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                <title>displeasure - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>displeasure RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बेंगलुरु: शराब बिक्री रोकने के फैसले पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लंबे समय तक रोक लगाने के आदेश को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर पूरे गणेश उत्सव के दौरान कई दिनों तक शराब की दुकानों को बंद रखने का औचित्य क्या है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में यहां तक टिप्पणी कर दी कि अगर किसी को 10 दिनों तक शराब नहीं मिलेगी तो वह 'बीमार हो जाएगा'। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला चर्चा में आ गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51809/bengaluru-high-court-expressed-displeasure-over-the-decision-to-stop"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-12t132156.408.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु: </strong>गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लंबे समय तक रोक लगाने के आदेश को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर पूरे गणेश उत्सव के दौरान कई दिनों तक शराब की दुकानों को बंद रखने का औचित्य क्या है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में यहां तक टिप्पणी कर दी कि अगर किसी को 10 दिनों तक शराब नहीं मिलेगी तो वह 'बीमार हो जाएगा'। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला चर्चा में आ गया है।</p>
<p> </p>
<p>विवाद स्थानीय प्रशासन की ओर से गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध से जुड़ा है। आदेश के तहत त्योहार और गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से शराब की दुकानों को कई दिनों तक बंद रखने की बात कही गई थी। इस आदेश को शराब कारोबारियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पूरे उत्सव के दौरान लगातार शराब की बिक्री बंद रखना जरूरत से ज्यादा कठोर फैसला है और इससे लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान होगा।</p>
<p>हाईकोर्ट ने पूछा- इतने दिनों की रोक क्यों? मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से यह जानना चाहा कि शराब की बिक्री पर इतने लंबे समय के लिए रोक लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। आमतौर पर चुनाव, महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन, जुलूस या कानून-व्यवस्था की संवेदनशील परिस्थितियों में प्रशासन 'ड्राई डे' घोषित कर सकता है। लेकिन अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या पूरे त्योहार के दौरान लगातार कई दिनों तक शराब की बिक्री बंद रखना आवश्यक और आनुपातिक कदम है।</p>
<p>अदालत ने प्रशासन से प्रतिबंध का स्पष्ट आधार बताने को कहा। कोर्ट ने संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके नाम पर किसी वैध कारोबार पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। 10 दिन में तो बीमार हो जाएंगे' सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जज की उस टिप्पणी की हो रही है जिसमें लंबे समय तक शराब नहीं मिलने को लेकर मजाकिया अंदाज में बात कही गई। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से शराब पीता है और उसे 10 दिनों तक शराब नहीं मिले तो वह बीमार पड़ सकता है। इस टिप्पणी को शराब सेवन को प्रोत्साहित करने के रूप में नहीं बल्कि प्रशासन की ओर से लगाए गए लंबे प्रतिबंध की व्यावहारिकता पर सवाल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।</p>
<p>अदालतों में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कई बार मौखिक टिप्पणियां करते हैं। ऐसी मौखिक टिप्पणियों और अदालत के लिखित आदेश के बीच अंतर होता है। मामले में कानूनी रूप से वही प्रभावी होगा जो हाईकोर्ट के औपचारिक आदेश में दर्ज किया गया है। शराब कारोबारियों ने दी थी चुनौती शराब विक्रेताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके पास वैध लाइसेंस हैं और वे सरकार को विभिन्न शुल्क और टैक्स का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें लंबे समय तक दुकानें बंद रखने का आदेश दिया जाता है तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कारोबारियों का कहना था कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए किसी विशेष दिन या कुछ घंटों के लिए शराब की बिक्री रोकी जा सकती है, लेकिन पूरे उत्सव की अवधि के लिए प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन के आदेश को अनुपातहीन बताते हुए अदालत से राहत मांगी। प्रशासन ने क्यों लगाया प्रतिबंध? गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक कार्यक्रम और जुलूस आयोजित किए जाते हैं।</p>
<p>गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से लेकर विसर्जन तक विभिन्न इलाकों में भारी भीड़ रहती है। प्रशासन अक्सर ऐसे अवसरों पर शराब की बिक्री को कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखता है। आशंका रहती है कि नशे की स्थिति में विवाद, मारपीट या जुलूस के दौरान अप्रिय घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से संवेदनशील क्षेत्रों में शराब की दुकानों को बंद रखने के आदेश दिए जाते हैं। कई राज्यों में धार्मिक जुलूस, मतदान या बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सीमित अवधि के लिए शराब की बिक्री प्रतिबंधित करना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था है। लेकिन मौजूदा मामले में विवाद प्रतिबंध की लंबी अवधि को लेकर पैदा हुआ। कानून-व्यवस्था बनाम कारोबार का अधिकार हाईकोर्ट के सामने इस मामले में दो पहलुओं के बीच संतुलन का सवाल है। एक तरफ राज्य और स्थानीय प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी है। दूसरी ओर लाइसेंस लेकर कारोबार करने वाले दुकानदारों के हित भी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 13:23:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> नई दिल्ली : डॉग फीडर्स की तय होगी जिम्मेदारी… आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी के बयान पर जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना पर नाराजगी जताई. हालांकि कोर्ट ने कहा कि टिप्पणी “कंटेम्प्ट” के तौर पर सही है, लेकिन उसने “अपनी उदारता के कारण” आरोपों पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47120/new-delhi-responsibility-of-dog-feeders-will-be-fixedsupreme"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-20t183153.078.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना पर नाराजगी जताई. हालांकि कोर्ट ने कहा कि टिप्पणी “कंटेम्प्ट” के तौर पर सही है, लेकिन उसने “अपनी उदारता के कारण” आरोपों पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.</p>
<p> </p>
<p>आवारा कुत्तों के मामले पर 5वें दिन की सुनवाई मंगलवार को पूरी हुई. मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को दोपहर 2 बजे होगी. आज याचिकाकर्ताओं और NGOs की दलीलें हुई पूरी. अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट राज्यों और एमिकस और NHRC का पक्ष सुनेगा. सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस से पूछा कि क्या आपका नोट तैयार हो गया है? एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कहा कि 7 राज्य शेष हैं.</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उसने कुत्तों को भोजन कराने वालों को जवाबदेह ठहराने संबंधी टिप्पणी व्यंग्यात्मक नहीं, बल्कि गंभीर रूप से की थी. उच्चतम न्यायालय ने मेनका गांधी से सवाल किया कि उन्होंने आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या का समाधान कराने के लिए बजटीय आवंटन दिलाने में कितनी मदद की है.<br />आवारा कुत्तों से जुड़े फैसले की आलोचना को लेकर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह उदारता दिखाते हुए मेनका गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं करेगा. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि चूंकि आपकी मुवक्किल मंत्री रह चुकी हैं और पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं तो हमें बताइए कि आपके आवेदन में बजट आवंटन का जिक्र क्यों नहीं है? इन क्षेत्रों में आपके मुवक्किल का क्या योगदान रहा है…?</p>
<p><strong>मेनका गांधी के बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी</strong><br />मेनका गांधी की ओर से पेश वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि मेरी मुवक्किल कई वर्षों तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुकी हैं. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि कुछ देर पहले आप कह रहे थे कि अदालत को सतर्क रहना चाहिए.क्या आपने पता लगाया कि वह किस तरह के बयान दे रही हैं?<br />रामचंद्रन ने कहा कि बिल्कुल, अगर मैं अजमल कसाब के लिए पेश हो सकता हूं, तो उनके लिए भी पेश हो सकता हूं. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आपकी मुवक्किल ने अवमानना ​​की है. हमने कोई कार्रवाई नहीं की है, यही हमारी उदारता है. आप देखिए वह क्या कहती हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज.</p>
<p><strong>टिप्पणी व्यंग्यपूर्ण नहीं, हम गंभीर थे</strong><br />रामचंद्रन ने कहा कि सार्वजनिक टिप्पणियों के मामले में वकीलों और जजों का दृष्टिकोण अलग-अलग होता है, मुझे आवेदनों पर बोलने दीजिए. वकील राजू रामचंद्रन ने समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिए और कहा कि एबीसी नियमों का कार्यान्वयन समग्र रणनीति का अभिन्न अंग है. एनएपीआरई नीति ने रेबीज उन्मूलन में 9 बाधाओं की पहचान की है. इसमें सभी हितधारकों की भूमिका स्पष्ट रूप से बताई गई है और राज्यों को अपनी कार्य योजनाएं विकसित करने का निर्देश दिया गया है. 30 से अधिक राज्यों ने ऐसा नहीं किया है. समाधान स्थायी आश्रय स्थल बनाने में नहीं, बल्कि मौजूदा ढांचे के समयबद्ध कार्यान्वयन में निहित है.</p>
<p>इस पर वकील प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नहीं कह सकते? भूषण ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि सुनवाई के दौरान जजों ने कुछ टिप्पणियां की हैं, जिनमें से कुछ का गलत अर्थ निकाला गया है, जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कोई बात नहीं, तर्क अव्यावहारिक हैं.</p>
<p>भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों के गंभीर परिणाम हो जाते हैं. जैसे मान लीजिए पीठ ने व्यंग्यपूर्वक टिप्पणी की कि दाना चुगली करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, इसकी रिपोर्ट प्रकाशित हुई. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि नहीं नहीं, बिल्कुल भी व्यंग्यपूर्ण नहीं था. हम गंभीर थे, हमें नहीं पता कि हम क्या करेंगे, लेकिन हम गंभीर थे.</p>
<p><strong>प्रशांत भूषण ने दिया ये तर्क</strong><br />वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि बार के सदस्य के रूप में मैं भी इस पर कुछ कहना चाहता हूं. कार्यवाही का टेलीविजन पर प्रसारण होता है. बार और पीठ दोनों का कर्तव्य है कि वे सतर्क रहें. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हम जानते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए हम ऐसा करने से बच रहे हैं. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कुत्तों की प्रभावी नसबंदी सिर्फ कुछ ही शहरों में कारगर साबित हुई, दुर्भाग्य से यह प्रणाली अधिकांश शहरों में कारगर नहीं रही है. नसबंदी से समय के साथ आवारा कुत्तों की संख्या कम हो जाती है. इससे उनकी आक्रामकता भी कम होती है. इसे प्रभावी कैसे बनाया जाए? इसे पारदर्शी बनाएं और लोगों को जवाबदेह बनाएं. एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां लोग बिना नसबंदी वाले आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें. शिकायत पर कार्रवाई के लिए नामित अधिकारी होने चाहिए. उन्हें आकर जांच करनी चाहिए और स्थिति का जायजा लेना चाहिए.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 18:33:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: बढ़ सकती हैं विधायक संजय गायकवाड़ की मुश्किलें ; घटना पर सीएम फडणवीस ने नाराजगी व्यक्त की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की जुबान काटने पर ईनाम का ऐलान करने के बाद सुर्खियों में आए शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुंबई की कैंटीन में मारपीट करने की घटना पर सीएम फडणवीस ने नाराजगी व्यक्त की है। घटना के वायरल होने के बाद शिवसेना के एमएलसी अनिल परब ने विधानसभा परिषद में यह मुद्दा उठाया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42038/mumbai--mla-sanjay-gaikwad-s-troubles-may-increase--cm-fadnavis-expressed-displeasure-over-the-incident"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-07/download---2025-07-10t125832.625.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की जुबान काटने पर ईनाम का ऐलान करने के बाद सुर्खियों में आए शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुंबई की कैंटीन में मारपीट करने की घटना पर सीएम फडणवीस ने नाराजगी व्यक्त की है। घटना के वायरल होने के बाद शिवसेना के एमएलसी अनिल परब ने विधानसभा परिषद में यह मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर औपचारिक रूप से शिकायत की जा सकती है। इस पर कार्रवाई की जा सकती है। फडणवीस ने कहा कि सभी विधायकों के बारे में लोगों के बीच यह गलत संदेश जाता है कि वे सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा परिषद के अध्यक्ष राम शिंदे से कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा हमला करना सही संदेश नहीं देता। यह एक गंभीर मुद्दा है। आप और विधानसभा स्पीकर अध्यक्ष (राहुल नार्वेकर) इस पर संज्ञान लें। इसके बाद कार्रवाई करें। </p>
<p> </p>
<p><strong>कैंटीन कर्मचारियों को पीटा था</strong><br />सीएम फडणवीस ने कहा कि विधायक ने कैंटीन के कर्मचारियाें पर हमला किया। शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने उनके कमरे में कथित तौर पर बासी दाल और चावल हमला बोल दिया था। घटना के सामने आने के बाद गायकवाड़ ने कहा था कि वह विधायक होने के साथ फाइटर भी हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि आगे ऐसा होगा तो फिर से पीटेंगे।</p>
<p>वीडियो में गुस्से में दिख रहे विधायक कैंटीन में गए और कर्मचारी को दाल का पैकेट सूंघने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने कर्मचारी को थप्पड़ और घूंसे मारे और अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ भी मारपीट की। बुलढाणा से विधायक गायकवाड़ ने कहा कि कैंटीन स्टाफ से गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने की उनकी बार-बार की गई अपील अनसुनी कर दी गई। संजय गायकवाड़ महाराष्ट्र की बुलढाणा सीट से विधायक हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 12:59:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: अमित शाह से एकनाथ शिंदे ने जाहिर की वित्त मंत्रालय को लेकर नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती नजर आ रही है। राज्य में सत्तारूढ़ महायुति सरकार के भीतर मतभेद के संकेत मिल रहे हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर सक्रिय भूमिका निभाते दिख रहे हैं। अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर महाराष्ट्र पहुंचे। इस दौरान उनसे उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने पुणे में मुलाकात की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39764/mumbai--eknath-shinde-expressed-his-displeasure-to-amit-shah-regarding-the-finance-ministry"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/new-project-2024-09-11t105316991_1726032200.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती नजर आ रही है। राज्य में सत्तारूढ़ महायुति सरकार के भीतर मतभेद के संकेत मिल रहे हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर सक्रिय भूमिका निभाते दिख रहे हैं। अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर महाराष्ट्र पहुंचे। इस दौरान उनसे उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने पुणे में मुलाकात की। खबर है कि शिंदे ने इस मुलाकात में राज्य के वित्त मंत्रालय को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाले वित्त मंत्रालय से शिवसेना मंत्रियों की फाइलों को समय पर मंजूरी नहीं मिल रही है।</p>
<p> </p>
<p>इसके बाद अमित शाह रायगढ़ के दौरे पर गए, जहां उन्होंने एनसीपी (अजित पवार गुट) नेता सुनील तटकरे के आवास पर स्नेहभोजन में हिस्सा लिया। इस भोज में शिवसेना के मंत्री भरत गोगावले को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह नहीं आये। इसके बाद शनिवार रात में अमित शाह ने मुंबई में सह्याद्री अतिथिगृह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।</p>
<p>इस बैठक में आगामी निकाय चुनाव, संरक्षक मंत्री और निधि आवंटन पर चर्चा होने की जानकारी है। जबकि अजित पवार इस बैठक में उपस्थित नहीं थे, क्योंकि वह सतारा जिले के दौरे पर थे। इस वाकिये ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 13 Apr 2025 16:12:40 +0530</pubDate>
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