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                <title>slum - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई बनेगी झोपड़ी मुक्त, एसआरए बनाएगी 5 लाख घर, टूटेगा 30 साल का रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई को झोपड़ी मुक्त बनाने की दिशा में अब सबसे बड़ा कदम उठाया गया है। स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी ने साल 2030 तक 5 लाख घर बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इससे पिछले करीब 30 वर्षों में बने कुल एसआरए घरों का रिकॉर्ड टूट सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49571/mumbai-will-become-slum-free-sra-will-build-5-lakh"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/images-(58).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई को झोपड़ी मुक्त बनाने की दिशा में अब सबसे बड़ा कदम उठाया गया है। स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी ने साल 2030 तक 5 लाख घर बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इससे पिछले करीब 30 वर्षों में बने कुल एसआरए घरों का रिकॉर्ड टूट सकता है।<br /></p><p><br /></p><p><strong>अब तक क्या हुआ, अब क्या होगा</strong><br />1996 में SRA की स्थापना के बाद से अब तक करीब 2.75 लाख घर ही बन पाए हैं। लेकिन अब एजेंसी ने काम की गति बढ़ाने का प्लान तैयार किया है। एसआरए के सीईओ डॉ. महेंद्र कल्याणकर के अनुसार, इस समय 3 लाख से ज्यादा घर अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में निर्माणाधीन हैं और इन्हें तय समय में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। यानी जो काम तीन दशक में हुआ, उसे अब महज पांच साल में दोगुना करने की तैयारी है।<br /><strong></strong></p><p><strong>तेज रफ्तार के लिए क्या बदला जा रहा है</strong><br />इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एसआरए ने कई अहम बदलाव किए हैं। अब प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे फाइलों में देरी कम होगी। ड्रोन सर्वे और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जैसे उपायों से जमीन और लाभार्थियों की सही जानकारी सुनिश्चित की जा रही है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और काम तेजी से आगे बढ़ेगा। इसके अलावा, लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने के लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं, ताकि निर्माण में रुकावट न आए।<br /><strong></strong></p><p><strong>बिल्डरों पर सख्ती, निवासियों को फायदा</strong><br />सरकार ने बिल्डरों की जवाबदेही तय करने के लिए नियमों को और कड़ा किया है। अब अगर बिल्डर तय समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं करते या स्लम निवासियों को किराया नहीं देते, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि लोग वर्षों तक अस्थायी घरों में रहने को मजबूर न रहें और उन्हें समय पर उनका स्थायी घर मिल सके।<br /></p><p><strong>मुंबई के लिए क्यों है यह योजना अहम</strong><br />मुंबई की लगभग आधी आबादी आज भी झोपड़पट्टियों में रहती है। ऐसे में 5 लाख घरों का यह लक्ष्य न सिर्फ लाखों परिवारों को बेहतर आवास देगा, बल्कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई दिशा देगा। बेहतर घर मिलने से लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।<br /></p><p><strong>झोपड़ी मुक्त मुंबई का सपना</strong><br />अगर यह योजना तय समय में पूरी होती है, तो मुंबई की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है। “झोपड़ी मुक्त  मुंबई” का सपना, जो सालों से चर्चा में है, अब जमीन पर उतरता हुआ नजर आ सकता है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49571/mumbai-will-become-slum-free-sra-will-build-5-lakh</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:30:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : धारावी में 436 झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को फडणवीस सरकार का बड़ा तोहफा, देवनार में जमीन देने का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने मुंबई के धारावी में रहने वालों को राहत देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। फडणवीस सरकार धारावी में लगी आग में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों के लिए 27 साल बाद बड़ी राहत लेकर आई है। इन सभी धारावी में रहने वालों को अब उनके हक का घर दिया जाएगा। आग में अपने घर गंवाने वाले 436 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को देवनार में जमीन देने का एक अहम फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बारे में एक अहम फैसला लिया गया है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48227/fadnavis-governments-decision-to-give-land-in-deonar-a-big"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-06t114033.303.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने मुंबई के धारावी में रहने वालों को राहत देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। फडणवीस सरकार धारावी में लगी आग में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों के लिए 27 साल बाद बड़ी राहत लेकर आई है। इन सभी धारावी में रहने वालों को अब उनके हक का घर दिया जाएगा। आग में अपने घर गंवाने वाले 436 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को देवनार में जमीन देने का एक अहम फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बारे में एक अहम फैसला लिया गया है। </p>
<p> </p>
<p><strong>436 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को फायदा</strong><br />रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने धारावी में 436 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को 11,659 स्क्वायर मीटर सरकारी जमीन देने का प्रस्ताव पेश किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसलिए आग में अपने घर गंवाने वाले 436 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को उनके हक का घर मिल जाएगा। इस बैठक में धारावी की झुग्गी-झोपड़ियों में राजीव गांधी SRA कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के बारे में फैसला लिया गया।</p>
<p><strong>घरकुल को लेकर क्या बोले मंत्री जयकुमार</strong><br />इस बीच रूरल डेवलपमेंट मिनिस्टर जयकुमार गोर ने घरकुल को लेकर जरूरी जानकारी दी। यह देश के हर परिवार को घर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी पहल है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार ने यह पक्का करने के मकसद से एक बड़ा प्रोग्राम लागू किया है कि देश में कोई भी परिवार बिना घर के न रहे। यह योजना महाराष्ट्र में भी अच्छे से लागू की जा रही है और पिछले साल राज्य में करीब चार लाख घरकुल बनाए गए। यह जानकारी रूरल डेवलपमेंट मिनिस्टर जयकुमार गोर ने विधान परिषद में सवाल-जवाब के दौरान दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 11:42:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई के पार्क और खेल के मैदानों पर बनेगी झुग्गी पुनर्वास योजना! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम सहित अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उन भूखंडों पर झुग्गी पुनर्वास योजनाओं की अनुमति दी थी, जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थे. यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया. पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने रखा. इसके बाद कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण, बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47443/slum-rehabilitation-scheme-to-be-built-on-mumbais-parks-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/images---2026-02-03t124245.462.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम सहित अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उन भूखंडों पर झुग्गी पुनर्वास योजनाओं की अनुमति दी थी, जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थे. यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया. पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने रखा. इसके बाद कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण, बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया.</p>
<p> </p>
<p>हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए, दीवान ने तर्क दिया कि मुंबई में सार्वजनिक खुले स्थानों की रक्षा करना बेहद जरूरी है. अदालत ने एनजीओ 'अलायंस फॉर गवर्नेंस एंड रिन्यूअल', नीरा पुंज और नयना कठपालिया (जो हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता थे) का प्रतिनिधित्व कर रहे दीवान से कहा कि वे मामले के जल्द निपटारे के लिए याचिका की कॉपी और नोटिस स्थायी वकील को सौंपें.<br />बॉम्बे हाई कोर्ट ने जून 2025 में झुग्गी पुनर्वास योजनाओं से जुड़े एक नियम की वैधता को बरकरार रखा था. कोर्ट ने यह फैसला मुंबई में हरियाली की भारी कमी और सिर छिपाने के संवैधानिक अधिकार के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से सुनाया था. अदालत ने 'डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस 2034' के नियम 17 को वैध माना था.</p>
<p>यह नियम उन जमीनों पर भी झुग्गी पुनर्वास योजनाओं को लागू करने की अनुमति देता है जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थीं, बशर्ते उस जमीन का एक हिस्सा वापस जनता के लिए बहाल किया जाए. जस्टिस अमित बोरकर और जस्टिस सोमशेखर की हाई कोर्ट की पीठ ने 'नागर' द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था. हालांकि, कानून की वैधता को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने 17 बिंदुओं वाला एक सख्त निर्देश जारी किया था. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वादे के मुताबिक छोड़े गए खुले स्थान केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि वे वास्तव में जनता के इस्तेमाल के लायक और सुलभ हों.</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने इस नियम को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि आरक्षित खुले स्थानों के 65 प्रतिशत तक के हिस्से पर निर्माण की अनुमति देना "अतिक्रमण को कानूनी जामा पहनाना" है. उन्होंने कहा कि यह 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' का उल्लंघन है, जिसके तहत सरकार सार्वजनिक संपत्तियों की संरक्षक होती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47443/slum-rehabilitation-scheme-to-be-built-on-mumbais-parks-and</link>
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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 11.20 लाख झोपड़ियों का पुनर्वसन; झोपडीधारकों के लिए बड़ी राहत की घोषणा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>झोपडीधारकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। वषों से अटके पड़े पुनर्वसन को अब क्लस्टर पुनर्विकास योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। नया जीआर जारी करके सरकार ने साफ किया है कि सीआरजेड जोन-1 और जोन-2 में आने वाली सभी झोपड़ियों को एक साथ मिलाकर 5 किमी की परिधि में किसी सुरक्षित जगह पर पुनर्वसित किया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45534/mumbai-rehabilitation-of-1120-lakh-huts-announcement-of-big-relief"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-17t113857.979.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>झोपडीधारकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। वषों से अटके पड़े पुनर्वसन को अब क्लस्टर पुनर्विकास योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। नया जीआर जारी करके सरकार ने साफ किया है कि सीआरजेड जोन-1 और जोन-2 में आने वाली सभी झोपड़ियों को एक साथ मिलाकर 5 किमी की परिधि में किसी सुरक्षित जगह पर पुनर्वसित किया जाएगा। हालांकि यह घोषणा पुनर्वसन की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है, लेकिन नए जीआर के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर तीखा विरोध भी शुरू हो गया है। </p>
<p> </p>
<p><strong>मुंबई में अब भी 11.20 लाख झोपड़ी संरचनाएं पुनर्वसन की प्रतीक्षा में</strong><br />मुंबई में कुल 13.80 लाख झोपड़ी संरचनाएं हैं। जिनमें से 2.60 लाख का अब तक पुनर्वसन किया जा चुका है। लगभग 11.20 लाख झोपड़ियों का पुनर्वसन अभी बाकी है। इसमें से 5,67,267 झोपड़ियों का पुनर्वसन प्रस्तावित है, जबकि 3,26,733 पात्र झोपडीधारक आवास आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे जटिल वह हिस्सा है, जिसमें 2.26 लाख झोपड़ी संरचनाएं वैधानिक या नीतिगत बाधाओं के कारण अटकी हैं। </p>
<p>इनमें से 1.41 लाख संरचनाएं केंद्रीय सरकारी जमीन पर हैं, जिनके लिए केंद्र की मंजूरी अनिवार्य है। कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण इनका पुनर्वसन वर्षों से ठप पड़ा था। इन्हीं में से 85 हजार झोपड़ियां सीआरजेड क्षेत्र में आती हैं। समुद्री तटीय नियमों के कारण इन झोपड़ियों का इन-सीटू (उसी जगह) पुनर्वसन संभव नहीं था। इसी वजह से यह परियोजना लंबे समय से रुकी हुई थी। अब नए जीआर के बाद यह बाधा हटती दिखाई दे रही है।</p>
<p><strong>वर्षों से अटके पुनर्वसन को क्लस्टर योजना की मंजूरी</strong><br />राज्य के हाउसिंग डिपार्टमेंट ने हाल ही में जारी निर्णय में कहा है कि सीआरजेड-1 और सीआरजेड-2 क्षेत्री की झोपड़ियी की मिलाकर क्लस्टर पुनर्विकास के दायरे में शामिल किया जाएगा पुनर्वसन सीआरजेड जमीन पर नहीं होगा, बल्कि 5 किमी के दायरे में किसी उपयुक्त स्थान पर किया जाएगा। सीआरजेड-1 से झोपड़ियों को हटाने के बाद बची जमीन पर पार्क, गार्डन जैसी सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, सीआरजेड-2 में डेवलपरों को सेल कंपोनेट (विक्रय योग्य हिस्सा) विकसित करने की अनुमति मिलेगी, सरकार का दावा है कि इन कदमों से समुद्र किनारे रहने वाले हजारों परिवारों को सुरक्षित, स्थायी और व्यवस्थित आवास मिल सकेगा।</p>
<p><strong>विरोध के स्वर तेज</strong><br />हालांकि, इस जीआर के बाद राजनीतिक धमासान भी शुरू हो गया है, विपक्ष ने इसे लोगों के संवैधानिक अधिकारी पर हमला बताते हुए कड़ी आलोचना की है। स्थानीय समुदायों, खासकर कोलीवाड़ा और पारंपरिक बस्तियों में भी चिंता बढ़ी है कि कहीं उन्हें झोपडपट्टी घोषित कर जबरन पुनर्विकास में न जोड़ा जाए। सांसद और कांग्रेस मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि यह सरकार अक्सर “घर में घुसकर मारेंगे’ की भाषा बोलती है, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि पड़ोसी देश नहीं, आपके अपने ही घर पर वार करने की तैयारी है। </p>
<p>नया जीआर लोगों का अपने घर पर अधिकार खत्म करने जैसा है, सरकार चाहे तो कल दक्षिण मुंबई के आर्ट डेको डिस्ट्रिक्ट में भी क्लस्टर डेवलपमेंट लागू कर दे और निवासियों की सहमति ही खत्म कर दे। सरकार कोलीवाड़ा और पारंपरिक बस्तियों को झोपड़पट्टी बताकर नोटिस भेज रही है। ये बस्तियां दशकों से मौजूद है। अब इन्हें पीएम और सीएम के दोस्तों को जमीन देने के लिए उखाड़ा जाएगा? यह किसी कथित अवैध बस्ती की बात नहीं है, यह आपके लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की बात है। आज स्लम है। कल सोसायटी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 11:39:25 +0530</pubDate>
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