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                <title>Criminal - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Criminal RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : 13/7 मुंबई धमाकों का आरोपी बना क्रिमिनल लॉयर, जेल में रहकर पूरी की वकालत की पढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मु्ंबई के 13/7 सीरियल बम धमाकों के आरोपी नदीम अख्तर अशफाख शेख अब एक क्रिमिनल लॉयर बन गए हैं।  36 वर्षीय नदीम अख्तर अशफाक शेख ने 14 साल आर्थर रोड जेल में बिताए। इसी साल फरवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद, नदीम ने महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल से सनद हासिल किया और अब कोर्ट में दूसरे आरोपियों के केस लड़ रहे हैं। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51750/criminal-lawyer-accused-in-mumbai-137-mumbai-blasts-completed-his"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-08t124523.960.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मु्ंबई के 13/7 सीरियल बम धमाकों के आरोपी नदीम अख्तर अशफाख शेख अब एक क्रिमिनल लॉयर बन गए हैं।  36 वर्षीय नदीम अख्तर अशफाक शेख ने 14 साल आर्थर रोड जेल में बिताए। इसी साल फरवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद, नदीम ने महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल से सनद हासिल किया और अब कोर्ट में दूसरे आरोपियों के केस लड़ रहे हैं। </p>
<p> </p>
<p><strong>सिम कार्ड बिजनेस से जेल का सफर</strong><br />बिहार के दरभंगा में जन्मे नदीम 2002 में मुंबई आकर भायखला में बस गए। वह बीकॉम की पढ़ाई और पिज्जा डिलीवरी का काम करने के साथ अपने एक रिश्तेदार के सिम कार्ड बिजनेस में मदद करते थे।<br />13 जुलाई 2011 को मुंबई के ओपेरा हाउस, जवेरी बाजार और दादर में हुए तीन धमाकों में 27 लोगों की जान चली गई और 127 लोग घायल हुए।<br />जांच में सामने आया कि कुछ आरोपियों ने नदीम के रिश्तेदार की दुकान से सिम कार्ड खरीदे थे। इसी आधार पर जनवरी 2012 में 22 साल के नदीम को नागपाड़ा से गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मकोका सहित कई कड़े कानून लगा दिए गए।</p>
<p><strong>जेल में वकालत की पढ़ाई</strong><br />कड़ी सुरक्षा वाली आर्थर रोड जेल में रहते हुए नदीम में पढ़ाई की। 2014 में उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री पूरी की। 2019 में स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पास कर ठाणे के लॉ कॉलेज में एडमिशन लिया। जमीयत-उलमा-ए-हिंद की आर्थिक मदद से जेल में खुद पढ़ाई की और कोर्ट की मंजूरी व पुलिस सुरक्षा में जाकर लॉ परीक्षाएं दीं।</p>
<p><strong>14 साल बाद मिली जमानत</strong><br />ट्रायल में हो रही देरी को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस साल 10 फरवरी को नदीम को जमानत दे दी। कोर्ट ने माना कि निकट भविष्य में केस खत्म होने की संभावना नहीं है, क्योंकि 400 से ज्यादा गवाहों में से 10 साल में केवल 167 से ही पूछताछ हो सकी थी। इस लंबी अवधि के दौरान नदीम के पिता का भी निधन हो गया था।</p>
<p><strong>वकालत की शुरुआत</strong><br />जुलाई में सनद मिलने के बाद नदीम ने काला गाउन पहनकर कोर्ट में वकालत शुरू की। पहला केस उन्होंने हत्या के एक आरोपी का लड़ा। अब तक वे 4 केस ले चुके हैं, जिनमें से एक केस वे मुफ्त लड़ रहे हैं।<br />वकालत से अब तक उन्होंने 50,000 रुपये की कमाई की है।</p>
<p><strong>खुद को निर्दोष साबित करने में जुटे</strong><br />नदीम का कहना है कि उनके क्लाइंट्स को उनके पेंडिंग केस से कोई एतराज नहीं है, क्योंकि जेल में रहने के कारण वे कैदियों की समस्याओं को अन्य वकीलों से बेहतर समझते हैं। 14 साल तक लगातार पुलिस कस्टडी में रहने के बाद, अब वे अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं और कानूनी लड़ाई के जरिए खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश में जुटे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 12:47:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: वोटर लिस्ट रिविजन में लापरवाही का आरोप, भिवंडी के बीएलओ पर हो सकती है आपराधिक कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन अभियान के दौरान काम में लापरवाही बरतने के आरोप में भिवंडी के एक बूथ लेवल ऑफिसर  पर आपराधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। चुनाव विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50838/6a5c6aed9ab44"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-19t114658.850.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन अभियान के दौरान काम में लापरवाही बरतने के आरोप में भिवंडी के एक बूथ लेवल ऑफिसर  पर आपराधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। चुनाव विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला भिवंडी क्षेत्र से जुड़ा है, जहां चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे बीएलओ पर आरोप है कि उन्होंने अपने निर्धारित कार्यों को सही तरीके से पूरा नहीं किया। चुनाव विभाग का कहना है कि मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</p>
<p> </p>
<p>जानकारी के मुताबिक, भिवंडी निजामपुर सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की वार्ड कमिटी नंबर-2 से जुड़े क्लर्क अनंत शिवराम गारे को एसआईआर  अभियान के तहत भिवंडी ईस्ट विधानसभा क्षेत्र के लिए बूथ लेवल ऑफिसर नियुक्त किया गया था। बीएलओ की जिम्मेदारी मतदाताओं से संबंधित जानकारी का सत्यापन करना, योग्य मतदाताओं तक आवेदन फॉर्म पहुंचाना और प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा कराना होती है। अधिकारियों के मुताबिक, रिविजन प्रक्रिया के दौरान शिकायतें मिलीं कि अनंत शिवराम गारे अपने क्षेत्र के पात्र मतदाताओं को निर्धारित आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराने में विफल रहे। चुनाव कार्यक्रम के तहत बीएलओ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करें और आवश्यक दस्तावेजों तथा जानकारी के आधार पर मतदाता सूची को अपडेट करने में सहयोग करें।</p>
<p>चुनाव विभाग ने शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच कराई। जांच के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि संबंधित अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारियों का अपेक्षित तरीके से निर्वहन नहीं किया। मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है। इसमें नए मतदाताओं को जोड़ना, गलत या अपात्र नामों को हटाना और मतदाता विवरण में सुधार करना शामिल होता है। इस पूरी प्रक्रिया में बीएलओ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वे सीधे मतदाताओं से संपर्क करते हैं और जमीनी स्तर पर सत्यापन का काम करते हैं।</p>
<p>चुनाव अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी इस प्रक्रिया में लापरवाही करता है तो उसका असर चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित बीएलओ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मामला दर्ज करने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।</p>
<p>चुनाव विभाग का यह कदम उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है, जो चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों में तैनात हैं। विभाग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। भिवंडी क्षेत्र में एसआईआर अभियान के तहत मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया अभी जारी है। विभाग की टीमें इस बात की निगरानी कर रही हैं कि सभी बीएलओ अपने दायित्वों को समय पर और सही तरीके से पूरा करें। इस मामले के सामने आने के बाद चुनावी कार्यों में तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।</p>
<p>चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन लगातार यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया निष्पक्ष और त्रुटिरहित तरीके से पूरी हो। फिलहाल अनंत शिवराम गारे के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद तय की जाएगी। चुनाव विभाग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 11:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : चोरी और जबरन वसूली के आरोपों में क्रिमिनल केस दर्ज होने के बाद आरसीएफ के 4 पुलिसवाले सस्पेंड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आरसीएफ पुलिस स्टेशन के एंटी-टेररिज्म सेल से जुड़े एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने के लिए एक ऑफिशियल ऑपरेशन के दौरान कथित चोरी और जबरन वसूली का केस दर्ज किया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48253/4-rcf-policemen-suspended-after-criminal-case-registered-on-charges"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-07t123933.053.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>आरसीएफ पुलिस स्टेशन के एंटी-टेररिज्म सेल से जुड़े एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने के लिए एक ऑफिशियल ऑपरेशन के दौरान कथित चोरी और जबरन वसूली का केस दर्ज किया गया है। पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों में  एपीआई विजय महादेव सुतार और कांस्टेबल योगेश विलास खांडके, धनश्री रामचंद्र मोरे और रवींद्र बापूसाहेब नेमाने शामिल हैं। आरसीएफ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 305(ए), 308(2), 351(2) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।</p>
<p> </p>
<p>ये आरोप तब सामने आए जब टीम ने संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने के लिए एक ड्राइव के तहत छापेमारी करते हुए नवी मुंबई में एक महिला के घर से कथित तौर पर कैश और सोने के गहने चुरा लिए। एक और घटना में, उन्हीं आरोपियों पर कल्याण में एक संदिग्ध बांग्लादेशी महिला से ₹5 लाख की जबरन वसूली करने का आरोप है। शिकायत के बाद इंटरनल जांच शुरू हुई ऑफिशियल रेड के दौरान कथित गलत काम का पता तब चला जब एक सोशल एक्टिविस्ट ने शिकायत की, जिसके बाद इंटरनल जांच शुरू की गई। इसके बाद, डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस समीर शेख ने जांच चेंबूर पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दी।</p>
<p>गिरफ्तारी और सस्पेंशन के आदेश जांच के दौरान, एपीआई सुतार और कांस्टेबल योगेश खांडके को गिरफ्तार किया गया, जबकि कांस्टेबल धनश्री मोरे को मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था। तीनों को उनकी गिरफ्तारी की तारीख से डीम्ड सस्पेंशन के तहत रखा गया है। कॉन्स्टेबल रवींद्र नेमाने, जिनका नाम इस मामले में है, 25 जनवरी, 2026 को अपराध दर्ज होने के बाद से फरार हैं। चूंकि उनका अब तक पता नहीं चला है, इसलिए उन्हें भी उसी तारीख से डीम्ड सस्पेंशन के तहत रखा गया है।</p>
<p>सस्पेंशन ऑर्डर की डिटेल्स पुलिस ने कहा कि सुतार और खांडके ने 19 फरवरी को सस्पेंशन ऑर्डर स्वीकार कर लिए थे, जबकि मोरे ने 20 फरवरी को ऑर्डर को माना। क्योंकि नेमाने अभी भी फरार है और उसे उसके घर पर नहीं पाया जा सका, इसलिए 25 फरवरी को पंच गवाहों की मौजूदगी में उसके घर के दरवाज़े पर सस्पेंशन ऑर्डर चिपका दिया गया। मामले में आगे की जांच चल रही है। एपीआई विजय सुतार और कांस्टेबल योगेश खांडके को 25 मई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें उनकी गिरफ्तारी की तारीख से सस्पेंड माना गया। कांस्टेबल धनश्री मोरे को पहले 30 जनवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया था, और उनकी गिरफ्तारी की तारीख से उन्हें डीम्ड सस्पेंशन के तहत रखा गया है।</p>
<p>इस बीच, कांस्टेबल रवींद्र नेमाने 25 जनवरी, 2026 को अपराध दर्ज होने के बाद से फरार है। क्योंकि अब तक उसका पता नहीं चला है, इसलिए उसे अपराध दर्ज होने की तारीख से डीम्ड सस्पेंशन के तहत रखा गया है। एपीआई विजय सुतार और कांस्टेबल योगेश खांडके ने 19 फरवरी, 2026 को सस्पेंशन ऑर्डर स्वीकार किए, जबकि कांस्टेबल धनश्री मोरे ने 20 फरवरी, 2026 को ऑर्डर को माना। क्योंकि नेमाने अभी भी फरार है और अपने घर पर नहीं मिला, इसलिए सस्पेंशन ऑर्डर 25 फरवरी, 2026 को पंच गवाहों की मौजूदगी में उसके घर के दरवाज़े पर चिपका दिया गया। अधिकारियों ने सभी संबंधित लोगों से ऑर्डर पर ध्यान देने को कहा है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48253/4-rcf-policemen-suspended-after-criminal-case-registered-on-charges</link>
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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 12:40:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुणे  : पासपोर्ट बनवाने के लिए गलत जानकारी देने पर क्रिमिनल केस हो सकता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनवाने के लिए कुछ लोगों ने गलत जानकारी दी है। पासपोर्ट ऑफिस में जमा किया है। इससे सही जानकारी देने वालों को परेशानी हो रही है और हाल ही में 'AI' की वजह से गलत जानकारी जमा करने का रेट बढ़ गया है। चेतावनी दी गई है कि गलत जानकारी देकर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करने वालों पर अब सीधे क्रिमिनल केस दर्ज किया जाएगा। पुणे के डिविजनल पासपोर्ट ऑफिसर डॉ. विनोद गायकवाड़ ने यह जानकारी दी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47667/pune-giving-wrong-information-to-get-a-passport-can-lead"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-12t105717.225.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे : </strong>विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनवाने के लिए कुछ लोगों ने गलत जानकारी दी है। पासपोर्ट ऑफिस में जमा किया है। इससे सही जानकारी देने वालों को परेशानी हो रही है और हाल ही में 'AI' की वजह से गलत जानकारी जमा करने का रेट बढ़ गया है। चेतावनी दी गई है कि गलत जानकारी देकर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करने वालों पर अब सीधे क्रिमिनल केस दर्ज किया जाएगा। पुणे के डिविजनल पासपोर्ट ऑफिसर डॉ. विनोद गायकवाड़ ने यह जानकारी दी।</p>
<p> </p>
<p>वे पुणे श्रमिक पत्रकार संघ द्वारा आयोजित एक टॉक शो में बोल रहे थे। इस मौके पर सब-डिविजनल पासपोर्ट ऑफिसर श्रुति पांडे, जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बृजमोहन पाटिल, जनरल सेक्रेटरी मंगेश फाल्ले, पासपोर्ट ऑफिस के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर जतिन पोटे और अन्य लोग मौजूद थे। </p>
<p>डॉ. गायकवाड़ ने कहा कि पासपोर्ट ऑफिस का कामकाज अब पूरी तरह से डिजिटल हो गया है और अपॉइंटमेंट से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होता है। अगर सरकार द्वारा बताए गए डॉक्यूमेंट्स सही तरीके से जमा किए जाएं, तो पासपोर्ट बनवाने का प्रोसेस आसान और तेज हो जाता है। लेकिन, कई एप्लिकेंट पहले एप्लीकेशन फॉर्म भरते हैं और फिर डॉक्यूमेंट्स को मिलाते हैं। </p>
<p>इसी वजह से पासपोर्ट मिलने में दिक्कतें आती हैं। हमारा लक्ष्य 30 दिनों के अंदर एप्लिकेंट के घर पासपोर्ट पहुंचाना है। कुछ मामलों में, यह हासिल हो गया है। हालांकि, ज़्यादातर समय देरी अधूरे या गलत डॉक्यूमेंट्स जमा करने की वजह से होती है, उन्होंने बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47667/pune-giving-wrong-information-to-get-a-passport-can-lead</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 10:58:09 +0530</pubDate>
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