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                <title>tangled - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई में इच्छामृत्यु के 40 आवेदन अटके, BMC में स्पष्ट नियमों के अभाव में प्रशासन उलझा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में ‘इच्छामृत्यु’ यानी पैसिव यूथेनेशिया का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में हरिश राणा को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी, जिनका निधन हो गया. इस घटना के बाद यह सामने आया कि पिछले दो साल में मुंबई महानगरपालिका के पास इच्छामृत्यु के लिए 40 लोगों ने आवेदन किया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48715/40-euthanasia-applications-stuck-in-mumbai-administration-entangled-due-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-26t122905.196.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में ‘इच्छामृत्यु’ यानी पैसिव यूथेनेशिया का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में हरिश राणा को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी, जिनका निधन हो गया. इस घटना के बाद यह सामने आया कि पिछले दो साल में मुंबई महानगरपालिका के पास इच्छामृत्यु के लिए 40 लोगों ने आवेदन किया है. साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक अहम फैसला देते हुए गंभीर और लाइलाज मरीजों को कुछ शर्तों के साथ इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी. इसके बाद राज्य सरकार ने BMC को ऐसे मामलों में आवेदन लेने की जिम्मेदारी दी. इसी के तहत शहर के अलग-अलग इलाकों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के पास अब तक 40 आवेदन जमा हो चुके हैं. यह संख्या दिखाती है कि कई लोग इस विकल्प को लेकर सोच रहे हैं.</p>
<p> </p>
<p><strong>स्पष्ट नहीं है कोई नियम</strong><br />सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन आवेदनों पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाए, इसको लेकर कोई स्पष्ट नियम तय नहीं है. करीब दो साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन यह तय नहीं कर पाया है कि किस केस में क्या कदम उठाना है. कानूनी और तकनीकी पहलुओं को लेकर भी कई तरह की उलझन बनी हुई है. इसी वजह से अब तक एक भी आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है.</p>
<p><strong>डॉक्टरों और प्रशासन के सामने मुश्किल सवाल</strong><br />वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि इच्छामृत्यु के मामलों में कई जटिल सवाल सामने आते हैं. जैसे अगर किसी व्यक्ति ने मुंबई में आवेदन किया, लेकिन उसकी मृत्यु किसी दूसरे शहर या राज्य में होती है, तो फैसला कौन लेगा? इसी तरह मरीज की हालत, परिवार की सहमति, मेडिकल बोर्ड की भूमिका और कानूनी जांच जैसे कई पहलुओं पर अभी भी स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं.</p>
<p><strong>डिजिटल पोर्टल को लेकर भी असमंजस</strong><br />सरकार के शहरी विकास विभाग ने इन मामलों को रिकॉर्ड करने के लिए एक डिजिटल पोर्टल बनाया है. लेकिन BMC स्तर पर इसका इस्तेमाल अभी तक शुरू नहीं हो पाया है. कुछ डॉक्टरों का मानना है कि BMC को अपना अलग सिस्टम बनाना चाहिए, जबकि प्रशासन का कहना है कि जब सरकारी पोर्टल मौजूद है, तो नया सिस्टम बनाने की जरूरत नहीं है.</p>
<p><strong>समाधान की उम्मीद, सरकार पर नजर</strong><br />इस पूरे मामले में सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्टर निखिल दातार ने सरकार से स्पष्ट प्रक्रिया तय करने की मांग की है. उन्होंने इस विषय पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी है. BMC प्रशासन ने भी सरकार से कई बार पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे हैं. अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट नियम बनाए जाएंगे, ताकि मरीजों और उनके परिवारों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
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