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                <title>fraud - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : गोवंडी पुलिस ने हेल्थ पॉलिसी के नाम पर लोगों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया; कई राज्यों में फैला नेटवर्क; 12 गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गोवंडी पुलिस ने हेल्थ पॉलिसी के नाम पर लोगों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ करते हुए कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और गोल्ड के सिक्कों समेत करीब 17 लाख रुपये से ज्यादा का सामान जब्त किया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50748/in-the-name-of-mumbai-health-policy-gold-was-bought"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/_vwk5c1z0qydhfkq.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>गोवंडी पुलिस ने हेल्थ पॉलिसी के नाम पर लोगों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ करते हुए कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और गोल्ड के सिक्कों समेत करीब 17 लाख रुपये से ज्यादा का सामान जब्त किया गया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>कैसे हुआ इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा?</strong><br />यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित ने गोवंडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता को आरोपियों ने फोन करके खुद को एचडीएफसी एर्गो हेल्थ पॉलिसी के ऑफिस से होने का झांसा दिया था। ठगों ने पीड़ित से झूठ बोला कि उनकी पॉलिसी पर 1 लाख 53 हजार 825 रुपये का 'नो क्लेम बोनस' मिलने वाला है, जिसे हासिल करने के लिए एक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस झांसे में आकर पीड़ित ने अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी उनके साथ साझा कर दी। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर अलग-अलग तरीके से कुल 3 लाख 43 हजार रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी कर दी। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।</p>
<p>मुंबई के डीसीपी समीर शेख ने बताया कि गोवंडी पुलिस की साइबर टीम ने मामले का टेक्निकल इन्वेस्टीगेशन शुरू किया, तो उन्हें कुर्ला पश्चिम के कोहिनूर सिटी मॉल में मौजूद 'एम.के. रिक्रूटमेंट मैनपावर' नाम की जगह पर फर्जी कॉल सेंटर चलने की जानकारी मिली। पुलिस ने वहां छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर, लैपटॉप, वाई-फाई राउटर, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और ग्राहकों को फंसाने वाली कॉलिंग स्क्रिप्ट बरामद की। मौके से 6 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। यह आरोपी ठगी के पैसों से क्रेडिट कार्ड के जरिए ऑनलाइन गोल्ड के सिक्के और दूसरा सामान ऑर्डर करते थे।</p>
<p><strong>लोगों को कैसे बनाते थे निशाना?</strong><br />डीसीपी समीर शेख ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो पता चला कि ये लोग एचडीएफसी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले ग्राहकों का डेटा और सिम कार्ड हासिल कर उन्हें निशाना बनाते थे। पुलिस ने डेटा और सिम कार्ड सप्लाई करने वाले 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनसे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने मुंबई के आसाल्फा विलेज के साईं लीलावती निवास और कोहिनूर मॉल के एक अन्य गाले में चल रहे दो और फर्जी कॉल सेंटरों पर छापेमारी की। वहां से भी कॉल सेंटर का पूरा सामान जब्त किया गया और बाकी आरोपियों को पकड़ा गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 12:34:22 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : RHFL बैंक धोखाधड़ी मामला: CBI ने पहली चार्जशीट दाखिल की, चार आरोपी नामजद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को मुंबई में सीबीआई मामलों के स्पेशल जज के सामने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की। ​​यह चार्जशीट चार आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है। इनमें रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), आरएचएफएल के दो पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव रवींद्र सुधालकर (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ) और कृष्णन गोपालकृष्णन अय्यर (चीफ रिस्क ऑफिसर) और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी (चीफ क्रेडिट और रिस्क ऑफिसर) शामिल हैं। इन पर पब्लिक सेक्टर के बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से आपराधिक साजिश रचने और धोखाधड़ी करने का आरोप है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50652/mumbai-rhfl-bank-fraud-case-cbi-files-first-charge-sheet"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-10t140514.042.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong> केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को मुंबई में सीबीआई मामलों के स्पेशल जज के सामने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की। ​​यह चार्जशीट चार आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है। इनमें रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), आरएचएफएल के दो पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव रवींद्र सुधालकर (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ) और कृष्णन गोपालकृष्णन अय्यर (चीफ रिस्क ऑफिसर) और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी (चीफ क्रेडिट और रिस्क ऑफिसर) शामिल हैं। इन पर पब्लिक सेक्टर के बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से आपराधिक साजिश रचने और धोखाधड़ी करने का आरोप है।</p>
<p> </p>
<p>दाखिल की गई चार्जशीट सीबीआई की जांच पर आधारित है। जांच से पता चला है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड द्वारा लिए गए फंड को बिचौलियों और जरिया बनी कंपनियों के माध्यम से रिलायंस एडीए ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में डायवर्ट किया गया। ऐसा करके कर्ज से जुड़ी शर्तों और नियमों का उल्लंघन किया गया, जिससे कर्ज देने वाले बैंकों को गलत तरीके से नुकसान हुआ और आरोपियों व संबंधित कंपनियों को गलत तरीके से फायदा हुआ। दरअसल, सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और कंसोर्टियम के अन्य पीएसयू बैंकों से मिली शिकायतों के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। कंसोर्टियम के 10 पब्लिक सेक्टर बैंकों को कुल 3526.35 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।</p>
<p>पब्लिक सेक्टर के बैंकों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने में शामिल अन्य डायरेक्टरों, कंपनियों और सरकारी अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी रखी गई है। उम्मीद है कि समय के साथ सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जाएंगी। सीबीआई ने इस मामले में अब तक दो आरोपी आरएचएफएल के पूर्व सीईओ रवींद्र सुधालकर और पूर्व डायरेक्टर अमित बापना को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p>बता दें कि सीबीआई ने विभिन्न पब्लिक सेक्टर बैंकों और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं। बीआई ने पहले आरकॉम मामले में 29 मई को 16 आरोपियों के खिलाफ अपनी पहली चार्जशीट और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) मामले में 7 जुलाई को 7 आरोपियों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की थी। यह चार्जशीट रिलायंस एडीए ग्रुप के मामलों में दाखिल की गई तीसरी चार्जशीट है। इन मामलों की जांच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:05:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : सीबीआई कोर्ट का फैसला, बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने बताया कि पुणे की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में प्राइवेट कंपनियों के दो मालिकों को तीन साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद (जो अब दूसरे बैंक में मिल गया है) को 5.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गलत तरीके से नुकसान हुआ था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50610/mumbai-cbi-courts-decision-to-jail-the-accused-in-bank"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-08t125549.225.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने बताया कि पुणे की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में प्राइवेट कंपनियों के दो मालिकों को तीन साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद (जो अब दूसरे बैंक में मिल गया है) को 5.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गलत तरीके से नुकसान हुआ था। सीबीआई की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में एम/एस चंद्रकांत एस. लोढ़ा एंड कंपनी के मालिक चंद्रकांत लोढ़ा और एम/एस  ठक्कर एंड संस के मालिक परेश ठक्कर को दोषी ठहराया।</p>
<p> </p>
<p>सीबीआई ने स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद की शिकायत के आधार पर 9 अक्टूबर, 2001 को यह मामला दर्ज किया था। यह मामला स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर बी.आर. दगड़े, तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वी.एल. काले, चंद्रकांत लोढ़ा और परेश ठक्कर के खिलाफ़ दर्ज किया गया था।आरोप था कि आरोपियों ने बैंक को धोखा देने के मकसद से ज़्यादा कीमत वाले चेक जमा किए, जिन्हें बैंक अधिकारियों ने उनके क्लियर होने का इंतज़ार किए बिना ही मंज़ूरी दे दी।जांच में पता चला कि आपराधिक साज़िश के तहत, आरोपी चंद्रकांत लोढ़ा (जो एम/एस  चंद्रकांत एस. लोढ़ा एंड कंपनी के मालिक थे) ने 6.75 करोड़ रुपये कीमत के 18 'अकोमोडेटिव चेक' (बिना वास्तविक लेन-देन के जारी किए गए चेक) जमा किए। ये चेक आरोपी परेश ठक्कर ने नासिक पीपल्स कोऑपरेटिव बैंक में अपने मालिकाना हक वाले खाते से जारी किए थे और बैंक अधिकारियों ने इन्हें पास कर दिया था।</p>
<p>इसके बाद, विनोद काले ने बी.आर. दगड़े की मंज़ूरी से चंद्रकांत लोढ़ा को उनके करंट अकाउंट से ज़्यादा कीमत वाले चेक जारी करने की इजाज़त दी, जबकि उन चेक का नतीजा (क्लियरेंस) अभी पता भी नहीं चला था। इस तरह, चंद्रकांत लोढ़ा ने अपने और अपनी सहयोगी कंपनियों (जैसे एम/एस  ए.सी. एंटरप्राइजेज़, एम/एस  अक्षय ट्रेडर्स) के नाम से चेक जारी किए और इस वजह से बैंक को 5.58 करोड़ रुपये का गलत तरीके से नुकसान पहुँचाया।जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 28 अगस्त, 2003 को बी.आर. दगड़े और अन्य के खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल की।</p>
<p>डागडे (तत्कालीन ब्रांच मैनेजर), वी.एल. काले (तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर), चंद्रकांत लोढ़ा और परेश ठक्कर।महाराष्ट्र राज्य में सीबीआई अदालतों के अधिकार क्षेत्र के पुनर्गठन के कारण, 2025 में इस मामले को नासिक से पुणे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।ट्रायल के बाद, कोर्ट ने आरोपियों और दो प्राइवेट व्यक्तियों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई। स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर बी.आर. डागडे और तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वी.एल. काले को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय ने  रिलायंस कम्युनिकेशंस के कथित धोखाधड़ी मामले में 3,034 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की </title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उसने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड बैंक कथित धोखाधड़ी मामले में 3034.90 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जिससे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मामलों में कुल कुर्की 19,344 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित  एसआईटी रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मामलों की जांच कर रही है, जिसमें एसबीआई बैंक/पब्लिक फंड के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49567/mumbai-enforcement-directorate-seizes-assets-worth-rs-3034-crore-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/images-(56).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उसने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड बैंक कथित धोखाधड़ी मामले में 3034.90 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जिससे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मामलों में कुल कुर्की 19,344 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित  एसआईटी रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मामलों की जांच कर रही है, जिसमें एसबीआई बैंक/पब्लिक फंड के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।</p>
<p> </p>
<p>पीएमएलए के तहत यह अस्थायी कुर्की संपत्ति को बिकने से रोकने और बैंकों तथा जनता के हितों की रक्षा के लिए की गई है। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों पर आरकॉम  , अनिल डी. अंबानी और अन्य के खिलाफ दर्ज कई सीबीआई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी। आरकॉम  और उसकी ग्रुप कंपनियों ने कथित तौर पर घरेलू और विदेशी कर्जदाताओं से लोन लिए थे, जिनमें से कुल 40,185 करोड़ रुपये बकाया हैं।</p>
<p>प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, प्रमोटर ग्रुप की कुछ संपत्तियां कुर्क की गईं, जिनमें मुंबई की उषा किरण बिल्डिंग में एक फ्लैट, पुणे के खंडाला में एक फार्महाउस, अहमदाबाद के सानंद में ज़मीन का एक टुकड़ा और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर शामिल हैं। ये शेयर मेसर्स राइजी इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे, जो अनिल अंबानी के ग्रुप की एक कंपनी है और राइजी ट्रस्ट  के तहत आती है। यह राइजी ट्रस्ट अनिल अंबानी के परिवार के सदस्यों का एक निजी पारिवारिक ट्रस्ट है।</p>
<p>पीएमएलए की धारा 8 के तहत, कुर्क की गई संपत्ति उन असली दावेदारों को वापस कर दी जाएगी जिन्हें नुकसान हुआ है, जिनमें पीड़ित बैंक भी शामिल हैं। इस प्रकार, कुर्की संपत्ति का मूल्य सुरक्षित रखती है ताकि उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद, सार्वजनिक धन को कानून के अनुसार बैंकों और अंततः आम जनता को वापस दिलाया जा सके। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि वह मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल संपत्तियों की पहचान करके और उन्हें कुर्क करके वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा और सार्वजनिक धन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आगे की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:32:52 +0530</pubDate>
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