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                <title>orders - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई: ऑटो टैक्सी चालकों की अब होगी भाषा जांच महाराष्ट्र सरकार का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के नियम को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि जिन चालकों को मराठी भाषा का जरूरी ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के तहत ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े चालकों को यात्रियों से संवाद करने के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी होगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51456/mumbai-auto-taxi-drivers-will-now-have-language-test-maharashtra"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-20t113300.121.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के नियम को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि जिन चालकों को मराठी भाषा का जरूरी ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के तहत ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े चालकों को यात्रियों से संवाद करने के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी होगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों को पहले नोटिस दिया जाएगा और उन्हें मराठी सीखने का अवसर मिलेगा।</p>
<p> </p>
<p>नए प्रावधानों के अनुसार, अगर जांच के दौरान कोई चालक मराठी भाषा के आवश्यक ज्ञान के बिना पाया जाता है तो उसे सुधार के लिए समय दिया जाएगा। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर उसका लाइसेंस या ड्राइविंग ऑथराइजेशन निलंबित किया जा सकता है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। परिवहन विभाग ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों को इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को चालकों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने को कहा गया है। नए बैज के लिए आवेदन करने वाले चालकों की मराठी भाषा क्षमता की जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है। कई बार भाषा को लेकर यात्रियों और ड्राइवरों के बीच विवाद की स्थिति बनती है, जिसे कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p>हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान जरूरी है, जबकि कुछ संगठनों ने दूसरे राज्यों से आए चालकों को अतिरिक्त समय देने की मांग की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी की रोजी-रोटी प्रभावित करना उद्देश्य नहीं है, लेकिन नियमों का पालन करना जरूरी होगा। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के लोग ऑटो और टैक्सी सेवाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले का असर हजारों चालकों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आरटीओ जांच अभियान के दौरान कितनी सख्ती बरती जाती है और कितने चालकों पर कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:51:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: मधु कोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला: मुंबई की संपत्तियों की नीलामी पर कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी विशेष अदालत ने ईडी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मुंबई स्थित उन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर रोक लगा दी है, जिन्हें ईडी ने वर्ष 2013 में कुर्क किया था। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-आक्शन सेवा प्रदाता सी-1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे पांच अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी और उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं करें।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50797/mumbai-madhu-koda-money-laundering-case-court-imposes-interim-stay"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-17t103328.315.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी विशेष अदालत ने ईडी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मुंबई स्थित उन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर रोक लगा दी है, जिन्हें ईडी ने वर्ष 2013 में कुर्क किया था। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-आक्शन सेवा प्रदाता सी-1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे पांच अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी और उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं करें।</p>
<p> </p>
<p>ईडी ने अदालत में दायर आवेदन में कहा था कि संबंधित संपत्तियां पहले से पीएमएलए एक्ट के तहत कुर्क हैं और उन पर पारित कुर्की आदेश की पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण तथा अपीलीय अधिकरण दोनों कर चुका है। ऐसे में मुकदमे के अंतिम निर्णय से पहले ई-नीलामी होने पर तीसरे पक्ष के अधिकार उत्पन्न हो जाएंगे, जिससे संपत्ति की जब्ती अथवा वैध दावेदार को बहाल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीएमएलए एक्ट के तहत पुष्टि की गई कुर्क संपत्तियां न्यायालय की अभिरक्षा में हैं। जब तक विशेष अदालत संपत्तियों की जब्ती या बहाली पर अंतिम निर्णय नहीं दे देती, तब तक उनका हस्तांतरण या नीलामी नहीं की जा सकती। अदालत ने फीनिक्स एआरसी, संबंधित पक्षों और उधारकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए 28 जुलाई को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। तब तक ई-नीलामी पर अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 10:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : सीबीआई कोर्ट का फैसला, बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने बताया कि पुणे की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में प्राइवेट कंपनियों के दो मालिकों को तीन साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद (जो अब दूसरे बैंक में मिल गया है) को 5.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गलत तरीके से नुकसान हुआ था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50610/mumbai-cbi-courts-decision-to-jail-the-accused-in-bank"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-08t125549.225.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने बताया कि पुणे की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में प्राइवेट कंपनियों के दो मालिकों को तीन साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद (जो अब दूसरे बैंक में मिल गया है) को 5.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गलत तरीके से नुकसान हुआ था। सीबीआई की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में एम/एस चंद्रकांत एस. लोढ़ा एंड कंपनी के मालिक चंद्रकांत लोढ़ा और एम/एस  ठक्कर एंड संस के मालिक परेश ठक्कर को दोषी ठहराया।</p>
<p> </p>
<p>सीबीआई ने स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद की शिकायत के आधार पर 9 अक्टूबर, 2001 को यह मामला दर्ज किया था। यह मामला स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर बी.आर. दगड़े, तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वी.एल. काले, चंद्रकांत लोढ़ा और परेश ठक्कर के खिलाफ़ दर्ज किया गया था।आरोप था कि आरोपियों ने बैंक को धोखा देने के मकसद से ज़्यादा कीमत वाले चेक जमा किए, जिन्हें बैंक अधिकारियों ने उनके क्लियर होने का इंतज़ार किए बिना ही मंज़ूरी दे दी।जांच में पता चला कि आपराधिक साज़िश के तहत, आरोपी चंद्रकांत लोढ़ा (जो एम/एस  चंद्रकांत एस. लोढ़ा एंड कंपनी के मालिक थे) ने 6.75 करोड़ रुपये कीमत के 18 'अकोमोडेटिव चेक' (बिना वास्तविक लेन-देन के जारी किए गए चेक) जमा किए। ये चेक आरोपी परेश ठक्कर ने नासिक पीपल्स कोऑपरेटिव बैंक में अपने मालिकाना हक वाले खाते से जारी किए थे और बैंक अधिकारियों ने इन्हें पास कर दिया था।</p>
<p>इसके बाद, विनोद काले ने बी.आर. दगड़े की मंज़ूरी से चंद्रकांत लोढ़ा को उनके करंट अकाउंट से ज़्यादा कीमत वाले चेक जारी करने की इजाज़त दी, जबकि उन चेक का नतीजा (क्लियरेंस) अभी पता भी नहीं चला था। इस तरह, चंद्रकांत लोढ़ा ने अपने और अपनी सहयोगी कंपनियों (जैसे एम/एस  ए.सी. एंटरप्राइजेज़, एम/एस  अक्षय ट्रेडर्स) के नाम से चेक जारी किए और इस वजह से बैंक को 5.58 करोड़ रुपये का गलत तरीके से नुकसान पहुँचाया।जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 28 अगस्त, 2003 को बी.आर. दगड़े और अन्य के खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल की।</p>
<p>डागडे (तत्कालीन ब्रांच मैनेजर), वी.एल. काले (तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर), चंद्रकांत लोढ़ा और परेश ठक्कर।महाराष्ट्र राज्य में सीबीआई अदालतों के अधिकार क्षेत्र के पुनर्गठन के कारण, 2025 में इस मामले को नासिक से पुणे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।ट्रायल के बाद, कोर्ट ने आरोपियों और दो प्राइवेट व्यक्तियों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई। स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर बी.आर. डागडे और तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वी.एल. काले को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : हाई कोर्ट  ने बढ़ाया मुआवजा, समुद्री इंजीनियर के परिवार को 1.31 करोड़ देने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दिवंगत मैरीटाइम इंजीनियर के परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि समुद्री (मैरीटाइम) क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स की आय सामान्य भूमि-आधारित नौकरियों की तुलना में काफी अधिक होती है, क्योंकि उनका काम ऑफशोर परिस्थितियों में कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है। यह मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा आय का आकलन कम किए जाने को गलत माना और इसे संशोधित करते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49546/mumbai-high-court-orders-increased-compensation-to-rs-131-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-28t115140.796.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दिवंगत मैरीटाइम इंजीनियर के परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि समुद्री (मैरीटाइम) क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स की आय सामान्य भूमि-आधारित नौकरियों की तुलना में काफी अधिक होती है, क्योंकि उनका काम ऑफशोर परिस्थितियों में कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है। यह मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा आय का आकलन कम किए जाने को गलत माना और इसे संशोधित करते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।</p>
<p> </p>
<p>जस्टिस जितेंद्र जैन ने 24 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में कहा कि समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियर और अन्य पेशेवर लंबे समय तक ऑफशोर रहते हैं और कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं, इसलिए उनकी आय को सामान्य कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “जहाजों पर काम करने वाले लोग जमीन पर काम करने वालों की तुलना में कहीं अधिक कमाई करते हैं।” इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए 10 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 1.31 करोड़ रुपये कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने इस राशि पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया, जिससे अंतिम भुगतान और अधिक बढ़ जाएगा।</p>
<p>अदालत ने कहा कि दुर्घटना पीड़ित के वास्तविक आर्थिक योगदान को सही तरीके से समझना जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी उच्च जोखिम और उच्च आय वाले पेशे से जुड़ा हो। कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रिब्यूनल द्वारा आय का गलत अनुमान लगाने से परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिल पाया था। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट संदेश गया है कि अदालतें अब प्रोफेशनल्स की वास्तविक आय क्षमता और उनके कार्य की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय करेंगी। खासकर उन मामलों में जहां पीड़ित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49546/mumbai-high-court-orders-increased-compensation-to-rs-131-crore</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:53:01 +0530</pubDate>
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