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                <title>inflation - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>inflation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : लोकल रेट पर मुंबई एयरपोर्ट में मिल रहा चाय-समोसा! महंगाई से परेशान यात्रियों के लिए इस कैफे का बड़ा तोहफा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अब यात्रियों को 'स्ट्रीट रेट' पर खाना मिलेगा. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने उड़ान यात्री कैफे का ई-उद्घाटन किया है. टर्मिनल 2 (T2) पर स्थित इस कैफे में चाय और पानी मात्र 10 रुपये में, जबकि कॉफी और समोसे जैसे स्नैक्स सिर्फ 20 रुपये में उपलब्ध हैं. सामान्यत: हवाई अड्डों पर एक कप चाय या एक समोसा खरीदने के लिए 200 रुपये से ज्यादा पेमेंट करना पड़ता है. यात्रियों की इसी मजबूरी और बेबसी के बीच मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसकी सभी जगह चर्चा हो रही है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47938/tea-and-samosa-are-available-in-mumbai-airport-at-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-23t111255.395.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई : </strong>छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अब यात्रियों को 'स्ट्रीट रेट' पर खाना मिलेगा. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने उड़ान यात्री कैफे का ई-उद्घाटन किया है. टर्मिनल 2 (T2) पर स्थित इस कैफे में चाय और पानी मात्र 10 रुपये में, जबकि कॉफी और समोसे जैसे स्नैक्स सिर्फ 20 रुपये में उपलब्ध हैं. सामान्यत: हवाई अड्डों पर एक कप चाय या एक समोसा खरीदने के लिए 200 रुपये से ज्यादा पेमेंट करना पड़ता है. यात्रियों की इसी मजबूरी और बेबसी के बीच मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसकी सभी जगह चर्चा हो रही है. अब यात्रियों को एयरपोर्ट के भीतर भी लगभग वही दाम चुकाने होंगे, जो वे अपने शहर की किसी साधारण दुकान पर देते हैं. इस बदलाव की शुरुआत मुंबई के व्यस्ततम हवाई अड्डे पर उड़ान यात्री कैफे के आधिकारिक उद्घाटन के साथ हुई है, जो हवाई सफर को और भी अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है. </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>उड्डयन मंत्री ने किया उड़ान कैफे का उद्घाटन</strong></div>
<div>केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने उड़ान यात्री कैफा का ई-उद्घाटन किया. उद्घाटन के दौरान उन्होंने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर हवाई अड्डों की सुविधाओं को सर्वसमावेशी बनाने के अभियान का हिस्सा बताया. यह कैफे विशेष रूप से उन यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो अब तक एयरपोर्ट पर महंगे खाने की वजह से हिचकिचाहट महसूस करते थे. यह नया आउटलेट टर्मिनल 2 (T2) के चेक-इन एरिया में डिपार्चर गेट नंबर 1 और 2 के बीच स्थित है, जिससे यात्रियों के लिए यहां तक पहुंचकर किफायती नाश्ते का आनंद लेना बेहद आसान हो गया है. </div>
<div><strong>एयरपोर्ट पर चाय-समोसा इतना सस्ता!</strong></div>
<div>उड़ान यात्री कैफे का मेन्यू कार्ड इतना किफायती है कि पहली बार देखने पर किसी को भी यकीन करना मुश्किल हो सकता है, जहां एयरपोर्ट की सामान्य दुकानों पर पानी की एक बोतल के लिए भी 50 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ते हैं, वहां इस कैफे में चाय और पानी की बोतल मात्र 10 रुपये में उपलब्ध है. इतना ही नहीं, कॉफी, समोसा, विभिन्न स्नैक्स और डेजर्ट्स के लिए यात्रियों को मात्र 20 रुपये का भुगतान करना होगा. यह दरें उन लोगों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं हैं जो अक्सर हवाई अड्डों पर मिलने वाली वस्तुओं के 500% तक के मार्कअप (मुनाफाखोरी) से परेशान रहते थे. </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:14:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबईकर झेल रहे महंगाई की मार को बीएमसी ने दिया एक और झटका, 15% तक बढ़े प्रॉपर्टी टैक्स... </title>
                                    <description><![CDATA[<p>अब आर्थिक वर्ष 2023-2024 के लिए बढ़े रेट के साथ बीएमसी ने 1 दिसंबर से बिल भेजना शुरू कर दिया है। चुनावी साल में इसका विपक्षी दलों द्वारा जोरदार विरोध होने की आशंका है। कांग्रेस नेता आसिफ जकारिया ने बीएमसी कमिश्नर आई़ एस़ चहल को पत्र लिखकर इस पर कड़ा विरोध जताया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/27274/bmc-gave-another-blow-to-mumbaikars-facing-the-brunt-of-inflation--increased-property-tax-by-15"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-12/download-(8)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> बीएमसी ने आर्थिक वर्ष 2023-24 के लिए प्रॉपर्टी टैक्स के बकाएदारों को 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी हुई दर के साथ बिल भेज रही है। महंगाई की मार झेल रहे नागरिकों पर यह बड़ा आर्थिक बोझ माना जा रहा है। बीएमसी अधिनियम के अनुसार हर पांच साल में प्रॉपर्टी टैक्स में वृद्धि का प्रावधान है, लेकिन कोरोना संकट और राजनीतिक दबाव के कारण पिछले तीन साल से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब आर्थिक वर्ष 2023-2024 के लिए बढ़े रेट के साथ बीएमसी ने 1 दिसंबर से बिल भेजना शुरू कर दिया है। चुनावी साल में इसका विपक्षी दलों द्वारा जोरदार विरोध होने की आशंका है। कांग्रेस नेता आसिफ जकारिया ने बीएमसी कमिश्नर आई़ एस़ चहल को पत्र लिखकर इस पर कड़ा विरोध जताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जकारिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2010 से प्रॉपर्टी टैक्स वसूली को गलत करार दिया है और नियमों में बदलाव करने का निर्देश दिया है। लेकिन बीएमसी ने कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज कर मुंबईकरों पर भारी वृद्धि थोंप दी। यह मुंबईकरों के साथ अन्याय है। बीएमसी को इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। वहीं, कमिश्नर चहल ने प्रॉपर्टी टैक्स में किसी तरह की वृद्धि से इनकार किया है। बीएमसी को प्रॉपर्टी टैक्स से वर्ष 2023-24 में करीब 6 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है।<br /><br />बीएमसी नियम के अनुसार मुंबई में हर पांच साल में प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाया जाता है। आखिरी बार वर्ष 2015 में प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी होनी थी, लेकिन कोरोना संकट के कारण 2020, 2021 और 2022 में टैक्स नहीं बढ़ाया गया। वर्ष 2022 में बीएमसी चुनाव को देखते हुए उद्धव ठाकरे सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स वृद्धि पर रोक लगा दी थी। लेकिन दिसंबर में बीएमसी ने 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ बिल भेज दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे मुंबईकरों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। कांग्रेस नेता जकारिया ने कहा कि बीएमसी की तरफ से वर्ष 2023-24 और और 2024-25 के लिए टैक्स बढ़ोतरी की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस कर वृद्धि के लिए बीएमसी की इंटरनल कमिटी द्वारा नियम तैयार किए गए थे। बीएमसी सूत्रों के मुताबिक इस वृद्धि के लिए बीएमसी ने राज्य सरकार से मंजूरी ले ली है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीएमसी का कहना है</strong><br />- बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि अगले दो साल 2023-24 और वर्ष 2024-25 के लिए टैक्स बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। इसका मसौदा बीएमसी के असेसमेंट और कलेक्शन डिपार्टमेंट द्वारा तैयार किया गया है।<br />- बीएमसी ऐक्ट में हर पांच साल में 40 प्रतिशत टैक्स बढ़ोतरी का प्रावधान है। लेकिन नागरिकों पर अधिक आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए आम तौर पर 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है।<br />- असेसमेंट ऐंड कलेक्शन डिपार्टमेंट के मुताबिक प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी उस क्षेत्र में रेडी रेकनर रेट के हिसाब से तय की जाएगी।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Dec 2023 21:09:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>१७ अर्थशास्त्रियों का एक सर्वेक्षण, मुद्रास्फीति उच्चतम स्तर ५.५५ फीसदी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई, </strong>खुदरा मुद्रास्फीति ने एक बार फिर उछाल भरी है। हाल ही में आए डेटा ने इस बात का संकेत दिया है कि महंगाई पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और यह बढ़ती ही जा रही है। साग-सब्जियों की कीमतों ने आम आदमी को हलाकान कर दिया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26763/a-survey-of-17-economists--inflation-highest-level-of-5-55-percent"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-12/400001514.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई, </strong>खुदरा मुद्रास्फीति ने एक बार फिर उछाल भरी है। हाल ही में आए डेटा ने इस बात का संकेत दिया है कि महंगाई पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और यह बढ़ती ही जा रही है। साग-सब्जियों की कीमतों ने आम आदमी को हलाकान कर दिया है। इसी बीच १७ अर्थशास्त्रियों का एक सर्वेक्षण सामने आया है। इसके अनुसार, सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के कारण, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी ‘सीपीआई’ पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर के ४.८७ फीसदी से बढ़कर नवंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर ५.५५ फीसदी पर पहुंच गई। दूसरी ओर मुख्य मुद्रास्फीति अक्टूबर के समान स्तर लगभग ४.२ फीसदी पर ही रहने की उम्मीद है।</p>
<p><br />खुदरा मुद्रास्फीति का आंकड़ा साग, सब्जी व फल आदि की कीमतों पर निर्भर रहता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने भी बताया है कि शाकाहारी थाली काफी महंगी हो गई है। इसमें मुख्य भूमिका टमाटर के साथ ही लहसुन-प्याज की रही है। इसके अलावा अन्य सब्जियां भी काफी महंगी हैं। खुदरा बाजार में सबसे सस्ती सब्जी भी ५० रुपए किलो से ऊपर बिक रही है। अगर औसत सब्जियों के रेट की बात की जाए तो यह ७० से ८० रुपए प्रति किलो के करीब है। अब ‘सीपीआई’ को इसी के आधार पर मापा जाता है।</p>
<p> </p>
<p><br />अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण के अनुसार, ५.५५ फीसदी पर समग्र सीपीआई सूचकांक महीने-दर-महीने ०.७ फीसदी या ४ महीनों में उच्चतम गति से बढ़ने की संभावना है। साथ ही ०.७ फीसदी वृद्धि पिछले १० वर्षों में समग्र सूचकांक में दर्ज की गई औसत ०.५ फीसदी वृद्धि से अधिक है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अभिषेक उपाध्याय कहते हैं, ‘सीपीआई मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि का मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में उछाल है।’</p>
<p><br />उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों से पता चला है कि नवंबर में प्याज की कीमतें महीने-दर-महीने ५८.३ फीसदी बढ़ीं और टमाटर की कीमतें ३४.७ फीसदी बढ़ीं। महीने के दौरान आलू की कीमतें क्रमिक रूप से २.२ फीसदी बढ़ीं। बाजार में ताजी खरीफ फसल के आगमन के बावजूद नवंबर के दौरान प्याज की खुदरा कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल की आवक में देरी और उत्पादन में गिरावट के कारण अक्टूबर में प्याज की मुद्रास्फीति ३७ महीने के उच्चतम स्तर ४२.०८ फीसदी पर थी। अनाज की कीमतें भी क्रमिक रूप से बढ़ीं, नवंबर में चावल की खुदरा कीमत में महीने-दर-महीने १.० फीसदी और गेहूं की कीमत में २.० फीसदी की वृद्धि हुई। दालों की कीमतें भी महीने दर महीने १.५ फीसदी बढ़ीं।</p>
<p><br />पिछले हफ्ते, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ‘एमपीसी’ ने नोट किया कि प्रतिकूल प्रभावों के साथ-साथ खाद्य कीमतों में अनिश्चितता से नवंबर-दिसंबर में मुख्य मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी होने की संभावना है। एमपीसी ने सुझाव दिया, ‘खरीफ फसल की आवक और रबी की बुआई में प्रगति के साथ-साथ अल नीनो मौसम की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। अनाज के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य कीमतों में तेज नरमी के साथ-साथ सरकार द्वारा सक्रिय आपूर्ति पक्ष के हस्तक्षेप से इन खाद्य कीमतों के दबाव को नियंत्रण में रखा जा सकता है।’ हालांकि, आरबीआई ने अपने पूरे वर्ष और मुद्रास्फीति पूर्वानुमानों को क्रमश: ५.४ फीसदी और ५.६ फीसदी पर अपरिवर्तित रखा। बार्कलेज को उम्मीद है कि नवंबर में मुख्य मुद्रास्फीति १० आधार अंकों की मामूली वृद्धि के साथ ४.३ फीसदी हो जाएगी। आरबीआई का मानना है कि घरेलू मांग में निरंतर मजबूती के बावजूद, मुख्य मुद्रास्फीति अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है। उसका मानना है कि यह या तो उच्च समग्र आपूर्ति के कारण हो सकता है या मुद्रास्फीति पर दूसरे क्रम के प्रभावों पर आपूर्ति के झटके का प्रभाव हो सकता है। एमपीसी ने अपने बयान में उल्लेख किया है कि मुख्य अपस्फीति स्थिर रही है, जो पिछले मौद्रिक नीति कार्यों के प्रभाव का संकेत है। हालांकि, इसमें कहा गया है, ‘अपस्फीति का मार्ग कायम रखने की जरूरत है। एमपीसी खाद्य मूल्य दबाव के सामान्यीकरण के किसी भी संकेत की सावधानीपूर्वक निगरानी करेगी, जो मुख्य मुद्रास्फीति में कमी के लाभ को बर्बाद कर सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 13 Dec 2023 10:53:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दीपावली बस दो दिन लेकिन... महंगाई के कारण कड़वी हुई चीनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के अनुसार, एथेनॉल की ओर डायवर्जन पर विचार किए बिना २०२३-२४ सीजन के लिए चीनी उत्पादन लगभग ३३७ लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है, जो २०२२-२३ सीजन के अनुमानित ३६६ लाख टन से कम है। आईएसएमए ने एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्सन का अनुमान नहीं लगाया है। सरकार द्वारा वार्षिक एथेनॉल खरीद मूल्य की घोषणा करने के बाद ही यह अनुमान लगाया जाएगा। भारत में चीनी उद्योग लगातार एथेनॉल की कीमतों में वृद्धि के लिए आग्रह कर रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/25794/diwali-is-just-two-days-away-but-sugar-has-become-bitter-due-to-inflation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-11/download-(4)7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>दीपावली बस दो दिन दूर है, लेकिन महंगाई और बेरोजगारी के कारण लोग खुलकर यह महापर्व नहीं मना पा रहे हैं। बाजारों में दीपावली की अपेक्षित धूम नहीं दिख रही है। खासकर मिठाई की दुकानें चमक-धमक के साथ तैयार हैं। बिक्री भी जमकर हो रही है, लेकिन गत वर्ष की तुलना में १५ फीसदी से अधिक महंगी हो चुकी मिठाई उन्हें मायूस कर रही है।</p>
<p>खोवा, मेवा, मैदा आदि सामग्रियों के अलावा खासकर महंगाई के कारण कड़वी हुई चीनी का महंगा होना, मिठाई के दाम बढ़ने के पीछे की सबसे अहम वजह बन गई है। त्योहारी सीजन में हमेंशा की तरह इस बार भी चीनी की मांग बढ़ गई है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम औसतन तीन फीसदी बढ़े हैं। एम-३० चीनी की एक्स-मिल दर मुंबई में ३८.५० रुपए, कानपुर में एम-३० का एक्स-मिल रेट ३९.३० रुपए, कोलकाता में एम-३० की एक्स-मिल कीमत ३९.८० रुपए प्रति किलोग्राम थी।</p>
<p>वहीं खुदरा बाजार में ८ नवंबर २०२३ को मुंबई में एम-३० चीन का खुदरा दाम ४७ रुपए, दिल्ली में ४५ रुपए, कोलकाता में ४८ रुपए, चेन्नाई में ४३ रुपए, कानपुर में ४६ रुपए और रायपुर में ४२ रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो एक साल पहले से औसतन करीब पांच रुपए अधिक हैं। एक साल मुंबई खुदरा बाजार में चीनी ४२ रुपए, दिल्ली में ४२ रुपए कानपुर में ४० रुपए, रायपुर में ४१ रुपए, कोलकोता में ४४ रुपए और चेन्नाई में ४० रुपए प्रति किलोग्राम थी।</p>
<p>गौरतलब हो कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की कम फसल के कारण चीनी उत्पादन में गिरावट की चिंता है। इसके साथ ही किसान संगठनों द्वारा गन्ना का मूल्य की अधिक मांग आने वाले समय में कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दे रहे हैं। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के राजू शेट्टी कहते हैं कि केंद्र सरकार को चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ३९ रुपए प्रति किलोग्राम करना चाहिए, एथेनॉल का मूल्य प्रति लीटर सी हेवी ६० रुपए, बी-हेवी के लिए ७१ रुपए और सिरप से उत्पादित एथेनॉल के लिए ७५ रुपए तय करना चाहिए। एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाएं जाने से भी चीनी का उत्पादन कम होने और कीमतें प्रभावित होने की बात की जा रही है।</p>
<p>इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के अनुसार, एथेनॉल की ओर डायवर्जन पर विचार किए बिना २०२३-२४ सीजन के लिए चीनी उत्पादन लगभग ३३७ लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है, जो २०२२-२३ सीजन के अनुमानित ३६६ लाख टन से कम है। आईएसएमए ने एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्सन का अनुमान नहीं लगाया है। सरकार द्वारा वार्षिक एथेनॉल खरीद मूल्य की घोषणा करने के बाद ही यह अनुमान लगाया जाएगा। भारत में चीनी उद्योग लगातार एथेनॉल की कीमतों में वृद्धि के लिए आग्रह कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 13:16:17 +0530</pubDate>
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