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                <title>impacts - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : पवई झील ओवरफ्लो, मुंबई में बारिश का असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शहर के पूर्वी उपनगरों में स्थित पवई झील बुधवार सुबह ओवरफ्लो हो गई। यह घटना लगभग सुबह 5:30 बजे दर्ज की गई, जिससे आसपास के इलाकों में हलचल बढ़ गई। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि झील अपने निर्धारित जलस्तर से ऊपर भर गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50510/mumbai-powai-lake-overflow-effect-of-rain-in-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/w-1280,h-720,imgid-01kwf25kf8ynkfxh1fak7230wr,imgname-powai-lake-overflows-in-mumbai-amid-heavy-monsoon-showers-1782917025255.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शहर के पूर्वी उपनगरों में स्थित पवई झील बुधवार सुबह ओवरफ्लो हो गई। यह घटना लगभग सुबह 5:30 बजे दर्ज की गई, जिससे आसपास के इलाकों में हलचल बढ़ गई। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि झील अपने निर्धारित जलस्तर से ऊपर भर गई है। बीएमसी के अनुसार, पवई झील शहर की प्रमुख कृत्रिम झीलों में से एक है, जिसकी कुल जल धारण क्षमता 545 करोड़ लीटर है। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि इस झील के पानी का उपयोग केवल औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, और इसे पीने के पानी की आपूर्ति में शामिल नहीं किया जाता।</p>
<p> </p>
<p>नगर निगम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि झील में जलस्तर बढ़ने के कारण यह ओवरफ्लो स्थिति में पहुंच गई है। लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ते पानी के दबाव को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। इस बीच, मुंबई की पेयजल आपूर्ति प्रणाली को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। शहर को पानी सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों में इस वर्ष पानी का स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम दर्ज किया गया है। हालांकि मानसून सक्रिय है, फिर भी जल भंडारण के स्तर में अपेक्षित वृद्धि नहीं देखी जा रही है। बीएमसी के अधिकारियों के अनुसार, मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह इन सात जलाशयों पर निर्भर करती है, जो शहर की दैनिक पानी की जरूरतों को पूरा करते हैं। ऐसे में जलस्तर में किसी भी तरह की गिरावट भविष्य में आपूर्ति व्यवस्था पर असर डाल सकती है।</p>
<p>पवई झील के ओवरफ्लो होने की घटना को फिलहाल बारिश के कारण सामान्य स्थिति माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि जल स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। नगर निगम की टीमें मौके पर स्थिति का आकलन कर रही हैं और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, झील के आसपास पानी का स्तर बढ़ने से कुछ निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका भी बनी रहती है। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या जलभराव की सूचना नहीं मिली है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में मानसून के दौरान झीलों और जलाशयों का भरना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जल प्रबंधन की दृष्टि से इसका संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि जलाशयों का स्तर लगातार कम बना रहता है, तो आने वाले महीनों में पानी की आपूर्ति को लेकर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। बीएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में जलापूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक योजनाएं लागू की जाएंगी। नगर निगम ने नागरिकों से भी पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की है। मुंबई में हर साल मानसून के दौरान जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। पवई झील जैसे जलस्रोत जहां अतिरिक्त पानी को संभालने में मदद करते हैं, वहीं अन्य जलाशय शहर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस बार के मानसून में जहां कुछ जलस्रोतों में पानी बढ़ा है, वहीं कुल मिलाकर जल भंडारण का स्तर अभी भी पिछले साल की तुलना में कम बताया जा रहा है। यह स्थिति आने वाले समय में जल प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकती है। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और कहा है कि किसी भी तरह की आपात स्थिति नहीं है। लेकिन जल स्तर की निगरानी और प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। कुल मिलाकर, पवई झील का ओवरफ्लो होना जहां भारी बारिश का सामान्य परिणाम माना जा रहा है, वहीं शहर के अन्य जलाशयों में कम जल स्तर आने वाले दिनों में मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए अहम विषय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:24:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : नो गैस, नो डब्बा! एलपीजी संकट से मुंबई का टिफिन नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग की वजह से देश में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है. ईरान ने प्रमुख तेल-गैस ढुलाई मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की बात कही है. इससे तेल-गैस की ढुलाई पर असर पड़ा है. भारत भी अपनी गैस जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं अरब देशों से आयात करता है. ऐसे में भारत में भी एलपीजी की कमी देखी जा रही है. हालांकि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं पर असर न पड़े, इसके लिए कई जरूरी कदम उठा रही है. एलपीजी के कमर्शिलय सिलेंडरों में कमी की गई है. इस कारण तमाम रेस्टोरेंटों और टिफिन सर्विस देने वाले लोगों के काम पर असर पड़ा है. इसी में से एक है मु्ंबई का फेमस टिफिन नेटवर्क.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48678/mumbais-tiffin-network-badly-affected-due-to-mumbai-no-gas"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-24t191509.660.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग की वजह से देश में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है. ईरान ने प्रमुख तेल-गैस ढुलाई मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की बात कही है. इससे तेल-गैस की ढुलाई पर असर पड़ा है. भारत भी अपनी गैस जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं अरब देशों से आयात करता है. ऐसे में भारत में भी एलपीजी की कमी देखी जा रही है. हालांकि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं पर असर न पड़े, इसके लिए कई जरूरी कदम उठा रही है. एलपीजी के कमर्शिलय सिलेंडरों में कमी की गई है. इस कारण तमाम रेस्टोरेंटों और टिफिन सर्विस देने वाले लोगों के काम पर असर पड़ा है. इसी में से एक है मु्ंबई का फेमस टिफिन नेटवर्क.</p>
<p> </p>
<p>मुंबई के साकिनाका से वर्ली तक, मुंबई का पारंपरिक टिफिन सर्विस नेटवर्क अब गंभीर एलपीजी संकट की चपेट में है. यह टिफिन सर्विस ऐप आधारित डिलिवरी सर्विस से दशकों पहले से मुंबई नगरी में घर-घर खाना पहुंचाने का एक बड़ा नेटवर्क है. एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण कई टिफिन वाले पुराने जमाने की लकड़ी-कोयले की सिगड़ी पर खाना बना रहे हैं, मेन्यू काट रहे हैं और ऑर्डर ठुकरा रहे हैं. कुछ तो पूरी तरह बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं.</p>
<p>इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साकिनाका में 33 वर्षीय चिराग पुरोहित 2009 से ‘यम्मी टिफिन्स’ चला रहे हैं. एलपीजी न मिलने पर उन्होंने लकड़ी और कोयले की सिगड़ी पर खाना बनाना शुरू कर दिया है. वह बताते हैं कि रोटी-सब्जी के अलावा हम हाई-प्रोटीन राइस बाउल भी बनाते थे, लेकिन अब उन्हें बंद करना पड़ा है. एक दिन में 500 डब्बे बनते थे, अब घटकर 300 रह गए हैं. सिगड़ी पर खाना बनने में बहुत ज्यादा समय लगता है. उनकी कैटरिंग बिजनेस भी बुरी तरह प्रभावित हुई है.</p>
<p>इसी तरह भांडुप में 29 वर्षीय ओमकार अजित पाटकर ‘भोजनयान टिफिन सर्विस’ चला रहे हैं. वह कहते हैं कि चाइनीज डिश या फ्राई करने वाली चीजें लकड़ी-कोयले पर नहीं बनाई जा सकतीं. पिछले दो हफ्तों से एक भी सिलेंडर नहीं मिला है. हम बंद होने के कगार पर हैं. जोशेवाड़ी में लक्ष्मी टिफिन सर्विस भी बंद हो गई. 30 वर्षीय आकाश अधिवंद रोजाना 70 डब्बे छात्रों, कामकाजी लोगों और परिवारों को सप्लाई करते थे. उन्होंने कहा कि दूसरा सिलेंडर खत्म हो गया, रिफिल नहीं हो पाया. गैस एजेंसी सिर्फ इतना कह रही है कि कुछ दिनों में स्थिति सुधर सकती है. </p>
<p>वर्ली कोलीवाड़ा में नीतीन मोरगांवकर ‘आईचा डब्बा टिफिन सर्विस’ चलाते हैं. वह कहते हैं कि 14 किलो वाले सिलेंडर का दाम 920 रुपये से बढ़कर ब्लैक में 2,500-3,000 रुपये हो गया है. पहले 120 रुपये में मिलने वाला साधारण रोटी-सब्जी का डब्बा अब 135 रुपये का हो गया है. डिलीवरी के साथ 175 रुपये. मार्जिन करीब 30 प्रतिशत घट गया है. उनकी पांच महिलाएं रोज 2,000 चपातियां बनाकर थोक में बेचती थीं, लेकिन अब वह काम भी बंद करना पड़ा. मोरगांवकर कहते हैं कि इन महिलाओं का रोजगार छिन गया, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था.</p>
<p><strong>केंद्र ने बढ़ाई कोटा, लेकिन टिफिन वालों को अभी राहत नहीं</strong><br />केंद्र सरकार ने सोमवार से सभी राज्यों में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई 20 प्रतिशत बढ़ा दी है, जिससे कुल आवंटन पूर्व संकट स्तर का 50 प्रतिशत हो गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने 21 मार्च को जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत कोटा रेस्तरां, ढाबा, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी यूनिट, सब्सिडाइज्ड कैंटीन और 5 किलो फ्री ट्रेड सिलेंडर (माइग्रेंट मजदूरों के लिए) को प्राथमिकता से दिया जाए.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 19:16:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : ईरान-इजरायल युद्ध का पड़ रहा निर्माण कार्य पर असर, टाइल्स और स्टील के दाम में उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ईरान-इजरायल युद्ध का असर निर्माण क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। कमर्शल गैस आपूर्ति प्रभावित होने से टाइल्स और स्टील के दामों में तेजी आई है, जिससे बिल्डिंग निर्माण की लागत बढ़ गई है। भवन निर्माण कार्य से जुड़े एवी कंस्ट्रक्शन समूह के संचालक अमित मिश्रा ने बताया कि स्टील के दामों में भी भारी उछाल आया है। पहले स्टील का बेसिक रेट करीब 36,100 रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 46,000 रुपये तक पहुंच गया है। यानी स्टील की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48645/mumbai-iran-israel-war-is-impacting-construction-work-rise-in-prices"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-23t132410.867.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>ईरान-इजरायल युद्ध का असर निर्माण क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। कमर्शल गैस आपूर्ति प्रभावित होने से टाइल्स और स्टील के दामों में तेजी आई है, जिससे बिल्डिंग निर्माण की लागत बढ़ गई है। भवन निर्माण कार्य से जुड़े एवी कंस्ट्रक्शन समूह के संचालक अमित मिश्रा ने बताया कि स्टील के दामों में भी भारी उछाल आया है। पहले स्टील का बेसिक रेट करीब 36,100 रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 46,000 रुपये तक पहुंच गया है। यानी स्टील की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। </p>
<p> </p>
<p><strong>स्टील समेत कई सामग्री हो रही महंगी</strong><br />अमित मिश्रा ने कहा कि सिर्फ स्टील ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक, एल्यूमिनियम और इंटीरियर वर्क से जुड़ी सामग्री भी महंगी हो गई है। इससे निर्माण लागत बढ़ रही है, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ रहा है। वहीं, टाइल्स कारोबारी सौरभ जैन ने बताया कि गुजरात के मोरबी में बड़े पैमाने पर टाइल्स का निर्माण होता है। वहां कई बड़े कारखाने संचालित हैं और टाइल्स बनाने की प्रक्रिया में प्रोफेन गैस का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन युद्ध के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित हो गई है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ा है। <br /> <br />टाइल्स कारोबारी सौरभ जैन ने बताया कि टाइल्स की कीमत अब करीब 35 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट तक पहुंच गई है और इसमें लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में दाम और बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर निर्माण कार्य पर पड़ेगा। कुल मिलाकर लागत बढ़ने से घरों की बिक्री पर भी असर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 13:26:32 +0530</pubDate>
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