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                <title>Residents - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Residents RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वसई के लोगों ने एलपीजी की कमी को लेकर मुंबई-अहमदाबाद हाईवे जाम किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>खाड़ी देशों में चल रहे झगड़ों की वजह से दुनिया भर में फ़्यूल की दिक्कत भारत में भी दिखने लगी है। शनिवार को, परेशान लोग वसई में सड़कों पर उतर आए और घरेलू गैस की भारी कमी और बढ़ती कीमतों के विरोध में मुंबई-अहमदाबाद हाईवे को जाम कर दिया। महिलाओं ने मोर्चा संभाला इस विरोध प्रदर्शन में भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें लोगों ने – खासकर महिलाओं ने – मोर्चा संभाला। इस आंदोलन ने इलाके की सबसे व्यस्त लाइफलाइन में से एक को रोक दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48811/people-of-vasai-blocked-mumbai-ahmedabad-highway-due-to-shortage-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-29t180402.387.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वसई : </strong>खाड़ी देशों में चल रहे झगड़ों की वजह से दुनिया भर में फ़्यूल की दिक्कत भारत में भी दिखने लगी है। शनिवार को, परेशान लोग वसई में सड़कों पर उतर आए और घरेलू गैस की भारी कमी और बढ़ती कीमतों के विरोध में मुंबई-अहमदाबाद हाईवे को जाम कर दिया। महिलाओं ने मोर्चा संभाला इस विरोध प्रदर्शन में भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें लोगों ने – खासकर महिलाओं ने – मोर्चा संभाला। इस आंदोलन ने इलाके की सबसे व्यस्त लाइफलाइन में से एक को रोक दिया।</p>
<p> </p>
<p>प्रदर्शनकारी खाली सिलेंडर के साथ हाईवे के बीच में बैठ गए और प्रशासन के "निष्क्रिय" शासन के खिलाफ नारे लगाने लगे। संदेश साफ़ था: "हमें गैस दो, नहीं तो हम सड़क खाली नहीं करेंगे।" कई घरों ने बताया कि उन्हें रिफिल के लिए 10 से 15 दिन इंतज़ार करना पड़ा, जिससे किचन बंद करने पड़े। स्थानीय होटल मालिक भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, और कहा कि उनकी रोज़ी-रोटी दांव पर लगी है। प्रशासन का जवाब और ट्रैफ़िक में गड़बड़ी<br />नाकाबंदी की वजह से भारी ट्रैफ़िक जाम हो गया, और गाड़ियों की कई किलोमीटर तक लाइनें लग गईं। गतिरोध जारी रहने से यात्रियों को काफ़ी देरी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी: अगर सप्लाई चेन तुरंत ठीक नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज़ हो जाएगा।</p>
<p>एक नाराज़ निवासी ने कहा, "हमारे घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं, जबकि प्रशासन खोखले वादे करने में लगा हुआ है।" फ्यूल की कमी के लोगों के गुस्से में बदलने के साथ, अब प्रशासन पर सिर्फ़ बोलने वाले भरोसे से ज़्यादा कुछ देने का दबाव है। अगर जल्दी एक्शन नहीं लिया गया, तो ज़िले के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह के "रास्ता रोको" (रोड ब्लॉक) विरोध प्रदर्शन होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 18:04:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : कोस्टल रोड का म्यूजिकल स्ट्रेच बना निवासियों के लिए सिरदर्द; जताया विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोस्टल रोड पर तैयार किया गया 'म्यूजिकल स्ट्रेच' सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। तय रफ्तार पर वाहन चलाने पर सड़क पर लगे रम्बल स्ट्रिप्स से टकराकर मशहूर गीत 'जै हो' की धुन बजती है। लेकिन जो प्रयोग एक सकारात्मक अनुभव के लिए शुरू किया गया था, वही अब आसपास रहने वाले लोगों के लिए रोज की परेशानी बन गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47850/mumbai-coastal-road-becomes-a-musical-stretch-residents-protest-against"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-19t122958.258.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कोस्टल रोड पर तैयार किया गया 'म्यूजिकल स्ट्रेच' सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। तय रफ्तार पर वाहन चलाने पर सड़क पर लगे रम्बल स्ट्रिप्स से टकराकर मशहूर गीत 'जै हो' की धुन बजती है। लेकिन जो प्रयोग एक सकारात्मक अनुभव के लिए शुरू किया गया था, वही अब आसपास रहने वाले लोगों के लिए रोज की परेशानी बन गया है। कोस्टल रोड के पास बसे घनी आबादी वाले इलाकों के निवासियों ने इस पहल पर कड़ा विरोध जताया है। ब्रिच कैंडी एएलएम और ब्रिच कैंडी रेजिडेंट्स फोरम ने इस मुद्दे को लेकर नगर आयुक्त को पत्र लिखा है, जिसकी प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजी गई है। निवासियों का कहना है कि यह सुविधा अब राहत नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला शोर बन चुकी है। </p>
<p> </p>
<p><strong>सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक क्या हो रहा है?</strong><br />650 से अधिक परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले निवासियों के अनुसार, यह संगीत रोजाना सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक बजता रहता है। पत्र में बताया गया है कि यह आवाज घरों के भीतर तक "मद्धम लेकिन लगातार दखल देने वाले शोर" के रूप में पहुंचती है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को दिनभर खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं, जिससे खासकर बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>क्या यह सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा है? </strong><br />निवासियों का मानना है कि यह पहल सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरी है। तेज रफ्तार वाली उत्तर दिशा की लेन पर ड्राइवर संगीत सुनने में उलझ जाते हैं। कई वाहन चालक धुन सुनने के लिए अचानक रफ्तार कम कर देते हैं, जिससे पीछे से आने वाले वाहनों के टकराने का खतरा बढ़ जाता है। इस तरह की अनियमित ड्राइविंग से गंभीर हादसे या बड़े स्तर पर टक्कर की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्या मुंबई को और शोर की जरूरत है?</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि मुंबई पहले ही हॉर्न और ट्रैफिक शोर से जूझ रही है। ऐसे में सड़क पर तेज आवाज में बजने वाला संगीत समस्या को और बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि: यह पहल गैर-जरूरी है और शोर प्रदूषण को बढ़ाती है। सड़क के आसपास स्कूल और अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान मौजूद हैं, जहां शांति बेहद जरूरी है।</p>
<p><strong>निवासियों की मांग क्या है?</strong><br />निवासियों ने नगर प्रशासन से अपील की है कि इस संगीत पहल की तुरंत समीक्षा की जाए और इसे बंद किया जाए। उनका कहना है कि पहले से मौजूद सुपरकार्स और तेज़ वाहनों से होने वाला शोर ही पर्याप्त है, ऐसे में यह प्रयोग स्थानीय जीवन को और अधिक बाधित कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 12:30:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई की इस सोसायटी में रहने के पैसे नहीं देने पड़ते, उल्टा रहने वालों को लाखों रुपए मिलते हैं हर साल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महानगरों में ऊंची-ऊंची सोसायटियों में फ्लैट खरीदना हर किसी का सपना होता है. बिल्डर शुरुआत में शानदार सुविधाओं और लग्ज़री लाइफ का वादा करते हैं, लेकिन घर मिलने के बाद असली सच्चाई सामने आती है, हर महीने भारी भरकम मेंटेनेंस बिल. आमतौर पर भारत में सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क 2 से 25 रुपए प्रति वर्ग फुट तक होता है. लेकिन मुंबई में एक ऐसी सोसायटी है, जहां रहने वाले मेंटेनेंस नहीं देते, बल्कि हर साल लाखों रुपए कमाते हैं. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47520/one-does-not-have-to-pay-for-living-in-this"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-06t140306.578.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महानगरों में ऊंची-ऊंची सोसायटियों में फ्लैट खरीदना हर किसी का सपना होता है. बिल्डर शुरुआत में शानदार सुविधाओं और लग्ज़री लाइफ का वादा करते हैं, लेकिन घर मिलने के बाद असली सच्चाई सामने आती है, हर महीने भारी भरकम मेंटेनेंस बिल. आमतौर पर भारत में सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क 2 से 25 रुपए प्रति वर्ग फुट तक होता है. लेकिन मुंबई में एक ऐसी सोसायटी है, जहां रहने वाले मेंटेनेंस नहीं देते, बल्कि हर साल लाखों रुपए कमाते हैं. </p>
<p> </p>
<p><strong>1970 के दशक में बनी, आज भी अनोखी </strong><br />मुंबई के कफ परेड इलाके में स्थित जॉली मेकर 1 सोसायटी का निर्माण 1970 के दशक में जॉली ग्रुप ने किया था. रियल एस्टेट ब्लॉगर विशाल भार्गव के मुताबिक, यह सोसायटी अपने हर रेज़िडेंट को सालाना करीब 2.5 लाख रुपए तक का डिविडेंड देती है.  इस सोसायटी में दो 25 मंज़िला रेज़िडेंशियल टावर, कुल 180 फ्लैट और 10 बंगलों शामिल हैं. यह मुंबई की सबसे आलीशान और कैश-रिच सोसायटियों में गिनी जाती है.</p>
<p><strong>मेंटेनेंस नहीं, उल्टा कमाई </strong><br />इस सोसायटी की सबसे खास बात यह है कि यहां रहने वाले किसी भी तरह का मासिक मेंटेनेंस नहीं देते. बिजली, पानी, टैक्स जैसे सभी खर्च सोसायटी खुद उठाती है. रेज़िडेंट्स से सिर्फ नाममात्र का एक पैसा प्रति वर्ग फुट प्रति माह लिया जाता है, जबकि आसपास की सोसायटियों में यह दर कई गुना ज्यादा है. इसका कारण है सोसायटी के पास मौजूद 25 से 30 करोड़ रुपए का रिज़र्व और सिंकिंग फंड.</p>
<p>इस कमाल की योजना के पीछे एक दूरदर्शी निवेश छिपा है. जॉली मेकर 1 में फ्लैट खरीदने वालों को नरीमन पॉइंट की एक कमर्शियल बिल्डिंग में भी हिस्सेदारी दी गई थी. उस समय खरीदारों ने करीब 40 प्रतिशत प्रीमियम चुकाया था. आज उसी कमर्शियल इमारत से करीब 50 लाख रुपए महीना किराया आता है. इसी किराये से जॉली मेकर 1 की पूरी मेंटेनेंस होती है और रेज़िडेंट्स को सालाना डिविडेंड दिया जाता है. </p>
<p><strong>डिविडेंड कैसे बढ़ता गया </strong><br />एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 में सोसायटी हर फ्लैट मालिक को 100 रुपए प्रति वर्ग फुट सालाना डिविडेंड देती थी. 2012 तक यह रकम बढ़कर 300 रुपए प्रति वर्ग फुट हो गई. यानि 2500 वर्ग फुट के फ्लैट में रहने वाला व्यक्ति सालाना 7.5 लाख रुपए तक कमा रहा था. हाल के वर्षों में डिविडेंड बढ़ा या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है. 2012 में यहां एक फ्लैट 1.11 लाख रुपए प्रति वर्ग फुट में बिका था, जिसकी कुल कीमत करीब 29 करोड़ रुपए रही. आज भी यहां की प्रॉपर्टी की कीमतें 75,000 रुपए प्रति वर्ग फुट से ऊपर बताई जाती हैं. </p>
<p><strong>निवेश जिसने ज़िंदगी भर फायदा दिया </strong><br />जॉली मेकर 1 इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर किया गया समझदारी भरा निवेश कैसे एक पूरी पीढ़ी के लिए मुफ्त मेंटेनेंस और स्थायी आय का ज़रिया बन सकता है. यही वजह है कि यह सोसायटी आज भी मुंबई की सबसे अनोखी और चर्चित रेज़िडेंशियल इमारतों में शामिल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:04:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में प्रदूषण का अटैक, बढ़ते वायु प्रदूषण सूचकांक के बीच छाई धुंध; लोगों से की गई घरों में रहने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आमतौर पर बढ़ती ठंड के साथ दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। मगर, इस बार प्रदूषण ने देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई पर धावा बोला है। बीते दिन (31 जनवरी 2026) को मुंबई का वायु प्रदूषण सूचकांक गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया। मुंबई में सुबह की शुरुआत धुंध के साथ हुई है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। वहीं, हल्की ठंड के बीच छाई धुंध स विजिबिलटी भी काफी कम हो गई है। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47403/pollution-attack-in-mumbai-haze-prevails-amid-rising-air-pollution"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-01-30t123713.346.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> आमतौर पर बढ़ती ठंड के साथ दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। मगर, इस बार प्रदूषण ने देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई पर धावा बोला है। बीते दिन (31 जनवरी 2026) को मुंबई का वायु प्रदूषण सूचकांक गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया। मुंबई में सुबह की शुरुआत धुंध के साथ हुई है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। वहीं, हल्की ठंड के बीच छाई धुंध स विजिबिलटी भी काफी कम हो गई है। </p>
<p> </p>
<p><br />मुंबई के कई इलाकों से प्रदूषण की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। भारी धुंध के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। </p>
<p><br />मुंबई के प्रभादेवी में एल्फिंस्टन ब्रिज के आसपास वायु प्रदूषण सूचकांक  258 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक माना जाता है। मुंबई के AQI से बढ़ते प्रदूषण के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में मुंबई में सांस लेना हर दिन 5 सिगरेट पीने के बराबर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47403/pollution-attack-in-mumbai-haze-prevails-amid-rising-air-pollution</link>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 13:21:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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