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                <title>Marathi - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Marathi RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: मराठी सीखने की समयसीमा बढ़ाने पर विवाद, एकीकरण समिति ने जताई आपत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ओला-उबर चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी गई एक वर्ष की समयसीमा बढ़ाने के फैसले के खिलाफ मराठी एकीकरण समिति ने आक्रामक रुख अपनाया है। समिति ने इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस मामले में समिति का एक प्रतिनिधिमंडल दो दिन के भीतर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर समयसीमा बढ़ाने का फैसला वापस लेने की मांग वाला ज्ञापन सौंपेगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51643/controversy-on-extending-the-deadline-for-learning-marathi-integration-committee"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-01t133241.674.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ओला-उबर चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी गई एक वर्ष की समयसीमा बढ़ाने के फैसले के खिलाफ मराठी एकीकरण समिति ने आक्रामक रुख अपनाया है। समिति ने इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस मामले में समिति का एक प्रतिनिधिमंडल दो दिन के भीतर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर समयसीमा बढ़ाने का फैसला वापस लेने की मांग वाला ज्ञापन सौंपेगा।</p>
<p> </p>
<p>राज्य सरकार के फैसले के विरोध और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के 107 शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता रविवार को बड़ी संख्या में हुतात्मा चौक पर इकट्ठा हुए। समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने कहा कि मराठी भाषा के क्रियान्वयन में किसी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए। चालकों को दी गई एक वर्ष की समयसीमा बढ़ाना स्थानीय मराठी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला फैसला है। इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को यह निर्णय वापस लेना चाहिए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो सरकार के इस फैसले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। फैसले की कानूनी वैधता और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51643/controversy-on-extending-the-deadline-for-learning-marathi-integration-committee</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 13:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : मराठी सीखें या मुंबई छोड़ दें, ऑटोरिक्शा ड्राइवर्स को MNS की धमकी, कांदिवली में लगाए चेतावनी बोर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के बीच एक बार फिर मनसे का बयान आया है। इस बार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई के कांदिवली इलाके में बोर्ड लगाए हैं। ये चेतावनी बोर्ड्स हैं, इनमें लिखा है कि भाषा के नियम को लेकर यात्रियों को परेशान किया गया या उन्हें मजबूर किया गया तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51562/mumbai-learn-marathi-or-leave-mumbai-mns-threatens-autorickshaw-drivers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-3dsfgasdf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के बीच एक बार फिर मनसे का बयान आया है। इस बार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई के कांदिवली इलाके में बोर्ड लगाए हैं। ये चेतावनी बोर्ड्स हैं, इनमें लिखा है कि भाषा के नियम को लेकर यात्रियों को परेशान किया गया या उन्हें मजबूर किया गया तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। पार्टी के एक पदाधिकारी ने राज्य सरकार के इस नियम का समर्थन करते हुए कहा कि जिन ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने या बोलने में परेशानी है, वे महाराष्ट्र छोड़ सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की यह टिप्पणी कांदिवली में चार ऑटो-रिक्शा चालकों द्वारा एक मराठी भाषी चालक के साथ कथित मारपीट के एक दिन बाद आई है। उस चालक ने भाषा संबंधी नियम के विरोध में शामिल होने से इनकार कर दिया था।</p>
<p><strong>कांदिवली में कई जगह लगे बोर्ड्स</strong><br />कांदिवली की घटना के बाद स्थानीय स्तर पर मराठी भाषी लोगों और उत्तर भारत से आए चालकों के बीच तनाव पैदा हो गया। महानगर के चारकोप विधानसभा क्षेत्र मनसे के पदाधिकारी दिनेश सालवी ने कहा कि पार्टी ने कांदिवली में कई जगह बोर्ड लगाए हैं, जहां सोमवार को यह घटना हुई थी। सालवी ने कहा कि अगर ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने या बोलने में परेशानी है, तो वे महाराष्ट्र छोड़कर अपने-अपने राज्यों में वापस जा सकते हैं।</p>
<p><strong>मराठी सिखा रहे ये संस्थान</strong><br />महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से पूरे राज्य में अभियान शुरू किया है, जिसके तहत गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के मराठी भाषा के कामचलाऊ ज्ञान की जांच की जा रही है। कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ की ओर से चलाए गए 105 दिवसीय ‘हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ में 165601 गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक कामचलाऊ मराठी सीखने के लिए आगे आए। पिछले सप्ताह परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान महाराष्ट्र में 1989 से जरूरी है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51562/mumbai-learn-marathi-or-leave-mumbai-mns-threatens-autorickshaw-drivers</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 13:04:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: यूपी में नहीं दे पाए नौकरी इसलिए मुंबई आए...मराठी भाषा के मुद्दे पर मंत्री प्रताप सरनाईक का अखिलेश यादव पर पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर राजनीति गरमाई हुई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक्स पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में सोचना चाहिए। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51541/minister-pratap-sarnaik-hit-back-at-akhilesh-yadav-on-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-3fsdf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर राजनीति गरमाई हुई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक्स पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में सोचना चाहिए। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है। पिछले कई सालों से नॉर्थ इंडियन लोगों को नौकरी के मौके नहीं मिले, जिसकी वजह से महाराष्ट्र पिछले 40-50 सालों से नॉर्थ इंडियंस को रोजी-रोटी दे रहा है। महायुति सरकार ऐसी सरकार है जो नौकरी देती है, छीनती नहीं। महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के निर्देश और ऑटो ड्राइवरों के विरोध पर अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट करके मामले को उठाया था। प्रताप सरनाईक ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा</strong><br />अखिलेश यादव ने लिखा था कि हर राज्य की मातृभाषा का सम्मान और उत्थान होना चाहिए लेकिन किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इससे देश की भाषिक-भाविक एकता में दूरी और दुराव पैदा होता है। मुंबई में भाजपा के उत्तर भारतीय नेता हैं या भ्रष्टाचार में लीन होकर ठंडे पड़े हैं। क्या इस तरह की भाषा-ज्ञान की शर्त रखकर किसीको संपूर्ण देश में व्यवसाय करने की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का हनन नहीं होता है? अगर ऐसा ही है तो फिर जो विदेशी कंपनियां मुंबई में काम कर रही हैं, उन पर भी ये शर्त लागू हो लेकिन होगी नहीं क्योंकि धन लोलुप भाजपा धनवानों के आगे कालीन की तरह बिछने को तैयार रहती है। भाजपा का सारा ज़ोर गरीबों, शोषितों, वंचितों और उपेक्षितों पर ही चलता है।<br />अखिलेश ने बीजेपी पर बोला था हमला<br />अखिलेश यादव ने लिखा था कि अगर ऐसा ही है तो मुंबई-महाराष्ट्र की भाजपा घोषित कर दे कि वो किसी हिंदी, ब्रज, बुंदेली, रोहेली-कौरवी, अवधी, भोजपुरी, मैथिली; हरियाणवी, गढ़वाली- कुमायूँनी; मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, मालवी, हाड़ौती, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी; गुजराती, काठियावाड़ी, सुरती, चरोतरी, महसाणी; तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयाली, तुलु, ओड़िया, गंजामी, संबलपुरी-कोसली, बालेश्वरी देसिया; सिंधी, पंजाबी; कश्मीरी-कॉशुर, डोगरी, गोजरी, पहाड़ी, शिना, बाल्टी, लद्दाखी; असमिया, मणिपुरी-मेइतेइलोन, मिजो, कोकबोरोक, खासी, गारो, नागामी, बोडो, भीली, गोंडी, कुड़ुख, मुंडारी, संथाली व अन्य भाषा भाषियों का एक भी वोट नहीं लेगी। आखिर में उन्होंने लिखा था कि सरकारों को दिल भी बड़ा रखना चाहिए और दिमाग भी।</p>
<p>आप उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम हैं। आप अपने समय में नौकरी नहीं दे पाए, इसलिए ये लोग महाराष्ट्र आए और हमने उन्हें स्वीकार कर लिया। इसे यूपी में चुनावी एजेंडा न बनाएं। राज्य में, हमने 1600-1800 टीचर (मराठी पढ़ाने के लिए) रखे हैं। हम बस इतना कह रहे हैं कि पैसेंजर से मराठी में बात करें, मराठी प्राइड बनाए रखें। आपको 1 महीने का समय दिया जाएगा और उसके बाद 3 महीने का समय दिया जाएगा। अगर आप अभी भी मराठी नहीं सीख पा रहे हैं, तो आपका बैज कैंसिल कर दिया जाएगा। क्योंकि यह महाराष्ट्र है। राज्य रोज़ी-रोटी देना जानता है, लेकिन महाराष्ट्र के गर्व और संस्कृति का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: 'अगर हम पढ़े-लिखे होते तो ऑफिस में बैठते', मराठी नियम पर मुंबई के ऑटो ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्सा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले ने राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। इसी बीच मुंबई में राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का एक वर्ग सड़क पर उतर आया है। इन चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51539/mumbai-if-we-were-educated-we-would-have-sat-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/mumbai-autorickshaw-strike-244942980-3x4.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्सा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले ने राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। इसी बीच मुंबई में राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का एक वर्ग सड़क पर उतर आया है। इन चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि चालकों का विरोध ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा जानने के अनिवार्य नियम को लेकर है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्या कहना है कि गौर-मराठी भाषी चालकों का?</strong><br />सरकार के फैसले के विरोध में सड़क पर उतरे गैर-मराठी भाषी चालकों का कहना है कि इस नियम से उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और भारी-भरकम जुर्माने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>मराठी सीखना मुश्किल- चालक</strong><br />हड़ताल में शामिल कई चालकों की उम्र 55 से 60 साल के बीच है। उनका कहना है कि वे कभी स्कूल नहीं गए, इसलिए उनके लिए अचानक मराठी बोलना और सीखना बहुत मुश्किल है।</p>
<p>मामले में मुंबई कंदिवली लिंक रोड पर सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे एक ऑटो चालक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? अगर हम पढ़े-लिखे होते, तो किसी दफ्तर में बैठकर काम कर रहे होते।</p>
<p><strong>चालकों ने जुर्माना को लेकर उठाए सवाल</strong><br />इतना ही नहीं विरोध कर रहे चालकों का दावा है कि वे जैसे-तैसे टूटी-फूट मराठी सीखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सहूलियत या समय देने के बजाय अधिकारियों द्वारा दंडित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि वे 15000 से 20000 रुपये तक का जुर्माना कैसे भर सकते हैं? चालकों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक यह तीन दिन की हड़ताल जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51539/mumbai-if-we-were-educated-we-would-have-sat-in</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 11:35:40 +0530</pubDate>
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