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                <title>story - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>नवी मुंबई : आपसी विवाद में कत्ल कर फेंक दी थी लाश... नवी मुंबई हत्याकांड में सामने आई कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीते दिनों एक शव मिला था. इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. शुरू में शव की शिनाख्त नहीं हो पाई तो ये मामला पुलिस के लिए चैलेंजिंग हो गया था. हालांकि पुलिस ने कड़ी से कड़ी मिलाते हुए तफ्तीश की और दो आरोपियों को पकड़ लिया. पुलिस ने जब आरोपियों से पूछताछ की तो पूरी कहानी सामने आ गई.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49597/navi-mumbai-dead-body-was-thrown-after-murder-due-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/crime-scene_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नवी मुंबई : </strong>बीते दिनों एक शव मिला था. इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. शुरू में शव की शिनाख्त नहीं हो पाई तो ये मामला पुलिस के लिए चैलेंजिंग हो गया था. हालांकि पुलिस ने कड़ी से कड़ी मिलाते हुए तफ्तीश की और दो आरोपियों को पकड़ लिया. पुलिस ने जब आरोपियों से पूछताछ की तो पूरी कहानी सामने आ गई.</p>
<p> </p>
<p>दरअसल, यह मामला सीबीडी बेलापुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है. जहां कुछ समय पहले एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था. शुरुआत में मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी. इसके बाद सीबीडी बेलापुर पुलिस थाने में हत्या का केस दर्ज किया गया था. मृतक की शिनाख्त न हो पाने की वजह से पुलिस के सामने बड़ी चुनौती थी. <br />हालांकि, पुलिस ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की मदद से मामले की पड़ताल की. इस दौरान पुलिस को कुछ सुराग मिले, जिनके आधार पर दो संदिग्धों को पकड़ा गया. </p>
<p>पूछताछ में दोनों ने हत्या में अपनी संलिप्तता की बात मान ली. इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों में 29 वर्षीय सुमाग छन्नूलाल धुर्वे निवासी है, जो मूल रूप से अमरावती का रहने वाला है. वहीं दूसरा आरोपी 35 वर्षीय अरविंद बोला कटकम उर्फ राजा निवासी पुणे है. </p>
<p>पुलिस का कहना है कि हत्या आपसी विवाद के चलते की गई थी. घटना के बाद आरोपी अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रह रहे थे, लेकिन पुलिस ने जांच में पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इस पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित पहलुओं को भी खंगाल रही है. नवी मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि क्राइम पर प्रभावी तरीके से कंट्रोल किया जा सके. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:31:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: BMC में 122 इंजीनियरों के ट्रांसफर कैंसिल; भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद एडमिनिस्ट्रेशन का यू-टर्न, असली मामला क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने आखिरकार 122 इंजीनियरों के ट्रांसफर कैंसिल कर दिए हैं। यह फैसला ट्रांसफर में कथित गड़बड़ियों और 'ट्रांसफर मार्केट' के आरोपों की वजह से लिया गया। खास बात यह है कि ये ट्रांसफर अक्टूबर 2025 में किए गए थे, लेकिन उसके बाद शिकायतों, आपत्तियों और जांच की मांगों की वजह से पूरा प्रोसेस विवादों में घिर गया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49287/transfer-cancellation-of-122-engineers-in-mumbai-bmc-u-turn-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-18t133131.930.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने आखिरकार 122 इंजीनियरों के ट्रांसफर कैंसिल कर दिए हैं। यह फैसला ट्रांसफर में कथित गड़बड़ियों और 'ट्रांसफर मार्केट' के आरोपों की वजह से लिया गया। खास बात यह है कि ये ट्रांसफर अक्टूबर 2025 में किए गए थे, लेकिन उसके बाद शिकायतों, आपत्तियों और जांच की मांगों की वजह से पूरा प्रोसेस विवादों में घिर गया था। मेयर रितु तावड़े के मामले का संज्ञान लेने और कार्रवाई की मांग करने के बाद एडमिनिस्ट्रेशन ने यह कदम उठाया। मामला एडिशनल कमिश्नर अविनाश ढकने को भेजा गया और आखिरकार 122 इंजीनियरों के ट्रांसफर ऑर्डर कैंसिल करने का फैसला किया गया।</p>
<p> </p>
<p>RTI एक्टिविस्ट अनिल गलगली और BJP शहर अध्यक्ष अमित साटम ने इन ट्रांसफर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई थीं। उसके बाद, उस समय के कमिश्नर भूषण गगरानी ने इन ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। अब उन ट्रांसफर को पूरी तरह से कैंसिल कर दिया गया है। इस फैसले ने एक बार फिर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में ट्रांसफर प्रोसेस की ट्रांसपेरेंसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फैसले को जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफर रद्द होने को एडमिनिस्ट्रेशन में गड़बड़ियों की बात मानी जा रही है। इस बीच, यह भी मांग उठ रही है कि आगे की ट्रांसफर प्रक्रिया एक इंडिपेंडेंट और ट्रांसपेरेंट कमेटी के ज़रिए लागू की जाए। BMC में कथित 'ट्रांसफर मार्केट' का मुद्दा अब गरमाने लगा है।</p>
<p>मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में इंजीनियरों के ट्रांसफर आखिरकार रद्द कर दिए गए हैं। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद छह महीने पहले सस्पेंड किए गए 122 से ज़्यादा सिविल इंजीनियरों के ट्रांसफर को म्युनिसिपैलिटी ने ऑफिशियली रद्द कर दिया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से म्युनिसिपैलिटी में कथित 'ट्रांसफर मार्केट' को बड़ा झटका लगा है।</p>
<p><strong>असली मामला क्या है?</strong><br />अक्टूबर 2025 में मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में 122 इंजीनियरों के ट्रांसफर के ऑर्डर जारी किए गए थे। हालांकि, RTI एक्टिविस्ट अनिल गलगली और BJP मुंबई स्टेट प्रेसिडेंट अमित साटम ने आरोप लगाया था कि इन ट्रांसफर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और पैसे का लेन-देन हुआ था। इन शिकायतों पर ध्यान देते हुए, उस समय के म्युनिसिपल कमिश्नर भूषण गगरानी ने तुरंत इन ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। इस हफ़्ते जारी म्युनिसिपल ऑर्डर में कहा गया, "अक्टूबर 2025 में शुरू किए गए 122 इंजीनियरों के ट्रांसफर के ऑर्डर अब कैंसल किए जा रहे हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 13:32:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई एटीएस का वाराणसी के डॉक्टर के घर छापा, जानिए पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाराणसी में मुंबई एटीएस और यूपी एटीएस की टीम ने करीब 8 घंटे तक एक मुस्लिम युवक से पूछताछ की। मुंबई एटीएस की टीम मुंबई में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में एक संदिग्ध की तलाश में आदमपुर के हनुमान फाटक इलाके में पहुंची थी। 18 वर्षीय यह संदिग्ध मुस्लिम युवक क्षेत्र के नामी चाइल्ड स्पेशलिस्ट का बेटा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49233/mumbai-ats-raids-varanasi-doctors-house-know-the-whole-matter"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/images-(21).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाराणसी: </strong>वाराणसी में मुंबई एटीएस और यूपी एटीएस की टीम ने करीब 8 घंटे तक एक मुस्लिम युवक से पूछताछ की। मुंबई एटीएस की टीम मुंबई में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में एक संदिग्ध की तलाश में आदमपुर के हनुमान फाटक इलाके में पहुंची थी। 18 वर्षीय यह संदिग्ध मुस्लिम युवक क्षेत्र के नामी चाइल्ड स्पेशलिस्ट का बेटा है।</p>
<p> </p>
<p>क्षेत्र में खासा नाम और रसूख होने की वजह से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। करीब 8 घंटे की पूछताछ के बाद एटीएस के साथ मौजूद आईबी के टीम सदस्य ने हालांकि इस मामले पर कुछ आधिकारिक तौर पर नहीं बताया। लेकिन जाते जाते एटीएस की टीम लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट अपने साथ जांच के लिए ले गई।</p>
<p><strong>मामला जानिए</strong><br />देश के कई शहरों में अचानक से आतंकवाद से जुड़े मामलों में लगातार गिरफ्तारी हुई है। इसी बीच मंगलवार की दोपहर अचानक से आदमपुर थाने के हनुमान फाटक क्षेत्र में मुंबई एटोएस और यूपी एटीएस की एक टीम के आने से हड़कंप मच गया। मामला क्षेत्र के बड़े चाइल्ड चाइल्ड स्पेशलिस्टके घर से जुड़ा था। इसलिए ये खबर तेजी से इलाके में फैल गई। देखते-देखते इस मुस्लिम बहुल इलाके में मीडियाकर्मियों समेत सैकड़ो लोगों का जमावड़ा लग गया।</p>
<p>थोड़ी देर के बाद जानकारी मिली कि यूपी एटीएस के बनारस की टीम के साथ मुंबई एटीएस की टीम इस चाइल्ड चाइल्ड स्पेशलिस्ट के 19 वर्षीय बेटे अबू बकर से पूछताछ करने पहुंची है। एटोएस कि इस टीम के साथ आईबी के भी लोग थे। इसी बीच पूछताछ के समय लगातार बढ़ता जा रहा था और बाहर लोगो की भीड़ भी। करीब 8 घण्टे तक छापेमारी करने वाली टीम ने परिवार के सभी सदस्यों और 18 वर्षीय युवक अबु बकर से पूछताछ की।</p>
<p><strong>टेलीग्राम के मैसेज और वीडियो के मामले में पूछताछ की गई</strong><br />जानकारी के अनुसार, मुंबई में एक दर्ज एफआईआर की जांच के दौरान वाराणसी के एक युवक अबू बकर के बारे में एटीएस की टीम को पता चला। इसी लीड को ट्रेस करते हुए मुंबई और यूपी एटोएस की टीम आदमपुर क्षेत्र के नामी चाइल्ड चाइल्ड स्पेशलिस्ट के घर पर पहुंच गई। जानकारी के अनुसार कश्मीर के एक संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप से एक आईडी का पता चला। इस चैनल के तार पाकिस्तान के हाफिज सईद तक जुड़े थे। इसी लिंक का राज जानने के लिए आज एक संयुक्त छपेमारी की गईं। जानकारी के मुताबिक ये युवक नीट की तैयारी करता है</p>
<p><strong>कई दस्तावेज टीम ले गई साथ</strong><br />8 घण्टे की पूछताछ के बाद एटीएस की टीम अपने साथ लैपटॉप समेत कई इलेट्रॉनिक गैजेट अपने साथ ले जाते दिखी। इतना ही नहीं टीम के सदस्य कई दस्तावेज भी अपने साथ ले जाते दिखे। हालांकि इस मामले में किसी को हिरासत में लिया गया है या नहीं इस बात की टीम के किसी सदस्य ने कोई जानकारी नहीं दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:34:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : 'नए कानून को सांविधानिक आधार पर चुनौती देंगे पूर्व कैडर अफसर, क्या है 122 'आईपीएस और मिथक' की कहानी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026' को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। पिछले दिनों इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक का उद्देश्य, सीएपीएफ में 'ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी' के अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित सामान्य नियमों को विनियमित करना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49108/69d8f9d36fc10"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-10t194536.599.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026' को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। पिछले दिनों इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक का उद्देश्य, सीएपीएफ में 'ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी' के अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित सामान्य नियमों को विनियमित करना है। इससे देश का आंतरिक सुरक्षा ढांचा मजबूत होगा और सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में अधिक स्पष्टता व एकरूपता आएगी। दूसरी ओर पूर्व कैडर अफसरों ने इस विधेयक को कैडर अफसरों के साथ-साथ निचले रैंक के हितों के लिए नुकसानदायक बताया है।</p>
<p> </p>
<p>बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है कि सीएपीएफ के नए अधिनियम को संवैधानिक आधार पर चुनौती दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अफसरों के पक्ष में जो फैसला दिया था, उसे पलटने के लिए ही सरकार ने यह नया कानून बनाया है। सूद ने इस मामले में 122 'आईपीएस और मिथक' का राज खोला है।  </p>
<p>गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक के पारित होने के बाद कहा था, इसे देश की सुरक्षा संरचना को मजबूत, सुदृढ़ और अधिक संगठित बनाने के लिए एक बड़े सुधार के तौर पर देखा जाना चाहिए। यह कानून, सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में लंबे समय से चले आ रहे संरचनात्मक असंतुलन और कैडर प्रबंधन में चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ परिचालन दक्षता में सुधार लाने का प्रयास करता है। समय के साथ सीएपीएफ की भूमिका और जिम्मेदारियों का काफी विस्तार हुआ है, लेकिन विभिन्न बलों में सेवा शर्तें, अलग-अलग नियमों, निर्देशों और प्रशासनिक उपायों द्वारा शासित होती रही हैं। यह विधेयक, मौजूदा व्यवस्थाओं में जो भी विसंगतियां हैं, उन्हें दूर करेगा। इन बलों में वित्तीय लाभों की निरंतरता सुनिश्चित होगी। यह विधेयक ग्रुप 'ए' जनरल ड्यूटी अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता और अन्य सेवा शर्तों को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट व्यापक ढांचा प्रदान करता है। </p>
<p><strong>इस सांविधानिक आधार पर दी जाएगी चुनौती...  </strong><br />बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं कि सीएपीएफ के नए कानून को इस संवैधानिक आधार पर चुनौती दिया जाना निश्चित है, क्योंकि यह किसी भी कानूनी खामी को दूर नहीं करता है। अनुच्छेद 14 और 16 के तहत कैडर अधिकारियों को प्राप्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर भी चुनौती दी जाएगी। सरकार ने नया कानून बनाकर, सर्वोच्च न्यायालय का फैसला पलटा है। इसके जरिए केंद्र सरकार ने संवैधानिक मुद्दों और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी निहितार्थों से ध्यान हटाकर 'आईपीएस' अधिकारियों की समन्वय क्षमता, प्रशिक्षण और रणनीतिक दृष्टि की कथित श्रेष्ठता का समर्थन किया है। बतौर सूद, इस मामले को सही परिप्रेक्ष्य में रखने की आवश्यकता है। यह धारणा केवल सेवारत और पूर्व आईपीएस अधिकारियों के साथ-साथ सत्ताधारी दल के राजनेताओं द्वारा व्यक्त की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:49:04 +0530</pubDate>
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