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                <title>मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की बड़ी पहल, रेत पर जीरो रॉयल्टी पॉलिसी की घोषणा जल्द</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सरकार ने राज्य में निर्माण कार्यों और सरकारी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को गति देने के लिए रेत आपूर्ति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नीति लाने की घोषणा की है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को विधान परिषद में बताया कि पड़ोसी राज्यों से मंगाई जाने वाली रेत पर जीरो रॉयल्टी पॉलिसी लागू की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राज्य में रेत की कमी को दूर करना और निर्माण क्षेत्र को समय पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना है। लगातार बढ़ती मांग और आपूर्ति में बाधा के कारण कई विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही थी, जिसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50530/mumbai-maharashtra-governments-big-initiative-to-announce-zero-royalty-policy"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-03t111020.936.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सरकार ने राज्य में निर्माण कार्यों और सरकारी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को गति देने के लिए रेत आपूर्ति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नीति लाने की घोषणा की है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को विधान परिषद में बताया कि पड़ोसी राज्यों से मंगाई जाने वाली रेत पर जीरो रॉयल्टी पॉलिसी लागू की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राज्य में रेत की कमी को दूर करना और निर्माण क्षेत्र को समय पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना है। लगातार बढ़ती मांग और आपूर्ति में बाधा के कारण कई विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही थी, जिसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।</p>
<p> </p>
<p>मंत्री बावनकुले ने बताया कि इस नीति की औपचारिक घोषणा मौजूदा विधानसभा सत्र समाप्त होने से पहले कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी और निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। यह बयान उस समय आया जब एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने नंदुरबार जिले में रेत की गंभीर कमी का मुद्दा विधान परिषद में उठाया था। उनके ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में मंत्री ने यह जानकारी दी।</p>
<p>इसके साथ ही सरकार ने नंदुरबार में तापी नदी से रेत निकालने के लिए सक्शन पंप तकनीक के उपयोग की अनुमति देने का भी प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है। यह मॉडल पहले कोंकण क्षेत्र में अपनाया जा चुका है और अब इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेत खनन की अनुमति केवल पर्यावरण विभाग द्वारा तय की गई सीमाओं के भीतर ही दी जाएगी। पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया नियंत्रित तरीके से संचालित की जाएगी।</p>
<p>राज्य सरकार का मानना है कि रेत आपूर्ति में स्थिरता आने से न केवल निर्माण कार्यों को गति मिलेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं और आवास परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि रेत की कमी पिछले कुछ समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसके कारण कई परियोजनाओं की लागत और समय दोनों पर असर पड़ा है। ऐसे में जीरो रॉयल्टी पॉलिसी को एक राहतकारी कदम माना जा रहा है। फिलहाल सरकार नीति के अंतिम प्रारूप पर काम कर रही है और जल्द ही इसे लागू करने की दिशा में औपचारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title> मुंबई : कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत, खुदाई रॉयल्टी माफ और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन ऑनलाइन ₹ 83.7 6 </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49087/relief-to-mumbai-construction-sector-excavation-royalty-waiver-and-non-agricultural"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-09t175612.026.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा। रॉयल्टी पेमेंट सिस्टम को भी आसान बनाया जाएगा और यह छह महीने के लिए लागू रहेगा। </p>
<p> </p>
<p>इसके अलावा, राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि अगले 10 दिनों के अंदर पूरी नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इससे डेवलपर्स को डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पास जाने की जरूरत खत्म हो जाएगी और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी में भी कमी आएगी। मीटिंग में पूरे राज्य में डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के ‘पुणे पैटर्न’ को अपनाने पर भी चर्चा हुई। इस मॉडल ने ट्रांसपेरेंसी और प्रोजेक्ट प्रोसेसिंग की गति बढ़ाने में असरदार साबित किया है। नए सिस्टम में, डॉक्यूमेंट्स के रजिस्ट्रेशन के बाद प्रॉपर्टी कार्ड को तुरंत अपडेट करने की सुविधा भी शामिल होगी। मंत्री ने प्रिंसिपली इस मांग को मान लिया।</p>
<p>क्रेडाई के प्रतिनिधियों ने इस सुधार को कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए अहम और सकारात्मक कदम बताया। उनके अनुसार, रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल  परमिशन ऑनलाइन करने से नए प्रोजेक्ट्स को तेजी से शुरू करने में मदद मिलेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। मंत्री बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में प्रक्रियाओं को सरल, तेज़ और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन सिस्टम के जरिए हर प्रोजेक्ट की ट्रैकिंग संभव होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत पकड़ने में मदद मिलेगी।</p>
<p>विशेष रूप से यह सुधार माइनर मिनरल्स के उपयोग को अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाएगा। पहले खोदे गए मिनरल्स के लिए रॉयल्टी देना डेवलपर्स के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन जाता था, जिसे अब खत्म किया गया है। इसके अलावा, नॉन-एग्रीकल्चरल  परमिशन ऑनलाइन करने से प्रोजेक्ट की योजना बनाने और मंजूरी लेने की प्रक्रिया भी तेज़ और आसान होगी। इस पहल से महाराष्ट्र में कंस्ट्रक्शन सेक्टर को तत्काल और दीर्घकालीन लाभ मिलने की उम्मीद है। अधिकारीयों का कहना है कि ऑनलाइन प्रोसेसिंग और डिजिटल ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार कम होगा और निवेशकों और डेवलपर्स के लिए एक भरोसेमंद माहौल तैयार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:57:03 +0530</pubDate>
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