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                <title>farmers - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>farmers RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महाराष्ट्र में जनता बेहाल, सियासत गुलजार... किसानों के हिस्से सूखा, नेताओं की थाली में काजू-बादाम!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम है.” संपादकीय में कहा गया, “सांसद बंडू जाधव ने अकाल में काजू-बादाम की इस खुराक का खुलेआम समर्थन किया. 50-50 करोड़ रुपए खाकर डकार लेने वालों की भूख मिटी नहीं है. और फिर अकाल की बैठक में भूख लगी इसलिए काजू-बादाम खाने हैं, यह कैसी रीति है?”</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51914/in-maharashtra-people-are-in-trouble-politics-is-buzzing-farmers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/qweqwe.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी शिवसेना-यूबीटी ने किसानों के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला है. शिवसेना-यूबीटी ने कहा कि किसान सूखे अकाल के कारण चीख-पुकार कर रहा है और सरकार सूखा मेवा खाकर डकार ले रही है. शिवसेना-यूबीटी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि महाराष्ट्र की सरकार शाही ठाट-बाट से जी रही है, लेकिन आधी से ज्यादा जनता अकाल की छाया में है और महाराष्ट्र में डर, भूख, प्यास का शैतानी राज आने वाला है. सवाल उठाया गया कि मानसून की वापसी का सफर शुरू हो चुका है और अकाल के गिद्ध पीछे छोड़ते हुए मानसून लौट रहा है. मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र, विदर्भ का किसान बेहाल हो चुका है. इस अकाल को लेकर फडणवीस-मिंधे की सरकार गंभीर है क्या?</p>
<p style="text-align:justify;">नांदेड़ की हालिया एक बैठक का जिक्र किया गया. इसमें कहा गया, “राज्य के कृषि मंत्री दत्तामामा भरणे सूखे अकाल का मुआयना करने के लिए मराठवाड़ा दौरे पर गए. नांदेड़ में अकालग्रस्त दौरा करने से पहले विश्राम गृह में हुई प्रशासनिक बैठक में मंत्री, विधायक, सांसद मंडली काजू-बादाम, सूखे मेवे पर हाथ साफ कर रही थी, ऐसी तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं. किसान सूखे अकाल के कारण चीख-पुकार कर रहा है और सरकार सूखा मेवा खाकर डकार ले रही है.</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम है.” संपादकीय में कहा गया, “सांसद बंडू जाधव ने अकाल में काजू-बादाम की इस खुराक का खुलेआम समर्थन किया. 50-50 करोड़ रुपए खाकर डकार लेने वालों की भूख मिटी नहीं है. और फिर अकाल की बैठक में भूख लगी इसलिए काजू-बादाम खाने हैं, यह कैसी रीति है?”</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच, ‘सामना’ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी प्रश्न खड़े किए गए. संपादकीय में कहा गया, “मुख्यमंत्री इस पर कहते हैं, ‘ऐसे काजू-बादाम खाना ठीक नहीं है. प्रशासन को संवेदनशील रहना चाहिए. हर चीज की राजनीति करने की विपक्ष को आदत है.’ मुख्यमंत्री फडणवीस से ऐसी असंवेदनशीलता की उम्मीद नहीं थी. काजू-बादाम का ठीकरा उन्होंने प्रशासन पर फोड़ दिया.”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 13:06:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नासिक : प्याज पर मचेगा रार: दाम कम करने पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी, किसान हुए उग्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल ने पिछले वर्ष प्याज के उत्पादन में कमी, मई माह में बेमौसम बारिश, प्याज की बिक्री में व्यवधान और राज्य में भंडारण प्रणाली की कमी के कारण अगले दो महीनों में प्याज की कमी की आशंका जताई है। हालांकि, पटेल का यह बयान गलत है और वर्तमान में किसानों के पास पर्याप्त प्याज मौजूद है। महाराष्ट्र राज्य प्याज किसान संघ ने कहा है कि यदि सरकार हस्तक्षेप करती है और प्याज की कीमत कम करती है, तो हम देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50893/there-will-be-an-uproar-over-nashik-onion-farmers-become"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/the-protestors-rued-that-the-government-proposed-c_1692895367573.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नासिक : </strong>राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल ने पिछले वर्ष प्याज के उत्पादन में कमी, मई माह में बेमौसम बारिश, प्याज की बिक्री में व्यवधान और राज्य में भंडारण प्रणाली की कमी के कारण अगले दो महीनों में प्याज की कमी की आशंका जताई है। हालांकि, पटेल का यह बयान गलत है और वर्तमान में किसानों के पास पर्याप्त प्याज मौजूद है। महाराष्ट्र राज्य प्याज किसान संघ ने कहा है कि यदि सरकार हस्तक्षेप करती है और प्याज की कीमत कम करती है, तो हम देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।  </p>
<p> </p>
<p>प्याज उत्पादक किसानों को भारी आर्थिक नुकसान : महाराष्ट्र में प्याज का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में अब तक देश में 327.40 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हो चुका है। इसमें से 151.10 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन महाराष्ट्र में हुआ है। देश के कुल प्याज उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत महाराष्ट्र में होता है। हालांकि, राज्य में पर्याप्त प्रसंस्करण उद्योग और भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण प्याज बड़े पैमाने पर खराब हो जाता है।</p>
<p>परिणामस्वरूप प्याज किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने पाशा पटेल की अध्यक्षता में प्याज नीति तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। यह समिति प्रसंस्करण उद्योगों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। “राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल का यह कहना कि अगले दो महीनों में राज्य में प्याज की कमी हो जाएगी, पूरी तरह गलत है। किसानों के पास प्याज का पर्याप्त भंडार है। अभी तो केवल नई प्याज की ही बड़े पैमाने पर बुवाई हुई है।</p>
<p>अगर सरकार हस्तक्षेप करती है और प्याज की कीमतें कम करती है, तो हम पूरे देश में बड़ा आंदोलन करेंगे, हम किसानों के हितों से समझौता नहीं करेंगे।” - भरत दिघोले, अध्यक्ष, महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ इन स्थानों पर प्याज की खेती होती है : महाराष्ट्र के नासिक, जलगांव, पुणे, अहिल्यानगर, सोलापुर, धुले और सतारा जिलों में प्याज का सबसे अधिक उत्पादन होता है, जबकि देश में कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार और अन्य राज्यों में भी बड़े पैमाने पर प्याज की खेती की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : 60 साल बाद बदलने जा रहा गन्‍ने से जुड़ा कानून, किसानों को फायदा होगा या नुकसान, एथनॉल उत्‍पादन पर भी असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49398/new-delhi-the-law-related-to-sugarcane-is-going-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184642.138.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्‍ली : </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है. इसमें पहली बार एथनॉल उत्पादन, डिजिटल नियमों के पालन और कारखानों की मंजूरी के लिए एक औपचारिक व्यवस्था को साथ लाया गया है. सरकार ने इस मसौदे पर 20 मई तक सुझाव मांगे हैं.</p>
<p> </p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसौदे में पुराने कानून की बुनियादी संरचना को बरकरार रखा गया है. इसमें उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के नियम, गन्ने की आवाजाही पर नियंत्रण, 14 दिनों के भीतर भुगतान की समय सीमा और देरी से भुगतान पर 15 फीसदी सालाना ब्याज शामिल है. हालांकि, इसमें पूरी तरह बदल चुके उद्योग के अनुरूप एक नया ढांचा तैयार किया गया है. इन नियमों का ज्‍यादातर लाभ किसानों को होगा, क्‍योंकि अभी मिलों के पास उनके हजारों करोड़ के बकाए पड़े हुए हैं.</p>
<p><strong>600 लीटर एथनॉल बराबर एक टन चीनी</strong><br />साल 1966 के कानून में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एथनॉल को गन्ना नियामक ढांचे में स्पष्ट रूप से शामिल करना है और मसौदे में चीनी कारखाने की परिभाषा का विस्तार कर इसमें गन्ने के रस, सिरप, चीनी और मोलासेस से एथनॉल उत्पादन को भी शामिल किया गया है. इसके लिए एक ठोस रूपांतरण सूत्र पेश किया गया है, जिसके तहत उत्पादन गणना करते समय 600 लीटर एथनॉल को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा.</p>
<p><strong>कुछ कंपनियों को बैंक गारंटी से छूट</strong><br />मसौदे में कहा गया है कि केवल एथनॉल बनाने वाली इकाइयां, जो अपने परिसर में गन्ना नहीं पेरती हैं. उन्हें प्रदर्शन बैंक गारंटी की आवश्यकता से छूट दी गई है. यह एकीकृत चीनी-सह-एथनॉल मिलों पर नियंत्रण हल्का किए बिना एकल एथनॉल क्षमता बढ़ाने के लिए एक सोची-समझी नीतिगत पहल है. मसौदे की धारा 6ए से 6जी में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो पुराने आदेश में नहीं थे. इसमें नए कारखानों के लिए औपचारिक आईईएम-आधारित मंजूरी प्रक्रिया, न्यूनतम दूरी के नियम, प्रदर्शन बैंक गारंटी को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करना और प्रभावी कदम तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए समय सीमा तय करना शामिल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:48:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: एक तरफ़ तापमान बढ़ा; दूसरी तरफ़ बेमौसम बारिश से राज्य के किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य में दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री के पार चला गया है। अकोला देश का सबसे गर्म शहर बन गया है। क्योंकि वहां तापमान 44 डिग्री के पार चला गया है। साथ ही, विदर्भ के दूसरे जिलों में भी तापमान 42 से 44 डिग्री के पार चला गया है। वहीं, दूसरी तरफ, राज्य के कुछ हिस्सों में बेमौसम बारिश देखी जा रही है। सोलापुर शहर समेत जिले के अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश शुरू हो गई है। इससे किसान परेशान हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49281/mumbai-on-one-hand-the-temperature-increased-and-on-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-18t130733.742.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:</strong> राज्य में दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री के पार चला गया है। अकोला देश का सबसे गर्म शहर बन गया है। क्योंकि वहां तापमान 44 डिग्री के पार चला गया है। साथ ही, विदर्भ के दूसरे जिलों में भी तापमान 42 से 44 डिग्री के पार चला गया है। वहीं, दूसरी तरफ, राज्य के कुछ हिस्सों में बेमौसम बारिश देखी जा रही है। सोलापुर शहर समेत जिले के अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश शुरू हो गई है। इससे किसान परेशान हैं।</p>
<p> </p>
<p>सोलापुर शहर समेत जिले के अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश शुरू हो गई है। मोहोल और नॉर्थ सोलापुर तालुका में शाम को करीब 1 घंटे तक भारी बारिश हुई है। जबकि सोलापुर शहर में पिछले 15 मिनट से बारिश शुरू हो गई है। पिछले कुछ दिनों से तेज गर्मी से परेशान लोगों को बारिश से कुछ राहत मिली है। हालांकि, इस बेमौसम बारिश से खेती की फसलों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।</p>
<p><strong>बिजली गिरने से युवक की मौत</strong><br />सोलापुर में बेमौसम बारिश के दौरान बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना मोहोल तालुका के अधेगांव में हुई। मृतक का नाम विजय राजाराम डोंगरे है। शाम करीब 7 बजे तूफानी हवाओं के साथ बारिश के दौरान तेज बिजली गिरी। उसी समय, कंस्ट्रक्शन के लिए रेत का ट्रक आने पर विजय डोंगरे ट्रक को अनलोड करने गए थे। इसी समय अचानक मौसम खराब हो गया और बिजली गिर गई। इससे विजय डोंगरे गंभीर रूप से घायल हो गए, उनके रिश्तेदार उन्हें इलाज के लिए मोहोल ग्रामीण अस्पताल लाए थे। हालांकि, डॉक्टरों ने बताया कि इलाज से पहले ही उनकी मौत हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 13:08:36 +0530</pubDate>
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