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                <title>'cyber - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>'cyber RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : 8वीं पास 'साइबर किंगपिन' गिरफ्तार, 2 साल में खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य, 10 राज्यों में था फैला जाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>झारखंड का जामताड़ा एक बार फिर साइबर अपराध के केंद्र के रूप में उभरा है. मुंबई पुलिस ने 25 वर्षीय मजहर आलम उर्फ इजरायल मियां को गिरफ्तार किया है, जिसने महज 8वीं तक की शिक्षा के बावजूद तकनीक का ऐसा घातक जाल बुना कि सिर्फ दो साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली. मजहर की गिरफ्तारी ने डिजिटल सुरक्षा की कलई खोलकर रख दी है.</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48793/mumbai-8th-pass-cyber-kingpin-arrested-built-an-empire-worth"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-29t104011.847.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>झारखंड का जामताड़ा एक बार फिर साइबर अपराध के केंद्र के रूप में उभरा है. मुंबई पुलिस ने 25 वर्षीय मजहर आलम उर्फ इजरायल मियां को गिरफ्तार किया है, जिसने महज 8वीं तक की शिक्षा के बावजूद तकनीक का ऐसा घातक जाल बुना कि सिर्फ दो साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली. मजहर की गिरफ्तारी ने डिजिटल सुरक्षा की कलई खोलकर रख दी है.</p>
<p> </p>
<p>पुलिस जांच के अनुसार, जामताड़ा के फुकबांदी गांव का रहने वाला मजहर पहले छोटे-मोटे फ्रॉड करता था. उसने ठगी की बारीकियां अपने एक रिश्तेदार से सीखी थीं, जो पहले ही मकोका के तहत जेल जा चुका है. जमानत पर बाहर आने के बाद मजहर ने अपना खुद का संगठित सिंडिकेट बनाया और 10 राज्यों में अपना नेटवर्क फैला दिया.</p>
<p><strong>सॉफ्टवेयर इंजीनिय की तरह दिया साजिश को अंजाम</strong><br />आरोपी का काम करने का तरीका किसी पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसा था. हनीट्रैप (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन): वह गूगल पर विभिन्न बैंकों के फर्जी 'क्रेडिट कार्ड हेल्पलाइन' नंबर डाल देता था. जब कोई जरूरतमंद मदद के लिए सर्च करता, तो उसका नंबर सामने आता.</p>
<p><strong>मालवेयर का हमला: </strong>खुद को बैंक अधिकारी बताकर वह पीड़ित को व्हाट्सएप पर 'क्रेडिट कार्ड एपीके' नाम की फाइल भेजता. इसे डाउनलोड करते ही फोन का पूरा एक्सेस मजहर के पास चला जाता.</p>
<p><strong>ओटीपी बाईपास: </strong>यह मालवेयर न केवल डेटा चुराता, बल्कि कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए ओटीपी भी सीधे मजहर को भेज देता था, जिससे पीड़ित को भनक तक नहीं लगती थी.</p>
<p><strong>डिजिटल लूट का निवेश: </strong>चोरी किए गए डेटा से वह अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करता और फर्जी मर्चेंट अकाउंट्स के जरिए पैसों को 'क्लीन' करता था. ठगी के पैसों से मजहर ने जामताड़ा में एक आलीशान बंगला बनवाया, करीब 30 लाख रुपये का फ्रेंचाइजी शोरूम खोला और महंगी गाड़ियां खरीदीं. उसकी लाइफस्टाइल किसी बड़े बिजनेसमैन जैसी हो गई थी.</p>
<p><strong>मुंबई में शिकायत के बाद बेनकाब हुआ जालसाज</strong><br />मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज एक शिकायत के बाद  एपीआई अमित देवकर और उनकी टीम ने तकनीकी जांच शुरू की. टीम ने 10 दिनों तक झारखंड में डेरा डाला और आखिरकार मजहर को दबोच लिया.</p>
<p>गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अब तक 94 सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया. उसके पास से कई मोबाइल, एडमिन पैनल एक्सेस और क्रेडिट कार्ड डेटा की भारी-भरकम शीट मिली हैं. अब तक 10 राज्यों से जुड़ी 36 से ज्यादा शिकायतें सीधे तौर पर उससे जुड़ी पाई गई हैं. मुंबई पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल को इंस्टॉल न करें और गूगल पर मिलने वाले हेल्पलाइन नंबरों की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को बना रहे ‘साइबर गुलाम’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर अपराध में धकेलने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और एस. सी. चंदक की खंडपीठ ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है और समाज के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48416/mumbai-youth-are-being-made-cyber-slaves-in-the-name"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-14t113229.605.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर अपराध में धकेलने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और एस. सी. चंदक की खंडपीठ ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है और समाज के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />मामले में आरोपी जेरी फिलिप्स जैकब पर आरोप है कि उसने कई शिक्षित युवाओं को विदेशी कंपनियों में आकर्षक और वैध नौकरी का झांसा दिया। जब ये युवक विदेश पहुंचे तो उन्हें बंधक बनाकर अन्य देशों के लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मानव तस्करी का मामला बनता है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ितों को नौकरी की वास्तविक प्रकृति के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। न्यायालय के अनुसार यह अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसमें पीड़ितों को अवैध तरीके से दूसरों को ठगने के लिए मजबूर किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो उसके फरार होने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका है। </p>
<p><strong>आरोपी की दलीलें खारिज</strong><br />मार्च 2024 से जेल में बंद आरोपी ने अदालत में दावा किया कि पीड़ितों को नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे और वे अपनी इच्छा से विदेश गए थे। उसने खुद पर लगे गुलामी और मानव तस्करी के आरोपों को गलत बताया। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि युवाओं को वैध रोजगार का झूठा आश्वासन देकर विदेश भेजना स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और मानव तस्करी की श्रेणी में आता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:33:33 +0530</pubDate>
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