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                <title>western - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>western RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई में खुलेगा यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया का कैंपस, यूजीसी से मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया ने बताया कि उसे मुंबई में अपना इंटरनेशनल कैंपस शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय सितंबर में मुंबई कैंपस में छात्रों के पहले बैच का स्वागत कर सकेगा।  यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की चांसलर डॉ. डायने स्मिथ-गैंडर एओ ने कहा, "यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया मुंबई का खुलना यूनिवर्सिटी और भारत के साथ हमारे रिश्तों के लिए एक अहम पड़ाव है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51589/university-of-western-australia-campus-will-open-in-mumbai-approval"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-29t084851.163.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई : यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया ने बताया कि उसे मुंबई में अपना इंटरनेशनल कैंपस शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय सितंबर में मुंबई कैंपस में छात्रों के पहले बैच का स्वागत कर सकेगा।  यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की चांसलर डॉ. डायने स्मिथ-गैंडर एओ ने कहा, "यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया मुंबई का खुलना यूनिवर्सिटी और भारत के साथ हमारे रिश्तों के लिए एक अहम पड़ाव है।</p>
<p> </p>
<p>सबसे जरूरी बात यह है कि इससे छात्रों के लिए नए मौके बनेंगे और उन्हें दुनिया भर में मशहूरयूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा मिलेगी, साथ ही वे भारत के मौकों, समुदायों और उम्मीदों से भी जुड़े रहेंगे। हम मुंबई में अपने पहले छात्रों का स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं।"</p>
<p>सितंबर में छात्रों के आने से पहले यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया कैंपस में ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके जरिए छात्रों को मुंबई कैंपस, पढ़ाई की व्यवस्था और वहां के माहौल के बारे में जानकारी दी जाएगी।</p>
<p>वाइस-चांसलर प्रोफेसर अमित चकमा ने कहा, "यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया मुंबई में अपने पहले छात्रों का स्वागत करने की दिशा में यूजीसी से मंजूरी का पत्र मिलना एक अहम कदम है। अब हमारा ध्यान पहले दिन से ही छात्रों को बेहतरीन अनुभव देने पर है। ऐसा अनुभव जो यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की एकेडमिक उत्कृष्टता और वैश्विक नजरिए को भारत में मौजूद अवसरों के साथ जोड़ता हो।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 08:49:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : पश्चिम रेलवे ने स्टेशनों के 22 खाने-पीने की स्टॉल बंद, बांद्रा के 11 शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में खाने-पीने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकराम मुंढे की कार्रवाई के बाद अब पश्चिम रेलवे भी सतर्क हो गया है। रेलवे के स्टेशनों पर खाने-पीने की दुकानों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी कार्रवाई के तहत बांद्रा स्टेशन की 11 दुकानें बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा ग्रांट रोड की 4, लोअर परेल की 3, चरनी रोड की 2 और मरीन लाइंस की 2 दुकानों समेत कुछ अन्य स्टेशनों के स्टॉल भी बंद कर दिए गए है। जानकारी के अनुसार, अब दूसरे स्टेशनों के खाने-पीने के स्टॉल भी पश्चिम रेलवे के रडार पर हैं और उनकी जल्द जांच की जा सकती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51440/mumbai-western-railway-closes-22-food-stalls-at-stations-including"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/train-sealed-mumbai-1763042332771_l.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र में खाने-पीने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकराम मुंढे की कार्रवाई के बाद अब पश्चिम रेलवे भी सतर्क हो गया है। रेलवे के स्टेशनों पर खाने-पीने की दुकानों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी कार्रवाई के तहत बांद्रा स्टेशन की 11 दुकानें बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा ग्रांट रोड की 4, लोअर परेल की 3, चरनी रोड की 2 और मरीन लाइंस की 2 दुकानों समेत कुछ अन्य स्टेशनों के स्टॉल भी बंद कर दिए गए है। जानकारी के अनुसार, अब दूसरे स्टेशनों के खाने-पीने के स्टॉल भी पश्चिम रेलवे के रडार पर हैं और उनकी जल्द जांच की जा सकती है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्यों बंद हुए रेलवे के स्टॉल</strong><br />नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांश वे स्टॉल बंद किए गए हैं, जहां छोले, समोसा, वड़ा समेत अन्य तैयार खाने -पीने की चीज़ें बेचे जा रहे थे। जांच के दौरान इन दुकानों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं पाई गई। कई दुकानों में साफ-सफाई की स्थिति भी खराब थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ स्टॉल पर काम करने वाले कर्मचारियों के पास जरूरी मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं थे। एक दुकान में चार कर्मचारी काम करते पाए गए, लेकिन मेडिकल सर्टिफिकेट सिर्फ दो कर्मचारियों के पास था। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकानों पर कार्रवाई की गई। उन्हें उनकी गलती सुधारने के लिए कुछ समय दिया गया है। फिलहाल सिर्फ पैकेज फ़ूड का आइटम ही स्टाल पर मिल रहा है।</p>
<p><strong>जनवरी से जुलाई तक 1,523 जांच का दावा</strong><br />हालांकि, पश्चिम रेलवे का कहना है कि उसके अधिकारी और सुपरवाइजर समय-समय पर स्टेशनों पर मौजूद खाने-पीने के स्टॉल की जांच करते रहते हैं। पश्चिम रेलवे के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 1,523 रेगुलर और सरप्राइज जांच की गई हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में दुकानों में गुणवत्ता, स्वच्छता और कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र से जुड़ी खामियां मिलने के बाद रेलवे की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 11:34:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई :वेस्टर्न रेलवे का बड़ा बदलाव: ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन रोल आम लोगों के लिए खुला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वेस्टर्न रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और डिजिटल टिकटिंग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम और अपनी तरह का पहला कदम उठाया है। अब ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन फैसिलिटेटर का रोल आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया है। इस फैसले के साथ वह पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है, जिसमें यह जिम्मेदारी केवल रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों तक सीमित थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50514/mumbai-western-railways-big-change-automatic-ticket-vending-machine-roll"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/untitled-design-2026-02-03t145139.716-1280x720.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>वेस्टर्न रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और डिजिटल टिकटिंग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम और अपनी तरह का पहला कदम उठाया है। अब ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन फैसिलिटेटर का रोल आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया है। इस फैसले के साथ वह पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है, जिसमें यह जिम्मेदारी केवल रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों तक सीमित थी। रेलवे प्रशासन के इस निर्णय को स्टेशन पर टिकटिंग व्यवस्था को अधिक सरल और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे यात्रियों को अनरिज़र्व्ड सबअर्बन टिकट लेने में आसानी होगी और सेल्फ-टिकटिंग सिस्टम के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p> </p>
<p>वेस्टर्न रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और डिजिटल टिकटिंग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम और अपनी तरह का पहला कदम उठाया है। अब ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन फैसिलिटेटर का रोल आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया है। इस फैसले के साथ वह पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है, जिसमें यह जिम्मेदारी केवल रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों तक सीमित थी। रेलवे प्रशासन के इस निर्णय को स्टेशन पर टिकटिंग व्यवस्था को अधिक सरल और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे यात्रियों को अनरिज़र्व्ड सबअर्बन टिकट लेने में आसानी होगी और सेल्फ-टिकटिंग सिस्टम के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>इस नई व्यवस्था के तहत अब आम नागरिक भी इस भूमिका के लिए आवेदन कर सकते हैं। वेस्टर्न रेलवे ने स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी स्थानीय निवासी, जिसने कम से कम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण की हो, इस पद के लिए पात्र होगा। इससे पहले तक यह सुविधा केवल रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों तक सीमित थी। लेकिन अब इसे व्यापक रूप देते हुए आम जनता को भी इस प्रणाली में शामिल किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।</p>
<p>रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग सिस्टम से जोड़ना और स्टेशनों पर भीड़ को कम करना है। ATVM फैसिलिटेटर यात्रियों को मशीनों के उपयोग में मदद करेंगे, खासकर उन लोगों को जिन्हें डिजिटल सिस्टम का कम अनुभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल टिकटिंग प्रक्रिया को आसान बनाएगा, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर कार्यक्षमता भी बढ़ाएगा। इसके साथ ही यह डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूती देगा, क्योंकि इससे अधिक लोग स्वचालित टिकटिंग सिस्टम की ओर प्रेरित होंगे।</p>
<p>चर्चगेट-दहानू कॉरिडोर जैसे व्यस्त सबअर्बन रूट पर इस व्यवस्था से यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। कुल मिलाकर, वेस्टर्न रेलवे का यह निर्णय पारंपरिक टिकटिंग व्यवस्था से डिजिटल और सहयोगी मॉडल की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों दोनों को फायदा होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: पश्चिम रेलवे के 80 फीसदी कोच में नहीं हैं सीसीटीवी, लोकल के डिब्बों में टॉकबैक तो लगे, ज्यादातर हैं खराब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। </p><p><br /></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50400/80-percent-coaches-of-western-railways-do-not-have-cctv"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/cameras-to-keep-eye-on_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। <br /><strong></strong></p><p><strong><br /></strong></p><p><strong>1. 60 % टॉकबैक नहीं किया काम </strong><br />चर्चगेट से विरार जाने वाली ट्रेन शामिल: शाम के समय चर्चगेट से रवाना होने वाली 5: 12 की विरार फ़ास्ट में चढ़ने के बाद जांच के लिए टॉक बैक पर लगातार क्लिक करके मदद मांगी गई। लेकिन गॉर्ड की तरफ से मुंबई सेंट्रल आने तक कोई रिप्लाई नहीं किया गया - ऐसा ही 2 और लोकल में देखा गया। जहां मदद के तौर कोई हेल्प नहीं मिली। यहां तक की 'टॉक' का लाइट भी नहीं जल रहा था।<br /><strong></strong></p><p><strong>2. टॉकबैक पर गार्ड ने किया कनेक्ट</strong><br />रात 9 बजे का समय था। एसी लोकल चर्चगेट से रवाना हुई। इसी दौरान करीब चरनी रोड के एक मेंटली इल औरत ने ट्रेन में दस्तक दी। सभी महिलाओं को परेशान करने लगी। इस दौरान मुंबई सेंट्रल में टॉक बेक सिस्टम पर क्लिक कर जानकारी दी गई। तुरंत किसी का रिप्लाई नहीं आया, लेकिन दादर स्टेशन पर एक गार्ड की आवाज आई, क्या हुआ - उत्तर में सभी जवाब दिए गए। हालांकि मदद के रूप में कोई नहीं आया। यानी 20 फीसदी ऐसे मामले मिले।<br /><strong></strong></p><p><strong>3. 20% टॉक बैक ने किया काम, मिली मदद</strong><br />शाम की मलाड से चर्चगेट आ रही फास्ट लोकल में टॉक बैक ने किया काम साथ ही जरूरी मदद भी मिली। पड़ताल के दौरान प्रतिनिधि ने मुंबई सेंट्रल से यह ट्रेन 5 :22 बजे पकड़ी। टॉक बैक पर मदद के लिए जानकारी दी। वहां से रिप्लाई भी आया। गॉर्ड ने जानकारी ली और उसे कंट्रोल रूम तक पहुंचाया। अगले स्टेशन तक मदद मिल गई।<br /><strong></strong></p><p><strong>कैसे करता है टॉक बैक काम </strong><br />पश्चिम रेलवे के गार्ड (ट्रेन मैनेजर)अशोक अवघाड़े ने बताया कि, जब कोई टॉक बैक सिस्टम पर दिए गए बटन पर क्लिक करता है, तब गौरब केबिन में एक अलार्म बजता है और लाइट दिखती है। गॉर्ड भी अपने सिस्टम से यात्री से कनेक्ट करता है। समस्या जानने के बाद सीधे कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया जाता है और जीआरपी और आरपीएफ अगले स्टेशन पर मदद के लिए पहुंचती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:04:27 +0530</pubDate>
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