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                <title>Yadavs - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title> पटना : आरजेडी को विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका; पार्टी का मुख्य वोट बैंक — मुस्लिम और यादव दूर होता दिखा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को इस विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा है. महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में सामने आए तेजस्वी यादव की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है. यह सवाल उठ रहा है कि जब तेजस्वी ने जनता से कई बड़े वादे किए थे, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पार्टी का मुख्य वोट बैंक—मुस्लिम और यादव—उससे दूर होता दिखा. आइए विस्तार से समझते हैं कि आरजेडी की हार के प्रमुख कारण क्या रहे.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45471/big-blow-to-patna-rjd-in-assembly-elections-partys-main"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-14t191048.052.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना : </strong>बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को इस विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा है. महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में सामने आए तेजस्वी यादव की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है. यह सवाल उठ रहा है कि जब तेजस्वी ने जनता से कई बड़े वादे किए थे, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पार्टी का मुख्य वोट बैंक—मुस्लिम और यादव—उससे दूर होता दिखा. आइए विस्तार से समझते हैं कि आरजेडी की हार के प्रमुख कारण क्या रहे.</p>
<p> </p>
<p><strong>आरजेडी की हार के बड़े 5 कारण</strong><br />नतीजों और रुझानों के अनुसार महागठबंधन की मुख्य सहयोगी आरजेडी इस बार महज 27 सीटों पर सिमटती दिख रही है, जबकि कांग्रेस 5 सीटें पाती दिख रही है. आरजेडी का परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम और यादव समुदाय रहा है. पार्टी ने इस चुनाव में 50 यादव उम्मीदवार और 18 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. इसके बावजूद परिणाम बेहद निराशाजनक रहे.</p>
<p>एक बड़ा आंकड़ा यह भी है कि इस बार काफी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं ने आरजेडी के बजाय ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को समर्थन दिया. कई मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM ने आरजेडी के वोट को सीधे प्रभावित किया, जिससे महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा. दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह रहा कि मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव कई सीटों पर जेडीयू की ओर गया. जहाँ जेडीयू और आरजेडी के मुस्लिम उम्मीदवार आमने-सामने थे, वहाँ जेडीयू को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दी. यह रुझान आरजेडी के पारंपरिक समीकरणों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ.</p>
<p>आरजेडी को यादव वोटों की नाराज़गी का भी सामना करना पड़ा. जिन सीटों पर यादव मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते थे, वहाँ इस बार वोटों का बिखराव देखा गया. इसके साथ ही जनसुराज पार्टी का पहली बार मैदान में उतरना भी महागठबंधन के लिए सिरदर्द बना, क्योंकि उसने कई जगहों पर विपक्षी वोट काटे. इसके अलावा, राज्य और केंद्र की सत्ताधारी सरकार ने अपनी योजनाओं के माध्यम से जातीय राजनीति की परंपरागत धारणाओं को काफी हद तक प्रभावित किया. नीतीश कुमार की योजनाओं से लाभान्वित होने वाले यादव सहित अन्य समुदायों और जातीय समूहों का झुकाव एनडीए की ओर बढ़ा. इसका सीधा असर आरजेडी और महागठबंधन के वोट शेयर पर पड़ा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 19:14:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>हरमोहन यादव की पुण्यतिथि 10वीं पर जुटे 12 प्रदेशों के यादव, PM मोदी ने किया संबोधित...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><em>समाजवादी नेता रहे और मुलायम सिंह के लंबे समय तक सियासी हमसफर रहने वाले हरमोहन सिंह यादव की 10वीं पुण्यतिथि के मौके पर सोमवार को नजारा एकदम बदला था। कभी कानपुर के मेहरबान सिंह का पुरवा गांव में हरमोहन यादव से जुड़े कार्यक्रमों में सपाइयों की भीड़ दिखती थी, लेकिन आज इस आयोजन में भाजपा के कद्दावर नेता जुटे थे। </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं इस आयोजन को खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। 18 अक्टूबर 1921 को मेहरबान सिंह का पुरवा में जन्मे हरमोहन सिंह यादव की पुण्यतिथि के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी का कानपुर आने का ही प्लान था,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/12348/yadavs-from-12-states-gathered-on-the-10th-death-anniversary-of-harmohan-yadav--pm-modi-addressed"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-07/download-(2)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>समाजवादी नेता रहे और मुलायम सिंह के लंबे समय तक सियासी हमसफर रहने वाले हरमोहन सिंह यादव की 10वीं पुण्यतिथि के मौके पर सोमवार को नजारा एकदम बदला था। कभी कानपुर के मेहरबान सिंह का पुरवा गांव में हरमोहन यादव से जुड़े कार्यक्रमों में सपाइयों की भीड़ दिखती थी, लेकिन आज इस आयोजन में भाजपा के कद्दावर नेता जुटे थे। </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं इस आयोजन को खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। 18 अक्टूबर 1921 को मेहरबान सिंह का पुरवा में जन्मे हरमोहन सिंह यादव की पुण्यतिथि के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी का कानपुर आने का ही प्लान था, लेकिन उन्होंने व्यवस्तता के चलते वर्चुअल माध्यम से ही संबोधित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर उन्होंने हरमोहन सिंह को लोकतंत्र के लिए लड़ने वाला योद्धा करार दिया। उन्होंने कहा कि वह आपातकाल में लोकतंत्र को बचाने की जंग में लड़ने वाले योद्धा थे। हरमोहन सिंह यादव को याद करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि समाज के लिए काम करने वाले लोग हमेशा अमर रहते हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे यहां मान्यता है कि शरीर के चले जाने के बाद भी जीवन समाप्त नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">गीता में भी श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है। जो समाज की सेवा के लिए जीते हैं, वे मृत्यु के बाद भी अमर रहते हैं।' पीएम मोदी ने कहा कि आजादी से पहले महात्मा गांधी हों या फिर उसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय, राम मनोहर लोहिया या फिर जयप्रकाश नारायण हों, उनके विचार हमें प्रेरणा देते हैं। लोहिया के विचारों को तो हरमोहन सिंह यादव ने आगे बढ़ाया। </p>
<p style="text-align:center;"><strong>हरमोहन सिंह यादव की पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, चौधरी हरमोहन सिंह यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में जो काम किया, उससे आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन ग्रामसभा से शुरू किया था और राज्यसभा तक गए। प्रधान बने, विधान परिषद बने और सांसद भी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी का इस कार्यक्रम को संबोधित करना भले ही एक आयोजन में उपस्थिति लग रहा हो, लेकिन इसके गहरे सियासी मायने हैं। यूपी की राजनीति को समझने वालों का मानना है कि इसके जरिए भाजपा सपा के मूल वोट बैंक कहे जाने वाले यादव समाज को अपनी ओर लुभाने की कोशिशों में जुटी है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>यादव महासभा के अध्यक्ष रह चुके थे हरमोहन सिंह यादव</strong></p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल हरमोहन सिंह यादव समाजवादी नेता होने के साथ ही यादव बिरादरी की राजनीति से भी जुड़े थे। वह लंबे समय तक अखिल भारतीय यादव महासभा के अध्यक्ष भी थे। यही नहीं उनके बेटे सुखराम यादव आज भी इसके उपाध्यक्ष हैं। आज हुए कार्यक्रम में भी यूपी, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, गुजरात समेत देश के 12 राज्यों से यादव महासभा के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर यादव नेताओं के साथ पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, विधानसभा स्पीकर सतीश महाना जैसे नेता मौजूद थे। इसके अलावा हरमोहन यादव के पोते मोहित यादव खुद भाजपा के नेता हैं। इस तरह मंच से बिना कहे साफ संदेश था कि यादव समाज के लिए भाजपा भी एक विकल्प है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>कभी लगता था सपाइयों का तांता, अब बना भाजपा का मंच</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कभी हरमोहन सिंह यादव की पुण्यतिथि अथवा जयंती आदि के कार्यक्रमों में सपाइयों का तांता लगता था। मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव समेत तमाम नेता जाया करते थे। लेकिन इस बार नजारा एकदम बदला था।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के नेता मंच पर थे और पीएम नरेंद्र मोदी समेत तमाम भाजपा नेताओं की तस्वीरें भी दिख रही थीं। वहीं सैफई परिवार गायब दिखा। भले ही यह आयोजन हरमोहन सिंह यादव की याद में था, लेकिन यादव बिरादरी के लिए जरूर इससे एक संदेश देने का प्रयास किया गया।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>हरमोहन सिंह यादव को मिला था सिखों की रक्षा के लिए शौर्य चक्र</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि 1984 में जब सिख विरोधी दंगे देश भर में भड़के थे तो हरमोहन सिंह यादव रक्षक के रूप में उतरे। उन्होंने कानपुर में लोगों को सिखों के खिलाफ हिंसा से रोका। खुद सड़कों पर उतरे और लोगों को शांत कराया। इसके चलते तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन ने उन्हें 1991 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जब दंगे भड़के हुए थे तो हरमोहन सिंह यादव ने अपने परिवार के साथ सिख बहुल इलाके में पलायन कर लिया था ताकि दंगों को शांत कर सकें। इतना ही नहीं दंगों के दौरान जब एक सिख परिवार उनके घर में अपनी सुरक्षा के लिये पहुंचा तो उन्होंने उसे तब तक हमले से बचाया जब तक कि हमलावरों को तितर-बितर कर गिरफ्तार नहीं कर लिया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 19:19:04 +0530</pubDate>
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