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                <title>patients - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>patients RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : हीटस्ट्रोक से मौत: राज्य में हीटस्ट्रोक के 55 मरीज; 2 मौतों पर शक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए, हेल्थ डिपार्टमेंट हीटस्ट्रोक के मरीज़ों की संख्या पर करीब से नज़र रख रहा है। कुल 55 हीटस्ट्रोक के मरीज़ों में से, 38 1 मार्च से 26 अप्रैल के बीच मिले। जनवरी और फरवरी में 17 मरीज़ मिले। इसी दौरान दो और मरीज़ मिले। मौतें, हालांकि यह रिकॉर्ड किया गया था, मौतों में से, हेल्थ डिपार्टमेंट ने सही कारण पर शक जताया है क्योंकि यह अभी तक साफ़ नहीं है। हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सरकारी अस्पतालों के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट, पीडियाट्रिक्स और इमरजेंसी डिपार्टमेंट में कुल 3,82,725 मरीज़ों ने अलग-अलग बीमारियों का इलाज करवाया। इसमें मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया, ठाणे, पालघर, पुणे शामिल हैं। नागपुर और चंद्रपुर ज़िलों में मरीज़ों की संख्या काफ़ी ज़्यादा पाई गई है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49591/mumbai-55-heatstroke-patients-die-in-the-state-2-deaths"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-30t121758.039.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए, हेल्थ डिपार्टमेंट हीटस्ट्रोक के मरीज़ों की संख्या पर करीब से नज़र रख रहा है। कुल 55 हीटस्ट्रोक के मरीज़ों में से, 38 1 मार्च से 26 अप्रैल के बीच मिले। जनवरी और फरवरी में 17 मरीज़ मिले। इसी दौरान दो और मरीज़ मिले। मौतें, हालांकि यह रिकॉर्ड किया गया था, मौतों में से, हेल्थ डिपार्टमेंट ने सही कारण पर शक जताया है क्योंकि यह अभी तक साफ़ नहीं है। हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सरकारी अस्पतालों के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट, पीडियाट्रिक्स और इमरजेंसी डिपार्टमेंट में कुल 3,82,725 मरीज़ों ने अलग-अलग बीमारियों का इलाज करवाया। इसमें मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया, ठाणे, पालघर, पुणे शामिल हैं। नागपुर और चंद्रपुर ज़िलों में मरीज़ों की संख्या काफ़ी ज़्यादा पाई गई है।</p>
<p> </p>
<p>ज़िले के हिसाब से आंकड़ों के मुताबिक, नंदुरबार ज़िले में सबसे ज़्यादा 14 मामले हैं। इसके बाद नासिक में 6, गढ़चिरौली और रत्नागिरी में 4-4, और अहिल्यानगर में 3 मामले हैं। रायगढ़, पुणे, पालघर, जालना, गोंदिया, बुलढाणा, चंद्रपुर और धुले में 2-2, जबकि अकोला, अमरावती, भंडारा, जलगांव, परभणी, सिंधुदुर्ग, सोलापुर और ठाणे ज़िलों में 1-1 मामला है। इस बीच, संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए, राज्य के सभी ज़िला और सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में खास 'हीट स्ट्रोक रूम' बनाए गए हैं, और ग्रामीण अस्पतालों और लोकल सरकारी हेल्थ सेंटरों में मरीज़ों के लिए बेड रिज़र्व किए गए हैं। इमरजेंसी में तुरंत इलाज पक्का करने के लिए ज़रूरी दवाओं और फ्लूइड्स का भी इंतज़ाम किया गया है।</p>
<p>हालांकि हीटस्ट्रोक हल्के लक्षणों के साथ शुरू होता है, लेकिन अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो यह गंभीर हो सकता है। इसके मुख्य लक्षणों में शरीर का ज़्यादा तापमान, सिरदर्द, चक्कर आना, कमज़ोरी, जी मिचलाना, सूखी और गर्म त्वचा, दिल की धड़कन बढ़ना और कभी-कभी बेहोशी शामिल हैं। बहुत ज़्यादा गर्मी में ज़्यादा देर तक रहना, डिहाइड्रेशन और दोपहर की तेज़ धूप में काम करना हीटस्ट्रोक के मुख्य कारण माने जाते हैं। इसलिए, हेल्थ डिपार्टमेंट ने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर न निकलें, खूब पानी और लिक्विड पिएं और अपने सिर को बचाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49591/mumbai-55-heatstroke-patients-die-in-the-state-2-deaths</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:20:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : बढ़ा गर्मी का प्रकोप, हीट स्ट्रोक के मरीज पहुंच रहे अस्पताल, मीरा रोड का बुरा हाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मार्च में मुंबई एमएमआर में जमकर गर्मी पड़ी नतीजतन मुंबई से सटे मीरा रोड वॉकहार्ट अस्पताल में हीट स्ट्रोक मामले सामने आने लगे है। अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पवन पई ने बताया कि मिड मार्च से अब तक पास कम से कम 2 से 3 मरीज स्ट्रोक जैसे लक्षणों के साथ पहुंचे जिनमें ज्यादातर की उम्र 50 व अधिक रही। मार्च की शुरुआत से अब तक में 4 बार और एमएमआर में 8 हीट वेव चली है। शहर में ताप बढ़ने के साथ ही हीट से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आने लगी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48699/heat-wave-increases-in-mumbai-heat-stroke-patients-are-reaching"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-25t114001.299.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मार्च में मुंबई एमएमआर में जमकर गर्मी पड़ी नतीजतन मुंबई से सटे मीरा रोड वॉकहार्ट अस्पताल में हीट स्ट्रोक मामले सामने आने लगे है। अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पवन पई ने बताया कि मिड मार्च से अब तक पास कम से कम 2 से 3 मरीज स्ट्रोक जैसे लक्षणों के साथ पहुंचे जिनमें ज्यादातर की उम्र 50 व अधिक रही। मार्च की शुरुआत से अब तक में 4 बार और एमएमआर में 8 हीट वेव चली है। शहर में ताप बढ़ने के साथ ही हीट से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आने लगी। </p>
<p> </p>
<p>मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पवन पई ने बताया कि डॉक्टर हाल के दिनों में मेरे 2 से 3 ऐसे मरीज आए हैं, जिनमें स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखाई दिए। मरीजों की उम्र सामान्यतः 50 व अधिक थी। जिससे यह स्पष्ट हो कि बुजुर्गो में इसका खतरा ज्यादा है। उन्होंने आगे बताया कि हीट स्ट्रोक का डायग्नोसिस पूरी तरह क्लीनिकल होता है।</p>
<p>मरीजों में अचानक चक्कर आना (गिडीनेस), उल्टी, सिरदर्द और बैलेंस खोने जैसे लक्षण देखे गए। हालांकि, समय पर कूलिंग और पर्याप्त हाइड्रेशन देने से मरीजों की स्थिति में सुधार हो जाता है। तेज धूप और डिहाइड्रेशन ही इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।<br />क्या है हीट स्ट्रोक?<br />हीट स्ट्रोक ऐसी अवस्था है, जिसमें पीड़ित के शरीर का तापमान अत्यधिक धूप या गर्मी की वजह से बढ़ने लगता है। हीट स्ट्रोक की स्थिति में शरीर की प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम सुचारू रूप से काम करना बंद कर देता है, जिसकी वजह से शरीर का तापमान कम नहीं हो पाता। इससे शरीर का तापमान बढ़ता जाता है और अगर सही समय पर इलाज नहींकरवाया तो मरीज की जान भी जा सकती है।</p>
<p><strong>हीट स्ट्रोक के कारण</strong><br />हीट स्ट्रोक तेज धूप या अत्यधिक गर्मी/तापमान के कारण होता है। लेकिन हीट स्ट्रोक के और भी कई कारण होते हैं। निर्जलीकरण, थाइराइड में असतुलन पैदा होना, शरीर में रक्त शर्करा में कमी आना (ऐसा मधुमेह के मरीजों में होता है।)</p>
<p><strong>हीट स्ट्रोक के लक्षण</strong><br />गर्मी के दिनों में या तेज धूप में काम करने से यदि आपको चक्कर आने लगें या उलटी- मितली जैसा लगे तो यह स्ट्रोक के लक्षण है।</p>
<p><strong>इन बातों का रखें ख्याल</strong><br />डॉ. पई ने सलाह दी है कि सुबह के समय ही एक्सरसाइज या आउटडोर गतिविधिया पूरी कर ले और कार्यस्थल पर भी ठंडा वातावरण सुनिश्चित करें। पानी पीते रहे और अपने आप को हाइड्रेट रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : तीन साल में सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल के आईसीयू में 521 मरीज़ों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुंबई के सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में मई 2022 से जुलाई 2025 तक तीन सालों में 521 मरीज़ों की मौत हो गई। इसी दौरान आईसीयू में करीब 7.8 फीसदी मरीज बिना इलाज पूरा किए ही डिस्चार्ज हो गए। यह जानकारी मेडिकल शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने सोमवार को विधान परिषद में लिखित उत्तर में दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48494/mumbai-521-patients-died-in-icu-of-st-george-hospital"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-17t132619.742.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र के मुंबई के सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में मई 2022 से जुलाई 2025 तक तीन सालों में 521 मरीज़ों की मौत हो गई। इसी दौरान आईसीयू में करीब 7.8 फीसदी मरीज बिना इलाज पूरा किए ही डिस्चार्ज हो गए। यह जानकारी मेडिकल शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने सोमवार को विधान परिषद में लिखित उत्तर में दी है।</p>
<p> </p>
<p>विधान परिषद सदस्य उमा खापरे ने तारांकित प्रश्र के माध्यम से सेंट जॉर्ज अस्पताल में मरीजों के डॉक्टरों की कमी से मरीजों की मौत का सवाल उपस्थित किया था। इसका लिखित उत्तर देते हुए मेडिकल शिक्षा मंत्री ने मान्य किया कि जार्ज अस्पताल में मरीजों की मौत होने को स्वीकार किया है। उन्हाेंने बताया कि जार्ज अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टर मौजूद हैं और वहां का हेल्थ सिस्टम ठीक से काम कर रहा है।</p>
<p>मुश्रीफ ने कहा कि आईसीयू में असिस्टेंट प्रोफेसर (फार्माकोलॉजी) की देखरेख में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इंटर्न रखे गए हैं। उन्हाेंने साफ किया है कि उन्हें मरीज़ों के इलाज के बारे में फैसले लेने की इजाज़त नहीं है। जार्ज अस्पताल में मौतों की संख्या कम करने के लिए इंस्टीट्यूशनल लेवल पर एक खास कमेटी बनाई गई है।</p>
<p>कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक, मुंबई के सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल के इंटेंसिव केयर यूनिट में एक एडिशनल असिस्टेंट प्रोफेसर (पैथोलॉजिस्ट) को अपॉइंट किया गया है और हेल्थ सर्विसेज़ को और बेहतर बनाने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। साथ ही, अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, इन्फेक्शन कंट्रोल और मॉनिटरिंग सिस्टम को कड़ा किया गया है और मौतों का अलग-अलग क्लासिफिकेशन किया जा रहा है। साथ ही हर छह महीने में डेथ ऑडिट किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:27:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई-नासिक हाइवे पर पलटा कंटेनर, लगा 3 किमी लंबा जाम, मरीजों को लेकर जा रही कई एंबुलेंस भी फंसी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भिवंडी तालुका के कुकसे गांव के पास मुंबई-नासिक हाइवे पर नासिक की ओर जा रहा एक बड़ा कंटेनर पलट गया। कंटेनर कुकसे गांव के पास भोइरपाडा स्थित वेयरहाउस कॉम्पलेक्स से सामान ले जा रहा था। गलत दिशा में जाने से ड्राइवर का वाहन से नियंत्रण छूटा और वह पलट गया। इसके चलते कुकसे-येवई रोड पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया। करीब 3 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। हादसे में कंटेनर ड्राइवर मामूली जख्मी हुआ है। पडघा पुलिस और हाइवे ट्रैफिक पुलिस देर तक ट्रैफिक दुरुस्त करने के लिए जूझती रही। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47696/overturned-container-creates-3-km-long-jam-on-mumbai-nashik-highway"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-13t133844.134.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>भिवंडी तालुका के कुकसे गांव के पास मुंबई-नासिक हाइवे पर नासिक की ओर जा रहा एक बड़ा कंटेनर पलट गया। कंटेनर कुकसे गांव के पास भोइरपाडा स्थित वेयरहाउस कॉम्पलेक्स से सामान ले जा रहा था। गलत दिशा में जाने से ड्राइवर का वाहन से नियंत्रण छूटा और वह पलट गया। इसके चलते कुकसे-येवई रोड पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया। करीब 3 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। हादसे में कंटेनर ड्राइवर मामूली जख्मी हुआ है। पडघा पुलिस और हाइवे ट्रैफिक पुलिस देर तक ट्रैफिक दुरुस्त करने के लिए जूझती रही। </p>
<p> </p>
<p><strong>एंबुलेंस भी फंसी, मरीज हुए परेशान</strong><br />टैंकर पलटने से हाइवे पर हुए ट्रैफिक जाम का असर आम यात्रियों के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं पर भी पड़ा। इस दौरान कुछ एंबुलेंस भी जाम में फंस गई, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ा। वाहन चालकों और पीड़ितों का कहना है कि पिछले कई महीनों से निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, जिसके चलते आए दिन यहां जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है।</p>
<p><strong>आधे-अधूरे निर्माण कार्य ने बढ़ाई वाहन चालकों की मुसीबत</strong><br />मुंबई-नासिक हाइवे पर फ्लाइओवर एवं पुलों के आधे-अधूरे निर्माण कार्य ने स्थिति विकट कर दी। इस रूट पर पहले भी ऐसे हादसे हुए हैं, जब लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है। इसकी एक वजह यह है कि राजनोली से पिंपलास तक सर्विस लेन सहित सड़क पांच लेन की है, जो आगे चलकर अचानक दो लेन में सिमट जाती है। ऐसे में, वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है और ट्रैफिक का दबाव बढ़ते ही जाम की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा इस हिस्से में चढ़ाई होने की वजह से वाहन धीमी गति में चलते हैं। कुछ ट्रक और अन्य बड़े वाहन तकनीकी खराबी के कारण बीच रास्ते में बंद हो जाते हैं। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है। पीक आवर में अक्सर यात्रियों का काफी वक्त ट्रैफिक जाम में ही चला जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 13:39:42 +0530</pubDate>
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