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                <title>Gujarat High Court Verdict - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Gujarat High Court Verdict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[<ul>
<li dir="ltr"><strong>न्यायिक फैसला:</strong> गुजरात हाई कोर्ट ने 2022 के विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए 38 आतंकियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।</li>
<li dir="ltr">​<strong>ऐतिहासिक संदर्भ:</strong> भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला था, जब एक साथ इतने बड़े पैमाने पर (38 लोगों को) मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी सही माना है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>मुआवजा समयसीमा:</strong> अदालत ने सरकार को मार्च 2027 तक सभी पीड़ितों या उनके परिवारों को 1 लाख से 10 लाख रुपये तक की मुआवजा राशि सौंपने का निर्देश दिया है।</li>
</ul>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50592/6a4cb6c2aefff"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/untitled-design-2026-07-07t123351.016.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>अहमदाबाद:</strong> गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने आतंकी संगठन 'इंडियन मुजाहिद्दीन' (IM) के 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा पर अपनी मुहर लगा दी है।</p>
<p dir="ltr">​जस्टिस ए.वाई. कोग्जे और जस्टिस समीर जे. दवे की पीठ ने दोषियों द्वारा विशेष अदालत के फरवरी 2022 के फैसले के खिलाफ दायर की गईं सभी अपीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने राज्य सरकार की उस याचिका को भी स्वीकार कर लिया, जिसमें मृत्युदंड की पुष्टि करने की मांग की गई थी।</p>
<p dir="ltr">​<strong>पीड़ितों के लिए मुआवजे का आदेश</strong></p>
<p dir="ltr">सजा बरकरार रखने के साथ ही गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह धमाकों के पीड़ितों को उचित मुआवजा प्रदान करे। अदालत के निर्देशानुसार:</p>
<ul>
<li dir="ltr">​मृतकों के परिजनों को <strong>10-10 लाख रुपये</strong> का मुआवजा दिया जाएगा।</li>
<li dir="ltr">​गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को <strong>5-5 लाख रुपये</strong> दिए जाएंगे।</li>
<li dir="ltr">​मामूली रूप से घायल पीड़ितों को <strong>1-1 लाख रुपये</strong> की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह पूरा मुआवजा 31 मार्च 2027 से पहले वितरित किया जाना है।</li>
</ul>
<p dir="ltr">​<strong>गुजरात सरकार ने बताया 'ऐतिहासिक जीत'</strong></p>
<p dir="ltr">इस फैसले का स्वागत करते हुए गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने इसे आतंकवाद के खिलाफ देश की सबसे बड़ी न्यायिक जीतों में से एक बताया। उन्होंने कहा:</p>
<blockquote>
<p dir="ltr">​"आज गुजरात हाई कोर्ट ने भारत के न्यायिक इतिहास का एक बेहद मजबूत और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जांच एजेंसियों ने बिना किसी कानूनी खामी के इस मामले पर सालों काम किया, जिससे आज पीड़ितों के परिवारों को न्याय मिल सका है। यह फैसला संदेश देता है कि भारत में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।"</p>
</blockquote>
<p> </p>
<p dir="ltr">​<strong>क्या था पूरा मामला?</strong></p>
<p dir="ltr">26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर एक के बाद एक 21 भीषण बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 240 से अधिक लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसरों को भी निशाना बनाया था, जहां घायलों को लाया जा रहा था। इसके दो दिन बाद सूरत में भी कई जिंदा बम मिले थे, जिन्हें निष्क्रिय किया गया था। जांच में सामने आया था कि प्रतिबंधित संगठन 'सिमी' (SIMI) से जुड़े आतंकियों ने इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के बैनर तले इस खूनी साजिश को अंजाम दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 19:37:29 +0530</pubDate>
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