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                <title>नई दिल्ली : 'नए कानून को सांविधानिक आधार पर चुनौती देंगे पूर्व कैडर अफसर, क्या है 122 'आईपीएस और मिथक' की कहानी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026' को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। पिछले दिनों इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक का उद्देश्य, सीएपीएफ में 'ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी' के अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित सामान्य नियमों को विनियमित करना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49108/69d8f9d36fc10"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-10t194536.599.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026' को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। पिछले दिनों इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक का उद्देश्य, सीएपीएफ में 'ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी' के अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित सामान्य नियमों को विनियमित करना है। इससे देश का आंतरिक सुरक्षा ढांचा मजबूत होगा और सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में अधिक स्पष्टता व एकरूपता आएगी। दूसरी ओर पूर्व कैडर अफसरों ने इस विधेयक को कैडर अफसरों के साथ-साथ निचले रैंक के हितों के लिए नुकसानदायक बताया है।</p>
<p> </p>
<p>बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है कि सीएपीएफ के नए अधिनियम को संवैधानिक आधार पर चुनौती दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अफसरों के पक्ष में जो फैसला दिया था, उसे पलटने के लिए ही सरकार ने यह नया कानून बनाया है। सूद ने इस मामले में 122 'आईपीएस और मिथक' का राज खोला है।  </p>
<p>गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक के पारित होने के बाद कहा था, इसे देश की सुरक्षा संरचना को मजबूत, सुदृढ़ और अधिक संगठित बनाने के लिए एक बड़े सुधार के तौर पर देखा जाना चाहिए। यह कानून, सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में लंबे समय से चले आ रहे संरचनात्मक असंतुलन और कैडर प्रबंधन में चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ परिचालन दक्षता में सुधार लाने का प्रयास करता है। समय के साथ सीएपीएफ की भूमिका और जिम्मेदारियों का काफी विस्तार हुआ है, लेकिन विभिन्न बलों में सेवा शर्तें, अलग-अलग नियमों, निर्देशों और प्रशासनिक उपायों द्वारा शासित होती रही हैं। यह विधेयक, मौजूदा व्यवस्थाओं में जो भी विसंगतियां हैं, उन्हें दूर करेगा। इन बलों में वित्तीय लाभों की निरंतरता सुनिश्चित होगी। यह विधेयक ग्रुप 'ए' जनरल ड्यूटी अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता और अन्य सेवा शर्तों को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट व्यापक ढांचा प्रदान करता है। </p>
<p><strong>इस सांविधानिक आधार पर दी जाएगी चुनौती...  </strong><br />बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं कि सीएपीएफ के नए कानून को इस संवैधानिक आधार पर चुनौती दिया जाना निश्चित है, क्योंकि यह किसी भी कानूनी खामी को दूर नहीं करता है। अनुच्छेद 14 और 16 के तहत कैडर अधिकारियों को प्राप्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर भी चुनौती दी जाएगी। सरकार ने नया कानून बनाकर, सर्वोच्च न्यायालय का फैसला पलटा है। इसके जरिए केंद्र सरकार ने संवैधानिक मुद्दों और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी निहितार्थों से ध्यान हटाकर 'आईपीएस' अधिकारियों की समन्वय क्षमता, प्रशिक्षण और रणनीतिक दृष्टि की कथित श्रेष्ठता का समर्थन किया है। बतौर सूद, इस मामले को सही परिप्रेक्ष्य में रखने की आवश्यकता है। यह धारणा केवल सेवारत और पूर्व आईपीएस अधिकारियों के साथ-साथ सत्ताधारी दल के राजनेताओं द्वारा व्यक्त की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:49:04 +0530</pubDate>
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