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                <title>ships - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : होर्मुज पार कर भारतीय टैंकर 'देश गरिमा' पहुंचा मुंबई, जानें कितने भारतीय जहाज अब भी वहां फंसे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कच्चे तेल का टैंकर 'देश गरिमा' बुधवार शाम को मुंबई बंदरगाह पर पहुंच गया. भारतीय ध्वज वाले इस बड़े कच्चे तेल के टैंकर में 97,422 मीट्रिक टन कच्चे तेल का स्टॉक लोड किया हुआ है और इसपर 31 भारतीय नाविक सवार हैं. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलकर सुरक्षित भारत पहुंचने वाला ये 10वां टैंकर है. 18 अप्रैल को दो भारतीय जहाजों- वीएलसीसी समनार हेराल्ड और बल्क कैरियर जग अर्नव पर IRGC सैनिकों द्वारा फायरिंग के बाद स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से निकलने वाला ये पहला जहाज है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49412/mumbai-indian-tanker-crosses-hormuz-and-reaches-desh-garima-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-23t111410.059.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कच्चे तेल का टैंकर 'देश गरिमा' बुधवार शाम को मुंबई बंदरगाह पर पहुंच गया. भारतीय ध्वज वाले इस बड़े कच्चे तेल के टैंकर में 97,422 मीट्रिक टन कच्चे तेल का स्टॉक लोड किया हुआ है और इसपर 31 भारतीय नाविक सवार हैं. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलकर सुरक्षित भारत पहुंचने वाला ये 10वां टैंकर है. 18 अप्रैल को दो भारतीय जहाजों- वीएलसीसी समनार हेराल्ड और बल्क कैरियर जग अर्नव पर IRGC सैनिकों द्वारा फायरिंग के बाद स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से निकलने वाला ये पहला जहाज है. 28 फरवरी 2026 से अब तक 9 एलपीजी टैंकर और 1 कच्चे तेल का टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं. हालांकि, अब भी होर्मुज जलडमरूमध्य में 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं. इनमें 3 कच्चे तेल के टैंकर और 1 बड़ा एलपीजी टैंकर शामिल हैं.</p>
<p> </p>
<p>शिपिंग मंत्रालय ने बुधवार को कहा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में टैंकर्स पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अनिश्चितता के बीच, भारतीय सरकार ने शेष 14 मालवाहक जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिलाने के प्रयासों को तेज कर दिया है. विशेष मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में फंसे सभी जहाज़ों को सुरक्षित निकलने के लिए ईरान सरकार के साथ बातचीत जारी है. हम होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना किसी बाधा के जहाजों की आवाजाही बहाल करने के पक्ष में हैं. हम अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं".</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है. भारत ने युद्धविराम का स्वागत किया था. हमने कहा है कि इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति आवश्यक है. 28 फरवरी को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के समय 24 भारत-ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में फंसे थे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:15:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : युद्ध के बीच चीन से जहाजों पर लदकर आईं सुरंगें खोदने वाली मशीनें, अंडरग्राउंड दौड़ेगी बुलेट ट्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेेरिका-ईरान में चले रहे युद्ध के बीच भारत की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए दो टनल बोरिंग मशीनें  मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर पहुंच गई हैं। सुरंगें खोदने वाली हर मशीन करीब 2,000 टन की हैं। ये मशीनें जर्मन कंपनी हेरेनकनेक्ट  ने बनाई हैं, जिनका प्रोडॅक्शन चीन में गुआंगझू की फैक्ट्री में किया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48763/amidst-the-mumbai-war-tunnel-digging-machines-came-loaded-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-28t104328.084.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अमेेरिका-ईरान में चले रहे युद्ध के बीच भारत की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए दो टनल बोरिंग मशीनें  मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर पहुंच गई हैं। सुरंगें खोदने वाली हर मशीन करीब 2,000 टन की हैं। ये मशीनें जर्मन कंपनी हेरेनकनेक्ट  ने बनाई हैं, जिनका प्रोडॅक्शन चीन में गुआंगझू की फैक्ट्री में किया गया है। इन मशीनों को चीन से भारत जहाजों के जरिये लाने में नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को बीजिंग, बर्लिन से संपर्क साधना पड़ा और अरसे से कूटनीतिक बातचीत के बाद सरकार को ये बड़ी कामयाबी मिली है। इन मशीनों के आने से अब बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को पूरा करने में तेजी आएगी। </p>
<p> </p>
<p><strong>मुंबई के नीचे चट्टान काटकर बनेगा अंडरग्राउंड टनल</strong><br />मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जल्द ही ये मशीनें एक शहर के नीचे चट्टानों को काटकर अंडरग्राउंड टनल बना देंगी, जिससे होकर भारत की पहली बुलेट ट्रेन गुजरेगी। 13.56 डायमीटर वाली ये टनल बोरिंग मशीनें भारत की धरती पर अब तक की सबसे बड़ी मशीनें हैं।</p>
<p><strong>मुंबई के नीचे चट्टान काटकर बनेगा अंडरग्राउंड टनल</strong><br />मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जल्द ही ये मशीनें एक शहर के नीचे चट्टानों को काटकर अंडरग्राउंड टनल बना देंगी, जिससे होकर भारत की पहली बुलेट ट्रेन गुजरेगी। 13.56 डायमीटर वाली ये टनल बोरिंग मशीनें भारत की धरती पर अब तक की सबसे बड़ी मशीनें हैं।<br />रिपोर्टों के अनुसार, इन मशीनों को लाने में भारत के कूटनीतिक संपर्कों का बड़ा इस्तेमाल हुआ है। नई दिल्ली, बीजिंग और बर्लिन के बीच कूटनीतिक प्रयास करने के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय, भारतीय विदेश मंत्रालय 18 महीनों से लगा हुआ था, तब जाकर ये मशीनें चीन से भारत आ पाईं। </p>
<p><strong>मुंबई से अहमदाबाद तक 508 किमी दौड़ेगी बुलेट ट्रेन</strong><br />रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी बुुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल  का कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा होगा, जो महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर का करीब 323 किलोमीटर का हिस्सा तकरीबन पूरा हो चुका है। </p>
<p><strong>21 किलोमटर का अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनेगा</strong><br />हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का सबसे ज्यादा तकनीकी हिस्सा अंडरग्राउंड वाला है, जो 21 किलोमीटर लंबा है।<br />यह मुंबई में बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स से नवीं मुंबई के शिलफाटा के बीच होगा।<br />यहां बेहद घनी आबादी और इन्फ्रास्ट्रक्चर है, ऐसे में इसे बनाना बेहद जटिल साबित हो रहा था।<br />मगर, अब इन टीबीएम मशीनों के आने से टनल बनाने का काम संभव हो पाएगा। </p>
<p><strong>कितना हो चुका है काम, कितना है बकाया</strong><br />इन 21 किलोमीटर की सुरंग में से 4.8 किमी का काम तो पूरा हो चुका है। इस हिस्से को न्यू ऑस्ट्रियाई टनलिंग मेथड यानी ड्रिल और ब्लास्ट के तरीके से बनाया गया है। बचा हुआ 15.5 किलोमीटर के हिस्से को बनाने के लिए इन TBM मशीनों की जरूरत थी।</p>
<p>एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त, 2027 तक चलने की उम्मीद है।<br />केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने बुलेट ट्रेन के लिए 7 नए कॉरिडोर का ऐलान किया था, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:44:49 +0530</pubDate>
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