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                <title>मुंबई: मनरेगा कार्यों की धीमी प्रगति, कैग की रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र में महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम (मनरेगा) के कामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कैग की रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में पेश की गई। कैग की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि राज्य में 2019-20 से 2023-24 तक महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम (मनरेगा) के तहत मंज़ूर कामों में से सिर्फ़ 52.81 प्रतिशत ही पूरे हुए हैं।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48729/cag-report-slow-progress-of-mumbai-mnrega-works"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-26t125936.645.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र में महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम (मनरेगा) के कामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कैग की रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में पेश की गई। कैग की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि राज्य में 2019-20 से 2023-24 तक महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम (मनरेगा) के तहत मंज़ूर कामों में से सिर्फ़ 52.81 प्रतिशत ही पूरे हुए हैं।</p>
<p> </p>
<p>लगभग 47.19 काम अधूरे हैं। इस दौरान कुल 25.72 लाख काम मंज़ूर किए गए. लेकिन मार्च 2025 तक 7.10 लाख काम शुरू भी नहीं हुए हैं। पूरे हो चुके कामों पर 6,725.65 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि अधूरे कामों पर 5,361.02 करोड़ रुपये खर्च हुए।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि बेरोज़गारी भत्ते के बंटवारे में भी गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं है. नियमानुसार 15 दिनों के अंदर काम न मिलने पर भत्ता देना ज़रूरी है, लेकिन बकाया 34.85 लाख रुपये में से सिर्फ़ 2,268 रुपये ही बांटे गए. शेष 34.83 लाख रुपये अभी भी पेंडिंग हैं. सोशल ऑडिट में भी खामियां पाई गई हैं. लघभग 72.43 से 95.67 फीसदी ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट नहीं हुआ है।</p>
<p>हालांकि गड़बड़ी के 1,084 मामलों में 11.22 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई है, लेकिन 314 मामलों में 4.44 करोड़ रुपये की रिकवरी अभी भी बाकी है। राज्य रोजगार गारंटी परिषद की बैठकें नियमित नहीं हुई हैं। ज़िलास्तर पर गुणवत्ता निरीक्षण का सिस्टम भी पर्याप्त नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:00:10 +0530</pubDate>
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