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                <title>Municipal Corporation - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Municipal Corporation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>KDMC में होर्डिंग घोटाले का बड़ा खुलासा! 600 में करीब 400 होर्डिंग अवैध, 60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>KDMC की जांच में कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला क्षेत्र में करीब 400 अनधिकृत होर्डिंग्स पाए गए हैं। 2014 के बाद नई प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50–60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान है। प्रशासन ने सर्वे, बकाया वसूली और अवैध होर्डिंग्स हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51453/big-revelation-of-hoarding-scam-in-kdmc-about-400-out"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-design-2026-07-05t175502.188.jpg" alt=""></a><br /><p>कल्याण-डोंबिवली: कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) क्षेत्र में होर्डिंग्स को लेकर हुई जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि महानगरपालिका क्षेत्र में लगे करीब 600 होर्डिंग्स में से लगभग 400 होर्डिंग्स अनधिकृत हैं। इन अवैध होर्डिंग्स और वर्षों से नई निविदा प्रक्रिया नहीं होने के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50 से ₹60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है। <br /><br />2014 के बाद नहीं हुई नई निविदा प्रक्रिया<br />महानगरपालिका की तदर्थ समिति की जांच में सामने आया कि होर्डिंग्स लगाने और उनके संचालन के लिए वर्ष 2014 के बाद नई प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया नहीं की गई। इसके बजाय पहले से काम कर रही एजेंसियों के अनुबंधों को बार-बार नवीनीकृत और आगे बढ़ाया जाता रहा।<br />समिति के अनुसार, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया होती तो महानगरपालिका को होर्डिंग्स से हर साल लगभग ₹10 से ₹15 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता था। फिलहाल इस माध्यम से करीब ₹4 करोड़ सालाना राजस्व मिलने की जानकारी सामने आई है। <br /><br />कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला में बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग<br />जांच में पाया गया कि अनधिकृत होर्डिंग्स केवल एक इलाके तक सीमित नहीं हैं। कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला के प्रमुख रास्तों, व्यस्त चौराहों और रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी संख्या में अवैध विज्ञापन संरचनाएं लगी हुई हैं।</p>
<p><br />शुरुआत में महानगरपालिका के संपत्ति विभाग ने करीब 200 होर्डिंग्स को अनधिकृत बताया था। बाद की जांच और स्थल निरीक्षण के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 400 तक पहुंच गई। यानी KDMC क्षेत्र में मौजूद कुल होर्डिंग्स का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अनधिकृत पाए जाने का दावा किया गया है। <br /><br />100 वर्गफुट की अनुमति, मौके पर 200 वर्गफुट के होर्डिंग<br />जांच के दौरान होर्डिंग्स के आकार को लेकर भी गंभीर अनियमितता सामने आई। समिति के अनुसार, 100 से अधिक होर्डिंग संचालकों ने 100 वर्गफुट के विज्ञापन ढांचे की अनुमति ली थी, लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान कई जगह लगभग 200 वर्गफुट के होर्डिंग लगाए जाने की जानकारी सामने आई।</p>
<p><br />इससे यह सवाल भी उठाया गया कि अनुमति से अधिक बड़े होर्डिंग वर्षों तक प्रमुख स्थानों पर कैसे लगे रहे और संबंधित प्रशासनिक विभागों की निगरानी व्यवस्था क्यों प्रभावी नहीं रही। <br /><br />पालिका को करोड़ों के राजस्व का नुकसान<br />समिति के अनुसार, यदि होर्डिंग्स के लिए नियमित और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती तो KDMC को काफी अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता था। जांच में अनुमान लगाया गया है कि पिछले वर्षों में प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया नहीं होने और अनधिकृत होर्डिंग्स के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50–60 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ।<br />अब समिति ने इस पूरे मामले में राजस्व वसूली और अवैध होर्डिंग्स पर कार्रवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। <br /><br />अवैध होर्डिंग्स पर कार्रवाई की तैयारी<br />KDMC प्रशासन ने सभी होर्डिंग्स का वार्ड स्तर पर सर्वे और सत्यापन शुरू किया है। अनधिकृत होर्डिंग्स से बकाया शुल्क और अन्य देय राशि वसूलने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।<br />इसके अलावा अवैध होर्डिंग्स को हटाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। एक होर्डिंग को हटाने में करीब ₹2 लाख तक का खर्च आने का अनुमान है। समिति ने सुझाव दिया है कि ठेकेदार अवैध संरचनाओं को हटाकर उनसे निकलने वाले कबाड़ से अपनी लागत की भरपाई कर सके, जिससे महानगरपालिका पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो। <br /><br />नियमितीकरण के लिए सिर्फ 30 संचालक आगे आए<br />KDMC ने अनधिकृत होर्डिंग संचालकों को निर्धारित शुल्क और जरूरी दस्तावेज जमा कराकर अपने होर्डिंग नियमित कराने का अवसर भी दिया था। हालांकि, करीब 400 अनधिकृत होर्डिंग्स में से अब तक केवल 30 संचालकों ने नियमितीकरण के लिए आवेदन किया है।<br />प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले सभी अनधिकृत होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। <br /><br />अब जिम्मेदारी तय करने की मांग<br />होर्डिंग्स की संख्या, टेंडर प्रक्रिया और करोड़ों रुपये के अनुमानित राजस्व नुकसान के खुलासे के बाद KDMC की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। समिति ने पारदर्शी निविदा प्रक्रिया, नियमित निरीक्षण और राजस्व वसूली की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।<br />अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि KDMC प्रशासन अवैध होर्डिंग्स पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और वर्षों से कथित तौर पर जमा बकाया राशि की कितनी वसूली हो पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 14:13:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : मनपा की हेरीटेज इमारत में लगे दीमक... घटिया काम करने वाले ठेकेदार पर होगी कार्रवाई!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बीएमसी मुख्यालय की विस्तारित इमारत के नवीनीकरण कार्य की जानकारी देते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बताया कि यह काम 31 अगस्त 2009 को स्थायी समिति के प्रस्ताव के अनुसार शानदार इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। बाद में कार्य की अवधि बढ़ाई गई और यह काम वर्ष 2023 तक जारी रहा। प्रभाकर शिंदे ने कहा कि संबंधित ठेकेदार ने अब तक किस गुणवत्ता का काम किया है और निर्माण कार्य में कितनी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि काम में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बीएमसी मुख्यालय जैसी ऐतिहासिक इमारत में दीमक और रखरखाव की समस्या सामने आने के बाद अब भवन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50928/termite-infestation-in-municipal-corporations-heritage-building-action-will-be"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/88998.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> बीएमसी के ऐतिहासिक मुख्यालय भवन में दीमक लगने का मामला सामने आया है। भवन के कई कार्यालयों में दीमक के कारण दरवाजे खराब हो गए हैं, वहीं महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। कुछ दिन पहले मुख्यालय में स्लैब गिरने की घटना के बाद अब इस मामले को लेकर बीएमसी की स्थायी समिति में गंभीर नाराजगी व्यक्त की गई। स्थायी समिति की बैठक में भाजपा नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने यह मुद्दा उठाया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि बीएमसी मुख्यालय के कई कार्यालयों के दरवाजे दीमक से पूरी तरह खराब हो रहे हैं और रिकॉर्ड भी सुरक्षित नहीं हैं। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने मुख्यालय परिसर में बढ़ती गंदगी, तिलचट्टों और चूहों की समस्या तथा केबिन और शौचालयों की खराब स्थिति पर भी सवाल उठाए। सदस्यों ने प्रशासन से पूछा कि क्या ऐतिहासिक बीएमसी भवन के नवीनीकरण और रखरखाव के लिए कोई ठोस योजना बनाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी मुख्यालय की विस्तारित इमारत के नवीनीकरण कार्य की जानकारी देते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बताया कि यह काम 31 अगस्त 2009 को स्थायी समिति के प्रस्ताव के अनुसार शानदार इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। बाद में कार्य की अवधि बढ़ाई गई और यह काम वर्ष 2023 तक जारी रहा। प्रभाकर शिंदे ने कहा कि संबंधित ठेकेदार ने अब तक किस गुणवत्ता का काम किया है और निर्माण कार्य में कितनी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि काम में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बीएमसी मुख्यालय जैसी ऐतिहासिक इमारत में दीमक और रखरखाव की समस्या सामने आने के बाद अब भवन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:19:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिंपरी-चिंचवड महापालिका के ₹60 करोड़ घोटाले में ‘सेटिंग’ के आरोप, प्रशासन और सत्ताधारियों पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पिंपरी-चिंचवड महापालिका के कथित ₹60 करोड़ घोटाले में प्रशासन और सत्ताधारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान का आरोप है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49884/allegations-of-setting-in-60-crore-scam-of-pimpri-chinchwad-municipal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/110c66eb-4277-4383-b7e4-aa5c6462dcc9.jpg" alt=""></a><br /><p> महाराष्ट्र के Pimpri Chinchwad Municipal Corporation में सामने आए कथित ₹60 करोड़ के वित्तीय घोटाले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। जांच में फर्जी उपसूचनाओं (Bogus Sub-Notices) के जरिए ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आने के बावजूद अब तक किसी पर ठोस आपराधिक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। <br /><br />रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच समिति की 243 पन्नों की रिपोर्ट में 14 फर्जी उपसूचनाओं के माध्यम से करीब ₹60.18 करोड़ के भुगतान का उल्लेख किया गया है। इस मामले में मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी Praveen Jain का नाम लगातार चर्चा में है। <br /><br />मामले ने नया मोड़ तब लिया जब प्रवीण जैन को जबरन अवकाश (Compulsory Leave) पर भेजने के आदेश को उन्होंने प्रशासनिक न्यायाधिकरण (MAT) में चुनौती देकर रद्द करा लिया। इसके बाद महापालिका प्रशासन की कार्रवाई और उसकी कानूनी तैयारी पर सवाल खड़े हो गए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि कार्रवाई जानबूझकर कमजोर रखी गई ताकि बड़े अधिकारियों और राजनीतिक लोगों को बचाया जा सके। </p>
<p><br />महापालिका की सामान्य सभा में भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कई नगरसेवकों ने जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने की मांग की, लेकिन आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने यह कहते हुए रिपोर्ट पेश करने से इनकार कर दिया कि मामला सरकार को भेजा जा चुका है और आगे का फैसला राज्य सरकार करेगी। <br /><br />विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों और उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कुछ अधिकारी, ठेकेदार तथा सत्ताधारी और विपक्षी गुटों के नगरसेवक भी शामिल हो सकते हैं। </p>
<p>रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कई नगरसेवकों के हस्ताक्षर इन कथित फर्जी उपसूचनाओं पर पाए गए हैं। इससे पूरे मामले को दबाने और “सेटलमेंट” करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। </p>
<p>भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के भीतर भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताया है, जबकि कुछ नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष आपराधिक जांच होनी चाहिए। <br /><br />फिलहाल राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित आपराधिक जांच पर सबकी नजर बनी हुई है। शहर में यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित रहेगा या फिर इसमें बड़े स्तर पर FIR और गिरफ्तारी भी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49884/allegations-of-setting-in-60-crore-scam-of-pimpri-chinchwad-municipal</link>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासिक : म्हाडा घोटाला... 59 बिल्डरों को नोटिस, मनपा की बड़ी कार्रवाई;  अब जांच के घेरे में डेवलपर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49154/nashik-mhada-scam-notice-to-59-builders-big-action-by"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/rt3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नासिक : </strong>नासिक म्हाडा के साथ धोखाधड़ी कर गरीबों के घरों को हड़पने वाले बिल्डरों के खिलाफ नासिक महानगरपालिका (मनपा) ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया।<br /><br />इस घोटाले की गूंज अथ राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन तक पहुंच चुकी है। जांच का दायरा बढ़ने के बाद इसमें बिल्डरों के पार्टनर और जमीन मालिको के नाम भी शामिल किए गए है, जिससे आरोपियों की कुल संख्या 194 तक पहुंच गई है। भूमि अभिलेख विभाग ने पहले ही 49 विकासकों के खिलाफ सरकार वाडा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पूरे प्रकरण में अब तक केवल एक आरोपी, सोनू मनवानी, की गिरफ्तारी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 10 विकासकों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि अगले सप्ताह कुछ और बिल्डरी को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, मनपा अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि नगर रचना विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन ले-आउट्स को मंजूरी कैसे दी। इस मामले में नगर रचना विभाग के अधिकारी कल्पेश पाटिल द्वारा जांच समिति को पूरी जानकारी न दिए जाने के कारण विभाग की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:35:11 +0530</pubDate>
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