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                <title>challenging - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>challenging RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : मैकडॉवेल्स और ओल्ड मंक की बिक्री पर रोक को चुनौती बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचीं शराब कंपनियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के शराब उद्योग में लोकप्रिय ब्रांडों से जुड़ा एक अहम मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। शराब बनाने वाली कंपनियों यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड और मोहन मीकिन लिमिटेड ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की उस कार्रवाई को चुनौती दी है, जिसके तहत उनके कुछ लोकप्रिय इंडियन-मेड फॉरेन लिकर उत्पादों के नए स्टॉक के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाई गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51242/mumbai-liquor-companies-reach-bombay-high-court-challenging-ban-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/whatsapp-image-2026-08-08-at-2.41.05-pm-1024x683.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> देश के शराब उद्योग में लोकप्रिय ब्रांडों से जुड़ा एक अहम मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। शराब बनाने वाली कंपनियों यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड और मोहन मीकिन लिमिटेड ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की उस कार्रवाई को चुनौती दी है, जिसके तहत उनके कुछ लोकप्रिय इंडियन-मेड फॉरेन लिकर उत्पादों के नए स्टॉक के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाई गई है। कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं में FSSAI के रोक संबंधी आदेशों को चुनौती दी गई है। मामला खास तौर पर मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड रम और ओल्ड मंक से जुड़े उत्पादों को लेकर है। FSSAI की ओर से संबंधित विनिर्माण इकाइयों के निरीक्षण के बाद ये आदेश जारी किए गए थे। निरीक्षण के दौरान नियामक ने उत्पादों की लेबलिंग, कंपोजिशन और फ्लेवरिंग एजेंट के इस्तेमाल से संबंधित आपत्तियां दर्ज की थीं।</p>
<p> </p>
<p>निर्माण इकाइयों के निरीक्षण के बाद कार्रवाई FSSAI की कार्रवाई के पीछे मुख्य मुद्दा शराब उत्पादों में इस्तेमाल किए जा रहे फ्लेवरिंग एजेंट और उनसे जुड़े नियामकीय मानकों का बताया जा रहा है। नियामक की जांच में कुछ उत्पादों में ऐसे कृत्रिम या ‘नेचर आइडेंटिकल’ फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए, जिनके जरिए उत्पाद में उम्रदराज शराब जैसी खुशबू और स्वाद हासिल करने का प्रयास किया जाता है। FSSAI ने अपनी कार्रवाई में ऐसे उत्पादों को खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं माना है। नियामक की ओर से यह भी कहा गया है कि इस तरह की फ्लेवरिंग पारंपरिक उम्र बढ़ाने की प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई कई प्रमुख शराब ब्रांडों तक पहुंची है और इसमें मैकडॉवेल्स, ओल्ड मंक सहित अन्य लोकप्रिय उत्पादों के कुछ संस्करण शामिल हैं।<br />कंपनियों ने कहा- लंबे समय से जारी है प्रक्रिया दूसरी ओर, कंपनियों ने FSSAI की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। यूनाइटेड स्पिरिट्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सराफ ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दलील दी कि नियामक के आदेश का असर IMFL उद्योग के एक बड़े हिस्से पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित उत्पाद दशकों से एक स्थापित प्रक्रिया के तहत बनाए जा रहे हैं। कंपनी का पक्ष है कि उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया और लेबलिंग को मौजूदा भारतीय कानूनी एवं नियामकीय व्यवस्था के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कंपनियां इस बात पर जोर दे रही हैं कि जिस प्रक्रिया को लेकर अब आपत्ति उठाई जा रही है, उसका इस्तेमाल लंबे समय से उद्योग में होता आया है।<br />हाईकोर्ट में रखी गई कंपनियों की दलील </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 14:01:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी एनकाउंटर में 22 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को 2005 में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में कई पुलिस अधिकारियों सहित सभी 22 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई शुरू की। सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबउद्दीन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पूरी तरह से न्याय का उल्लंघन था और इसमें "कई कमियां" थीं। सुनवाई के पहले दिन, रुबाबउद्दीन की ओर से पेश हुए वकील गौतम तिवारी ने अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ के सामने पूरी घटना का क्रम बताया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46022/-mumbai--final-hearing-begins-on-the-petition-challenging-the-acquittal-of-22-people-in-the-alleged-fake-encounter-of-gangster-sohrabuddin-sheikh"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download-(4).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को 2005 में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में कई पुलिस अधिकारियों सहित सभी 22 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई शुरू की। सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबउद्दीन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पूरी तरह से न्याय का उल्लंघन था और इसमें "कई कमियां" थीं। सुनवाई के पहले दिन, रुबाबउद्दीन की ओर से पेश हुए वकील गौतम तिवारी ने अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ के सामने पूरी घटना का क्रम बताया। </p>
<p> </p>
<p>अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी, कौसर बी, और एक सहयोगी, तुलसीराम प्रजापति, नवंबर 2005 में हैदराबाद से सांगली बस से यात्रा कर रहे थे, जब गुजरात के एंटी टेररिस्ट स्क्वाड और राजस्थान के स्पेशल टास्क फोर्स के अधिकारियों की एक टीम ने तीनों को उठा लिया और उन्हें वलसाड के एक फार्महाउस में ले गई।तिवारी ने कोर्ट को बताया कि प्रजापति, जिसने सोहराबुद्दीन और कौसर बी के अपहरण को देखा था, को बाद में राजस्थान जाने दिया गया क्योंकि वह एक दूसरे मामले में वांछित था। बाद में गुजरात पुलिस ने उसे अहमदाबाद ले जाते समय गोली मार दी।वकील ने आगे कहा, "वह हर किसी से कहता रहा कि वह सोहराबुद्दीन जैसा हश्र नहीं चाहता। हमारे पास गवाह हैं, उसके सेलमेट, जिन वकीलों से उसने सलाह ली थी, और उसका परिवार। उसने इस बारे में सभी से बात की थी। उसकी सुरक्षा को लेकर कई लोगों ने उसकी सुरक्षा के लिए याचिकाएं भी दायर की थीं।"प्रजापति की भूमिका पर जोर देते हुए, तिवारी ने कहा कि वह सोहराबुद्दीन को पकड़ने में मदद करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के लिए काम कर रहा था।</p>
<p> सोहराबुद्दीन और कौसर बी का) प्लान हैदराबाद जाने का था, वहां अपने रिश्तेदारों के साथ ईद मनाने का था, और फिर अपनी पत्नी के ऑपरेशन के लिए सांगली जाने का था। तुलसीराम उन दोनों की मदद कर रहा था और हैदराबाद तक और हैदराबाद के अंदर ट्रांसपोर्ट का इंतज़ाम करने में उसका अहम रोल था,” उसने कोर्ट को बताया।“जब सोहराबुद्दीन को सांगली जाते समय पकड़ा गया, तो उसे वलसाड के एक फार्महाउस में ले जाया गया, बाद में एक गेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया, और वहां से उसे अहमदाबाद ले जाया जाना था। इस दौरान, तुलसीराम को राजस्थान में उसके खिलाफ एक और केस के लिए ज़रूरत थी, और उसे राजस्थान जाने की इजाज़त दी गई। बाद में, 26 नवंबर 2005 के आसपास, सोहराबुद्दीन की लाश एक मोटरसाइकिल के पास पड़ी मिली, यह दावा किया गया कि पुलिस से बचने की कोशिश में उसे गोली मार दी गई थी,” वकील ने कहा। वह अगले हफ्ते अपनी दलीलें जारी रखेंगे।ट्रायल के दौरान, गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात और राजस्थान के कई पुलिस अधिकारियों सहित 16 मुख्य आरोपियों को बरी करने के बाद, दिसंबर 2018 में एक स्पेशल CBI कोर्ट ने बाकी बचे सभी 22 आरोपियों को भी बरी कर दिया। उन्हें कथित अपराधों से जोड़ने वाले पर्याप्त और ठोस सबूतों की कमी के कारण बरी किया गया। सेंट्रल एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूत उनमें से किसी को भी किसी भी आरोप में दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 12:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : त्यौहारी सीजन में मिलावट खोरों के खिलाफ मुहिम; मिठाई की दुकानों, क्लाउड किचन, होटलों, दूध में मिलावट जैसी हर चीज की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के खाद्य व औषधि प्रशासन (एफडीए) ने त्यौहारी सीजन में मिलावट खोरों के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है। लेकिन एफडीए अधिकारियों के कमी के कारण मिलावट पर अंकुश लगाने में प्रशासन असहज महशूस कर रहा है। एफडीए आयुक्त राजेश नार्वेकर का खुद मानना है कि राज्य में 1100 अधिकारियों की जरूरत है, जबकि फील्ड पर 130 ही कार्यरत हैं और 194 प्रशिक्षण ले रहे हैं। नार्वेकर के अनुसार एफडीए पिछले कुछ वर्षों से रेहड़ी-पटरी वालों और महिला बचत गुटों समूहों को प्रशिक्षण दे रहा है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44827/campaign-against-adulteration-in-mumbai-festival-season-monitoring-of-everything"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-20t123453.126.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के खाद्य व औषधि प्रशासन (एफडीए) ने त्यौहारी सीजन में मिलावट खोरों के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है। लेकिन एफडीए अधिकारियों के कमी के कारण मिलावट पर अंकुश लगाने में प्रशासन असहज महशूस कर रहा है। एफडीए आयुक्त राजेश नार्वेकर का खुद मानना है कि राज्य में 1100 अधिकारियों की जरूरत है, जबकि फील्ड पर 130 ही कार्यरत हैं और 194 प्रशिक्षण ले रहे हैं। नार्वेकर के अनुसार एफडीए पिछले कुछ वर्षों से रेहड़ी-पटरी वालों और महिला बचत गुटों समूहों को प्रशिक्षण दे रहा है। </p>
<p> </p>
<p>मिठाई की दुकानों, क्लाउड किचन, होटलों, दूध में मिलावट जैसी हर चीज की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है. पिछले दो महीनों में एफडीए ने मुंबई शहर में 10 हजार 875 किलो की खान- पान की वस्तुएं जब्त की है, जिसकी कीमत 18 लाख 69 हजार के आसपास है. इसमें मिलावटी पनीर, दूध, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, मावा, रिफाइन तेल शामिल है। त्योहार के सीजन में मिलावटखोरों की तादाद बढ़ जाती है. दूध, पनीर, तेल, मिठाई व अन्य चीजों की डिमांड अधिक होती है। </p>
<p>शहर में डेढ़ करोड़ से अधिक लोग रहते है, ऐसे में त्योहार आते ही खाद्य पदार्थ की मांग बाजार में बढ़ जाती है। डेयरी, मिठाई की दुकान, किराने की दुकान हर जगह मिलावटी सामान पहुंचता है। एफडीए अधिकारियों के अनुसार अगस्त से 15 अक्टूबर के दौरान शहर भर के 324 दुकानों में छापेमारी की। इनमें से 299 दुकानों से सैंपल लिया गया। लिए गए सैंपल में खोआ, दूध, चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स, वरई व मिठाई सहित अन्य खाने की चीज शामिल थी। सैंपल की जांच करने के बाद 195 दुकानदारों को अपने खाद्य पदार्थ में सुधार करने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके अलावा 8 दुकानदारों का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/44827/campaign-against-adulteration-in-mumbai-festival-season-monitoring-of-everything</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Oct 2025 12:36:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार के दावे को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका हाई कोर्ट ने बहाल की...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">HC ने अपनी याचिका को बहाल करने की मांग करने वाली केंद्र की एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए शर्तों के अधीन याचिका को बहाल कर दिया। न्यायमूर्ति संदीप मार्ने ने 12 जनवरी को कहा, "रिट याचिका आज से चार सप्ताह के भीतर कार्यालय की आपत्तियों को हटाने की शर्त के अधीन बहाल की जाती है।"</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28672/the-high-court-reinstated-the-centre-s-petition-challenging-the-government-s-claim"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(2)20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र सरकार के तत्कालीन राजस्व मंत्री के नवंबर 2018 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को बहाल कर दिया है, जिसमें राज्य सरकार को मुंबई के कांजुरमार्ग में विभिन्न नमक पैन का मालिक घोषित किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र की याचिका, जो सितंबर 2020 में दायर की गई थी, को उच्च न्यायालय रजिस्ट्री ने 17 जनवरी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार की ओर से याचिका दायर करने वाले उप नमक आयुक्त ने कुछ औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं और इसलिए उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है... इसे आगे बढ़ाने में।</p>
<p style="text-align:justify;">HC ने अपनी याचिका को बहाल करने की मांग करने वाली केंद्र की एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए शर्तों के अधीन याचिका को बहाल कर दिया। न्यायमूर्ति संदीप मार्ने ने 12 जनवरी को कहा, "रिट याचिका आज से चार सप्ताह के भीतर कार्यालय की आपत्तियों को हटाने की शर्त के अधीन बहाल की जाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र को अब कार्यालय की आपत्तियों को दूर करना होगा जिसका अर्थ है कि उसे यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ विभागीय आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों को सुपाठ्य बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र ने दावा किया कि याचिका जल्दबाजी में खारिज कर दी गई। याचिका बड़ी है और संबंधित दस्तावेज या तो पुराने हैं या पढ़ने में नहीं आते या हस्तलिखित हैं। इसलिए उन दस्तावेज़ों को टाइप करने में समय लगता था, उन्होंने कहा कि कार्यालय की अन्य आपत्तियों को पहले ही दूर कर दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जोरू बथेना द्वारा एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि केंद्र और राज्य वहां मुकदमेबाजी शुरू कर रहे हैं जहां कोई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मेट्रो रेल डिपो के लिए जमीन मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) को सौंप दी जानी चाहिए। हस्तक्षेप याचिका का केंद्र ने विरोध किया कि हस्तक्षेपकर्ता की भूमिका बाद में आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र ने मई 2018 में कोंकण संभागीय आयुक्त द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी है, जिसके आधार पर तत्कालीन राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने 2018 में भूमि स्वामित्व पर आदेश पारित किया था।राजस्व मंत्री के आदेश के बाद, 1 अक्टूबर, 2020 को, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के तहत तत्कालीन मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर ने मेट्रो कार शेड परियोजना के लिए 102 एकड़ कांजुरमार्ग नमक पैन भूमि को एमएमआरडीए को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">2019 में, देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने उपनगरीय आरे मिल्क कॉलोनी में मेट्रो कार शेड बनाने की योजना की घोषणा की. एमवीए ने 2020 में योजना को रद्द कर दिया और मेट्रो लाइन 3 (कोलाबा-बांद्रा-एसईईपीजेड), मेट्रो लाइन 4 (कासारवडावली-वडाला) और मेट्रो लाइन 6 (लोखंडवाला-विक्रोली) के लिए कार शेड और एक इंटरचेंज स्टेशन के लिए कांजुरमार्ग भूमि की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, 16 दिसंबर, 2020 को उच्च न्यायालय ने मेट्रो कार शेड बनाने के लिए 1 अक्टूबर, 2020 के भूमि हस्तांतरण आदेश पर रोक लगा दी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने यह भी कहा कि वह यह तय करेगी कि जमीन का मालिक कौन है, राज्य या केंद्र सरकार।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/28672/the-high-court-reinstated-the-centre-s-petition-challenging-the-government-s-claim</link>
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                <pubDate>Fri, 16 Feb 2024 19:30:39 +0530</pubDate>
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