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                <title>मुंबई : एनसीएलटी ने केनरा बैंक की पिटीशन पर मिट्सम एंटरप्राइजेज में सीआईआरपी शुरू किया </title>
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                        <![CDATA[<p>नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने पुणे स्थित फर्म मेसर्स मिट्सम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ केनरा बैंक की इन्सॉल्वेंसी पिटीशन को  स्वीकार कर लिया। इस पिटीशन के तहत कंपनी पर 73 करोड़ रुपये से अधिक के डिफॉल्ट के मामले में कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस  शुरू किया गया है। एनसीएलटी की डिवीजन बेंच, जिसमें ज्यूडिशियल मेंबर नीलेश शर्मा और टेक्निकल मेंबर समीर कक्कड़ शामिल थे, ने ऑर्डर पारित करते हुए यह तय किया कि फाइनेंशियल क्रेडिटर यानी केनरा बैंक ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत कानूनी लिमिट से अधिक कर्ज और डिफॉल्ट को सही तरीके से साबित कर दिया।</p>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48981/mumbai-nclt-initiates-cirp-in-mitsam-enterprises-on-canara-banks"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(30).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने पुणे स्थित फर्म मेसर्स मिट्सम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ केनरा बैंक की इन्सॉल्वेंसी पिटीशन को  स्वीकार कर लिया। इस पिटीशन के तहत कंपनी पर 73 करोड़ रुपये से अधिक के डिफॉल्ट के मामले में कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस  शुरू किया गया है। एनसीएलटी की डिवीजन बेंच, जिसमें ज्यूडिशियल मेंबर नीलेश शर्मा और टेक्निकल मेंबर समीर कक्कड़ शामिल थे, ने ऑर्डर पारित करते हुए यह तय किया कि फाइनेंशियल क्रेडिटर यानी केनरा बैंक ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत कानूनी लिमिट से अधिक कर्ज और डिफॉल्ट को सही तरीके से साबित कर दिया।</p>
<p> </p>
<p>केनरा बैंक ने सेक्शन 7 के तहत पिटीशन दाखिल की थी। बैंक ने बताया कि उसने 2017 में मिट्सम एंटरप्राइजेज को कैश क्रेडिट लिमिट और लेटर ऑफ़ क्रेडिट फैसिलिटी समेत कई क्रेडिट फैसिलिटी मंज़ूर की थीं। बैंक का दावा है कि कंपनी ने अपनी रीपेमेंट ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया, जिसके कारण कुल बकाया रकम बढ़कर 73.69 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। हालांकि, कंपनी ने पिटीशन में उठाए गए दावों पर सवाल खड़े किए। कॉर्पोरेट कर्जदार ने बकाया रकम, डिफ़ॉल्ट की तारीख और पिटीशन के मेंटेनेबल होने पर आपत्ति जताई। कंपनी का यह भी कहना था कि दावा लिमिटेशन पीरियड के कारण रुका हुआ था और मई 2023 में प्रस्तुत किए गए कथित वन-टाइम सेटलमेंट प्रपोज़ल को कर्ज की वैलिड एक्नॉलेजमेंट नहीं माना जा सकता।</p>
<p>इन आपत्तियों पर विचार करते हुए ट्रिब्यूनल ने पाया कि बैंक ने रिकॉर्ड में पर्याप्त मटीरियल सबूत पेश किए थे। इनमें लोन डॉक्यूमेंट, अकाउंट स्टेटमेंट और इन्फॉर्मेशन यूटिलिटी के माध्यम से ऑथेंटिकेटेड डिफ़ॉल्ट रिकॉर्ड शामिल थे। ट्रिब्यूनल ने यह भी फैसला सुनाया कि कंपनी द्वारा पिछले कुछ सालों में किए गए पेमेंट और ओ टी एस प्रपोज़ल के जरिए की गई जमा राशि, लायबिलिटी की वैध मान्यता के रूप में देखी जाएगी, जिससे लिमिटेशन पीरियड बढ़ गया।</p>
<p>इसके बाद, ट्रिब्यूनल ने कंपनी के मैनेजमेंट से सभी अधिकार आईआरपी यानी इंटरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल को सौंपने का निर्देश दिया। पंकज शाम जोशी को सीआईआरपी की देखरेख के लिए आईआरपी के रूप में नियुक्त किया गया है। वह कंपनी की वित्तीय स्थिति का जायजा लेंगे और रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस को सुचारू रूप से संचालित करेंगे। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि आईबीसी के तहत फाइनेंशियल क्रेडिटर्स अपनी शिकायतों के साथ सीआईआरपी शुरू करवा सकते हैं, यदि कंपनी के कर्ज और डिफॉल्ट का ठोस सबूत मौजूद हो। केनरा बैंक की इस पिटीशन को मान्यता मिलने के बाद मिट्सम एंटरप्राइजेज के लिए वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों पर आईआरपी की निगरानी में ही काम होगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम कंपनियों को अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही, सीआईआरपी के जरिए बैंक और अन्य क्रेडिटर्स को बकाया राशि वसूलने का कानूनी रास्ता मिलता है। यह मामला महाराष्ट्र में कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी के महत्व को भी उजागर करता है और संकेत देता है कि आईबीसी  के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन कर केनरा बैंक जैसे फाइनेंशियल संस्थान अपने कर्ज का संरक्षण कर सकते हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 11:23:37 +0530</pubDate>
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