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                <title>मुंबई : हाई कोर्ट  ने बढ़ाया मुआवजा, समुद्री इंजीनियर के परिवार को 1.31 करोड़ देने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दिवंगत मैरीटाइम इंजीनियर के परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि समुद्री (मैरीटाइम) क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स की आय सामान्य भूमि-आधारित नौकरियों की तुलना में काफी अधिक होती है, क्योंकि उनका काम ऑफशोर परिस्थितियों में कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है। यह मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा आय का आकलन कम किए जाने को गलत माना और इसे संशोधित करते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49546/mumbai-high-court-orders-increased-compensation-to-rs-131-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-28t115140.796.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दिवंगत मैरीटाइम इंजीनियर के परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि समुद्री (मैरीटाइम) क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स की आय सामान्य भूमि-आधारित नौकरियों की तुलना में काफी अधिक होती है, क्योंकि उनका काम ऑफशोर परिस्थितियों में कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है। यह मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा आय का आकलन कम किए जाने को गलत माना और इसे संशोधित करते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।</p>
<p> </p>
<p>जस्टिस जितेंद्र जैन ने 24 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में कहा कि समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियर और अन्य पेशेवर लंबे समय तक ऑफशोर रहते हैं और कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं, इसलिए उनकी आय को सामान्य कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “जहाजों पर काम करने वाले लोग जमीन पर काम करने वालों की तुलना में कहीं अधिक कमाई करते हैं।” इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए 10 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 1.31 करोड़ रुपये कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने इस राशि पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया, जिससे अंतिम भुगतान और अधिक बढ़ जाएगा।</p>
<p>अदालत ने कहा कि दुर्घटना पीड़ित के वास्तविक आर्थिक योगदान को सही तरीके से समझना जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी उच्च जोखिम और उच्च आय वाले पेशे से जुड़ा हो। कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रिब्यूनल द्वारा आय का गलत अनुमान लगाने से परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिल पाया था। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट संदेश गया है कि अदालतें अब प्रोफेशनल्स की वास्तविक आय क्षमता और उनके कार्य की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय करेंगी। खासकर उन मामलों में जहां पीड़ित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:53:01 +0530</pubDate>
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