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                <title>SC - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>SC RSS Feed</description>
                
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                <title>नई दिल्ली : SC ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के खिलाफ टिप्पणी हटाई</title>
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                        <![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 8 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज प्रशांत कुमार को लेकर की गई अपनी उस टिप्पणी को हटा लिया है जिसमें उनकी एक सिविल विवाद मामले में आपराधिक कार्यवाही को अनुमति दिए जाने की आलोचना की थी। कोर्ट ने कहा कि उसका इरादा उन्हें शर्मिंदा करना या उन पर आरोप लगाना नहीं था। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने दोहराया कि ये टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए की गई थीं।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42858/new-delhi--sc-removes-remarks-against-allahabad-high-court-judge"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-08t151811.599.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 8 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज प्रशांत कुमार को लेकर की गई अपनी उस टिप्पणी को हटा लिया है जिसमें उनकी एक सिविल विवाद मामले में आपराधिक कार्यवाही को अनुमति दिए जाने की आलोचना की थी। कोर्ट ने कहा कि उसका इरादा उन्हें शर्मिंदा करना या उन पर आरोप लगाना नहीं था। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने दोहराया कि ये टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए की गई थीं।</p>
<p> </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चीफ जस्टिस बी आर गवई द्वारा मामले पर पुनर्विचार करने के अनुरोध के बाद वह इन टिप्पणियों को हटा रही है। शीर्ष अदालत ने यह स्वीकार करते हुए कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ही रोस्टर के मास्टर हैं, इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार उन पर छोड़ दिया। अपने अभूतपूर्व आदेश में, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की पीठ ने 4 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के आपराधिक मामलों के रोस्टर को 'उनके पद छोड़ने तक' हटा दिया, क्योंकि उन्होंने एक दीवानी विवाद में आपराधिक प्रकृति के समन को 'गलती से' बरकरार रखा था।</p>
<p><strong>हाईकोर्ट के जजों ने पत्र लिखकर जताया था विरोध</strong><br />इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के एक ग्रुप ने मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को पत्र लिखकर उनसे न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार को आपराधिक रोस्टर से हटाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के जवाब में एक कोर्ट मीटिंग बुलाने का अनुरोध किया था।<br />न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा ने पत्र लिखकर 4 अगस्त को पारित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अपनी पीड़ा व्यक्त की और इस पत्र पर 7 न्यायाधीशों ने हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक तर्कों पर की थीं टिप्पणियां</strong><br />बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार के न्यायिक तर्कों पर कड़ी टिप्पणियां कीं और हाईकोर्ट प्रशासन को उन्हें आपराधिक मामलों की सूची से हटाने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें सेवानिवृत्ति तक किसी वरिष्ठ न्यायाधीश के साथ एक खंडपीठ में नियुक्त करने का भी निर्देश दिया था।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 15:18:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : SC हत्या के आरोपी की रिमांड रद करने के आदेश के विरोध में होगी सुनवाई...  गिरफ्तारी के नहीं बताए कारण</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के तुरंत बाद कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई, ना ही गिरफ्तारी के बाद लिखित रूप में कारणों की सूचना देने की आवश्यकता को पूरा किया गया। सुप्रीम कोर्ट इस अलग याचिका पर विचार करेगा, जिसमें 22 अप्रैल को निर्णय सुरक्षित रखा गया था कि क्या प्रत्येक मामले में आरोपित को गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना आवश्यक होगा।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/41664/new-delhi-sc-murder-accused-will-be-protested-against-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-06/download-(2)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस की एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी, जिसमें एक हत्या मामले में आरोपित की हिरासत रिमांड को खारिज करने वाले आदेश के खिलाफ अपील की गई थी, जिसमें कहा गया था कि उसे गिरफ्तारी के कारणों के बारे में सूचित नहीं किया गया था। जस्टिस केवी विश्वनाथन और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने गुरुवार को कहा कि इस मामले पर विचार करने की आवश्यकता है। विशेष अनुमति याचिका और स्थगन के लिए आवेदन पर नोटिस जारी करें।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, 17 अप्रैल के अपने आदेश में हाई कोर्ट ने 17 फरवरी, 2023 को पारित ट्रायल कोर्ट के रिमांड आदेश को रद कर दिया और कुछ शर्तों के अधीन व्यक्ति को हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया। अपर न्यायालय ने हत्या मामले में 17 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किए व्यक्ति को याचिका पर नोटिस जारी किया।<br /><br />पीठ ने नोट किया कि गिरफ्तारी के कारणों के मुद्दे पर एक अलग याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 22 अप्रैल को अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। इस निर्णय का परिणाम (अलग याचिका पर) इस मामले के अंतिम निर्णय पर प्रभाव डालेगा। पीठ ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई 18 जुलाई को रखी जाए।<br /><br />हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के तुरंत बाद कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई, ना ही गिरफ्तारी के बाद लिखित रूप में कारणों की सूचना देने की आवश्यकता को पूरा किया गया। सुप्रीम कोर्ट इस अलग याचिका पर विचार करेगा, जिसमें 22 अप्रैल को निर्णय सुरक्षित रखा गया था कि क्या प्रत्येक मामले में आरोपित को गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना आवश्यक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी विचार करेगा कि क्या विशेष मामलों में जहां कुछ आपात स्थितियों के कारण गिरफ्तारी के कारणों को गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद प्रदान करना संभव नहीं होगा। गिरफ्तारी के पहले पूर्व सीआरपीसी की धारा 50 के प्रविधानों के अनुपालन की कमी के आधार पर अमान्य किया जाएगा। धारा 50 सीआरपीसी गिरफ्तारी के कारणों और जमानत के अधिकार के बारे में व्यक्ति को सूचित करने से संबंधित है।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 21:00:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं की कमी से जुड़ी याचिका पर कल SC में सुनवाई</title>
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                        <![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट सोमवार यानी कल देश में एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी दवाओं की कथित कमी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई 24 फरवरी की कॉज लिस्ट के अनुसार, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ एनजीओ 'नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स' और अन्य द्वारा 2022 में दायर याचिका पर सुनवाई करेगी।</p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38410/new-delhi--sc-will-hear-the-petition-related-to-the-shortage-of-anti-retroviral-drugs-tomorrow"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-02/images---2025-02-23t195810.023.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> सुप्रीम कोर्ट सोमवार यानी कल देश में एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी दवाओं की कथित कमी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई 24 फरवरी की कॉज लिस्ट के अनुसार, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ एनजीओ 'नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स' और अन्य द्वारा 2022 में दायर याचिका पर सुनवाई करेगी।</p>
<p>केंद्र ने पिछले साल जुलाई में शीर्ष अदालत को बताया था कि सरकार राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी केंद्रों के माध्यम से एचआईवी से पीड़ित सभी लोगों के लिए मुफ्त, आजीवन एंटी-रेट्रोवायरल (एआरवी) दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। इसने कहा था कि आज की तारीख में कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर सभी एआरवी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि याचिका दायर करने के बाद से जो कुछ हुआ है, उसे देखते हुए वर्तमान में एआरटी दवाओं की कोई कमी नहीं है।</p>
<p>हालांकि, वकील ने दवाओं की खरीद प्रक्रिया और गुणवत्ता के संबंध में कुछ कठिनाइयों को चिह्नित किया था। शीर्ष अदालत ने एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एआरवी दवाओं की गुणवत्ता और कमी के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए केंद्र, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन और एड्स रोगियों के लिए काम करने वाले एक संगठन के बीच एक बैठक का सुझाव दिया था। एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी में एंटी-एचआईवी दवाओं का उपयोग करके मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) से संक्रमित लोगों का इलाज शामिल है।याचिका में दावा किया गया था कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी केंद्रों पर दवाओं की अनुपलब्धता एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों के इलाज में बाधा डालती है।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/38410/new-delhi--sc-will-hear-the-petition-related-to-the-shortage-of-anti-retroviral-drugs-tomorrow</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 19:59:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई के कॉलेज में SC की बुर्का-हिजाब बैन के सर्कुलर पर आंशिक रोक...  </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">कॉलेज की तरफ से माधवी दीवान ने पक्ष रखते हुए कहा कि कॉलेज में इस समुदाय की 441 छात्राएं हैं. जब कोई लड़की नकाब आदि पहनती है तो एक अवरोध पैदा हो जाता है. वहां चेंजिंग रूम भी हैं. जिस पर अदालत ने कहा कि आप सही हो सकते हैं, वे जिस पृष्ठभूमि से आती हैं, उनके परिवार के सदस्य कह सकते हैं कि इसे पहनो और जाओ और उन्हें पहनना ही पड़ता है. लेकिन सभी को एक साथ पढ़ाई करनी चाहिए.</p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/33195/partial-stay-on-sc-s-circular-banning-burqa-hijab-in-mumbai-colleges"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-08/download.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के प्राइवेट कॉलेज में हिजाब, नकाब,बुर्का, स्टॉल, कैप बैन के सर्कुलर पर सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. अदालत ने नोटिस जारी कर तिलक का उदाहण दिया. कोर्ट ने कहा कि क्या किसी को ये कहकर कॉलेज में आने देने से इनकार किया जा सकता है कि उसने तिलक लगाया है. अदालत ने कॉलेज प्रशासन को नोटिस जारी कर इस पर जवाब तलब किया है. <br /><br />दरअसल मुंबई के एनजी आचार्य और डीके मराठे कॉलेज ने हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी पहनने पर बैन लगाया हुआ है. इसके खिलाफ 9 लड़कियों ने पहले बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया था. अब मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनको पूरी उम्मीद है कि कोई इन आदेशों का मिसयूज नहीं करेगा. इस मामले पर अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी. अदालत ने प्राइवेट कॉलेज में हिजाब,नकाब,बुर्का, स्टॉल, कैप पहनने के मामले में जारी कॉलेज के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है. <br /><br />कॉलेज की तरफ से माधवी दीवान ने पक्ष रखते हुए कहा कि कॉलेज में इस समुदाय की 441 छात्राएं हैं. जब कोई लड़की नकाब आदि पहनती है तो एक अवरोध पैदा हो जाता है. वहां चेंजिंग रूम भी हैं. जिस पर अदालत ने कहा कि आप सही हो सकते हैं, वे जिस पृष्ठभूमि से आती हैं, उनके परिवार के सदस्य कह सकते हैं कि इसे पहनो और जाओ और उन्हें पहनना ही पड़ता है. लेकिन सभी को एक साथ पढ़ाई करनी चाहिए.<br /><br />जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि आप महिलाओं को यह बताकर कैसे सशक्त बना रहे हैं कि उन्हें क्या पहनना है? मामले में जितना कम कहा जाए उतना अच्छा है. महिलाओं के पास विकल्प कहां है? आप अचानक इस तथ्य से जाग उठे हैं कि वे इसे पहन रही हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के इतने सालों बाद ये सब कहा जा रहा है और आप कहते हैं कि इस देश में धर्म है.<br /><br />कॉलेज की तरफ से दलील पेश करते हुए माधवी दीवान ने कहा कि इस समुदाय की बाकी लड़कियों को कोई दिक्कत नहीं है. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आप ऐसे सर्कुलर क्यों जारी कर रहे हैं.सुप्रीम कोर्ट ने सर्कुलर पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप लड़कियों के पहनने पर पाबंदी लगाकर उनका कैसा सशक्तिकरण कर रहे हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">लड़कियां क्या पहनना चाहती है ये उन पर छोड़ देना चाहिए. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के इतने सालों बाद इस तरह के बैन की बात कहीं जा रही है. SC ने  सर्कुकर के एक हिस्से पर रोक लगाई जिसके मुताबिक छात्राओं के हिजाब, कैप पहनकर आने पर रोक लगाई गई थी. कोर्ट ने कुछ छात्राओं की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया. कोर्ट ने कहा कि हमारे इस आदेश का दुरुपयोग न हो.</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Aug 2024 16:41:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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