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                <title>Mumbai Property News - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Mumbai Property News RSS Feed</description>
                
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                <title>महाराष्ट्र में Flat Nomination Rules: नॉमिनी बनने से कोई व्यक्ति अपने आप फ्लैट का कानूनी मालिक नहीं बनता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सहकारी आवासीय सोसायटी के फ्लैट को लेकर नॉमिनी और कानूनी वारिस के अधिकारों को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। किसी व्यक्ति को नॉमिनी बनाने का मतलब यह नहीं है कि मालिक की मृत्यु के बाद वह व्यक्ति अपने आप फ्लैट का कानूनी मालिक बन जाएगा। नॉमिनेशन मुख्य रूप से सोसायटी के रिकॉर्ड में शेयर और फ्लैट से जुड़े अधिकारों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51740/maharashtra-flat-nomination-rules-nominee-legal-owner-cooperative-society"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/untitled-design-2026-09-07t151230.928.jpg" alt=""></a><br /><p>सहकारी सोसायटी के फ्लैट में नॉमिनी का नाम दर्ज होने से उसे अपने आप संपत्ति का अंतिम स्वामित्व नहीं मिल जाता। नॉमिनी की भूमिका और कानूनी वारिस के अधिकार अलग-अलग होते हैं। मृत्यु के बाद संपत्ति पर अंतिम अधिकार उत्तराधिकार कानून, वसीयत और अन्य लागू कानूनी दस्तावेजों के आधार पर तय हो सकता है।</p>
<p>नॉमिनेशन का मुख्य उद्देश्य सोसायटी के लिए सदस्य की मृत्यु के बाद शेयर और फ्लैट से जुड़े अधिकारों के संबंध में प्रक्रिया को सुगम बनाना है। इससे सोसायटी को यह पता रहता है कि मृत सदस्य के बाद किस व्यक्ति से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।</p>
<p>यदि नॉमिनी और कानूनी वारिस अलग-अलग व्यक्ति हैं, तो केवल नॉमिनी होने के आधार पर संपत्ति का अंतिम मालिकाना अधिकार तय नहीं होता। संपत्ति का वास्तविक उत्तराधिकार लागू उत्तराधिकार कानून या वैध वसीयत के अनुसार तय किया जा सकता है।</p>
<p>वसीयत में संपत्ति के संबंध में मालिक की इच्छा दर्ज की जा सकती है, जबकि नॉमिनेशन का उद्देश्य मृत्यु के बाद संबंधित संस्था या सोसायटी के स्तर पर हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसलिए संपत्ति के मालिकों के लिए केवल नॉमिनी दर्ज करना पर्याप्त मान लेना उचित नहीं है।</p>
<p>यदि परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद होता है, तो नॉमिनी का नाम अकेले अंतिम स्वामित्व का फैसला नहीं करता। ऐसे मामलों में वसीयत, उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज और लागू कानूनों के आधार पर अधिकार निर्धारित किए जा सकते हैं।</p>
<p>सहकारी सोसायटी के फ्लैट मालिकों को अपने नॉमिनेशन रिकॉर्ड को समय-समय पर अपडेट रखना चाहिए। साथ ही, संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर स्पष्टता के लिए वैध वसीयत और अन्य जरूरी कानूनी दस्तावेज तैयार रखना भविष्य में पारिवारिक विवाद और कानूनी जटिलताओं को कम करने में मदद कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 20:38:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई: घर खरीदार को बड़ी राहत, उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को मुआवजा देने का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के खार में एक पुनर्विकास परियोजना से जुड़े मामले में उपभोक्ता आयोग ने घर खरीदार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। फ्लैट के क्षेत्रफल में कमी, कब्जा देने में देरी और अन्य खामियों को लेकर डेवलपर को मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। जानिए पूरा मामला।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50041/big-relief-to-mumbai-home-buyers-consumer-commission-orders-compensation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/images---2026-06-02t132926.991.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई के खार पश्चिम स्थित एक पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) परियोजना से जुड़े मामले में महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक घर खरीदार के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने डेवलपर और उसके साझेदारों को देरी, फ्लैट के क्षेत्रफल में कमी और अन्य वादों को पूरा न करने के लिए खरीदार को मुआवजा देने का निर्देश दिया है।</p>
<p><br />मामला एक आवासीय परियोजना से जुड़ा है, जहां खरीदार ने वर्ष 2010 में एक फ्लैट बुक किया था। समझौते के अनुसार उसे निर्धारित क्षेत्रफल वाला फ्लैट, पार्किंग सुविधा और परियोजना पूरी होने तक किराया मुआवजा मिलना था। लेकिन परियोजना में वर्षों की देरी हुई और कई शर्तें पूरी नहीं की गईं।</p>
<p><br />शिकायतकर्ता का आरोप था कि समझौते में 750 वर्ग फुट कार्पेट एरिया का वादा किया गया था, जबकि वास्तविक रूप से उसे लगभग 525 वर्ग फुट का फ्लैट मिला। इसके अलावा कब्जा सौंपने की प्रक्रिया भी कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए बिना की गई।</p>
<p><br />आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि डेवलपर अपनी संविदात्मक और कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करने में विफल रहा। आयोग ने डेवलपर को पार्किंग उपलब्ध कराने, आवश्यक कानूनी दस्तावेज पूरे करने और क्षेत्रफल की कमी के लिए प्रचलित सरकारी दरों के आधार पर मुआवजा देने का आदेश दिया।</p>
<p><br />इसके अलावा आयोग ने देरी से कब्जा देने, मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए भी अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो पुनर्विकास परियोजनाओं में देरी और वादाखिलाफी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:31:48 +0530</pubDate>
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