाद, उन्हें अब मैजिस्ट्रेटी कस्टडी में भेज दिया गया है। जांच जारी है, और अधिकारी मनी ट्रेल और फ्रॉड में दूसरे संभावित साथियों के शामिल होने की जांच कर रहे हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:38:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका : टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप...  लीक हुई बैठक की बातें, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- ‘कुछ करना होगा’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/6999176a9783d-donald-trump-tariff-212437107-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका : </strong>अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी घमासान अब कानूनी मोर्चे पर खुलकर सामने आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए उनके टैरिफ को अवैध ठहरा दिया. 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी साल में व्यापार नीति को भी नई बहस के केंद्र में ला दिया है.<br /><br />अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.<br /><br />राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी कानून का सहारा लेते हुए पहले मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे. इसके बाद उन्होंने 'लिबरेशन डे' के नाम पर भारत समेत कई देशों पर व्यापक टैरिफ लागू कर दिए थे. ट्रंप का तर्क था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं. उनका कहना रहा है कि टैरिफ से विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर होंगी और फैक्ट्रियां वापस लौटेंगी.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर्स के साथ एक निजी बैठक में उन्होंने फैसले को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि 'इन अदालतों के बारे में कुछ करना होगा.' एक बयान में उन्होंने कहा कि वे व्यापार को पूरी तरह रोक सकते हैं या प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन एक डॉलर का टैरिफ नहीं लगा सकते - इसे उन्होंने 'अजीब स्थिति' बताया. उनके इन बयानों से यह संकेत मिला है कि वे न्यायपालिका के फैसले को चुनौती देने या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की तैयारी में हैं.<br /><br />कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नया कदम उठाते हुए वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इसे पहले वाले टैरिफ की जगह लेने वाला कदम बताया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करेगा और व्यापार नीति पर पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक, टैरिफ से अमेरिकी निवेश और रोजगार को मजबूती मिलती है.<br /><br />अदालत के फैसले को उन अमेरिकी राज्यों और कारोबारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने तर्क दिया था कि अचानक बढ़े आयात शुल्क से उत्पादन लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा. अब इस निर्णय के बाद अरबों डॉलर के संभावित रिफंड का रास्ता खुल सकता है. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि मामला आगे भी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रह सकता है.<br /><br />टैरिफ को ट्रंप अपनी आर्थिक नीति की आधारशिला बताते रहे हैं. चुनावी रैलियों में वे दावा करते रहे कि इन कदमों से नौकरियां बढ़ेंगी और अमेरिकी उद्योग को मजबूती मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने चुनावी साल में उनकी व्यापार रणनीति पर अनिश्चितता पैदा कर दी है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन कौन-से वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाता है और क्या यह टकराव कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बड़े संवैधानिक संघर्ष का रूप लेता है. फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी और कानूनी जंग अभी थमी नहीं है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:39:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : राहुल का सरकार पर वार: 'चीन हमारे सामने आ रहा था..तब कहां थी 56 इंच की छाती, राष्ट्रीय सुरक्षा अहम मुद्दा'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से चीन की सेना की ओर से घुसपैठ का दावा किया। इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम केंद्रीय मंत्रियों ने आपत्ति जताई। इसकी वजह से लोकसभा का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा में सोमवार को कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान जोरदार हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम में चार चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे। राहुल गांधी के दावे पर का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार विरोध किया था। जिसके बाद सदन में काफी हंगामा देखने को मिला। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47429/new-delhi-rahuls-attack-on-the-government-china-was-coming"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-02t191955.260.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली : </strong>संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से चीन की सेना की ओर से घुसपैठ का दावा किया। इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम केंद्रीय मंत्रियों ने आपत्ति जताई। इसकी वजह से लोकसभा का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा में सोमवार को कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान जोरदार हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम में चार चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे। राहुल गांधी के दावे पर का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार विरोध किया था। जिसके बाद सदन में काफी हंगामा देखने को मिला। </div>
<div> </div>
<div>राहुल गांधी के संबोधन के दौरान लोकसभा कई बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए चेयर पर आसीन सांसद जगदंबिका पाल ने सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पता नहीं सरकार क्यों डर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सच छुपा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा जरूरी है। </div>
<div> </div>
<div><strong>प्रधानमंत्री मोदी पर राहुल गांधी ने साधा निशाना</strong></div>
<div>नेता विपक्ष ने मीडिया से कहा, 'मैं सुरक्षा के मुद्दे पर सदन में बोलना चाहता था। पूर्व सेना प्रमुख ने राजनाथ सिंह से क्या कहा था। पता नहीं सरकार क्यों डरी हुई है। मैं पूर्व सेना प्रमुख की बात बताना चाहता था। नरवणेजी ने प्रधानमंत्री के बारे में, राजनाथ के बारे में एक आर्टिकल में लिखा है। मैं वो बोल रहा हूं, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। चीन हमारे सामने आ रहा था। तब 56 इंच की छाती को क्या हुआ था?'</div>
<div> </div>
<div>कांग्रेस सांसद ने कहा, 'मैं सदन में बोलना चाहता हूं। मुद्दा वही है जो प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह जी ने कहा। जमीन ली गई या नहीं, यह एक अलग सवाल है। हम उस पर बाद में बात करेंगे। लेकिन उससे पहले, देश के नेता को दिशा-निर्देश देने चाहिए। देश के नेता को फैसले लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए और फैसले दूसरों के कंधों पर नहीं छोड़ने चाहिए। प्रधानमंत्री ने यही किया है।'</div>
<div> </div>
<div><strong>राहुल गांधी ने पूछे ये सवाल?</strong></div>
<div>राहुल गांधी ने कहा, 'मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। मुझे सिर्फ दो-तीन लाइनें बोलनी हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। ये पूर्व सेना प्रमुख के शब्द हैं और यह वह बातचीत है जो उन्होंने राजनाथ सिंह जी और प्रधानमंत्री मोदी से की है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मैं सदन में वही कहना चाहता हूं जो पूर्व सेना प्रमुख ने लिखा है और राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें क्या आदेश दिए थे।'</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47429/new-delhi-rahuls-attack-on-the-government-china-was-coming</link>
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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 19:21:01 +0530</pubDate>
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