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                <title>women's - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>women's RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई :  महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाली एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे पर शिवसेना नेता नीलम गोऱ्हे ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन दोनों का महिला आरक्षण केवल दिखावटी है। पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए गोऱ्हे ने कहा कि इन दोनों नेताओं को राजनीति में स्थान परिवारवाद की विरासत से मिला है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49431/mumbai-political-rhetoric-intensifies-on-womens-reservation-issue"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/congress-worker-protesting.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाली एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे पर शिवसेना नेता नीलम गोऱ्हे ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन दोनों का महिला आरक्षण केवल दिखावटी है। पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए गोऱ्हे ने कहा कि इन दोनों नेताओं को राजनीति में स्थान परिवारवाद की विरासत से मिला है। महिला आरक्षण का लाभ सामान्य महिलाओं को मिलने वाला था, लेकिन सुले और शिंदे ने जो भूमिका अपनाई है, वह आरक्षण विरोधी है। नीलम गोऱ्हे ने नारी शक्ति वंदन विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस सांसदों की भी आलोचना की।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा कि शाहबानो प्रकरण में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई थी। राजीव गांधी ने मुस्लिम महिला संरक्षण विधेयक पेश किया था, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार न मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव गांधी ने मुस्लिम महिलाओं के न्यायिक अधिकारों पर स्थायी आघात किया। </p>
<p>नीलम गोऱ्हे ने आगे कहा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून में संशोधन कर तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार दिलाने का काम किया। उन्होंने कांग्रेस की एक महिला सांसद के उस बयान का भी खंडन किया जिसमें कहा गया था कि महिला आरक्षण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि राजीव गांधी ने 1986-87 में ही आरक्षण दे दिया था। उन्होंने इसे असत्य बताया और सवाल किया कि यदि आरक्षण पहले ही दिया गया था, तो फिर 1996 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। राजीव गांधी ने 1986-87 में कोई महिला आरक्षण विधेयक नहीं लाया था। महिला आरक्षण का पहला विधेयक 1996 में लाया गया।</p>
<p>यदि कांग्रेस को महिला आरक्षण की आवश्यकता नहीं है तो फिर नगरपालिकाओं में आरक्षित सीटों पर महिला उम्मीदवार क्यों उतारती है। यदि महिला आरक्षण विधेयक लागू होता है, तो इसका बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार को मिलेगा। इसी वजह से कांग्रेस ने निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन के साथ-साथ महिला आरक्षण विधेयक का भी विरोध किया, ताकि सामान्य महिलाएं राजनीतिक रूप से सशक्त न हो सकें। वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए गोऱ्हे ने कहा कि दुनिया की संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 27.5 प्रतिशत है, जबकि भारत में यह 10 प्रतिशत से भी कम है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान गति से अवसरों में समानता वर्ष 2063 तक ही संभव होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:57:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सुषमा अंधारे ने फडणवीस को चुनौती दी: क्या वह महिला कल्याण के लिए इस्तीफा देंगे?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महिला आरक्षण की भ्रूण हत्या 1951 में हुई थी। भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने यह बिल पेश किया था। इसके विरोध के कारण डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने इस्तीफा दे दिया था। क्या महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए? देवेंद्र फडणवीस। उद्धव सेना प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने सवाल किया कि क्या वे तैयार हैं?</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49392/mumbai-sushma-andhare-challenges-fadnavis-whether-he-will-resign-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t131014.028.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महिला आरक्षण की भ्रूण हत्या 1951 में हुई थी। भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने यह बिल पेश किया था। इसके विरोध के कारण डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने इस्तीफा दे दिया था। क्या महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए? देवेंद्र फडणवीस। उद्धव सेना प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने सवाल किया कि क्या वे तैयार हैं? सुषमा अंधारे ने कहा कि अगर BJP सच में प्रोग्रेसिव है, तो 2029 लोकसभा में सत्ता में आने पर उसे महाराष्ट्र में एक महिला प्रधानमंत्री और एक महिला मुख्यमंत्री नियुक्त करना चाहिए। इसी तरह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक सरसंघचालक के पद पर भी एक महिला को नियुक्त किया जाना चाहिए। हम इसका भी समर्थन करेंगे, उन्होंने कहा।</p>
<p> </p>
<p>केंद्र में महिला आरक्षण बिल का विपक्ष द्वारा विरोध किए जाने के बाद, कल राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष की कड़ी आलोचना की। इसके जवाब में, आज सुषमा अंधारे ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री के विभिन्न मुद्दों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा था कि 'विरोधियों ने बिल की भ्रूण हत्या की है'। अंधारे ने इस पर आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों का ज़िक्र करके विरोधियों पर निशाना साधा। इस पर, क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सालाना प्रोग्राम में महात्मा ज्योतिबा फुले की लिखी किताबें 'गुलामगिरी' और 'किसानों का आसूद' सबके सामने पढ़ी जाएंगी? इस मौके पर सुषमा अंधारे ने सत्ताधारी पार्टी को चुनौती दी। अंधारे ने 20 और 22 सितंबर 2023 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के किए गए ट्वीट्स दिखाए कि महिला आरक्षण बिल पास हो गया है।</p>
<p>यह कहते हुए कि अगर महिलाओं को आरक्षण देना है तो 543 से दें, यह कहा जा रहा है कि जनगणना के बाद लोकसभा के बाद आबादी के हिसाब से MPs की संख्या बढ़ जाएगी, लेकिन दक्षिण में MPs की संख्या वही रहेगी। हालांकि, उत्तर में MPs की संख्या बढ़ेगी, और भारतीय जनता पार्टी को दक्षिण और उत्तर के बीच यह झगड़ा खड़ा करने की ज़रूरत क्यों पड़ी, खरात ने यह भी सवाल उठाया। सुषमा अंधारे ने मांग की, 'कहा जा रहा है कि जालसाज अशोक खरात की संपत्ति 15 हजार करोड़ रुपये की है, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए और खरात की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि इसमें कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:11:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : महिला आरक्षण बिल पास न होने पर एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर साधा निशाना, पीएम मोदी के कदम की सराहना की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को महिला आरक्षण बिल की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की। साथ ही, उन्होंने लोकसभा में इस बिल के पास न हो पाने को लेकर विपक्ष की कड़ी आलोचना की और इसे "इतिहास का काला दिन" करार दिया। बिल पेश किए जाने का ज़िक्र करते हुए शिंदे ने कहा, "सबसे पहले, मैं महिला आरक्षण बिल लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद और बधाई देता हूँ।"</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49325/mumbai-womens-reservation-bill-not-passed-eknath-shinde-targets-opposition"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/images-(27).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को महिला आरक्षण बिल की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की। साथ ही, उन्होंने लोकसभा में इस बिल के पास न हो पाने को लेकर विपक्ष की कड़ी आलोचना की और इसे "इतिहास का काला दिन" करार दिया। बिल पेश किए जाने का ज़िक्र करते हुए शिंदे ने कहा, "सबसे पहले, मैं महिला आरक्षण बिल लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद और बधाई देता हूँ।" उन्होंने आगे ज़ोर देकर कहा कि विपक्ष ने महिलाओं का सम्मान करने का एक अहम मौका गँवा दिया है। शिंदे ने कहा, "यह विपक्ष के लिए महिलाओं का सम्मान करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक मौका था, जिसे उन्होंने गँवा दिया। यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।" इस कानून के महत्व को रेखांकित करते हुए और विपक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने कहा, "यह बिल हमारे देश की 50 प्रतिशत महिलाओं—यानी लगभग 70 करोड़ महिलाओं—के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता।"</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल महिला-विरोधी हैं और देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "यह महिलाओं को सशक्त बनाने का एक मौका था, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दलों ने अपना असली महिला-विरोधी चेहरा दिखा दिया है। मैं उनकी कड़ी निंदा और भर्त्सना करता हूँ। देश कह रहा है कि भारत महिलाओं के सम्मान का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के हितों के खिलाफ काम किया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने बिल्कुल सही कहा है कि यह महिलाओं की आकांक्षाओं की हत्या जैसा है। विपक्ष ने महिलाओं के अधिकार छीनने और लोकतंत्र को कमज़ोर करने का काम किया है।" चुनावी नतीजों से तुलना करते हुए शिंदे ने कहा, "जिस तरह 'लाडली बहना' योजना ने महाराष्ट्र में विपक्ष को सबक सिखाया, उसी तरह पूरे देश की महिलाएं नरेंद्र मोदी जी का समर्थन करेंगी और विपक्ष को सबक सिखाएंगी।"</p>
<p>प्रस्तावित बिल का उद्देश्य मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और इसी तरह के प्रावधान राज्य विधानसभाओं, दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों—जिनमें पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं—तक विस्तारित करना था। एक अन्य सदस्य, विल्सन ने कहा कि आरक्षण स्थायी होना चाहिए, न कि भविष्य की प्रक्रियाओं पर निर्भर। शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट। विधेयक के पारित न हो पाने के बाद सरकार ने कहा कि वह इससे जुड़े दो अन्य विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:49:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: इंडिया अघाड़ी ने मोदी सरकार की साज़िश नाकाम की, हर्षवर्धन सपकाल ने महिला आरक्षण बिल पर हमला बोला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकसभा में आज महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका। सरकार को इस बिल के पक्ष में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। साथ ही, महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन बिल भी पास नहीं हो सका। इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मोदी सरकार की आलोचना की है। आज लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई है। यह कहते हुए कि इंडिया अघाड़ी ने मोदी सरकार की साज़िश नाकाम कर दी है, हर्षवर्धन सपकाल ने महिला आरक्षण बिल पर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49293/mumbai-india-aghadi-foiled-the-conspiracy-of-modi-government-harshvardhan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-18t135006.422.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>लोकसभा में आज महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका। सरकार को इस बिल के पक्ष में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। साथ ही, महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन बिल भी पास नहीं हो सका। इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मोदी सरकार की आलोचना की है। आज लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई है। यह कहते हुए कि इंडिया अघाड़ी ने मोदी सरकार की साज़िश नाकाम कर दी है, हर्षवर्धन सपकाल ने महिला आरक्षण बिल पर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला।</p>
<p> </p>
<p><strong>हर्षवर्धन सपकाल ने असल में क्या कहा?</strong><br />हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि 'इंडिया' अघाड़ी ने महिला आरक्षण के नाम पर निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन बिल लाकर देश के संविधान, लोकतंत्र और चुनावी ढांचे को बदलने की मोदी सरकार की साज़िश नाकाम कर दी। महिलाओं को 33 परसेंट रिज़र्वेशन देने वाला बिल संसद ने 2023 में ही पास कर दिया था। कांग्रेस लगातार मांग करती रही है कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाए। लेकिन, मोदी सरकार महिलाओं को सीधा रिज़र्वेशन नहीं देना चाहती थी, इसीलिए उसने जनगणना की शर्त लगाकर इसे लागू करने में देरी करने की कोशिश की।</p>
<p><strong>सरकार की फ़ेडरल सिस्टम को ही खतरे में डालने की कोशिश</strong><br />अब जब देश में जनगणना चल रही है, तो नतीजों का इंतज़ार किए बिना, सरकार ने महिला रिज़र्वेशन की आड़ में सुधारों के नाम पर जल्दबाजी में डिलिमिटेशन बिल लाकर फ़ेडरल सिस्टम को ही खतरे में डालने की कोशिश की, और आज विपक्षी पार्टियों की एकता ने इसे हरा दिया। सपकाल ने कहा कि यह डेमोक्रेसी की बड़ी जीत है।</p>
<p><strong>महिलाओं के लिए 33 परसेंट रिज़र्वेशन 2029 के उस चुनाव से लागू किया जाना चाहिए</strong><br />कांग्रेस पार्टी इसका पूरा सपोर्ट करेगी। लेकिन महिलाओं के नाम पर हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस देश के लोकतंत्र, संवैधानिक और चुनावी सुरक्षा में गैर-संवैधानिक बदलाव करके देश में बंटवारा करने और फेडरल सिस्टम के लिए खतरा पैदा करने की किसी भी योजना को कभी सफल नहीं होने देगी।<br />पहले राउंड में संविधान संशोधन के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि संविधान संशोधन बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने लोकसभा में संविधान 131वां संशोधन बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल, 2026 और परिसीमन बिल, 2026 पेश किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं ने इन बिलों के पक्ष में बात की। दूसरी ओर, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, अरविंद सावंत, अमोल कोल्हे, वर्षा गायकवाड़, कल्याण बनर्जी समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों ने बिल के पक्ष में बात की। क्योंकि यह एक कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल है, इसलिए इसे पास करने के लिए लोकसभा में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई वोट ज़रूरी हैं। इस कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल पर लोकसभा में वोटिंग वोटिंग के ज़रिए हुई।</p>
<p>पहले राउंड में कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े। कुल 528 सांसदों ने वोट किया, अब कल राज्यसभा में वोटिंग होगी। 528 का दो-तिहाई 352 था, इसलिए यह साफ़ हो गया कि सरकार के पास कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट बिल पास करने के लिए ज़रूरी नंबर नहीं थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने घोषणा की कि कॉन्स्टिट्यूशन 131वां अमेंडमेंट बिल, 2026 रिजेक्ट कर दिया गया है। इसके बाद पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने बाकी दो बिलों को आगे न बढ़ाने का फ़ैसला किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49293/mumbai-india-aghadi-foiled-the-conspiracy-of-modi-government-harshvardhan</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 13:55:48 +0530</pubDate>
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