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                <title>will - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>भोपाल से कोटा 5 घंटे में, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बुंदेलखंड, सागर, जयपुर-उदयपुर तक सीधी कनेक्टिविटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोटा जाने में अभी 8 से 9 घंटे का समय लगता है, लेकिन जल्द ही यह दूरी महज 4 से 5 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. क्योंकि सागर कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दोनों शहरों की दूरी को कम कर देगा. यह हाईवे एमपी भोपाल और सागर को राजस्थान के कोटा, जयपुर और उदयपुर से सीधा कनेक्टिविटी देने वाला है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51807/bhopal-to-kota-will-be-connected-to-delhi-mumbai-expressway-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-12t123744.332.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भोपाल : </strong>कोटा जाने में अभी 8 से 9 घंटे का समय लगता है, लेकिन जल्द ही यह दूरी महज 4 से 5 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. क्योंकि सागर कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दोनों शहरों की दूरी को कम कर देगा. यह हाईवे एमपी भोपाल और सागर को राजस्थान के कोटा, जयपुर और उदयपुर से सीधा कनेक्टिविटी देने वाला है. 16000 हजार करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट का पूरा नाम कोटा-विदिशा-सागर एक्सप्रेसवे है. यह नया 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे होगा, जिसकी खासियत यह है कि यह तीन बड़े कॉरिडोर से सीधा कनेक्ट होगा. जिससे मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच भी दूरियां अब और कम होने वाली हैं. यह कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी और यात्रा को पूरी तरह से बदलने वाला है. </p>
<p> </p>
<p><strong>भोपाल से कोटा का सफर 5 घंटे में होगा </strong><br />सागर कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने से भोपाल और कोटा की दूरी में बड़ा बदलाव आएगा. अभी दोनों शहरों के बीच आने जाने के लिए नेशनल हाईवे-52 का इस्तेमाल होता है. दोनों शहरों के बीच की कुल दूरी 345 किलोमीटर होती है, जिसे तय करने में 8 से 9 घंटे तक समय लग जाता है. लेकिन नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पूरी तरह से एक नए अलाइनमेंट रूट तैयार कर रहा है. जहां आप पहले भोपाल से सागर आएंगे और यहां से सीधे कोटा तक हाई स्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी. जहां गाड़ियों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर रहेगी. इसे भोपाल के बाहरी हिस्से और भोपाल-बैरसिया रोड से सीधे कनेक्ट किया जाएगा, जिससे भोपाल से कोटा के बीच की दूरी लगभग 75 किलोमीटर तक कम भी होगी और ट्रैफिक का दवाब भी नहीं रहेगा. जिससे यात्रियों के पूरे 4 घंटे तक की बचत होगी. </p>
<p><strong>चार बड़े एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी</strong></p>
<p><strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: </strong>यह प्रोजेक्ट राजस्थान के कोटा से सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा. </p>
<p><strong>भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: </strong>यह हाईवे सागर और विदिशा के बीच भोपाल-कानपुर एक्सप्रेसवे से इंटरकनेक्ट करेगा. </p>
<p><strong>लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: </strong>इसके अलावा यह भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से होते हुए यह चेन सीधे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाएगी. </p>
<p><strong>चंबल एक्सप्रेसवे:</strong> सागर कोटा एक्सप्रेसवे कोटा क्षेत्र में बनने वाले नए इंटरचेंज के माध्यम से चंबल एक्सप्रेसवे से भी कनेक्ट होगा.</p>
<p><strong>एमपी-राजस्थान की हाईस्पीड कनेक्टिविटी</strong><br />यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत करने वाला है. यह कॉरिडोर कोटा से शुरू होकर झालावाड़ और अकलेरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगा, इसके बाद यह एमपी में एंट्री करेगा और गुना जिले के चाचौड़ा और मकसूदनगढ़ से निकलेगा, यहां से बैरसिया, विदिशा और अंत में बुंदेलखंड के केंद्र सागर तक जाएगा.  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51807/bhopal-to-kota-will-be-connected-to-delhi-mumbai-expressway-in</link>
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                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 12:39:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ दुर्ग को राष्ट्रीय किला घोषित करने की पहल, पर्यटन विभाग देखेगा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्य मंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य की राजधानी रायगढ़ को 'नेशनल फोर्ट' घोषित करने के लिए केंद्रीय सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए आई मुख्य मंत्री सचिवालय ने इस मांग पर ध्यान दिया है और बताया है कि यह प्रतिनिधित्व सही कार्यवाही के लिए पर्यटन एवं सांस्कृतिक विभाग को भेज दिया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51795/tourism-department-will-look-into-the-matter-of-declaring-raigarh"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-11t125009.738.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्य मंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य की राजधानी रायगढ़ को 'नेशनल फोर्ट' घोषित करने के लिए केंद्रीय सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए आई मुख्य मंत्री सचिवालय ने इस मांग पर ध्यान दिया है और बताया है कि यह प्रतिनिधित्व सही कार्यवाही के लिए पर्यटन एवं सांस्कृतिक विभाग को भेज दिया गया है।</p>
<p> </p>
<p>रायगढ़ न सिर्फ महाराष्ट्र की शान है, बल्कि हिंदू स्वराज्य के इतिहास का जीता-जागता गवाह है। छत्रपति शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक राजतिलक इसी किले पर हुआ था और स्वराज्य को शाही शान मिली थी। इसलिए, डॉ. सिंकर ने यह भावना जताई है कि रायगढ़ को राष्ट्रीय किले का दर्जा मिलना न केवल एक ऐतिहासिक इमारत का सम्मान होगा, बल्कि स्वराज्य की अवधारणा और छत्रपति शिवाजी के राष्ट्र-निर्माण के विचारों के लिए भी राष्ट्रीय गौरव होगा।</p>
<p>देश में राष्ट्रीय फूल, राष्ट्रीय पशु और राष्ट्रीय पक्षी जैसे राष्ट्रीय प्रतीक हैं। इसी तर्ज पर, उन्होंने यह बात रखी है कि भारत की स्वतंत्रता, बहादुरी और राष्ट्र-निर्माण के इतिहास के प्रतीक के रूप में एक किले को राष्ट्रीय दर्जा दिया जाना चाहिए।  </p>
<p>रायगढ़ की मिट्टी में स्वतंत्रता की शपथ, किले में संघर्ष की कहानी और हर कदम पर शिवाजी के इतिहास की गवाही है। इसलिए, रायगढ़ का इतिहास केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय है, डॉ. सिनकर ने अपने बयान में कहा।</p>
<p>जैसा कि मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस प्रस्ताव को पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग को स्थानांतरित कर दिया है, अब शिव प्रेमियों और इतिहास प्रेमियों का ध्यान इस बात पर है कि क्या महाराष्ट्र सरकार केंद्र सरकार को आधिकारिक प्रस्ताव भेजेगी। रायगढ़ महाराष्ट्र का गौरव है और अब इसे भारत की राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बनना चाहिए, डॉ. प्रशांत सिनकर ने अपनी भावनात्मक अपेक्षा व्यक्त की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:51:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: क्या मुंबई समेत महाराष्ट्र में डीजे पर कसेगी नकेल, माधुरी मिसाल के बाद अब शिंदे के मंत्री ने साझा की आपबीती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों गरबा में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने और डीजे पाबंदी के मुद्दे छाए हुए हैं। राज्य में यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा डीजे के खिलाफ आवाज उठाने और प्रशासनिक बैठक में प्रतिबंध की मांग करने के बाद उन पर हुए सार्वजनिक हमले के बाद बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51793/will-mumbai-crack-down-on-djs-in-maharashtra-including-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/dj-santosh-kihim-alibaug-disc-jockey-cw63ljytho.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों गरबा में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने और डीजे पाबंदी के मुद्दे छाए हुए हैं। राज्य में यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा डीजे के खिलाफ आवाज उठाने और प्रशासनिक बैठक में प्रतिबंध की मांग करने के बाद उन पर हुए सार्वजनिक हमले के बाद बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है। कई नेताओं और नागरिकों का तर्क है कि महाराष्ट्र के पारंपरिक उत्सवों (जैसे गणेशोत्सव) को डीजे की बजाय ढोल-ताशे और स्थानीय पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मनाया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले फडणवीस सरकार में मंत्री और बीजेपी की नेता माधुरी मिसाल ने कहा था कि वह पूर्ण डीजे प्रतिबंध चाहती हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>गुलाबराव पाटिल ने किया अलर्ट</strong><br />महाराष्ट्र में डीजे पर छिड़ी चर्चा के बीच अब एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना से मंत्री गुलाबराव पाटिल ने गणेशोत्सव में डीजे छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि ढोल-ताशे अपनाएं। पाटिल ने जलगांव में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी आपबीती को साझा किया। मंत्री गुलाबराव पाटिल ने कहा कि डीजे की आवाज ने उनकी सुनने की क्षमता 40 फीसदी कम कर दी है। गणेशोत्सव में डीजे और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर अलर्ट करते हुए राज्य के जलापूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटिल ने अपना अनुभव साझा किया।</p>
<p><strong>डीजे ने छीनी सुनने की क्षमता</strong><br />मंत्री गुलाबराव पाटिल ने कहा कि शादी समारोह में डीजे की तेज आवाज के कारण उनके एक कान की सुनने की क्षमता 40 फीसदी तक कम हो गई है। अब यह क्षमता वापस आना संभव नहीं है। पाटिल ने कहा कि त्योहार खुशी के लिए हैं, किसी की सेहत खराब करने के लिए नहीं हैं। तेज आवाज से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। मंत्री पाटिल ने कहा कि इसलिए युवाओं को गणेशोत्सव में डीजे और के बजाय ढोल-ताशे को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वह भतीजे की शादी के दौरान परिजनों के आग्रह पर वे नाचने लगे थे। इसी दौरान डीजे की तेज आवाज से उनके कान में परेशानी शुरू हुई और फिर पता चला कि उनकी सुनने की क्षमता 40 फीसदी चली गई है।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में अभी क्या है स्थिति?</strong><br />महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान डीजे और हाई-डेसिबल साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर पूरे राज्य में एक समान पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अलग-अलग जिलों में स्थानीय प्रशासन और अदालती आदेशों के तहत कड़े नियम व पाबंदियां लागू हैं।</p>
<p>2016: सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. महेश बेडेकर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रिहायशी इलाकों में दिन में 55डीबी और रात (10 बजे से सुबह 6 बजे) के बीच 45डीबी की सीमा तय कर दी।</p>
<p>2018: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में गणेशोत्सव के दौरान भारी-भरकम डीजे और डॉल्बी साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। कोर्ट ने पारंपरिक वाद्यों (जैसे ढोल-ताशा) को प्राथमिकता देने की बात कही।</p>
<p>अगस्त 2025: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान डीजे और लेजर लाइट पर प्रतिबंध जारी रखने का फैसला सुनाया। नियमों का उल्लंघन करने पर उपकरण जब्त करने और भारी जुर्माने की चेतावनी दी।</p>
<p>सितंबर 2026: पुणे में सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने और उन पर हुए हमले के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया। इसके बाद सरकार के मंत्रियों (जैसे माधुरी मिसाल) और विपक्षी नेताओं (जैसे उद्धव ठाकरे ) ने पूरे राज्य के त्योहारों में डीजे पर एक समान पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग तेज कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:44:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: महाराष्ट्र के पांच बड़े पर्यटन स्थलों की बदलेगी तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य पर्यटन बोर्ड ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत अपने पांच प्रमुख रिसॉर्ट्स को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना तैयार की है। इसके तहत ताडोबा, मिथबाव, महाबलेश्वर, माथेरान और हरिहरेश्वर स्थित पर्यटन परिसरों का बड़े स्तर पर विकास और अपग्रेड किया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51768/the-picture-of-five-big-tourist-places-of-mumbai-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/maharashtra-3822.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य पर्यटन बोर्ड ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत अपने पांच प्रमुख रिसॉर्ट्स को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना तैयार की है। इसके तहत ताडोबा, मिथबाव, महाबलेश्वर, माथेरान और हरिहरेश्वर स्थित पर्यटन परिसरों का बड़े स्तर पर विकास और अपग्रेड किया जाएगा। इन परियोजनाओं की निगरानी के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य पर्यटन प्राधिकरण ने विकास, निर्माण और संचालन के सभी चरणों की देखरेख के लिए एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्त करने को लेकर प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। </p>
<p> </p>
<p>पीपीपी मॉडल से होगा रिसॉर्ट्स का कायाकल्प एमटीडीसी की योजना के अनुसार, इन पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों पर मौजूद रिसॉर्ट्स को निजी भागीदारी के जरिए विकसित किया जाएगा। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे सरकारी संसाधनों के साथ निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का इस्तेमाल किया जा सके। इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और महाराष्ट्र के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप तैयार करना है।</p>
<p>सरकार का मानना है कि आधुनिक सुविधाओं से लैस रिसॉर्ट्स बनने के बाद पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होगा विकास इस योजना के तहत जिन पांच स्थानों को चुना गया है, वे महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हैं। ताडोबा: यह क्षेत्र अपने वन्यजीव पर्यटन और बाघ अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेहतर आवास और सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही थी।<br />मिथबाव: समुद्री पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को बेहतर पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। महाबलेश्वर: महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में शामिल महाबलेश्वर में पर्यटकों की भारी संख्या को देखते हुए आधुनिक रिसॉर्ट सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा। माथेरान: पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील और लोकप्रिय पर्यटन स्थल माथेरान में सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जाएगा। हरिहरेश्वर: धार्मिक और समुद्री पर्यटन के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में भी पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने की योजना है।</p>
<p>स्वतंत्र एजेंसी करेगी निगरानी परियोजना की गुणवत्ता और समय पर काम पूरा कराने के लिए एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्त की जाएगी। यह एजेंसी रिसॉर्ट्स के विकास, निर्माण और संचालन से जुड़े सभी चरणों की निगरानी करेगी। राज्य पर्यटन प्राधिकरण ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है। विशेषज्ञ एजेंसी परियोजना की प्रगति, गुणवत्ता नियंत्रण और तय मानकों के पालन पर नजर रखेगी।</p>
<p>इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निजी भागीदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।डीबीएफओटी मॉडल के तहत होगा संचालन इन पर्यटन परियोजनाओं को डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर   मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।</p>
<p>इस व्यवस्था में निजी कंसेशनरी परियोजना की डिजाइन और निर्माण से लेकर वित्तीय व्यवस्था और संचालन तक की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद तय अवधि पूरी होने पर परियोजना सरकार को वापस हस्तांतरित की जाएगी। निजी कंपनियों को 30 से 60 साल तक लंबी अवधि के लिए संचालन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे उन्हें निवेश की भरपाई और परियोजना को बेहतर तरीके से संचालित करने का अवसर मिलेगा। पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार महाराष्ट्र में पर्यटन क्षेत्र रोजगार और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य में समुद्री तट, पहाड़, वन्यजीव क्षेत्र और धार्मिक स्थल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से पर्यटन उद्योग को और बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और छोटे व्यवसायों को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर पर्यटन परियोजनाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।</p>
<p>रिसॉर्ट्स के संचालन, परिवहन, गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में लोगों को फायदा मिलने की संभावना है। सरकार की कोशिश है कि बड़े पर्यटन विकास कार्यों का लाभ स्थानीय समुदाय तक भी पहुंचे। महाराष्ट्र पर्यटन को मिलेगी नई पहचान एमटीडीसी की यह योजना महाराष्ट्र के पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पीपीपी मॉडल के जरिए निजी निवेश और विशेषज्ञता का उपयोग कर राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को नई पहचान देने की तैयारी है। अब इन परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विकास कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरे होते हैं। यदि योजना सफल रहती है तो महाराष्ट्र के ये पांच प्रमुख पर्यटन स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बन सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:38:56 +0530</pubDate>
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