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                <title>Mumbai court - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Mumbai court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>₹70 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में ‘गॉडमैन’ अशोक खरात की गिरफ्तारी को कोर्ट की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की विशेष अदालत ने ₹70 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अशोक खरात को गिरफ्तार करने की ED को अनुमति दे दी है। आरोपी पर रेप, उगाही और आर्थिक धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49915/court-approves-arrest-of-godman-ashok-kharat-in-70-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/img_1001653838_2_1_u5fqampu.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई की विशेष PMLA कोर्ट ने कथित स्वयंभू ‘गॉडमैन’ अशोक खरात को ₹70 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार करने की अनुमति Enforcement Directorate (ED) को दे दी है। अशोक खरात पहले से ही रेप, धोखाधड़ी और आर्थिक शोषण से जुड़े कई मामलों में न्यायिक हिरासत में है। <br /><br />रिपोर्ट्स के मुताबिक, अशोक खरात को नाशिक जेल से प्रोडक्शन वारंट पर मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया गया था। ED ने कोर्ट से गिरफ्तारी की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अब एजेंसी औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में रिमांड के लिए पेश करेगी। <br /><br />ED ने यह मामला Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत दर्ज किया है। एजेंसी का दावा है कि अशोक खरात ने धार्मिक आस्था और कथित चमत्कारों का इस्तेमाल कर लोगों से करोड़ों रुपये की उगाही की और उस पैसे को कई बेनामी बैंक खातों के जरिए सफेद किया। <br /><br />जांच एजेंसी के अनुसार, खरात ने कथित तौर पर एक ही दिन में 60 बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों में भक्तों और अन्य लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल बिना उनकी जानकारी के किया गया। ED का दावा है कि इन खातों के जरिए ₹70 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन किए गए। <br /><br />अशोक खरात पर महिलाओं के यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और धार्मिक अंधविश्वास फैलाने के भी गंभीर आरोप हैं। SIT फिलहाल उसके खिलाफ दर्ज 12 मामलों की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, वह खुद को आध्यात्मिक शक्तियों वाला व्यक्ति बताकर लोगों को अपने प्रभाव में लेता था। </p>
<p><br />ED का आरोप है कि खरात ने उगाही से मिले पैसों से अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर चल-अचल संपत्तियां खरीदीं। एजेंसी को शक है कि इस पूरे नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों और संभवतः विदेशों तक भी जुड़े हो सकते हैं। <br /><br />जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी लोगों को “चमत्कारी” वस्तुएं बेचता था और डर व अंधविश्वास का माहौल बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई नए खुलासे हो सकते हैं। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49915/court-approves-arrest-of-godman-ashok-kharat-in-70-crore</link>
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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 20:45:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डीआरआई केस में मुंबई कोर्ट ने हीरा व्यापारी गिरीश काडेल को कर दिया बरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">परिणामस्वरूप, व्यवसायी गिरीश काडेल को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 174 और सीमा शुल्क अधिनियम , 1962 की धारा 108 के तहत अपराध से बरी कर दिया गया है। अदालत ने कहा कि विशेष लोक अभियोजक भी अनुपस्थित थे। उनकी ओर से कोई भी लंबे समय से मामले की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहा है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि शिकायतकर्ता या उसका विभाग इस मामले को आगे बढ़ाने में इच्छुक नहीं है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29427/mumbai-court-acquitted-diamond-merchant-girish-kadel-in-dri-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/360_f_486366405_nozdxkmgs12likxydkiv57atmfab5sfe.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, 19वीं अदालत, एस्प्लेनेड मुंबई की अदालत ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा दायर एक मामले में हीरा व्यापारी गिरीश काडेल को बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पी. मोदी ने 2 मार्च, 2024 को एक आदेश में राजस्व खुफिया निदेशालय द्वारा 21 जून, 2019 को दायर शिकायत को खारिज करने का फैसला किया ।</p>
<p style="text-align:justify;">परिणामस्वरूप, व्यवसायी गिरीश काडेल को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 174 और सीमा शुल्क अधिनियम , 1962 की धारा 108 के तहत अपराध से बरी कर दिया गया है। अदालत ने कहा कि विशेष लोक अभियोजक भी अनुपस्थित थे। उनकी ओर से कोई भी लंबे समय से मामले की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहा है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि शिकायतकर्ता या उसका विभाग इस मामले को आगे बढ़ाने में इच्छुक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">डीआरआई ने मेसर्स एंटीक एक्ज़िम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कच्चे हीरों के आयात में कथित अधिक मूल्यांकन के मामले में की जा रही जांच के संबंध में एसीएमएम कोर्ट के समक्ष शिकायत दर्ज की थी। लिमिटेड और मेसर्स तनमन ज्वेल्स प्रा. लिमिटेड 2022 में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने हीरों के अधिक मूल्यांकन में शामिल पार्टियों और सरकारी अधिकारियों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया था। गिरीश काडेल और सरकार द्वारा अनुमोदित मूल्यांकनकर्ताओं सहित अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था । </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 09:51:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: 'पुलिस दुपहिया वाहन की चाभी नहीं निकाल सकती', ट्रैफिक विभाग की कार्यशैली पर कोर्ट ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई की सत्र न्यायालय ने मायानगरी के ट्रैफिक विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस किसी भी वाहन चालक के बाइक की चाभी नहीं निकाल सकती है। इसके साथ ही वह किसी भी वाहन चालक को लाइसेंस देने के बाद पुलिस ले जाने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/22330/mumbai-police-cannot-remove-the-key-of-two-wheeler-said-mumbai-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-06/download-(34).jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई सत्र न्यायालय ने ट्रैफिक पुलिस को झटका देते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस को नियमों का उल्लंघन करनेवाले दुपहिया वाहन चालकों की गाड़ी से चाभी निकालने का अधिकार नहीं है। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने के बाद पुलिस दंड वसूली के लिए दुपहिया वाहन चालक से पुलिस स्टेशन चलने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकती है। कोर्ट ने यह बात ट्रैफिक नियम के उल्लंघन के मामले में एक आरोपी को बरी करते हुए अपने आदेश में कही है। दरअसल ट्रैफिक पुलिस ने एक युवक को सरकारी अधिकारी के काम में अवरोध पैदा करने व नियमों के उल्लंघन के आरोप में सागर पाठक को पकड़ा था। 25 मार्च 2017 को इस मामले में मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 332 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दायर किया था...Mumbai Police cannot remove keys from two wheelers...</p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-06/download-(34).jpg" alt="download (34)" width="602" height="337"></img></p>
<p>अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी कुलाबा इलाके में बिना हेल्मेट के मोटर साइकिल चला रहा था। नियम का उल्लंघन कर गाड़ी चला रहे आरोपी ने जब ट्रैफिक पुलिस को अपनी ओर आते देखा तो वह हेल्मेट पहनने लगा। इसे देखते हुए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने जब आरोपी से दंड भरने को कहा तो वह बदसलूकी करने लगा। यही नहीं आरोपी ने पुलिसकर्मी की ड्युटी में अवरोध पैदा करने की भी कोशिश की। हालांकि आरोपी ने खुद पर लगाए गए आरोपों का कोर्ट में खंडन किया...Mumbai Police cannot remove keys from two wheelers...<br /><br />अतिरिक्त न्यायाधीश एनपी मेहता के सामने मामले से जुड़े मुकदमे की सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने पुलिसवाले को अपना लाइसेंस दे दिया था। ऐसे में आरोपी को पुलिस स्टेशन ले जाने की जरूरत नहीं थी। हमारे सामने ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जो दर्शाए कि आरोपी ने ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर हमला किया था। इसलिए आरोपी को सबूत के अभाव में बरी किया जाता है...Mumbai Police cannot remove keys from two wheelers...</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 10:53:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदालत ने गुजरात के बेस्ट बेकरी कांड हमले के आरोपी को किया बरी, कहा- अभियोजन आरोप साबित करने में रहा विफल</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2002 में गोधरा ट्रेन आगजनी कांड में 56 यात्रियों के मारे जाने के दो दिन बाद वड़ोदरा शहर में भीड़ ने बेस्ट बेकरी पर हमला कर दिया था जिसमें 14 लोग मारे गए थे। मृतकों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से जुड़े थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/22182/the-prosecution-failed-to-prove-the-role-of-mafat-gohil-and-harshad-solanki-in-the-attack-on-best-bakery"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-06/15_06_2023-court_verdict_23441830.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई की एक निचली अदालत ने गुजरात में 2002 में हुए बेस्ट बेकरी कांड के आरोपियों- हर्षद सोलंकी और मफत गोहिल को बरी करते हुए कहा है कि अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है(Best Bakery Case)</p>
<p>वर्ष 2002 में गोधरा ट्रेन आगजनी कांड में 56 यात्रियों के मारे जाने के दो दिन बाद वड़ोदरा शहर में भीड़ ने बेस्ट बेकरी (Best Bakery Case)पर हमला कर दिया था, जिसमें 14 लोग मारे गए थे। मृतकों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से जुड़े थे और उन्होंने गुजरात दंगों के मद्देनजर वहां शरण ली हुई थी।(Best Bakery Case)</p>
<p>अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम जी देशपांडे ने मंगलवार को सोलंकी और गोहिल को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि विस्तृत आदेश बुधवार को उपलब्ध हो सका।(Best Bakery Case)</p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-06/15_06_2023-court_verdict_23441830.jpeg" alt="15_06_2023-court_verdict_23441830"></img></p>
<p>2003 में इस मामले में 21 आरोपी हुए थे बरी</p>
<p>अदालत ने फैसले में कहा है कि इन दोनों आरोपियों की कोई विशेष भूमिका नहीं बताई गई है। वडोदरा की एक अदालत ने 2003 में इस मामले में 21 आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसकी पुष्टि बाद में गुजरात उच्च न्यायालय ने भी की थी(Best Bakery Case)</p>
<p>जब पीड़िता जाहिराबीबी शेख ने एक गैर सरकारी संगठन NGO के साथ इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया, तो शीर्ष अदालत ने मुंबई में फिर से सुनवाई कराये जाने का आदेश दिया।</p>
<p>अदालत ने कहा, ‘‘यह साबित करने के लिए (अभियोजन के पास) कुछ भी नहीं था कि दोनों आरोपी भीड़ का हिस्सा थे, उन्होंने दंगा किया और बेस्ट बेकरी को आग लगा दी।’’(Best Bakery Case)</p>
<p>आरोप साबित करने में अभियोजन रहा विफल </p>
<p>न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यद्यपि इस घटना में चौदह लोगों की हत्या और अप्राकृतिक मौत को लेकर ज्यादा विवाद नहीं है…(लेकिन) अभियोजन उक्त घटना से इन आरोपियों का संबंध स्थापित करने और उसे साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है।’’</p>
<p>न्यायाधीश ने कहा कि बेस्ट बेकरी को रात में आग के हवाले कर दिया गया था और इसकी छत पर शरण लिये हुए लोगों को सुबह एक सीढ़ी से नीचे आने के लिए कहा गया था।</p>
<p>चश्मदीदों की गवाही में विरोधाभास- न्यायाधीश</p>
<p>घायल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बार जब वे नीचे आए तो उनके हाथ-पैर बांध दिए गए और उन पर लाठी-डंडों और तलवारों से हमला किया गया। न्यायाधीश ने कहा कि लेकिन इन घायल चश्मदीदों की गवाही में विरोधाभास था, जिनकी फिर से पड़ताल की गयी थी। (Best Bakery Case)</p>
<p>अदालत ने कहा, ‘‘….. इन दोनों आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि वे दोनों इस घटना के समय रात में और सुबह भी तलवार और लोहे के पाइप से लैस थे।’’ अदालत के अनुसार किसी भी घायल चश्मदीद ने यह नहीं कहा कि इन दोनों आरोपियों ने उन्हें चोट पहुंचाईं।(Best Bakery Case)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2023 12:05:48 +0530</pubDate>
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