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                <title>Muharram - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई समेत पूरे राज्य में शांति के साथ मनाया गया मुहर्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में शुक्रवार को मुहर्रम (आशूरा) श्रद्धा, शांति और गंभीर माहौल के बीच मनाया गया। राज्य के बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों ने धार्मिक परंपराओं का पालन किया। मुहर्रम के अवसर पर महाराष्ट्र में सरकारी अवकाश रहा। इस कारण पूरे राज्य में व्यावसायिक गतिविधियां काफी हद तक बंद रहीं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में कारोबार नहीं हुआ।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50416/muharram-was-celebrated-peacefully-in-the-entire-state-including-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/1690509821dsc_9226.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में शुक्रवार को मुहर्रम (आशूरा) श्रद्धा, शांति और गंभीर माहौल के बीच मनाया गया। राज्य के बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों ने धार्मिक परंपराओं का पालन किया। मुहर्रम के अवसर पर महाराष्ट्र में सरकारी अवकाश रहा। इस कारण पूरे राज्य में व्यावसायिक गतिविधियां काफी हद तक बंद रहीं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में कारोबार नहीं हुआ।</p>
<p> </p>
<p>राज्यभर में बैंकों की शाखाएं भी बंद रहीं। इसके साथ ही चौथे शनिवार और रविवार की छुट्टी होने से बैंक कर्मचारियों के लिए लगातार तीन दिन का अवकाश हो गया। मुंबई, ठाणे, पुणे और नागपुर सहित पूरे राज्य में सरकारी कार्यालय, नगर निगम, स्कूल और कॉलेज भी बंद रहे। शिया समुदाय ने इस दिन को पूरी श्रद्धा और शोक के साथ मनाया। दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार, डोंगरी और क्रॉफर्ड मार्केट जैसे इलाकों में तय मार्गों पर पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए।</p>
<p>काले कपड़े पहने लोगों ने कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मजलिस में हिस्सा लिया। वहीं, सुन्नी समुदाय के लोगों ने कई जगह रोजा रखा, मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की और जरूरतमंदों की मदद की। स्थानीय परंपरा के अनुसार, जुलूस के रास्तों पर कई जगहों पर सबील लगाई गई, जहां लोगों को पानी, दूध और मीठा शरबत बांटा गया। दोपहर और शाम को निकलने वाले जुलूसों को देखते हुए मुंबई पुलिस और पुणे तथा छत्रपति संभाजीनगर ( औरंगाबाद) सहित कई शहरों की ट्रैफिक पुलिस ने पहले से ही यातायात में बदलाव किए थे। पुलिस की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए, ताकि जुलूस शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें और आपातकालीन सेवाओं तथा सार्वजनिक परिवहन पर कोई असर न पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 10:28:47 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई के माहिम इलाके में ताजिया जुलूस 50 फीसदी से कम देखा गया , मुसलमानों ने रोज़ा रखा और गरीबों में लंगर वितरित किए</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई के माहिम में इलाके ताजिया जुलूस 50 फीसदी से कम देखा गया । ताजिया ज्यादातर धारावी से आतेह है लेकिन इस 50 फीसदी से ज्यादा कमी दिखी एक पुलिस अधिकारी ने बताया । ज्यादातर लोग शरबत खीचड़ा अपने इलाको में मुसावीर , गरीब, रिश्तेदारों में तस्किम किया गया ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/12900/tazia-procession-witnessed-less-than-50-percent-in-mahim-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-08/screenshot_2022-08-10-20-26-29-00_7352322957d4404136654ef4adb64504.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई के माहिम में इलाके ताजिया जुलूस 50 फीसदी से कम देखा गया । ताजिया ज्यादातर धारावी से आतेह है लेकिन इस 50 फीसदी से ज्यादा कमी दिखी एक पुलिस अधिकारी ने बताया । ज्यादातर लोग शरबत खीचड़ा अपने इलाको में मुसावीर , गरीब, रिश्तेदारों में तस्किम किया गया । इस साल ज्यादातर लोग दिन में रोज़ा रखे शामको वितरण का आयोजन किया गया ।</p>
<p>सुहैल खंडवानी माहिम &amp; हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी ने बताया कि मुहर्रम कर्बला की लड़ाई में पैगंबर मोहम्मद के पोते हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। ताजिया और जुलूस कम हो गए हैं।  पहले लंबे जुलूस होते थे लोगो लेकिन अहसास हुआ कि लोगों की सेवा करने और रोजा रखने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।  हमारे समुदाय के लोगों ने महसूस किया कि हम अपने इमाम हुसैन को रोज़ा और लोगों की सेवा करके याद कर सकते हैं।  उन्हें दस दिन तक भूखा-प्यासा रखा गया।  इसलिए थके हुए यात्रियों को शर्बत परोसने की इस परंपरा को एक स्मरण के रूप में मनाया जाता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि समुदाय का यह भी मानना ​​है कि उनके पैगंबर के पोते ने सच बोलने के लिए शहादत दी थी।  “हम नहीं चाहते कि चिलचिलाती धूप में घूमने वाले यात्रियों को समान कठिनाइयों का सामना करना पड़े।  इमाम हुसैन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए खड़े थे।  राजनीतिक फासीवाद के बजाय लोकतंत्र की जीत होनी चाहिए इसी वजह से वह शहीद हो गए।  इसलिए हम परंपराओं के बहकावे में नहीं आने का प्रयास करते हैं और ताजिया जुलूसों में भाग लेने में समय नहीं लगाते हैं ।</p>
<p>शर्बत परोसने की इस परंपरा को बरकरार रखा है 1400 साल पहले इमाम हुसैन को यज़ीदों ने शहीद कर दिया था जो मुसलमान थे लेकिन उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के नियमों का पालन नहीं किया।  यज़ीद ने लोगों को प्रताड़ित किया और वह इस्लाम के खिलाफ था।  इमाम हुसैन को अपने पीछे चलने के लिए कहने के बाद, यज़ीद ने उन्हें और उनके 72 सदस्यों के परिवार को कर्बला में कैद कर लिया । </p>
<p>उन्हें 10 दिनों तक एक तंबू में प्रताड़ित किया गया और भोजन और पानी से वंचित रखा गया। उनकी याद में मुसलमान लोगों को शरबत , खाना खिलाते हैं।  चूंकि उन्हें पानी से वंचित कर दिया गया था, इसलिए मुसलमान शरबत खिचड़ा, पुलाव भी पकाते हैं और गरीबों में बांटते हैं।  यह दिन इस बात का प्रतीक है बलिदान का महीना है और सत्य की जीत होगी चाहे कोई कितना भी पीड़ित क्यों न हो।  सही रास्ते पर धैर्यवान और दृढ़ रहना चाहिए, अपने सिद्धांतों का पालन करना चाहिए और दोस्तों, परिवार और समाज की परवाह करनी चाहिए सुहैल खंडवानी ने कहा ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 20:29:22 +0530</pubDate>
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