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                <title>Municipal Corporation - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Municipal Corporation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पिंपरी-चिंचवड महापालिका के ₹60 करोड़ घोटाले में ‘सेटिंग’ के आरोप, प्रशासन और सत्ताधारियों पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पिंपरी-चिंचवड महापालिका के कथित ₹60 करोड़ घोटाले में प्रशासन और सत्ताधारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान का आरोप है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49884/allegations-of-setting-in-60-crore-scam-of-pimpri-chinchwad-municipal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/110c66eb-4277-4383-b7e4-aa5c6462dcc9.jpg" alt=""></a><br /><p> महाराष्ट्र के Pimpri Chinchwad Municipal Corporation में सामने आए कथित ₹60 करोड़ के वित्तीय घोटाले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। जांच में फर्जी उपसूचनाओं (Bogus Sub-Notices) के जरिए ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आने के बावजूद अब तक किसी पर ठोस आपराधिक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। <br /><br />रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच समिति की 243 पन्नों की रिपोर्ट में 14 फर्जी उपसूचनाओं के माध्यम से करीब ₹60.18 करोड़ के भुगतान का उल्लेख किया गया है। इस मामले में मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी Praveen Jain का नाम लगातार चर्चा में है। <br /><br />मामले ने नया मोड़ तब लिया जब प्रवीण जैन को जबरन अवकाश (Compulsory Leave) पर भेजने के आदेश को उन्होंने प्रशासनिक न्यायाधिकरण (MAT) में चुनौती देकर रद्द करा लिया। इसके बाद महापालिका प्रशासन की कार्रवाई और उसकी कानूनी तैयारी पर सवाल खड़े हो गए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि कार्रवाई जानबूझकर कमजोर रखी गई ताकि बड़े अधिकारियों और राजनीतिक लोगों को बचाया जा सके। </p>
<p><br />महापालिका की सामान्य सभा में भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कई नगरसेवकों ने जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने की मांग की, लेकिन आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने यह कहते हुए रिपोर्ट पेश करने से इनकार कर दिया कि मामला सरकार को भेजा जा चुका है और आगे का फैसला राज्य सरकार करेगी। <br /><br />विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों और उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कुछ अधिकारी, ठेकेदार तथा सत्ताधारी और विपक्षी गुटों के नगरसेवक भी शामिल हो सकते हैं। </p>
<p>रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कई नगरसेवकों के हस्ताक्षर इन कथित फर्जी उपसूचनाओं पर पाए गए हैं। इससे पूरे मामले को दबाने और “सेटलमेंट” करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। </p>
<p>भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के भीतर भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताया है, जबकि कुछ नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष आपराधिक जांच होनी चाहिए। <br /><br />फिलहाल राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित आपराधिक जांच पर सबकी नजर बनी हुई है। शहर में यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित रहेगा या फिर इसमें बड़े स्तर पर FIR और गिरफ्तारी भी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49884/allegations-of-setting-in-60-crore-scam-of-pimpri-chinchwad-municipal</link>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नासिक : म्हाडा घोटाला... 59 बिल्डरों को नोटिस, मनपा की बड़ी कार्रवाई;  अब जांच के घेरे में डेवलपर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49154/nashik-mhada-scam-notice-to-59-builders-big-action-by"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/rt3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नासिक : </strong>नासिक म्हाडा के साथ धोखाधड़ी कर गरीबों के घरों को हड़पने वाले बिल्डरों के खिलाफ नासिक महानगरपालिका (मनपा) ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया।<br /><br />इस घोटाले की गूंज अथ राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन तक पहुंच चुकी है। जांच का दायरा बढ़ने के बाद इसमें बिल्डरों के पार्टनर और जमीन मालिको के नाम भी शामिल किए गए है, जिससे आरोपियों की कुल संख्या 194 तक पहुंच गई है। भूमि अभिलेख विभाग ने पहले ही 49 विकासकों के खिलाफ सरकार वाडा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पूरे प्रकरण में अब तक केवल एक आरोपी, सोनू मनवानी, की गिरफ्तारी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 10 विकासकों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि अगले सप्ताह कुछ और बिल्डरी को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, मनपा अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि नगर रचना विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन ले-आउट्स को मंजूरी कैसे दी। इस मामले में नगर रचना विभाग के अधिकारी कल्पेश पाटिल द्वारा जांच समिति को पूरी जानकारी न दिए जाने के कारण विभाग की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:35:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>पुणे में 100+ इलाकों में दूषित जल संकट...  मनपा पर सवाल, जनता में आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मलनिस्सारण विभाग के तहत आने वाले जोन क्रमांक 1 से 5 में सीवर लाइनों के जाम होने के कारण मलजल पेयजल की पाइपलाइनों में रिस रहा है। घनी बस्तियों में जल वितरण और निकासी की व्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि दोनों पाइपलाइने एक-दूसरे के बेहद करीब या एक ही स्तर पर बिछी हुई हैं। ऐसे में पाइपलाइन फटने या रिसाव होने की स्थिति में सीवेज सीधे पीने के पानी में मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए जलापूर्ति और ड्रेनेज विभाग के कार्यों हेतु 20 करोड़ 20 लाख रुपये का फंड ट्रांसफर किया गया है, लेकिन धरातल पर सुधार की गति कछुआ चाल से भी धीमी है। पिछले चार वर्षों से पुणे मनपा में प्रशासक राज लागू होने के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47900/contaminated-water-crisis-in-100-areas-in-pune-questions-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/gemini_generated_image_9iz1et9iz1et9iz1-1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पुणे : </strong>पुणे महानगर पालिका चुनाव के समय ‘साफ पानी’ का झुनझुना थमाने वाले नेताओं के दावे आज नलों से आ रही सीवेज की दुर्गंध में दम तोड़ रहे हैं। चुनावों के समय जिन राजनीतिक दलों ने घर-घर जाकर ‘शुद्ध जल’ का अमृत पिलाने का दावा किया था, आज उनके वादे मनपा की ड्रेनेज लाइनों में बहते नजर आ रहे हैं। शिकायत के बाद जलापूर्ति विभाग ‘मरम्मत’ का घिसा-पिटा बहाना बना रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि सांस्कृतिक राजधानी और शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले पुणे शहर में इन दिनों स्वास्थ्य का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले दो महीने से शहर के 100 से अधिक इलाकों में दुषित पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि नलों से आने वाले पानी में सीवेज की दुर्गंध और गंदगी साफ देखी जा सकती है। के कई यनी आबादी वाले क्षेत्रों में गंदे पानी की सप्लाई बदस्तूर जारी है, जिससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।<br /><br />प्रशासनिक रिपोटों के अनुसार, मलनिस्सारण विभाग के तहत आने वाले जोन क्रमांक 1 से 5 में सीवर लाइनों के जाम होने के कारण मलजल पेयजल की पाइपलाइनों में रिस रहा है। घनी बस्तियों में जल वितरण और निकासी की व्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि दोनों पाइपलाइने एक-दूसरे के बेहद करीब या एक ही स्तर पर बिछी हुई हैं। ऐसे में पाइपलाइन फटने या रिसाव होने की स्थिति में सीवेज सीधे पीने के पानी में मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए जलापूर्ति और ड्रेनेज विभाग के कार्यों हेतु 20 करोड़ 20 लाख रुपये का फंड ट्रांसफर किया गया है, लेकिन धरातल पर सुधार की गति कछुआ चाल से भी धीमी है। पिछले चार वर्षों से पुणे मनपा में प्रशासक राज लागू होने के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।<br /><br />अब जब नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि वापस आए हैं, तो जनरल बॉडी की बैठकों में नगरसेवकों ने इस मुद्दे पर प्रशासन को जमकर घेरा, नगरसेविका वैशाली बनकर ने सासवड रोड क्षेत्र की भयावह स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि वहां पाइपलाइन से सीधा सीवेज का पानी घरों में पहुंच रहा है। इसी तरह येरवडा से नगरसेविका अश्विनी लांडगे और वानवडी-कोंढवा क्षेत्र से नगरसेवक प्रशांत जगताप ने भी दूषित जलापूर्ति के कारण फैल रही बीमारियों का मुद्दा उठाया। नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। है। सर्वे के साथ-साथ दुरुस्ती कार्य जारी रखकर पेयजल में मिलावट की घटनाएं पूरी तरह रोकने का प्रयास किया जा रहा है।<br /><br />महापौर मंजुषा नागपुरे ने प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय में तत्काल बैठक करने के निर्देश दिए है। जलापूर्ति विभाग के मुख्य अभियंता ने भरोसा दिलाया है कि कोंढवा, मोहम्मदवाडी और हडपसर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तात्कालिक कार्य शुरू किए जाएंगे, हालांकि, हकीकत यह है कि मनपा ने जिन 98 स्थानों पर मरम्मत का प्रस्ताव रखा है, उनमें से केवल 50-55 जगहों पर ही काम शुरू हो पाया है।<br /><br />इंदौर और गुजरात के कुछ शहरों में दूषित पानी से हुई मौतों ने पुणे प्रशासन की नींद तो उड़ाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर सक्रियता अब भी कम है। कोढवा, शिवनेरी नगर, हडपसर, कात्रज के संतोषनगर और अंजनी नगर में लोग पेट दर्द, डायरिया और टायफाइड जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अगर पुरानी पाइपलाइनों को नहीं बदला गया, तो पुणे में जलजनित महामारी फैल जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:34:40 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर 250 रुपये जुर्माना लगेगा: बृह्नमुंबई महानगरपालिका</title>
                                    <description><![CDATA[<div>बृह्नमुंबई महानगरपालिका ने सोमवार को संशोधित स्वच्छता उपनियमों के तहत जुर्माने की अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने और कूड़ा फेंकने पर क्रमशः 250 रुपये और 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों या पक्षियों को खाना खिलाना और सार्वजनिक क्षेत्रों में बर्तन, कपड़े या अन्य सामान धोने पर क्रमशः 500 रुपये और 300 रुपये का जुर्माना लगेगा।</div>
<div> </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47439/mumbai-spitting-in-public-places-will-attract-a-fine-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-03t123531.500.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई : </strong>बृह्नमुंबई महानगरपालिका ने सोमवार को संशोधित स्वच्छता उपनियमों के तहत जुर्माने की अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने और कूड़ा फेंकने पर क्रमशः 250 रुपये और 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों या पक्षियों को खाना खिलाना और सार्वजनिक क्षेत्रों में बर्तन, कपड़े या अन्य सामान धोने पर क्रमशः 500 रुपये और 300 रुपये का जुर्माना लगेगा।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग न करने पर पहली बार में 200 रुपये का जुर्माना लगेगा और सार्वजनिक स्थानों पर वाहन धोने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने सोमवार को अपने संशोधित ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन), स्वच्छता और सफाई उपनियम 2025 के तहत जुर्माने की एक अनुसूची अधिसूचित की, जिसमें विभिन्न प्रकार के उल्लंघनों के लिए 200 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है।</div>
<div> </div>
<div>नगर निगम ने उपनियमों के तहत 21 अपराधों की पहचान की है, जिनमें खुले में पेशाब करना, सार्वजनिक स्थानों पर वाहन धोना, कचरा जलाना, सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों को खिलाना और निर्माण मलबे का अनुचित निपटान शामिल है। मुंबई को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर रखने के लिए इन अपराधों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47439/mumbai-spitting-in-public-places-will-attract-a-fine-of</link>
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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:36:59 +0530</pubDate>
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