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                <title>governor - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई: ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान में शामिल होंगे राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा बुधवार, 29 जुलाई को ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान के तहत आयोजित होने वाली सामुदायिक जागरूकता पदयात्रा में शामिल होंगे। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को तपेदिक (टीबी) के प्रति जागरूक करना और बीमारी की रोकथाम, जांच तथा इलाज को लेकर जानकारी पहुंचाना है। राज्यपाल सुबह 11:30 बजे इस जागरूकता वॉक में हिस्सा लेंगे। यह पदयात्रा चेंबूर (पश्चिम) स्थित पी.एल. लोखंडे मार्ग पर बने श्री नारायण गुरु कॉलेज ऑफ कॉमर्स के परिसर से शुरू होगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, स्वयंसेवक और स्थानीय लोग शामिल होंगे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51016/mumbai-governor-jishnu-dev-verma-to-join-tb-free-mumbai-campaign"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/20260526610427112-300x200.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा बुधवार, 29 जुलाई को ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान के तहत आयोजित होने वाली सामुदायिक जागरूकता पदयात्रा में शामिल होंगे। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को तपेदिक (टीबी) के प्रति जागरूक करना और बीमारी की रोकथाम, जांच तथा इलाज को लेकर जानकारी पहुंचाना है। राज्यपाल सुबह 11:30 बजे इस जागरूकता वॉक में हिस्सा लेंगे। यह पदयात्रा चेंबूर (पश्चिम) स्थित पी.एल. लोखंडे मार्ग पर बने श्री नारायण गुरु कॉलेज ऑफ कॉमर्स के परिसर से शुरू होगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, स्वयंसेवक और स्थानीय लोग शामिल होंगे।</p>
<p> </p>
<p>आयोजकों के अनुसार, इस सामुदायिक जागरूकता वॉक में लगभग 1000 राष्ट्रीय सेवा योजना वॉलंटियर्स भाग लेंगे। ये स्वयंसेवक ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान से जुड़े संदेशों वाले प्लेकार्ड लेकर आसपास के क्षेत्रों में पैदल चलेंगे और लोगों को टीबी से बचाव तथा उपचार के बारे में जागरूक करेंगे। पदयात्रा के दौरान स्वयंसेवक लोगों को टीबी के लक्षणों, समय पर जांच कराने की आवश्यकता और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी देंगे। अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना है कि टीबी एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है और समय पर पहचान होने पर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।<br />टीबी भारत में लंबे समय से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रही है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी उन्मूलन के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान भी इसी दिशा में एक प्रयास है, जिसके माध्यम से शहर के लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NSS वॉलंटियर्स के माध्यम से अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। युवा स्वयंसेवक अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।<br />इस जागरूकता अभियान में टीवी और फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों के भी शामिल होने की संभावना है। अभिनेता राकेश बेदी और शिव ठाकरे के कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है। उनकी मौजूदगी से अभियान को और अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी को नियंत्रित करने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी बेहद जरूरी है। कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे अभियानों के जरिए लोगों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है।<br />टीबी के सामान्य लक्षणों में लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और कमजोरी महसूस होना शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मुंबई जैसे बड़े शहर में जहां बड़ी आबादी रहती है, वहां संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए सामुदायिक भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ही टीबी जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। राज्यपाल की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम को टीबी उन्मूलन के संदेश को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अभियान के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि टीबी से डरने की नहीं, बल्कि समय पर जांच और सही इलाज अपनाने की जरूरत है। ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान के तहत आयोजित यह पदयात्रा स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों को बीमारी के खिलाफ एकजुट करने का प्रयास है। आयोजकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान को नई गति मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 12:30:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई :  राजभवन में राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया स्वागत </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुंबई स्थित राजभवन में स्वागत किया गया। उनके साथ पत्नी दर्शना देवी भी मौजूद थीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल को शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। राज्यपाल के स्वागत के लिए महाराष्ट्र पुलिस द्वारा राजकीय सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) भी दिया गया। इस भव्य स्वागत को लेकर महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी गई और 'एक्स' पोस्ट में लिखा गया, "महाराष्ट्र के नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत पत्नी दर्शना देवी के साथ मुंबई स्थित राजभवन पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान, राज्यपाल आचार्य देवव्रत को राज्य पुलिस बल द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया गया।"</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43910/mumbai--chief-minister-devendra-fadnavis-welcomed-governor-acharya-devvrat-at-raj-bhavan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/4880473-untitled-1-copy.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुंबई स्थित राजभवन में स्वागत किया गया। उनके साथ पत्नी दर्शना देवी भी मौजूद थीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल को शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। राज्यपाल के स्वागत के लिए महाराष्ट्र पुलिस द्वारा राजकीय सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) भी दिया गया। इस भव्य स्वागत को लेकर महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी गई और 'एक्स' पोस्ट में लिखा गया, "महाराष्ट्र के नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत पत्नी दर्शना देवी के साथ मुंबई स्थित राजभवन पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान, राज्यपाल आचार्य देवव्रत को राज्य पुलिस बल द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया गया।"</p>
<p> </p>
<p>वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी इस अवसर पर अपने आधिकारिक 'एक्स' पोस्ट के जरिए कहा, "महाराष्ट्र के नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुंबई के राजभवन में स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे। उनका शॉल और पुष्पगुच्छ भेंटकर हार्दिक स्वागत किया गया और उन्हें राज्य की ओर से सम्मान भी प्रदान किया गया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "आचार्य देवव्रत सोमवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे। राज्य को उनके अनुभव से लाभ होगा।"</p>
<p>इस कार्यक्रम में कई उच्च पदस्थ अधिकारी भी उपस्थित थे। राज्य के मुख्य सचिव राजेश कुमार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला, तथा महामहिम राज्यपाल के परिवार के सदस्य भी स्वागत समारोह का हिस्सा बने। राजभवन परिसर को इस विशेष अवसर पर सजाया गया था और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नियुक्ति आदेश जारी किया था। राष्ट्रपति सचिवालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सीपी राधाकृष्णन के महाराष्ट्र राज्यपाल पद से इस्तीफा देने और भारत के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद, भारत के राष्ट्रपति ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्यभार का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 13:07:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार; सीपी राधाकृष्णन की लेंगे जगह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के नए उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की तरफ से बयान जारी कर यह जानकारी दी गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन के इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। वे अब दोनों राज्यों के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान में आगे बताया गया कि सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद महाराष्ट्र के राज्यपाल का पद खाली हुआ। इसके चलते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43815/gujarat-governor-acharya-devvrat-has-been-given-additional-charge-of-maharashtra--will-replace-cp-radhakrishnan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-11t185746.388.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>भारत के नए उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की तरफ से बयान जारी कर यह जानकारी दी गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन के इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। वे अब दोनों राज्यों के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान में आगे बताया गया कि सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद महाराष्ट्र के राज्यपाल का पद खाली हुआ। इसके चलते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। </p>
<p> </p>
<p><strong>सीपी राधाकृष्णन बने अगले उपराष्ट्रपति</strong><br />बता दें कि बीते 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ के अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे देने के बाद उपराष्ट्रपति पद को लेकर चर्चा तेज हो गई कि भारत का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा? ऐसे में बीते नौ सितंबर को इसके लिए चुनाव हुए। 67 वर्षीय एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार बी सुधर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराकर, भारत के नए उपराष्ट्रपति बन गए। </p>
<p><strong>कौन है आचार्य देवव्रत?</strong><br />अब बात अगर आचार्य देवव्रत की करें तो देवव्रत एक शिक्षाविद, समाजसेवी और वैदिक विद्वान के रूप में जाने जाते हैं। वे लंबे समय तक गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से जुड़े रहे हैं। उन्होंने हरियाणा के गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्रधानाचार्य के रूप में काम किया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है।</p>
<p><strong>कैसा रहा है राजनीतिक सफर?</strong><br />आचार्य देवव्रत ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत शिक्षा और समाज सेवा से की थी। 2015 में उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया, जो उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत मानी जाती है। जुलाई 2019 में वे गुजरात के राज्यपाल नियुक्त किए गए, और तब से इस पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में अब, 2025 में उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 19:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली ; राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए जानबूझकर कोई समय सीमा तय नहीं की गई - केंद्र सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रेशीडेंशियल रिफरेंस का समर्थन करते हुए उसमें उठाए गए संवैधानिक मुद्दों पर पक्ष रखा। केंद्र सरकार ने कहा कि संविधान में विधेयक पर निर्णय लेने के संबंध में राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए जानबूझकर कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43190/new-delhi--no-time-limit-has-been-deliberately-set-for-the-president-and-governor---central-government"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-19t221230.895.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली ; </strong>केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रेशीडेंशियल रिफरेंस का समर्थन करते हुए उसमें उठाए गए संवैधानिक मुद्दों पर पक्ष रखा। केंद्र सरकार ने कहा कि संविधान में विधेयक पर निर्णय लेने के संबंध में राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए जानबूझकर कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। केंद्र सरकार की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता की बहस बुधवार को भी जारी रहेगी।<br />इससे पहले केरल और तमिलनाडु सरकार की ओर से सुनवाई पर आपत्ति जताई गई और कहा गया कि कोर्ट पहले ही जो फैसला दे चुका है उस पर रेफरेंस का कोई अर्थ नहीं। लेकिन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने रेफरेंस भेजकर राय मांगी है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। विधि अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में प्रेसिडेंशियल रिफरेंस पर शरू हुई सुनवाई में अपना पक्ष रख रहे थे।</p>
<p> </p>
<p><strong>राष्ट्रपति को समय सीमा में नहीं बांधा जा सकता</strong><br />चीफ जस्टिस बीआर गवई की टिप्पणी थी कि संविधान सभा की बहस को देखने से लगता है कि एक तर्कसंगत समय की बात की गई है यहां तक कि कुछ सदस्यों को तो छह सप्ताह का समय भी ज्यादा लग रहा था। लेकिन मेहता ने कहा कि संविधान निर्माताओं का सोचना था कि राष्ट्रपति को समय सीमा में नहीं बांधा जा सकता। जबकि यहां मुद्दा ये है कि हमने इसे तीन महीने कर दिया है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह तमिलनाडु के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं वे संविधान सभा में हुई बहस पर कह रहे हैं। मेहता की बहस बुधवार को भी जारी रहेगी।</p>
<p><strong>केरल और तमिलनाडु ने दायर की याचिका</strong><br />केरल और तमिलनाडु की ओर से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी और केके वेणुगोपाल का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट के लिए रिफरेंस का जवाब देना जरूरी नहीं है। जो मुद्दे किसी जजमेंट में तय हो चुके हैं उन पर रिफरेंस में जवाब नहीं दिया जाता क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अनुच्छेद 141 के तहत सभी पर बाध्यकारी होता है।</p>
<p>संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से काम करते हैं ऐसे में ये रिफरेंस केंद्र का है। केंद्र ने उस फैसले के खिलाफ न पुनर्विचार और न ही क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है बल्कि रिफरेंस दाखिल करके जजमेंट को परोक्ष रूप से चुनौती दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 22:13:44 +0530</pubDate>
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