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                <title>Court News - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Court News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>फर्जी यूनिवर्सिटी संबद्धता घोटाला: मुंबई सेशंस कोर्ट ने कॉलेज प्रिंसिपल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में फर्जी यूनिवर्सिटी संबद्धता मामले में कॉलेज प्रिंसिपल को राहत नहीं। सेशंस कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49947/fake-university-affiliation-scam-mumbai-sessions-court-rejects-anticipatory-bail"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/images---2026-05-24t013508.892.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई की सेशंस कोर्ट ने कथित फर्जी यूनिवर्सिटी संबद्धता (Fake University Affiliation) मामले में एक कॉलेज प्रिंसिपल को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आरोपी प्रिंसिपल की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज कर दी। मामला छात्रों को कथित रूप से फर्जी मान्यता और यूनिवर्सिटी संबद्धता दिखाकर एडमिशन देने से जुड़ा है। </p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोप है कि संबंधित कॉलेज ने छात्रों को यह विश्वास दिलाया कि संस्थान को मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से वैध संबद्धता हासिल है, जबकि जांच में दस्तावेजों और मान्यता को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। </p>
<p><br />मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कोर्ट को बताया कि छात्रों और अभिभावकों से फीस लेकर उन्हें कथित तौर पर भ्रमित किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में आर्थिक धोखाधड़ी और शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ के गंभीर आरोप शामिल हैं। </p>
<p><br />सेशंस कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले की प्रकृति गंभीर है और शुरुआती जांच में आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर दिखाई देते हैं। अदालत ने यह भी माना कि जांच के इस चरण में आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। </p>
<p><br />पुलिस अब कॉलेज प्रशासन, यूनिवर्सिटी से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। </p>
<p><br />इस घटना के बाद शिक्षा क्षेत्र में फर्जी मान्यता और एडमिशन घोटालों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को किसी भी कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले उसकी यूनिवर्सिटी संबद्धता और सरकारी मान्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। </p>
<p><br />फिलहाल पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और संबंधित दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है। कोर्ट के फैसले के बाद आरोपी प्रिंसिपल की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 01:39:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक हटाई, बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की सजा पर लगी रोक रद्द कर दी। पूर्व विधायक को बड़ा कानूनी झटका।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49872/unnao-rape-case-supreme-court-kuldeep-sengar-sentence"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/69522bfbda793-supreme-court-stays-bail-of-kuldeep-sengar-in-unnao-rape-case--accused-to-remain-in-jail-292126230-16x9.jpeg" alt=""></a><br /><p>देश को झकझोर देने वाले Unnao rape case मामले में Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक Kuldeep Singh Sengar की सजा पर लगाई गई रोक को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले को सेंगर के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।</p>
<p><br />रिपोर्ट के मुताबिक, कुलदीप सेंगर ने स्वास्थ्य और अन्य आधारों का हवाला देते हुए सजा निलंबित करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया और पहले दिए गए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।<br />उन्नाव रेप केस देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है। आरोप था कि 2017 में उन्नाव की एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया था। पीड़िता और उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि आरोपी कुलदीप सेंगर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश की।</p>
<p><br />मामले ने तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं जब पीड़िता के परिवार के साथ सड़क हादसा हुआ था और उसके पिता की हिरासत में मौत का आरोप भी सामने आया था। इसके बाद जांच Central Bureau of Investigation को सौंपी गई थी। 2019 में दिल्ली की विशेष अदालत ने कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।</p>
<p><br />सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब सेंगर को फिर से जेल में सजा काटनी होगी। अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में न्याय प्रक्रिया और पीड़िता के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला गंभीर अपराधों में सजा निलंबन के मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। वहीं महिला अधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 20:20:52 +0530</pubDate>
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