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                <title>MHADA - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>MHADA RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महाराष्ट्र : नासिक में म्हाडा कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र की रफ्तार धीमी...  प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए इंतजार कर रहे बिल्डर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं। लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51918/maharashtra-after-mhada-action-in-nashik-construction-sector-slows-down"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/8998.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नासिक : </strong>म्हाडा आवास प्रकरण में हुई कार्रवाई के बाद नासिक के निर्माण व्यवसायियों में अब भी आशंका का माहौल बना हुआ है। इसका असर शहर के पूरे निर्माण क्षेत्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इस प्रकरण के बाद निर्माण व्यवसायियों द्वारा नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए मनपा के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रमाण तेजी से घटा है। नई परियोजनाओं में निवेश को लेकर भी व्यवसायियों ने सावधानी बरतना शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई शुरू होने के बाद अब तक मंजूरी के लिए दाखिल हुए नए प्रोजेक्ट की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक ही होने की जानकारी सामने आ रही है। परिणामस्वरूप निर्माण क्षेत्र में करोड़ों रुपये की आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने के साथ ही मनपा के राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका है।<br /><br />नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं। लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।<br /><br />नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने से लेकर वास्तुरचना, विभिन्न मंजूरियां, विकास शुल्क, टीडीआर-एफएसआई, निर्माण लागत औ०र वित्तीय व्यवस्था तक बड़ी राशि निवेश करनी पड़ती है। ऐसे में आज मंजूर किया गया प्रोजेक्ट कल किसी जांच के दायरे में आएगा या नहीं, दस्तावेजों की दोबारा जांच होगी या नहीं और प्रशासनिक नियमों में फिर कोई बदलाव होगा या नहीं, ऐसे सवाल निर्माण व्यवसायियों के सामने खड़े हैं।<br />म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई का दायरा बढ़ने से यह आशंका और गहरी हुई है। मनपा के नगररचना विभाग ने 49 मामलों से संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद लेआउट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद भी इस प्रकरण में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।<br /><br />निर्माण क्षेत्र में मंदी का असर केवल बिल्डर या विकासक तक सीमित नहीं रहेगा। नए प्रोजेक्ट कम होने पर मनपा को मिलने वाला विकास शुल्क, निर्माण अनुमति शुल्क, प्रीमियम, टीडीआर-एफएसआई से संबंधित शुल्क तथा अन्य राजस्व भी घट सकता है। एक ओर शहर के विकास कार्यों के लिए अधिक निधि की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत निर्माण क्षेत्र की गति धीमी होने की स्थिति बन गई है। इसका असर वास्तुविशारद, इंजीनियर, ठेकेदार, निर्माण श्रमिक, स्टील-सिमेंट विक्रेता, हार्डवेयर व्यवसायी, रियल एस्टेट एजेंट तथा निर्माण क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है।<br /><br />आर्किटेक्ट विजय सानप ने कहा कि पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा नासिक म्हाडा से संबंधित नियमों में किए गए बदलावों के कारण भी निर्माण व्यवसायियों में असमंजस की स्थिति है। नए नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और उस पर प्राप्त सुझाव एवं आपत्तियों के निपटारे तक कुछ प्रोजेक्ट की मंजूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की बात निर्माण क्षेत्र से जुड़े सूत्रों द्वारा कही जा रही है। इसके साथ ही टीडीआर के नियमों में 50:50 की नई व्यवस्था आने से छोटे प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। छोटे प्रोजेक्ट कम होने पर इसका असर निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ महापालिका को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ सकता है।<br />नगररचना के उपसंचालक रितेश चव्हाण का कहना है कि म्हाडा प्रकरण के बाद मनपा के पास बड़े प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए बहुत कम आए थे। हालांकि, अब धीरे-धीरे नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए आने लगे हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है। कुछ समय के लिए अंतर जरूर पड़ा था, लेकिन अब नियमित रूप से काम शुरू है।<br /><br />म्हाडा प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। लेकिन इसका असर पूरे निर्माण क्षेत्र पर न पड़े, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की भी है। नासिक मनपा को नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने के साथ ही निर्माण व्यवसायियों की शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रभावी संवाद शुरू करना चाहिए। नासिक का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक ब्रेक लगना चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:00:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>नायगांव BDD चॉल पुनर्विकास परियोजना पर संकट, पानी की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान रहवासी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नायगांव BDD चॉल पुनर्विकास परियोजना में पानी की कमी, बंद शौचालय और खराब लिफ्ट जैसी समस्याओं के कारण कई रहवासी नए घरों में शिफ्ट होने से हिचक रहे हैं। रहवासियों ने पहले बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने की मांग की है। #BDDChawl #MHADA #MumbaiNews #WaterCrisis #Redevelopment #MaharashtraNews #BreakingNews</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50160/crisis-on-naigaon-bdd-chawl-redevelopment-project-residents-troubled-by"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/untitled-design-2025-08-25t153525.806.jpeg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>मुंबई के नायगांव स्थित BDD चॉल पुनर्विकास परियोजना में रहवासियों के पुनर्वास की प्रक्रिया बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। नए पुनर्वास भवनों में पानी की समस्या, बंद पड़े शौचालय, लिफ्ट खराबी और अन्य आधारभूत सुविधाओं की कमियों के चलते कई परिवार अब तक स्थानांतरित होने को तैयार नहीं हैं।</p>
<p>रहवासियों का कहना है कि पुनर्वास के लिए तैयार किए गए भवनों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। कई इमारतों में शौचालयों की कार्यप्रणाली प्रभावित है, जबकि कुछ स्थानों पर लिफ्ट बार-बार बंद पड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। इन समस्याओं के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब तक आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह चालू नहीं होतीं, तब तक नए घरों में स्थानांतरण करना व्यावहारिक नहीं है। कई परिवारों ने मांग की है कि पहले पानी, स्वच्छता और लिफ्ट जैसी बुनियादी सेवाओं को दुरुस्त किया जाए, उसके बाद ही पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।</p>
<p>महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य पुराने BDD चॉल परिसर का पुनर्विकास कर आधुनिक आवास उपलब्ध कराना है। हालांकि बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों ने परियोजना की प्रगति को प्रभावित किया है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि रहवासियों द्वारा उठाई गई समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है और संबंधित विभागों को आवश्यक सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि जलापूर्ति, स्वच्छता व्यवस्था और लिफ्ट संचालन से जुड़े मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुनर्विकास परियोजना की सफलता केवल भवन निर्माण पर नहीं, बल्कि उसमें उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है। ऐसे में रहवासियों की चिंताओं का समय पर समाधान परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:18:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : पुनर्निर्माण की महाक्रांति! मोतीलाल नगर में म्हाडा का पहला मेगा टाउनशिप प्रोजेक्ट धमाका...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">म्हाडा की पहचान मुख्य रूप से किफायती आवास योजनाओं और छोटे स्तर के पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स तक सीमित रही है। लेकिन बदलते समय और मुंबई की बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए संस्था ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है। यह नया टाउनशिप प्रोजेक्ट इस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसमें एक ही स्थान पर हजारों परिवारों के लिए आधुनिक और व्यवस्थित आवास तैयार किए जाएंगे। इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट से न केवल निर्माण कार्य में तेजी आएगी, बल्कि शहर के अव्यवस्थित और पुराने इलाकों को व्यवस्थित रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। यह मॉडल भविष्य में मुंबई के अन्य पुराने आवासीय क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49251/mhadas-first-mega-township-project-blast-in-motilal-nagar-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/err.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवास संकट के बीच महाराष्ट्र गृहनिर्माण क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए अपने पहले बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। यह महत्वाकांक्षी योजना मोतीलाल नगर, गोरेगांव में 143 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित की जाएगी। यह परियोजना केवल इमारतों के पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इलाके को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखती है। अधिकारियों के अनुसार, आगामी 2 से 4 दिनों के भीतर इस प्रोजेक्ट का विस्तृत खाका आम जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सके।<br /><br />अब तक म्हाडा की पहचान मुख्य रूप से किफायती आवास योजनाओं और छोटे स्तर के पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स तक सीमित रही है। लेकिन बदलते समय और मुंबई की बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए संस्था ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है। यह नया टाउनशिप प्रोजेक्ट इस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसमें एक ही स्थान पर हजारों परिवारों के लिए आधुनिक और व्यवस्थित आवास तैयार किए जाएंगे। इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट से न केवल निर्माण कार्य में तेजी आएगी, बल्कि शहर के अव्यवस्थित और पुराने इलाकों को व्यवस्थित रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। यह मॉडल भविष्य में मुंबई के अन्य पुराने आवासीय क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।<br /><br />इस परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्तमान में छोटे और सीमित जगह में रहने वाले परिवारों को बड़े और आधुनिक फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। अभी मोतीलाल नगर में कई परिवार लगभग 230 वर्ग फुट के छोटे घरों में रहते हैं, जहां जगह की कमी, खराब वेंटिलेशन और सीमित सुविधाएं आम समस्या हैं। रीडेवलपमेंट के बाद इन्हीं परिवारों को लगभग 1600 वर्ग फुट तक के विशाल फ्लैट मिलेंगे, जिसमें बेहतर वेंटिलेशन, प्राकृतिक रोशनी, अलग-अलग कमरे, आधुनिक रसोई और सुरक्षित संरचना जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे न केवल उनके रहने का स्तर सुधरेगा, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।<br /><br />म्हाडा इस प्रोजेक्ट को केवल आवासीय इमारतों तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि इसे एक पूर्ण विकसित टाउनशिप के रूप में तैयार किया जाएगा। इस योजना में चौड़ी और सुव्यवस्थित सड़कें, ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, हरित क्षेत्र और पार्क, बच्चों के खेलने के लिए स्थान, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं, पर्याप्त पार्किंग और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था शामिल होगी। इसके अलावा, टाउनशिप के भीतर ही स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग सेंटर, कम्युनिटी हॉल और मनोरंजन के साधन विकसित किए जाएंगे, जिससे निवासियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। यह प्रोजेक्ट ‘वॉक-टू-वर्क’ और ‘वॉक-टू-लाइफ’ की अवधारणा को भी बढ़ावा देगा, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।<br /><br />म्हाडा के उपाध्यक्ष संजीव जयस्वाल ने इस प्रोजेक्ट को संस्था के लिए एक नया अध्याय बताया है। उनके अनुसार, म्हाडा अब केवल सस्ते घर उपलब्ध कराने वाली संस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण के साथ आवास क्षेत्र में नई पहचान बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से म्हाडा यह दिखाना चाहती है कि सरकारी एजेंसियां भी निजी डेवलपर्स की तरह उच्च स्तर के और आकर्षक प्रोजेक्ट विकसित कर सकती हैं। इससे लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा और भविष्य में ऐसे और प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहन मिलेगा।<br /><br />विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर रीडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स से मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में सकारात्मक बदलाव आएगा। जहां एक ओर पुराने और जर्जर भवनों की जगह सुरक्षित और आधुनिक इमारतें बनेंगी, वहीं दूसरी ओर शहर के बुनियादी ढांचे पर भी दबाव कम होगा। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, क्योंकि निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में श्रमिकों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों की आवश्यकता होगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।<br /><br />हालांकि यह प्रोजेक्ट काफी महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए कई चरणों से गुजरना होगा। सबसे पहले निवासियों की सहमति लेना आवश्यक होगा, क्योंकि रीडिवेलपमेंट में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। इसके बाद पर्यावरणीय मंजूरी, कानूनी प्रक्रियाएं और वित्तीय व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, यदि सभी चरण सही तरीके से पूरे किए जाते हैं, तो यह प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में मुंबई के सबसे सफल और आदर्श टाउनशिप प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकता है।<br /><br />गोरेगांव का मोतीलाल नगर रीडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण योजना नहीं, बल्कि मुंबई के शहरी विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह प्रोजेक्ट न केवल हजारों परिवारों के जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि शहर के समग्र विकास को भी नई गति देगा। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में मुंबई के अन्य पुराने और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी इसी तरह के बड़े और सुव्यवस्थित टाउनशिप प्रोजेक्ट्स लागू किए जा सकते हैं, जिससे शहर को एक नया और आधुनिक स्वरूप मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:45:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई बोर्ड के म्हाडा घरों के लिए आवेदन आज से, जानिए कहां-कितने घर और कैसे करें आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र गृहनिर्माण क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) मुंबई बोर्ड के घरों की लॉटरी का इंतजार करने वालों के लिए खुशखबरी है। मुंबई बोर्ड के 2640 घरों की लॉटरी के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सोमवार दोपहर 3 बजे से शुरू हो रही है। 15 मई को सुबह 11बजे घरों की लॉटरी जारी होगी। म्हाडा उपाध्यक्ष संजीव जयसवाल द्वारा सोमवार दोपहर 3 बजे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को गो लाइव किया जाएगा। संजीव के एक बटन दबाने के बाद से 2640 घरों को लेने की रेस शुरू हो जाएगी। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48819/application-for-mhada-houses-of-mumbai-board-from-today-know"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-30t123600.555.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र गृहनिर्माण क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) मुंबई बोर्ड के घरों की लॉटरी का इंतजार करने वालों के लिए खुशखबरी है। मुंबई बोर्ड के 2640 घरों की लॉटरी के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सोमवार दोपहर 3 बजे से शुरू हो रही है। 15 मई को सुबह 11बजे घरों की लॉटरी जारी होगी। म्हाडा उपाध्यक्ष संजीव जयसवाल द्वारा सोमवार दोपहर 3 बजे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को गो लाइव किया जाएगा। संजीव के एक बटन दबाने के बाद से 2640 घरों को लेने की रेस शुरू हो जाएगी। </p>
<p> </p>
<p>आवेदक 29 अप्रैल रात 11:59 बजे तक म्हाडा की वेबसाइट housing.mhada.gov.in से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। 30 अप्रैल की रात 11:59 बजे तक आवेदक डिपॉजिट जमा कर दावेदारी पक्की कर सकते हैं। </p>
<p><strong>लॉटरी में कहां-कहां है घर?</strong><br />कन्नमवार नगर विक्रोली, पत्राचाल सिद्धार्थ नगर गोरेगांव, मागाठाणे- बोरीवली, गोराई-बोरीवली, सुभाष नगर-चेंबूर, गांधीनगर बांद्रा, पंतनगर घाटकोपर, गिरगांव, वडाला, कोपरी पवई, मझगांव, तुंगा पवई, लोकमान्य नगर दादर, पहाडी गोरेगाव, एंटॉप हिल वडाला के घरों को शामिल किया गया है। आवेदक म्हाडा की वेबसाइट से जानकारी ले सकते हैं।</p>
<p><strong>किस श्रेणी में कितने घर?</strong><br />अत्यल्प आय वर्ग के 145 घर, अल्प आय वर्ग के 858 घर, मध्यम वर्ग के 1408 घर और उच्च वर्ग के 229 घरों को लॉटरी में शामिल किया गया है। मुंबई बोर्ड के तैयार किए जा रहे प्रॉजेक्ट के 1762 घर, 33(5) रीडिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट के तहत म्हाडा को प्राप्त हुए 371 घर, 33/ 7 योजना के तहत मिले 1S8 घरों को भी लॉटरी में शामिल किया गया है। पिछली बार न बिके 319 घरों को फिर से लॉटरी में शामिल किया गया। </p>
<p><strong>म्हाडा के घर आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगेंगे?</strong><br />लॉटरी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आवेदक को आधार कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर, मेल आईडी, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और आईटी रिटर्न की जरूरत होगी। म्हाडा की लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है। लॉटरी के लिए म्हाडा की तरफ से किसी भी एजेंट या प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:37:00 +0530</pubDate>
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