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                <title>Supreme Court Order - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Supreme Court Order RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महाराष्ट्र में हाईवे अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन! 60 दिन में अवैध निर्माण हटेंगे, नए ढाबे-रेस्टोरेंट पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में हाईवे के ROW क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ 60 दिन का अभियान शुरू होगा। नए ढाबे, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण पर रोक के साथ मौजूदा लाइसेंस की भी समीक्षा की जाएगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51293/big-action-on-highway-encroachment-in-maharashtra-illegal-constructions-will"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/48c44e31-b3ad-498b-83e2-e506079a9649_1785589351284.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के Right of Way (ROW) क्षेत्र में मौजूद अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्य के सभी महानगरपालिका, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में ऐसे अवैध ढांचों को 60 दिनों के भीतर हटाने या ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है।</p>
<p>सरकार के नए निर्देशों के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग के ROW क्षेत्र में नए ढाबे, रेस्टोरेंट, भोजनालय या अन्य व्यावसायिक निर्माण की अनुमति तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दी गई है। हाईवे से जुड़े सुरक्षा क्षेत्रों में किसी भी नए लाइसेंस, NOC या व्यापार अनुमति के लिए NHAI या PWD की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी।</p>
<p>मौजूदा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस की भी 30 दिनों के भीतर समीक्षा की जाएगी। सरकार ने प्रत्येक उस जिले में District Highway Safety Task Force बनाने के निर्देश दिए हैं, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है। इसमें जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI या संबंधित भूमि एजेंसी, PWD और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे।</p>
<p>अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की संयुक्त जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और पुलिस आयुक्त/पुलिस अधीक्षक को दी गई है। टास्क फोर्स को हर पखवाड़े समीक्षा बैठक कर कार्रवाई का रिकॉर्ड भी बनाए रखना होगा।</p>
<p>यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल 2026 को दिए गए निर्देशों के बाद महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग द्वारा जारी किया गया है। सरकार ने स्थानीय निकायों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:59:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आवारा कुत्तों को हटाने और नसबंदी आदेश बरकरार, पुनर्विचार याचिकाएं खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने और नसबंदी संबंधी अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49917/big-decision-of-supreme-court-on-removal-and-sterilization-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/aug21-17_20250829070945_20251111065914_20260519041709.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने और उनकी नसबंदी से जुड़े अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए सभी पुनर्विचार और संशोधन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि “गरिमा के साथ जीने का अधिकार” में लोगों का कुत्तों के हमलों और डॉग बाइट के खतरे से मुक्त रहना भी शामिल है। <br /><br />जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की बेंच ने Animal Welfare Board of India (AWBI) द्वारा जारी Standard Operating Procedures (SOPs) को भी वैध माना। अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करें। <br /><br />सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में डॉग बाइट की घटनाएं “गंभीर और चिंताजनक स्तर” तक पहुंच चुकी हैं। अदालत ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और विदेशी यात्रियों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकारें इस मुद्दे पर निष्क्रिय नहीं रह सकतीं। <br /><br />कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद वापस उसी जगह छोड़ने पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि ऐसे कुत्तों को निर्धारित शेल्टर होम्स में रखा जाए। <br /><br />अदालत ने यह भी कहा कि राज्यों में Animal Birth Control (ABC) कार्यक्रम का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। कोर्ट के मुताबिक, कई राज्यों में यह व्यवस्था “कम फंडिंग, कमजोर अमल और असमान व्यवस्था” का शिकार है। <br /><br />सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यरत ABC सेंटर बनाने का निर्देश दिया। साथ ही एंटी-रेबीज दवाओं और वैक्सीनेशन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। <br /><br />एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में अदालत ने कहा कि कानूनी रूप से अनुमति मिलने पर “रेबीज संक्रमित, असाध्य रूप से बीमार या बेहद खतरनाक” आवारा कुत्तों के मामले में euthanasia (दया मृत्यु) जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। हालांकि यह प्रक्रिया पशु कल्याण नियमों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार ही होगी। <br /><br />कोर्ट ने National Highways Authority of India (NHAI) को भी निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से आवारा पशुओं को हटाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। <br /><br />यह मामला पिछले वर्ष दिल्ली में बच्चों में रेबीज और डॉग बाइट के बढ़ते मामलों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) के आधार पर शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान ऐसा समाज स्वीकार नहीं कर सकता जहां लोगों की सुरक्षा “किस्मत या शारीरिक ताकत” पर निर्भर हो। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 20:50:46 +0530</pubDate>
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