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                <title>मुंबई : एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर कसा तंज, कहा- उनका हाल ‘तुम लड़ो, हम कपड़े संभालते हैं’ जैसा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए नामांकन दाखिल होने के बाद उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के राजनीतिक रुख को लेकर तीखी टिप्पणी की। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान, 'अंतरात्मा की आवाज' के चलते कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारा, पर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने तंज कसते हुए जवाब दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49617/mumbai-eknath-shinde-took-a-jibe-at-uddhav-thackeray-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-01t134636.728.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए नामांकन दाखिल होने के बाद उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के राजनीतिक रुख को लेकर तीखी टिप्पणी की। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान, 'अंतरात्मा की आवाज' के चलते कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारा, पर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने तंज कसते हुए जवाब दिया।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा, ''जिन लोगों की आत्मा ही मर चुकी है, क्या उनके भीतर से कोई आवाज आ सकती है? मैं यह पहली बार सुन रहा हूं। 2019 में यह ‘अंतरात्मा की आवाज’ कहां थी?'' शिंदे ने यह टिप्पणी राज्य में पिछली सरकार के गठन के दौरान हुए राजनीतिक घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए की। उद्धव ठाकरे की नेतृत्व शैली पर निशाना साधते हुए एकनाथ शिंदे ने विपक्ष की रणनीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, ''जब लड़ने की बारी आती है तो ये लोग हमेशा किसी और को आगे कर देते हैं। इनका हाल ‘तुम लड़ो, हम कपड़े संभालते हैं’ जैसा है। यह उनका अंदरूनी मामला है, लेकिन इससे उनका तरीका साफ दिखता है।'' इससे पहले एकनाथ शिंदे ने नीलम गोरहे और बच्चू कडू के नामों का ऐलान किया। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू को साथ लाना महायुति के लिए रणनीतिक कदम है। उन्होंने बच्चू कडू के 25 साल के सामाजिक कार्यों की तारीफ करते हुए कहा, ''शिवसेना हमेशा गरीबों, शोषितों और दिव्यांगों के लिए आगे रही है। बच्चू भाऊ के साथ आने से पार्टी और उनके मिशन, दोनों को मजबूती मिलेगी।''</p>
<p>बच्चू कडू को उम्मीदवार बनाए जाने को विदर्भ क्षेत्र में शिवसेना की पकड़ मजबूत करने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है। वहीं, नीलम गोरहे की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर कुछ नाराजगी की चर्चा थी, लेकिन उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उनका खुलकर समर्थन किया और उनकी उम्मीदवारी तय कर दी। नीलम गोरहे फिलहाल विधान परिषद की सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 13 मई को खत्म हो रहा है। वह अविभाजित शिवसेना की ओर से लगातार चौथी बार विधान परिषद पहुंची थीं।</p>
<p>बाद में शिंदे की बगावत और महायुति में शामिल होने के बाद उन्होंने भी एकनाथ शिंदे का साथ दे दिया था। अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं उतारकर शिवसेना-भाजपा-एनसीपी (महायुति) गठबंधन ने नौ सीटों का चुनाव निर्विरोध कराने का रास्ता साफ कर दिया है। शिंदे ने कहा, ''सभी ने समझदारी का परिचय दिया है। मैं सभी दलों का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने यह चुनाव सौहार्दपूर्ण माहौल में होने दिया।''<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:47:35 +0530</pubDate>
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                <title>नई दिल्ली: आबकारी नीति केस: अरविंद केजरीवाल की दलील पर जज ने कहा, 'आप कोर्ट की प्रक्रिया नहीं समझ पा रहे'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आबकारी नीति मामले में सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। केजरीवाल ने मांग की है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को इस केस से हटाया जाए। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ही निचली अदालत से आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही है। हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को बहस करने की इजाजत दी है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49184/on-the-argument-of-arvind-kejriwal-in-the-new-delhi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-13t185545.728.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> आबकारी नीति मामले में सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। केजरीवाल ने मांग की है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को इस केस से हटाया जाए। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ही निचली अदालत से आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही है। हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को बहस करने की इजाजत दी है।</p>
<p> </p>
<p>अरविंद केजरीवाल ने जज से कहा कि मैं आपकी और ज्यूडिशियरी की बहुत इज्जत करता हूं। मैं सॉलिसिटर जनरल से सहयोग की उम्मीद करता हूं। मैं आज आपके सामने एक आरोपी के तौर पर नहीं खड़ा हूं, क्योंकि मुझे बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि आप रिक्यूजल आवेदन को पढ़ें। केजरीवाल ने कहा कि मुझे थोड़ा बैकग्राउंड बताना पड़ेगा। ट्रायल कोर्ट ने तीन महीने तक प्रतिदिन सुनवाई की, 40 हजार पन्ने पढ़े और फिर डिस्चार्ज किया। केजरीवाल ने कहा कि उस वक्त मैंने 11 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को बेंच बदलने के लिए पत्र लिखा, जिसे नकार दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट रणजीत ठाकुर में लिखा हुआ है कि जज को ये नहीं देखना है कि वो बायस्ड है कि नहीं, लेकिन किसी पार्टी के मन में इस बात की शंका है तो बेंच चेंज करा सकता है तो वो ये फाइल कर सकता है। सीबीआई को इस मामले में पार्टी नहीं बनाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन के फैसले में 18 घंटे और 6 दिन की सुनवाई के दौरान आखिरी समय में ईडी को शंका हुई तो वह जिला जज के पास पहुंच गए। यहां जज की इंटीग्रिटी पर सवाल नहीं है, बल्कि पार्टी के मन में आने वाली शंका या सवाल है। मेरे मामले में भी ऐसा ही है। मेरे पास भी इसी बात के आधार हैं और ऐसे में सीबीआई को पार्टी नहीं बनाना चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि सवाल जज की ईमानदारी पर नहीं, बल्कि पार्टी की खुद की आशंका पर है। मैं बस वही राहत मांग रहा हूं, जो ईडी को दी गई थी, और मेरा केस अब और मजबूत है। निचली अदालत ने फैसले में बताया कि कोई प्रोसीड ऑफ क्राइम नहीं था। कोई गोवा में पैसा नहीं ले जाया गया। कोई भ्रष्टाचार नहीं था। गोवा चुनाव में पैसों के इस्तेमाल पर कोर्ट अपनी फाइंडिंग दे चुका है, एक मुद्दा उठा था अप्रूवर का। इसके ऊपर आपकी फाइंडिंग है। मुझे लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया गया। मुझे लगभग दोषी घोषित कर दिया गया, बस सजा सुनानी रह गई थी।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि इस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, यह बस आपकी सोच है। केजरीवाल ने कहा कि यह सामान्य है कि जज पक्षपाती है या नहीं। सवाल ये है कि क्या मेरे मामले में निष्पक्ष रूप से फैसला हो पाएगा। रीजनेबल अप्रिहेंशन (कनकलता जजमेंट) में अदालती जिद का जिक्र है, जहां जज को खुद से ये केस छोड़ देना चाहिए। यहां शराब नीति से जुड़े 5 मामले आए। मेरा मामला गैरकानूनी गिरफ्तारी तरीके का था। दो ही सुनवाई में ये तय कर दिया गया कि मेरी गिरफ्तारी सही थी। मुझे भ्रष्टाचारी घोषित कर दिया गया था। मुझे दोषी ही बना दिया गया था।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:56:52 +0530</pubDate>
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