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                <title>deaths - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>deaths RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : दिल, दिमाग, आंत का रंग हरा, फूड पॉइजनिंग से मौतें नहीं, मुंबई तरबूज केस की मिस्ट्री गहराई, आखिर उस रात क्या हुआ था?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पायधुनी इलाके मुंबई में हाल ही में हुई एक घटना, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सचमुच बिरयानी खाने के बाद खाया गया तरबूज़ ही उनकी मौत का कारण बना, या इसके पीछे कोई और वजह है? शुरुआती अंदाज़ों में तरबूज़ को ही इसका दोषी माना जा रहा था, जिसके चलते वह स्थानीय बाज़ारों से गायब हो गया। हालांकि, नई जानकारियों से पता चलता है कि अब्दुल्ला डोकाडिया के परिवार की मौत का कारण शायद तरबूज़ नहीं, बल्कि ज़हर था। हालांकि एफएसडीए को घर से लिए गए सैंपल्स में कहीं भी जहर नहीं मिली है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49660/mumbai-heart-brain-intestine-color-green-deaths-not-due-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-03t140745.334.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>पायधुनी इलाके मुंबई में हाल ही में हुई एक घटना, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सचमुच बिरयानी खाने के बाद खाया गया तरबूज़ ही उनकी मौत का कारण बना, या इसके पीछे कोई और वजह है? शुरुआती अंदाज़ों में तरबूज़ को ही इसका दोषी माना जा रहा था, जिसके चलते वह स्थानीय बाज़ारों से गायब हो गया। हालांकि, नई जानकारियों से पता चलता है कि अब्दुल्ला डोकाडिया के परिवार की मौत का कारण शायद तरबूज़ नहीं, बल्कि ज़हर था। हालांकि एफएसडीए को घर से लिए गए सैंपल्स में कहीं भी जहर नहीं मिली है। </p>
<p> </p>
<p>अधिकारियों ने अब्दुल्ला कोडाडिया घर से कुल 11 सैंपल लिए थे, जिनमें बिरयानी, तरबूज, फ्रिज का पानी, कच्चा और पका हुआ चावल, चिकन, खजूर और मसाले जैसी चीजें शामिल थीं। इन सभी की जांच में मिलावट के कोई सबूत नहीं मिले, जिससे मामला और उलझ गया है।</p>
<p><strong>शरीर में कैसे पहुंचा मॉर्फीन?</strong><br />वहीं दूसरी तरफ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कुछ अलग इशारा कर रही है। रिपोर्ट में मृतकों के शरीर में मॉर्फीन की मौजूदगी पाई गई है, जो एक तरह की दर्द निवारक दवा है। इसके अलावा शरीर के कुछ टिश्यू में असामान्य हरे रंग का बदलाव भी देखा गया है। आमतौर पर ऐसा बदलाव किसी जहरीले पदार्थ की वजह से हो सकता है। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि यह जहर क्या था और शरीर में कैसे पहुंचा।</p>
<p><strong>परिवार ने खाया था तरबूज</strong><br />यह मामला 26 अप्रैल को सामने आया था, जब 40 साल के अब्दुल्ला दोकाडिया को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि तरबूज खाने के बाद उनकी, उनकी पत्नी नसरीन (35) और दोनों बेटियों आयशा (16) और जैनब (13) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। देखते ही देखते हालत इतनी खराब हो गई कि चारों की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। </p>
<p><strong>पुलिस को अब तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला</strong><br />जांच अधिकारियों का कहना है कि वे हर एंगल से मामले को देख रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। कलीना फॉरेंसिक लैब, एफडीए और जेजे अस्पताल की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि इस केस में किसी प्रकार के जहर का सेवन हुआ था या नहीं और अगर हुआ था, तो उसका समय क्या था। </p>
<p>पुलिस के मुताबिक इस केस में अब तक कोई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने नहीं आया है। परिजनों के बयानों में परिवार को खुशहाल बताया गया है और किसी तरह के विवाद या चिंता की जानकारी नहीं मिली है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। </p>
<p><strong>फूड पॉइजनिंग नहीं तो क्या?</strong><br />रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मौत की वजह तरबूज़ नहीं, बल्कि कोई ज़हरीला पदार्थ था जिसने पीड़ितों के अंगों को नुकसान पहुंचाया। सूत्रों से पता चला है कि शुरुआती फ़ॉरेंसिक जांच में यह सामने आया कि पीड़ितों के कुछ अंग,दिमाग, दिल और आंत हरे रंग के हो गए थे। इस मामले की जांच कर रहे मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया कि लक्षण और शरीर के अंदर मिले नतीजे, फ़ूड पॉइज़निंग के आम मामलों से मेल नहीं खाते थे। इसके अलावा, अब्दुल्ला डोकाडिया के शरीर में मॉर्फीन पाया गया।</p>
<p>मॉर्फीन एक बहुत असरदार दर्द निवारक दवा है, जिसे आम तौर पर डॉक्टरों की देखरेख में ही दिया जाता है। जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस नतीजे का मतलब यह है कि पहले कोई मेडिकल इलाज हुआ था, या यह किसी दुर्घटना की वजह से शरीर में चला गया था, या फिर इसके पीछे कोई और संदिग्ध वजह है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय; आखिर कब थमेगा मौत और हादसों का सिलसिला?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>देश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय बने गए हैं। तय सीमा से अधिक रफ्तार, कमजोर निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे तमाम कारणों से इस एक्सप्रेस-वे पर आए-दिन एक्सीडेंट हो रहे है। इसी वजह से लोग अब इसे एक्सप्रेस-वे की जगह 'डेथ-वे' यानि मौत का रास्ता तक कहने लगे हैं। हर हादसे के बाद रोकथाम के दावे किए गए, लेकिन ये दावे सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकले।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49621/increasing-road-accidents-on-delhi-mumbai-expressway-is-a-matter-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/images-(67).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>देश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय बने गए हैं। तय सीमा से अधिक रफ्तार, कमजोर निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे तमाम कारणों से इस एक्सप्रेस-वे पर आए-दिन एक्सीडेंट हो रहे है। इसी वजह से लोग अब इसे एक्सप्रेस-वे की जगह 'डेथ-वे' यानि मौत का रास्ता तक कहने लगे हैं। हर हादसे के बाद रोकथाम के दावे किए गए, लेकिन ये दावे सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकले।</p>
<p> </p>
<p>हाल यह है कि रोक के बावजूद इस पर दुपहिया वाहन दौड़ते हैं। आवारा पशु तक एक्सप्रेस-वे पर आ जाते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी और कम समय में लंबी दूरी तय करने के दावे के साथ शुरू किया गया यह एक्सप्रेस-वे सुरक्षा के मोर्चे पर सवालों के घेरे में है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे ने जहां यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाया है, वहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी इसे आम लोगों के लिए खतरनाक भी बना रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हादसों का यह सिलसिला और अधिक भयावह हो सकता है।<br />विशेषज्ञों के अनुसार इन हादसों के लिए तय गति सीमा से अधिक रफ्तार, लेन डिसिप्लेन का पालन न होना और तकनीकी निगरानी की विफलता इसके प्रमुख कारण है। यह परियोजना इस दावे के साथ शुरू की गई थी कि इससे यात्रा का समय घटेगा, व्यापार को गति मिलेगी और सड़क परिवहन सुरक्षित होगा। जिस एक्सप्रेस-वे को सुविधा और रफ्तार का प्रतीक होना था, वह अब लगातार हो रहे हादसों का प्रतीक बनती जा रही है। यह एक्सप्रेस-वे देश के आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक माना जाता है। बीते कुछ दिनों में इस एक्सप्रेस-वे पर हुई दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं है, बल्कि व्यवस्था की असफलता का आईना है।<br />चालकों को सतर्क रहने की सलाह<br />एएसपी प्रियंका रघुवंशी ने ऐसे हादसों से बचाव के लिए वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में सीएनजी वाहनों की समय-समय पर फिटनेस और लीकेज जांच कराना बेहद जरूरी है। लंबी यात्रा के दौरान गाड़ी को लगातार चलाने से इंजन और गैस सिस्टम पर दबाव बढ़ता है, जिससे हादसे की आशंका रहती है। बीच-बीच में वाहन रोककर इंजन को ठंडा होने देना चाहिए। साथ ही किसी भी तरह की गैस की गंध, ओवर हीटिंग या तकनीकी खराबी महसूस होने पर तुरंत गाड़ी रोककर जांच कराएं।<br />आखिर कब थमेगा मौत और हादसों का यह सिलसिला?<br />-29 अप्रेल की रात अलवर के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कार में आग लगने से इसमें सवार दंपती, उनकी 6 साल की बेटी, सास और सास की बहन जिंदा जल गए। चालक जान बचाने के लिए कार से कूदा, लेकिन वह मौत को नहीं हरा सका। उसे पहले अलवर और फिर जयपुर रेफर किया गया। जयपुर में उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।<br />-14 अप्रेल को अलवर जिले के पिनान इंटरचेंज की पुलिया नंबर 128 को पार करते समय मध्यप्रदेश के उज्जैन से दिल्ली जा रही स्लीपर कोच बस आगे चल रहे ट्रक से टकराने के बाद मिडवे जोन के एंगल से जा टकराई थी। इस हादसे में बस चालक उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद निवासी मोनू यादव (32), उसकी पत्नी रीना (31) व बेटी शक्ति उर्फ डोली (8) की मौत हो गई थी। इस हादसे में 31 यात्री घायल हो गए थे। इनमें से दो घायलों ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 14:02:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : हीटस्ट्रोक से मौत: राज्य में हीटस्ट्रोक के 55 मरीज; 2 मौतों पर शक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए, हेल्थ डिपार्टमेंट हीटस्ट्रोक के मरीज़ों की संख्या पर करीब से नज़र रख रहा है। कुल 55 हीटस्ट्रोक के मरीज़ों में से, 38 1 मार्च से 26 अप्रैल के बीच मिले। जनवरी और फरवरी में 17 मरीज़ मिले। इसी दौरान दो और मरीज़ मिले। मौतें, हालांकि यह रिकॉर्ड किया गया था, मौतों में से, हेल्थ डिपार्टमेंट ने सही कारण पर शक जताया है क्योंकि यह अभी तक साफ़ नहीं है। हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सरकारी अस्पतालों के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट, पीडियाट्रिक्स और इमरजेंसी डिपार्टमेंट में कुल 3,82,725 मरीज़ों ने अलग-अलग बीमारियों का इलाज करवाया। इसमें मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया, ठाणे, पालघर, पुणे शामिल हैं। नागपुर और चंद्रपुर ज़िलों में मरीज़ों की संख्या काफ़ी ज़्यादा पाई गई है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49591/mumbai-55-heatstroke-patients-die-in-the-state-2-deaths"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-30t121758.039.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए, हेल्थ डिपार्टमेंट हीटस्ट्रोक के मरीज़ों की संख्या पर करीब से नज़र रख रहा है। कुल 55 हीटस्ट्रोक के मरीज़ों में से, 38 1 मार्च से 26 अप्रैल के बीच मिले। जनवरी और फरवरी में 17 मरीज़ मिले। इसी दौरान दो और मरीज़ मिले। मौतें, हालांकि यह रिकॉर्ड किया गया था, मौतों में से, हेल्थ डिपार्टमेंट ने सही कारण पर शक जताया है क्योंकि यह अभी तक साफ़ नहीं है। हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सरकारी अस्पतालों के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट, पीडियाट्रिक्स और इमरजेंसी डिपार्टमेंट में कुल 3,82,725 मरीज़ों ने अलग-अलग बीमारियों का इलाज करवाया। इसमें मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया, ठाणे, पालघर, पुणे शामिल हैं। नागपुर और चंद्रपुर ज़िलों में मरीज़ों की संख्या काफ़ी ज़्यादा पाई गई है।</p>
<p> </p>
<p>ज़िले के हिसाब से आंकड़ों के मुताबिक, नंदुरबार ज़िले में सबसे ज़्यादा 14 मामले हैं। इसके बाद नासिक में 6, गढ़चिरौली और रत्नागिरी में 4-4, और अहिल्यानगर में 3 मामले हैं। रायगढ़, पुणे, पालघर, जालना, गोंदिया, बुलढाणा, चंद्रपुर और धुले में 2-2, जबकि अकोला, अमरावती, भंडारा, जलगांव, परभणी, सिंधुदुर्ग, सोलापुर और ठाणे ज़िलों में 1-1 मामला है। इस बीच, संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए, राज्य के सभी ज़िला और सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में खास 'हीट स्ट्रोक रूम' बनाए गए हैं, और ग्रामीण अस्पतालों और लोकल सरकारी हेल्थ सेंटरों में मरीज़ों के लिए बेड रिज़र्व किए गए हैं। इमरजेंसी में तुरंत इलाज पक्का करने के लिए ज़रूरी दवाओं और फ्लूइड्स का भी इंतज़ाम किया गया है।</p>
<p>हालांकि हीटस्ट्रोक हल्के लक्षणों के साथ शुरू होता है, लेकिन अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो यह गंभीर हो सकता है। इसके मुख्य लक्षणों में शरीर का ज़्यादा तापमान, सिरदर्द, चक्कर आना, कमज़ोरी, जी मिचलाना, सूखी और गर्म त्वचा, दिल की धड़कन बढ़ना और कभी-कभी बेहोशी शामिल हैं। बहुत ज़्यादा गर्मी में ज़्यादा देर तक रहना, डिहाइड्रेशन और दोपहर की तेज़ धूप में काम करना हीटस्ट्रोक के मुख्य कारण माने जाते हैं। इसलिए, हेल्थ डिपार्टमेंट ने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर न निकलें, खूब पानी और लिक्विड पिएं और अपने सिर को बचाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49591/mumbai-55-heatstroke-patients-die-in-the-state-2-deaths</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:20:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : एमबीए छात्रों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा; एक सप्लायर गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गोरेगांव ईस्ट में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग ओवरडोज से दो एमबीए छात्रों की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच में अहम खुलासे हुए हैं। वनराई पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक कॉलेज छात्र को गिरफ्तार किया गया है, जिसने दोनों मृतकों को एमडीएमए की गोलियां बेची थीं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49231/big-revelation-in-the-case-of-death-of-mumbai-mba"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-15t133039.504.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>गोरेगांव ईस्ट में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग ओवरडोज से दो एमबीए छात्रों की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच में अहम खुलासे हुए हैं। वनराई पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक कॉलेज छात्र को गिरफ्तार किया गया है, जिसने दोनों मृतकों को एमडीएमए की गोलियां बेची थीं।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्र ने प्रति गोली 1600 रुपये के हिसाब से ड्रग्स की बिक्री की थी। जानकारी के अनुसार, दोनों छात्रों ने कुल चार गोलियां ली थीं, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:31:36 +0530</pubDate>
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