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                <title>#Infrastructure - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>#Infrastructure RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Konkan Railway का ₹4,704 करोड़ मेगा अपग्रेड प्लान: ट्रैक डबलिंग, Vande Bharat विस्तार और नेटवर्क आधुनिकीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Konkan Railway ने ₹4,704 करोड़ के अपग्रेड प्लान की घोषणा की है जिसमें लाइन डबलिंग और Vande Bharat विस्तार शामिल है। इसका उद्देश्य मुंबई–कोकण–गोवा रूट पर ट्रेनों की क्षमता, स्पीड और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50266/konkan-railways-4704-crore-mega-upgrade-plan-track-doubling-vande"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/screenshot_2026-06-15-16-34-18-807_com.android.chrome-edit.jpg" alt=""></a><br /><p>Konkan Railway Corporation (KRCL) ने अपने पूरे नेटवर्क को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगभग ₹4,704 करोड़ के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लाइन क्षमता बढ़ाना, ट्रेनों की गति और समयपालन सुधारना तथा मुंबई–कोकण–गोवा कॉरिडोर पर बढ़ते यात्री और माल यातायात को बेहतर तरीके से संभालना है।</p>
<p><br />इस योजना का सबसे अहम हिस्सा लाइन डबलिंग (Track Doubling) है। Konkan Railway का बड़ा हिस्सा अभी भी सिंगल लाइन पर आधारित है, जिससे ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए रुकना पड़ता है और खासकर मानसून के दौरान देरी बढ़ जाती है। डबलिंग होने से ट्रेन संचालन सुचारू होगा, देरी कम होगी और रूट की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</p>
<p><br />इसके अलावा, योजना में Vande Bharat जैसी प्रीमियम ट्रेनों की सेवाओं के विस्तार और बेहतर रूट ऑप्टिमाइजेशन पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य मुंबई–गोवा और मुंबई–मंगलुरु रूट पर तेज, आरामदायक और आधुनिक रेल सेवा प्रदान करना है।</p>
<p><br />Konkan Railway का यह पूरा नेटवर्क पहाड़ी इलाकों, लंबी सुरंगों और समुद्री किनारों से होकर गुजरता है, इसलिए यहां इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड बेहद चुनौतीपूर्ण और तकनीकी रूप से जटिल माना जाता है। इसके बावजूद रेलवे का लक्ष्य है कि इसे एक हाई-कैपेसिटी और फास्ट रेल कॉरिडोर में बदला जाए।</p>
<p><br />विशेषज्ञों के अनुसार, यह अपग्रेड पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी, कम यात्रा समय और अधिक ट्रेन विकल्प मिलेंगे। साथ ही माल ढुलाई में भी तेजी आएगी, जिससे कोकण और गोवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 16:37:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऐरोली–कलवा रेल कॉरिडोर का 45% काम पूरा, 436 परिवारों के पुनर्वास में अटका प्रोजेक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई का बहुप्रतीक्षित ऐरोली–कलवा एलिवेटेड रेल कॉरिडोर 45% पूरा हो चुका है, लेकिन 436 परिवारों के पुनर्वास में देरी के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया पूरी होते ही काम तेज किया जाएगा, जिससे ठाणे और नवी मुंबई के बीच यात्रा अधिक सुगम हो सकेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50264/45-works-of-airoli-kalwa-rail-corridor-completed-project-stuck-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/img-20240920-wa0025.jpg" alt=""></a><br /><p><br />मुंबई और नवी मुंबई के बीच कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए बनाए जा रहे ऐरोली–कलवा एलिवेटेड रेल कॉरिडोर का लगभग 45% काम पूरा हो चुका है। ₹476 करोड़ की लागत वाले इस महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट का उद्देश्य सेंट्रल रेलवे और ट्रांस-हार्बर रेलवे नेटवर्क को जोड़ना है, जिससे लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। <br /><br />हालांकि, परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती अभी भी 436 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, भोलानगर क्षेत्र के 350 परिवारों का सर्वे और पुनर्वास पूरा कर लिया गया है तथा वहां की झोपड़ियों को हटाकर जमीन परियोजना के लिए उपलब्ध करा दी गई है। लेकिन शिवाजी नगर क्षेत्र में 436 परिवारों के पुनर्वास को लेकर विरोध जारी है, जिससे परियोजना की गति प्रभावित हो रही है। <br /><br />इस परियोजना के तहत ठाणे के बालकुम क्षेत्र में पुनर्वास के लिए 868 आवास निर्धारित किए गए हैं। अब तक 82 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां पुनर्वास प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के प्रयास कर रही हैं। <br /><br />रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को लगभग 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कॉरिडोर शुरू होने के बाद ठाणे, कल्याण और नवी मुंबई के बीच यात्रा को काफी आसान बनाएगा तथा ठाणे स्टेशन पर भीड़ कम करने में मदद करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 16:15:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठाणे की AC इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस एक महीने बाद भी शुरू नहीं, चार्जिंग स्टेशन न होने से खड़ी-खड़ी हो रही खराब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ठाणे में AC इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस लॉन्च के एक महीने बाद भी चार्जिंग स्टेशन न होने के कारण सेवा में नहीं आ सकी है और डिपो में खड़ी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50239/thanes-ac-electric-double-decker-bus-not-starting-even-after"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/untitled-design-2026-06-12t231834.775.jpg" alt=""></a><br /><p>ठाणे में शुरू की गई पहली AC इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस उद्घाटन के बाद भी अब तक यात्रियों की सेवा में नहीं आ सकी है। लॉन्च को एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद यह बस डिपो में खड़ी धूल फांक रही है।</p>
<p><br />मुख्य वजह चार्जिंग स्टेशन की कमी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बस को चलाने के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी तक तैयार नहीं हो पाया है, जिसके कारण बस को रूट पर नहीं उतारा जा सका।</p>
<p><br />स्थानीय नागरिकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बड़े धूमधाम से लॉन्च किए गए इस प्रोजेक्ट का फायदा अभी तक जनता को नहीं मिल पाया है। वहीं बस के यूं बेकार पड़े रहने से सरकारी संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p><br />विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के सफल संचालन के लिए चार्जिंग नेटवर्क का पहले से तैयार होना जरूरी है, अन्यथा ऐसी परियोजनाएं केवल लॉन्च तक सीमित रह जाती हैं।<br />इससे पहले भी ठाणे में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर बुनियादी ढांचे की कमी की समस्याएं सामने आती रही हैं, जिससे परियोजनाओं में देरी होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:25:31 +0530</pubDate>
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