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                <title>sea - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>sea RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई और कोलकाता समुद्र का जलस्तर बढ़ने से हो सकते हैं प्रभावित; यूएन रिपोर्ट की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कोलकाता और मुंबई में रह रहे लाखों लोग बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। सोमवार को जारी रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ने के असर को लेकर कई गंभीर चेतावनियां दी गई हैं।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51639/mumbai-and-kolkata-may-be-affected-by-rising-sea-level"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/sealevelpixabay-1788241016944_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कोलकाता और मुंबई में रह रहे लाखों लोग बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। सोमवार को जारी रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ने के असर को लेकर कई गंभीर चेतावनियां दी गई हैं।</p>
<p> </p>
<p>पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स की 55वीं बैठक में सेक्रेटरी-जनरल अमीना मोहम्मद ने जो रिपोर्ट जारी की, उसके मुताबिक 2024 में समुद्र के जलस्तर में सालाना बढ़ोतरी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है और यह लगभग छह मिलीमीटर दर्ज की गई है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, “दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा इलाकों और भारत के कोलकाता और मुंबई व बांग्लादेश के ढाका जैसे शहरों में सबसे बड़ा असर लोगों के विस्थापन के रूप में दिख रहा है। यहां एक करोड़ चालीस लाख से अधिक लोगों के घर हमेशा के लिए पानी में डूबने का खतरा है।” रिपोर्ट में इस स्थिति के होने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है।</p>
<p>न्यूयॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल नाविद हनीफ ने कहा कि “समुद्र के बढ़ते जलस्तर को एक बड़ी व्यवस्थागत समस्या के तौर पर देखें, क्योंकि इसका असर सेहत, खाद्य सुरक्षा, मानवाधिकारों और संस्कृति पर पड़ेगा।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 12:52:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुंबई, जिसकी हवा में कभी समंदर की नमकीन ताजगी और सपनों की महक हुआ करती थी, आज बीमारियों का शहर!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">केईएम, सायन, नायर सहित कई सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों सांस संबंधी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। हर दूसरे घर में कोई न कोई लगातार खांसी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा या एलर्जी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। शहर को सुंदर बनाने की योजनाओं के बीच लोगों की सेहत पर बढ़ता खतरा चिंता का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि यदि लोगों को स्वच्छ हवा ही न मिले, तो विकास का क्या अर्थ रह जाता है।<br />मुंबईकरों का सवाल – यह विकास है या विनाश?</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50922/mumbai-whose-air-once-had-the-salty-freshness-of-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/daf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई, जिसकी हवा में कभी समंदर की नमकीन ताजगी और सपनों की महक हुआ करती थी, आज उसी शहर की हवा में प्रदूषण घुल चुका है। सपनों का शहर कहलाने वाली मुंबई अब कंक्रीट का ऐसा जंगल बन चुकी है, जहां सांस लेना भी चुनौती बन गया है। सुंदर मुंबई और वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों के बीच आम मुंबईकर बीमारियों की मार झेल रहा है। चारों ओर उड़ती धूल, बेहिसाब निर्माण कार्य, उखड़ी सड़कें और धुएं के गुबार ने शहर के आसमान को धुंधला कर दिया है। जो शहर कभी रुकता नहीं था, आज वही मुंबई खांसते-खांसते हांफ रही है।<br /><br />शहर के कोने-कोने में चल रहे रीडेवलपमेंट, कोस्टल रोड, मेट्रो परियोजनाओं और तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों ने मुंबई की हवा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। नियम-कायदों की अनदेखी और हरित आवरण की कमी के बीच हो रहे निर्माण कार्यों ने वायु गुणवत्ता को चिंताजनक स्तर पर पहुंचा दिया है। मनपा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुंबईकर हर दिन प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।<br /><br />केईएम, सायन, नायर सहित कई सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों सांस संबंधी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। हर दूसरे घर में कोई न कोई लगातार खांसी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा या एलर्जी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। शहर को सुंदर बनाने की योजनाओं के बीच लोगों की सेहत पर बढ़ता खतरा चिंता का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि यदि लोगों को स्वच्छ हवा ही न मिले, तो विकास का क्या अर्थ रह जाता है।<br />मुंबईकरों का सवाल – यह विकास है या विनाश?</p>
<p>गिरगांव निवासी रवींद्र सावंत कहते हैं, ‘हमने अपनी पूरी जिंदगी मुंबई में बिताई है। पहले समंदर की हवा में ताजगी होती थी, लेकिन अब खिड़की खोलते ही घर में धूल की परत जम जाती है। नाती-पोतों को बाहर खेलने भेजने में डर लगता है।’ वहीं, कुर्ला निवासी सुनीता पाटील का कहना है, ‘अब डॉक्टर के यहां जाना राशन की दुकान जाने जैसा हो गया है। हर महीने बच्चों की नेबुलाइजर और दवाइयों पर हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं। क्या हमें इसी स्मार्ट मुंबई का सपना दिखाया गया था?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:09:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का काम तेज, समुद्र के नीचे दूसरी टीबीएम ने भी शुरू की सुरंग की खोदाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(0,0,0);">मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक (संकरी समुद्री खाड़ी) के नीचे रेल सुरंग बनाने के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने खोदाई का काम शुरू कर दिया। इस काम को अंजाम दे रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, टीबीएम ने सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर खोदाई का काम शुरू किया। यह बुलेट ट्रेन परियोजना के 10 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से का भाग है, जिसमें सात किलोमीटर का सबसे अहम हिस्सा ठाणे क्रीक के समुद्र तल के नीचे बनेगा। यह किसी भी रेल गलियारे के लिए देश की पहली समुद्र के नीचे बनी सुरंग होगी।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50831/6a5c654ead433"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/bullet-train-news-trains-1779016984914_d-1784395996996_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक (संकरी समुद्री खाड़ी) के नीचे रेल सुरंग बनाने के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने खोदाई का काम शुरू कर दिया। इस काम को अंजाम दे रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, टीबीएम ने सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर खोदाई का काम शुरू किया। यह बुलेट ट्रेन परियोजना के 10 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से का भाग है, जिसमें सात किलोमीटर का सबसे अहम हिस्सा ठाणे क्रीक के समुद्र तल के नीचे बनेगा। यह किसी भी रेल गलियारे के लिए देश की पहली समुद्र के नीचे बनी सुरंग होगी। समुद्र के नीचे वाला यह हिस्सा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें से सावली और मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच 16 किलोमीटर का काम टीबीएम का इस्तेमाल करके किया जा रहा है, जबकि बाकी पांच किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का इस्तेमाल से पहले ही पूरा किया जा चुका है। पहली टीबीएम ने इससे पहले पांच जुलाई को विक्रोली से बीकेसी की तरफ अपनी छह किलोमीटर की खोदाई शुरू की थी। एनएचएसआरसीएल का कहना है कि यह टीबीएम भारत में रेल सुरंग बनाने के लिए इस्तेमाल की गई अब तक की सबसे बड़ी मशीनों में से एक है। इस मशीन में चार मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर का 13.6 मीटर व्यास वाला कटरहेड है। इसका वजन 500 एशियाई हाथियों के वजन के बराबर 3,200 टन है। पूरी मशीन की लंबाई 96 मीटर है। </p>
<p> </p>
<p><strong>पालघर में पुल गिरा, कटे दो गांव; नागपुर में ट्रेन की टक्कर से छह हिरणों की मौत</strong><br />महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई तालुका में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हुआ। यहां मेढे आंबोडे ग्राम पंचायत इलाके में एक पुल अचानक ढह गया। इस घटना की वजह से वडघर और कलंबोल गांवों का आपस में और बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि ग्रामीणों की आवाजाही के लिए फिलहाल निर्माणाधीन मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे से एक अस्थायी रास्ता (बायपास) तैयार किया गया है। </p>
<p>दूसरी तरफ, नागपुर जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल लाइन पर कन्हान रेलवे स्टेशन के पास एक तेज रफ्तार ट्रेन ने हिरणों के झुंड को कुचल दिया। यह हादसा शनिवार तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच हुआ, जब हिरण पटरी पार कर रहे थे। ट्रेन की टक्कर इतनी भीषण थी कि पांच मादा और एक नर हिरण की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>10 साल तक डीसीपी बनकर लाखों ठगे एएसआई गिरफ्तार</strong><br />महाराष्ट्र के मुंबई में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) का भेष धर कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले रेलवे पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अपराध शाखा के एक अधिकारी से शनिवार को मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी एएसआई मोहम्मद गौस इब्राहिम खतीब करीब 10 साल तक डीसीपी डॉ राज खतीबा बनकर ठगी करता रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 11:22:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक के पास मिला हंपबैक व्हेल का शव </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में शनिवार को उस समय सनसनी फैल गई जब बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक के पास ओटर्स क्लब के नजदीक चट्टानों के बीच एक हंपबैक व्हेल का बच्चा फंसा हुआ पाया गया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें व्हेल का शव चट्टानों के बीच फंसा दिखाई दे रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50462/body-of-humpback-whale-found-near-bandra-versova-sea-link"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/whle.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में शनिवार को उस समय सनसनी फैल गई जब बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक के पास ओटर्स क्लब के नजदीक चट्टानों के बीच एक हंपबैक व्हेल का बच्चा फंसा हुआ पाया गया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें व्हेल का शव चट्टानों के बीच फंसा दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, यह हंपबैक व्हेल लगभग 26 फीट लंबी थी। घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड और बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक प्रोजेक्ट की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। हालांकि, जांच के बाद व्हेल को मृत घोषित कर दिया गया।</p>
<p> </p>
<p>रेस्क्यू टीम ने क्रेन की मदद से बेहद सावधानीपूर्वक व्हेल के शव को चट्टानी इलाके से बाहर निकाला। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से हटाकर दफनाने के लिए ले जाया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण नियमों का विशेष ध्यान रखा गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि समुद्र की तेज लहरें किनारे से टकरा रही थीं और मौसम भी खराब स्थिति में था। व्हेल का शव चट्टानों के बीच फंसा हुआ दिखाई देता है, जिसे देखकर लोगों में चिंता और हैरानी दोनों देखी गई।</p>
<p>प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, हंपबैक व्हेल संभवतः हाई टाइड के दौरान समुद्र से बहकर किनारे पर आ गई होगी और फिर चट्टानों के बीच फंस गई। हालांकि, इसके पीछे का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है और संबंधित विभाग इसकी जांच कर रहे हैं। समुद्री जीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले कभी-कभी समुद्री धाराओं में बदलाव, खराब मौसम या प्राकृतिक कारणों से भी हो सकते हैं। व्हेल जैसे बड़े समुद्री जीवों का किनारे पर आना एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति मानी जाती है।</p>
<p>स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह के समय समुद्र में असामान्य हलचल देखी गई थी और कुछ ही समय बाद व्हेल के फंसे होने की सूचना मिली। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। मुंबई फायर ब्रिगेड की टीम ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था क्योंकि क्षेत्र चट्टानी और फिसलन भरा था। इसके बावजूद टीम ने सावधानीपूर्वक शव को हटाने का काम पूरा किया।</p>
<p>अधिकारियों ने यह भी कहा कि समुद्री जीवों की सुरक्षा और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि व्हेल की मौत का वास्तविक कारण क्या था। इस घटना ने एक बार फिर समुद्री पर्यावरण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन भी ऐसे मामलों में भूमिका निभा सकते हैं। कुल मिलाकर, बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक के पास मिली हंपबैक व्हेल की यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि समुद्री जीवन संरक्षण की आवश्यकता को भी उजागर करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 11:47:51 +0530</pubDate>
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