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                <title>Indian Judiciary - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Indian Judiciary RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मद्रास उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: 'धोखाधड़ी या ब्लैकमेल से बना शारीरिक संबंध सहमति नहीं है'</title>
                                    <description><![CDATA[<ul>
<li dir="ltr">​<strong>न्यायिक टिप्पणी:</strong> धोखाधड़ी, ब्लैकमेल या झूठे वादों के आधार पर ली गई सहमति अवैध है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>कानूनी आधार:</strong> सहमति 'स्वतंत्र इच्छा' (free will) से होनी चाहिए, किसी दबाव या धोखे से नहीं।</li>
<li dir="ltr">​<strong>महत्व:</strong> यह फैसला यौन अपराधों के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक मिसाल बनेगा।</li>
<li dir="ltr">​<strong>अदालत का निर्देश:</strong> अदालतों को सहमति की परिस्थितियों की गहराई से जांच करने का आदेश दिया गया है।</li>
</ul>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50764/big-decision-of-madras-high-court-physical-relationship-formed-by"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/f0b4450c_f9cb_44eb_a3c4_dea6069f1a3c1.jpeg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>चेन्नई:</strong> मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई शारीरिक संबंध किसी महिला को धोखा देकर या उसे ब्लैकमेल करके बनाए गए हैं, तो उसे कानून की नजर में 'सहमति' (consent) नहीं माना जा सकता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि सहमति तभी मान्य होती है जब वह बिना किसी डर, दबाव या गलत बयानी के दी गई हो।</p>
<p dir="ltr">​<strong>फैसले के मुख्य बिंदु:</strong></p>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>सहमति की परिभाषा:</strong> न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि सहमति केवल 'हां' कहना नहीं है, बल्कि वह स्वतंत्र इच्छा (free will) होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने शादी का झूठा वादा किया हो या ब्लैकमेल के जरिए संबंध बनाने पर मजबूर किया हो, तो ऐसी 'सहमति' का कोई कानूनी आधार नहीं है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>धोखाधड़ी का पहलू:</strong> अदालत ने कहा कि जब शारीरिक संबंध की शुरुआत ही धोखाधड़ी या गलत जानकारी पर आधारित हो, तो पीड़ित महिला की सहमति को 'स्वैच्छिक' नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में आरोपी का यह तर्क कि 'सहमति से संबंध थे', मान्य नहीं होगा।</li>
<li dir="ltr">​<strong>ब्लैकमेल और दबाव:</strong> न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ब्लैकमेल करना, डर दिखाना या किसी व्यक्ति की मजबूरी का फायदा उठाना 'सहमति' की भावना के पूर्णतः विपरीत है।</li>
</ul>
<p dir="ltr">​<strong>कानूनी महत्व:</strong></p>
<p dir="ltr">यह फैसला यौन अपराधों से जुड़े मामलों में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अक्सर बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि संबंध सहमति से थे, लेकिन इस आदेश के बाद अब यह स्पष्ट है कि यदि सहमति प्राप्त करने का तरीका ही अनैतिक या गैर-कानूनी (धोखा या डर) है, तो इसे कानून के तहत अपराध माना जाएगा।</p>
<p dir="ltr">​न्यायालय ने निचली अदालतों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई करते समय 'सहमति' के पीछे की परिस्थितियों और आरोपी द्वारा अपनाए गए तरीकों की बारीकी से जांच करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 21:28:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जस्टिस रविंद्र घुगे बने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनके पदोन्नत होने के बाद जस्टिस रविंद्र घुगे को बॉम्बे हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। जानिए इस बड़े न्यायिक बदलाव की पूरी जानकारी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50064/bombay-high-court-chief-justice-chandrashekhar-reaches-supreme-court-justice"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-queen-of-all-mayhem-76.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई के न्यायिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है।</p>
<p>जस्टिस चंद्रशेखर के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस रविंद्र वी. घुगे को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की आधिकारिक सूची में भी उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में दर्शाया गया है।</p>
<p>जस्टिस चंद्रशेखर ने सितंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और कई चर्चित फैसले दिए। कानूनी क्षेत्र में उनके अनुभव और न्यायिक योगदान को देखते हुए उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में नियुक्त किया गया है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने जस्टिस चंद्रशेखर के अलावा चार अन्य न्यायिक हस्तियों की भी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक क्षमता को मजबूत करना और लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति देना बताया जा रहा है।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस चंद्रशेखर का सुप्रीम कोर्ट में जाना भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, जस्टिस रविंद्र घुगे के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनने से बॉम्बे हाईकोर्ट का प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज सुचारू रूप से जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:58:35 +0530</pubDate>
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