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                <title>Bombay High Court Nitin Gadkari Order - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Bombay High Court Nitin Gadkari Order RSS Feed</description>
                
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                <title>नितिन गडकरी और उनके परिवार के खिलाफ 'घृणास्पद' पोस्ट पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तुरंत हटाने के दिए आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई अश्लील, घृणास्पद और एआई-निर्मित डीपफेक सामग्री को तुरंत हटाने का आदेश मेटा, एक्स और गूगल को दिया है। E20 इथेनॉल नीति से जुड़े इन फर्जी पोस्टों को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक मानते हुए कोर्ट ने टेक कंपनियों को ऑटोमेटेड मैकेनिज्म न होने पर भी फटकार लगाई और 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51154/bombay-high-court-orders-immediate-removal-of-hateful-posts-against"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-design-2026-07-28t172020.045.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई:</strong> केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार को निशाना बनाने वाले फर्जी व आपत्तिजनक सोशल मीडिया कंटेंट पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम), एक्स (ट्विटर) और गूगल को नितिन गडकरी तथा उनके परिवार के खिलाफ पोस्ट किए गए एआई-जनरेटेड डीपफेक, अभद्र और अपमानजनक वीडियो तथा कंटेंट को तुरंत (Forthwith) हटाने के निर्देश जारी किए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की अत्यधिक घृणास्पद, अश्लील और अपमानजनक सामग्री का सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जहाँ इसे युवा पीढ़ी सहित आम जनता द्वारा देखा जा सके।</p>
<p dir="ltr">​यह पूरा कानूनी विवाद सरकार की E20 (इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) नीति से जुड़ा हुआ है। नितिन गडकरी द्वारा दायर मानहानि याचिका के अनुसार, कुछ अज्ञात तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर डीपफेक और फर्जी पोस्ट प्रसारित कर यह झूठा दावा किया जा रहा था कि इथेनॉल नीति से गडकरी और उनके परिवार ने अवैध वित्तीय लाभ कमाए हैं। मंत्री की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत आती है, न कि नितिन गडकरी के व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र में। इन भ्रामक और एआई-निर्मित सामग्रियों से मंत्री और उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचाया गया है, जिसके खिलाफ ₹11 करोड़ के मुआवजे और स्थायी रोक की मांग की गई है।</p>
<p dir="ltr">​सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों के रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने मेटा, एक्स और गूगल से पूछा कि जब उनके पास इतनी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, तो अश्लील, अभद्र और जहरीले कंटेंट को बिना किसी के कोर्ट पहुंचे खुद ही हटाने (Automated Triggers) का कोई तंत्र क्यों नहीं है? हाईकोर्ट ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सामग्री पर खुद से संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि भविष्य में यदि ऐसी कोई डीपफेक या मानहानिकारक सामग्री अपलोड होती है, तो गडकरी सीधे प्लेटफॉर्म्स को सूचित कर सकते हैं और कंपनियों को उस पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने कंपनियों को चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 16:06:33 +0530</pubDate>
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