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                            <item>
                <title>खंडवा : मुंबई-अमरावती की गणेश मूर्तियों की धूम, 111 रूपों में गणपति बप्पा, नए ट्रेंड ने खींचा लोगों का ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बाजार में गणपति बप्पा के कई अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं. कहीं भगवान गणेश गजमुख के स्वरूप में नजर आ रहे हैं तो कहीं दगड़ू सेठ और लालबाग के राजा की झलक दिखाई दे रही है. इसके अलावा इस्कॉन के स्वरूप, भजन करते गणपति, राधा-कृष्ण थीम और ब्राह्मण बैठक जैसे कई नए डिजाइन भी बाजार में मौजूद हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51813/khandwa-mumbai-amravati-ganesh-idols-in-vogue-ganpati-bappa-in-111"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/ganeshotsav-protest-mumbai_2026091131966.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>खंडवा : </strong>बाजार में गणपति बप्पा के कई अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं. कहीं भगवान गणेश गजमुख के स्वरूप में नजर आ रहे हैं तो कहीं दगड़ू सेठ और लालबाग के राजा की झलक दिखाई दे रही है. इसके अलावा इस्कॉन के स्वरूप, भजन करते गणपति, राधा-कृष्ण थीम और ब्राह्मण बैठक जैसे कई नए डिजाइन भी बाजार में मौजूद हैं.</p>
<p> </p>
<p>इस बार गणेश प्रतिमाओं में सबसे खास बात यह है कि एक ही बाजार में गणपति बप्पा के करीब 111 अलग-अलग रूप और डिजाइन देखने को मिल रहे हैं. हर प्रतिमा का स्वरूप और सजावट दूसरी प्रतिमा से अलग है. यही वजह है कि लोग मूर्ति खरीदने से पहले बाजार में अलग-अलग डिजाइन देख रहे हैं और अपनी पसंद के हिसाब से गणपति बप्पा का स्वरूप चुन रहे हैं. गणेश प्रतिमा कारोबारी प्रवेश नरेडी बताते हैं कि इस बार बाजार में नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. पहले जहां लोग पारंपरिक स्वरूप वाली प्रतिमाएं ज्यादा पसंद करते थे, वहीं अब अलग-अलग थीम और डिजाइन वाली प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है. उनके यहां गजमुख, दगड़ू सेठ, इस्कॉन और लालबाग के राजा के स्वरूप के साथ कई अन्य डिजाइन की प्रतिमाएं मौजूद हैं. कुछ प्रतिमाओं में गणपति बप्पा को भजन करते हुए दिखाया गया है, तो कुछ प्रतिमाओं में भगवान का अलग अंदाज देखने को मिल रहा है.</p>
<p><strong>मुंबई और अमरावती की मूर्तियां बनी आकर्षण</strong><br />इस बार बाजार में मुंबई और अमरावती से विशेष तौर पर गणेश प्रतिमाएं मंगाई गई हैं. इन प्रतिमाओं में अलग-अलग तरह का वर्क किया गया है, जिसकी वजह से इनकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई है. मुंबई से आई कुछ प्रतिमाओं में कपड़ा वर्क किया गया है. इस वर्क की वजह से मूर्ति का लुक काफी अलग नजर आता है. वहीं अमरावती की प्रतिमाओं में फेटा वर्क देखने को मिल रहा है. दोनों जगहों से आई प्रतिमाओं में अपनी-अपनी खासियत है और यही अलग डिजाइन लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं. कारोबारी बताते हैं कि इस तरह के वर्क वाली प्रतिमाओं की कीमत सामान्य मूर्तियों की तुलना में थोड़ी ज्यादा रहती है, लेकिन इनकी फिनिशिंग और डिजाइन लोगों को पसंद आ रही है.</p>
<p><strong>551 रुपए से लेकर 11 हजार रुपए तक की मूर्तियां</strong><br />बाजार में इस बार हर बजट के हिसाब से गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं. यहां 551 रुपए से लेकर करीब 11 हजार रुपए तक की प्रतिमाएं मिल रही हैं. छोटी प्रतिमाओं से लेकर बड़ी और खास डिजाइन वाली मूर्तियां बाजार में सजी हुई हैं. लोग अपनी जरूरत और घर में बनाई जा रही झांकी के हिसाब से प्रतिमाओं का चयन कर रहे हैं. कुछ लोग छोटे गणपति घर में स्थापित करने के लिए खरीद रहे हैं, तो कई परिवार अपनी बड़ी झांकी के लिए खास डिजाइन वाली प्रतिमा पसंद कर रहे हैं. </p>
<p><strong>घर-घर में तैयार हो रही गणेश उत्सव की झांकियां</strong><br />गणेश उत्सव को लेकर खंडवा में घरों के साथ-साथ मोहल्लों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं. कई परिवार अपने घरों में अलग-अलग थीम पर झांकियां तैयार कर रहे हैं. ऐसे में गणेश प्रतिमा के साथ उसकी सजावट और स्वरूप पर भी लोग खास ध्यान दे रहे हैं. बाजार में भी अलग-अलग तरह की प्रतिमाएं सजने के बाद लोग परिवार के साथ इन्हें देखने पहुंच रहे हैं. बच्चे भी अलग-अलग रूपों वाली गणेश प्रतिमाओं को देखकर उत्साहित नजर आ रहे हैं.</p>
<p><strong>नए डिजाइन के साथ पारंपरिक स्वरूप भी पसंद</strong><br />भले ही इस बार नए डिजाइन और थीम वाली प्रतिमाओं का ट्रेंड देखने को मिल रहा है, लेकिन पारंपरिक गणपति प्रतिमाओं की मांग भी बनी हुई है. कई लोग साधारण और पारंपरिक स्वरूप वाली प्रतिमा को ही घर में स्थापित करना पसंद कर रहे हैं. यानी इस बार बाजार में परंपरा और नया ट्रेंड दोनों साथ-साथ देखने को मिल रहे हैं. गणपति बप्पा के अलग-अलग रूपों ने बाजार की रौनक बढ़ा दी है और गणेश उत्सव शुरू होने से पहले ही प्रतिमा बाजार में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है.</p>
<p>मुंबई और अमरावती से आई खास प्रतिमाओं के साथ 111 अलग-अलग डिजाइन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. अब भक्त अपनी पसंद, बजट और घर की झांकी के हिसाब से गणपति बप्पा का स्वरूप चुन रहे हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 11:51:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली-मुंबई हो या पटना, निर्भया कानून के बाद भी क्यों नहीं कम हो रहीं रेप की घटना </title>
                                    <description><![CDATA[<p>3 साल की मासूम के साथ स्कूल वैन के ड्राइवर ने दरिंदगी की.स्कूल से लौटते वक्त जब नन्ही बच्ची वैन में अकेली थी तो ड्राइवर के अंदर बैठा दानव जाग गया और उसने अपनी हवस का शिकार इस मासूम को बना डाला. इससे पहले खबर आई कि बिहार के बक्सर में स्कूल के शिक्षकों ने ही छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51692/be-it-delhi-mumbai-or-patna-why-are-the-incidents-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/_99063271_3571e17b-2d69-49b8-8a92-df0610c97d9f.jpg.webp" alt=""></a><br /><p><strong>दिल्ली : </strong>3 साल की मासूम के साथ स्कूल वैन के ड्राइवर ने दरिंदगी की.स्कूल से लौटते वक्त जब नन्ही बच्ची वैन में अकेली थी तो ड्राइवर के अंदर बैठा दानव जाग गया और उसने अपनी हवस का शिकार इस मासूम को बना डाला. इससे पहले खबर आई कि बिहार के बक्सर में स्कूल के शिक्षकों ने ही छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया. वहीं उससे ठीक पहले नोएडा से दिल्ली के बीच 47 किलोमीटर की दूरी में 16 साल की छात्रा के साथ हुए सामूहिक रेप की घटना ने भले ही सनसनी फैला दी हो, लेकिन इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला है कि रेप की घटनाएं भारत में रुक क्यों नहीं रहीं? स्कूल की वैन हो, बस हो या खुद स्कूल हो आखिर हमारी बच्चियां कहां सुरक्षित हैं? जवाब है कहीं नहीं.</p>
<p> </p>
<p>पिछले 10 दिन की घटनाओं पर गौर करें तो दिल्ली-मुंबई-पटना तीनों ही राजधानियां हैं चाहे देश की या राज्यों की. इन बड़े शहरों की चकाचौंध के बीच फिलहाल जो एक बात कॉमन रही, वह है इनसे आईं बलात्कार की घटनाएं. कहीं शिक्षक तो कहीं वैन ड्राइवर तो कहीं बस चालक के रूप में घूमते इन दरिंदों का शरीर भले ही मानवों का रहा हो, लेकिन इनकी आत्मा में शैतान ही था और इन हैवानों की शिकार बनीं हमारी-आपकी बेटियां. यह कोई पहली घटना नहीं है, दसवीं और सौवीं भी नहीं, बल्कि इससे पहले अनगिनत रेप, सामूहिक रेप, यौन उत्पीडन की घटनाएं हो चुकी हैं और लगातार हो रही हैं. जब भी ऐसी घटना सामने आती है फिर-फिर कर यही सवाल उठते हैं कि ये रेप क्यों नहीं रुक रहे? इन रेपिस्ट को तुरंत मार क्यों नहीं देते? बलात्कारियों में कानून का डर क्यों नहीं है? क्या हमारे भारत में सख्त कानून नहीं है? क्या 2012 के निर्भया कांड के बाद भी भारत में कुछ नहीं बदला?</p>
<p>आपको याद हो तो 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुई निर्भया के साथ हुई बर्बरता की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इसने सिर्फ गुस्सा नहीं जगाया, बल्कि कानून व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी खड़ी कर दी थी. युवा सड़कों पर उतर आए थे, विदेशों तक इस घटना की गूंज थी, कमेटियां बनाई गईं, जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 पारित हुआ, जिसे आम भाषा में निर्भया कानून या निर्भया एक्ट कहा गया. निर्भया फंड बना, लेकिन सवाल फिर वही कि असल धरातल पर क्या हुआ?</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 10:38:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: मनोज जरांगे ने फिर दी आंदोलन की चेतावनी, कहा- मुंबई में प्रदर्शन किया तो न ट्रेन चलेगी और ना उड़ेंगे प्लेन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मराठा समुदाय को धमकाने का आरोप लगाकर महाराष्ट्र सरकार को गंभीर नतीजों की चेतावनी देते हुए, मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को कहा कि यदि वह मुंबई में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय करते हैं, तो 80 से 90 लाख युवा उनके साथ जुड़ेंगे और न तो हवाई जहाज उड़ने देंगे और न ही ट्रेनें चलने देंगे। हालांकि, जरांगे ने ये भी कहा कि अगर महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय को उनका हक दे देती है, तो उन्हें मुंबई में प्रदर्शन करने में कोई दिलचस्पी नहीं है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51567/mumbai-manoj-jarange-again-warned-of-agitation-said-if"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-27t103316.448.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मराठा समुदाय को धमकाने का आरोप लगाकर महाराष्ट्र सरकार को गंभीर नतीजों की चेतावनी देते हुए, मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को कहा कि यदि वह मुंबई में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय करते हैं, तो 80 से 90 लाख युवा उनके साथ जुड़ेंगे और न तो हवाई जहाज उड़ने देंगे और न ही ट्रेनें चलने देंगे। हालांकि, जरांगे ने ये भी कहा कि अगर महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय को उनका हक दे देती है, तो उन्हें मुंबई में प्रदर्शन करने में कोई दिलचस्पी नहीं है।</p>
<p> </p>
<p><strong>29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे जरांगे</strong><br />बता दें कि मनोज जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आने वाले 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है और महाराष्ट्र सरकार के पुनर्विचार की अपील को ठुकरा दिया है। इसके साथ ही, जरांगे ने अपनी मांगों को लागू करने के लिए समयसीमा 28 अगस्त की तय की है।</p>
<p><strong>क्या है मनोज जरांगे का आरोप?</strong><br />मनोज जरांगे ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सरकार, मराठा समुदाय के योग्य सदस्यों को जारी किए जाने वाले कुनबी जाति प्रमाण-पत्रों की संख्या कम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने डिमांड की कि पहले पहचाने गए 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर सर्टिफिकेट जारी किए जाएं।</p>
<p><strong>जरांगे ने दी ट्रेन की पटरी उखाड़ने की धमकी</strong><br />वहीं, मुंबई पुलिस के पब्लिक रैली पर रोक लगाने वाले कथित आदेश के बारे में पूछे जाने पर मनोज जरांगे ने कहा, "अगर मराठा समुदाय के लोग मुंबई में इकट्ठा होने का निर्णय करेंगे, तो वे रेलवे ट्रैक उखाड़ देंगे और विमानों की उड़ान रोक देंगे। सरकार को मनमाना व्यवहार नहीं करना चाहिए।"</p>
<p><strong>अपनी पसंद की जगह पर करेंगे प्रदर्शन- जरांगे</strong><br />जरांगे ने ये भी कहा कि यदि मराठा समुदाय के लोग मुंबई जाने का निर्णय करते हैं, तो वे अपनी पसंद की जगहों पर प्रोटेस्ट करेंगे, जैसे कि आजाद मैदान, शिवाजी पार्क या 'वर्षा' यानी मुख्यमंत्री का सरकारी आवास के बाहर। इससे पहले, मनोज जरांगे ने चेतावनी दी थी कि अगर मराठा आरक्षण पर विश्वासघात हुआ तो चुनावों में उन्हें धूल चटा देंगे। आरक्षण के लिए उनका संघर्ष महाराष्ट्र भर के मराठों के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 10:34:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति; -३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51392/khanpurti-in-the-name-of-mumbai-fire-safety-more"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-16t121413.887.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?</p>
<p> </p>
<p>विलेपार्ले-पश्चिम की शांता भुवन सोसाइटी में लगी आग ने इस लापरवाही की पोल खोल दी। वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम का कुछ हिस्सा ही काम कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि हादसे के बाद दमकल की गाड़ी पहुंच भी जाए तो यदि अलार्म, उपकरण या आपातकालीन व्यवस्था ही न चले तो जान बचाएगा कौन?</p>
<p><strong>नियम हैं, लेकिन कार्रवाई का डंडा कहां?</strong><br />हर छह महीने में सेल्फ-सेफ्टी दाखिल करने की व्यवस्था है, लेकिन नियमों का पालन नहीं करने वालों पर दमकल विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता। स्टाफ की कमी के कारण हर इमारत का नियमित निरीक्षण भी मुश्किल है। न प्रभावी जुर्माना, न कड़ी कार्रवाई और न ही अनुपालन करने वालों के लिए कोई प्रोत्साहन—ऐसे में फायर सेफ्टी भी कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है।</p>
<p>मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। सरकार और मनपा को अब चेतना होगा। आग लगने के बाद दमकल भेजना समाधान नहीं; आग लगने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा—हादसे से पहले या फिर लाशें गिनने के बाद?</p>
<p><strong>फायर सेफ्टी बनी कागजी खानापूर्ति!</strong><br />मुंबई में हजारों इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। फायर सेफ्टी के लिए जरूरी फॉर्म बी जमा करने वाली सोसाइटियों की संख्या बेहद कम है। स्टाफ की कमी और कमजोर कार्रवाई से नियमों का डर खत्म होता दिख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक रैंडम जांच, भारी जुर्माना और सख्त कार्रवाई ही हादसों को रोक सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:15:08 +0530</pubDate>
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