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                <title>Century - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Century RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : सेंचुरी मिल मुंबई की जमीन 1350 करोड़ में हो जाएगी प्राइवेट प्रॉपर्टी, शापूरजी, रहेजा समेत 4 बड़ी कंपनियां आईं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोअर परेल स्थित सेंचुरी मिल की बहुमूल्य ज़मीन अब BMC के लिए बड़ी कमाई का जरिया बनने जा रही है। इस जमीन के विकास और लीज से बीएमसी को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए देश की चार बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां मैदान में उतर चुकी है। इनमें शापूरजी पालनजी ग्रुप, रहेजा ग्रुप, किश्तो ग्रुप और पेडर रियलिटी कंपनियों के नाम शामिल है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49507/the-land-of-mumbai-century-mill-will-become-private-property"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-27t130848.009.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>लोअर परेल स्थित सेंचुरी मिल की बहुमूल्य ज़मीन अब BMC के लिए बड़ी कमाई का जरिया बनने जा रही है। इस जमीन के विकास और लीज से बीएमसी को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए देश की चार बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां मैदान में उतर चुकी है। इनमें शापूरजी पालनजी ग्रुप, रहेजा ग्रुप, किश्तो ग्रुप और पेडर रियलिटी कंपनियों के नाम शामिल है। </p>
<p> </p>
<p><strong>लीज़ से BMC को मिलेगे 1348 करोड़ रुपये</strong><br />बीएमसी ने इस ज़मीन के विकास के लिए हाल ही में टेंडर जारी किया था। सूत्रों के अनुसार, शापूरजी पालनजी ग्रुप, रहेजा ग्रुप, किश्तो ग्रुप और पेडर रियलिटी जैसी कंपनियों आवेदन किया है। इन प्रस्तावों पर आने वाले सप्ताह में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बीएमसी इस ज़मीन की नीलामी करेगी, जिससे उसे करीब 1,348 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।</p>
<p><strong>1927 में दी गई थी जमीन</strong><br />करीब 6 एकड़ में फैली यह ज़मीन ऐतिहासिक रूप से सेंचुरी स्पिनिंग ऐंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को 1 अप्रैल, 1927 से 28 साल के लिए दी गई थी। इसका उद्देश्य मिल के कामगारों के लिए आवास उपलब्ध कराना था। इस ज़मीन पर 476 कमरे, 10 दुकानें और कई चॉल बनाई गई थीं। हालोंकि, 31 मार्च, 1955 को लीज समाप्त हो गई थी और नियमों के अनुसार ज़मीन बीएमसी को वापस मिलनी थी। लेकिन लीज खत्म होने के बाद भी विवाद शुरू हो गया। </p>
<p><strong>बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर मिली जमीन</strong><br />सेंचुरी मिल ने इस जमीन पर अपना अधिकार बनाए रखने के लिए अदालत का रुख किया। इसके जवाब में बीएमसी ने भी कानूनी लड़ाई लड़ी। लंबे समय तक चले इस मामले में अंततः बीएमसी को जीत मिली और ज़मीन उसके कब्जे में वापस आ गई। ज़मीन वापस मिलने के बाद बीएमसी ने इसके विकास की योजना बनाई। इसके तहत सबसे पहले यहां रहने वाले मूल कामगारों, किरायेदारों और अन्य निवासियों का सर्वे किया गया, ताकि पुनर्वास और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई जा सके। </p>
<p><strong>बनेंगे लक्जरी घर, मजदूरों को मिलेंगे फ्लैट</strong><br />सर्वे पूरा होने के बाद अब बीएमसी ने इस ज़मीन को निजी डिवेलपर्स के जरिए विकसित करने का फैसला लिया है। बीएमसी के स्टेट डिपार्टमेंट से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट BMC के लिए राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ शहर के पुनर्विकास का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि 'टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है और सभी कानूनी व तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से न केवल बीएमसी को अच्छी आय होगी, बल्कि पुराने कामगारों का पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाएगा।' योजना के अनुसार, यहां लक्ज़री घर बनाए जाएंगे। इनमें कुछ घर सेंचुरी मिल के मूल कामगारों और कर्मचारियों को दिए जाएंगे, जबकि बाकी फ्लैट्स खुले बाज़ार में बेचे जाएंगे। </p>
<p>फिलहाल इस ज़मीन की मौजूदा कीमत करीब 660 करोड़ रुपये आंकी गई है, लेकिन विकास के बाद इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ने की संभावना है। बीएमसी इस ज़मीन को 30 साल की लीज पर देगी, जिससे उसे एकमुश्त राशि के साथ-साथ लंबे समय तक स्थिर आय भी मिलती रहेगी।<br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 13:17:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : बीएमसी ने लोअर परेल में सेंचुरी मिल्स के 23,822 वर्ग मीटर लैंड पार्सल के लिए नीलामी की डेडलाइन बढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोअर परेल में 23,822 वर्ग मीटर ज़मीन के टुकड़े की नीलामी को आगे बढ़ा दिया गया है, क्योंकि बीएमसी  बोली लगाने वालों को नहीं ला पाई। यह प्राइम प्लॉट, जो असल में 1927 में सेंचुरी स्पिनिंग एंड मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड को लीज़ पर दिया गया था, पिछले साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सिविक बॉडी ने अपने कब्ज़े में ले लिया था। बीएमसी ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टिसिपेशन मॉडल के तहत ज़मीन को 30 साल के लिए लीज़ पर देने के लिए बोलियां मंगाई हैं — जिसे और 30 साल तक बढ़ाया जा सकता है — जिससे लगभग 1,348 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48183/mumbai-bmc-extends-auction-deadline-for-23822-square-meter-land"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-04t181935.476.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>लोअर परेल में 23,822 वर्ग मीटर ज़मीन के टुकड़े की नीलामी को आगे बढ़ा दिया गया है, क्योंकि बीएमसी  बोली लगाने वालों को नहीं ला पाई। यह प्राइम प्लॉट, जो असल में 1927 में सेंचुरी स्पिनिंग एंड मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड को लीज़ पर दिया गया था, पिछले साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सिविक बॉडी ने अपने कब्ज़े में ले लिया था। बीएमसी ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टिसिपेशन मॉडल के तहत ज़मीन को 30 साल के लिए लीज़ पर देने के लिए बोलियां मंगाई हैं — जिसे और 30 साल तक बढ़ाया जा सकता है — जिससे लगभग 1,348 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>
<p><strong>लीज़ का इतिहास और सुप्रीम कोर्ट का फैसला</strong><br />यह प्लॉट असल में मेसर्स सेंचुरी स्पिनिंग एंड मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड (अब सेंचुरी टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) को 1 अप्रैल, 1927 से 28 साल के लिए गरीब तबके के कर्मचारियों को रहने के लिए लीज़ पर दिया गया था। लीज़ डीड 3 अक्टूबर, 1928 को हुई थी, और 1955 में खत्म हो गई थी। लीज़ खत्म होने के बाद, कंपनी ने ज़मीन वापस करने के बजाय उसे अपने नाम पर ट्रांसफर करने की कोशिश की। बीएमसी ने इस कदम को भारत के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जनवरी 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने सिविक बॉडी के पक्ष में फैसला सुनाया, और कहा कि ज़मीन सही मायने में बीएमसी की है।</p>
<p><strong>कोई बोली नहीं मिली; डेडलाइन बढ़ाई गई </strong><br />बीएमसी की लोअर परेल ज़मीन पर अब 476 घर, 10 दुकानें और एक स्कूल है, और इस प्राइम प्लॉट की कीमत लीज़ के लिए Rs 1,348 करोड़ तक है। जनवरी में, सिविक बॉडी ने प्लॉट को लीज़ पर देने के लिए टेंडर मंगाए थे, लेकिन 16 फरवरी की ओरिजिनल डेडलाइन तक कोई बोली जमा नहीं की गई। बीएमसी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “हालांकि कई कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई, लेकिन 16 फरवरी तक किसी ने भी बोली जमा नहीं की। हम उनके सवालों का जवाब दे रहे हैं, और अब डेडलाइन बढ़ाकर 16 मार्च कर दी गई है।”</p>
<p>जून 2025 में, बीएमसी ने क्रॉफर्ड मार्केट और वर्ली एस्फाल्ट प्लांट के पास दो महंगे प्लॉट की नीलामी की, जिससे Rs 1,152 करोड़ मिले। 2,432 वर्ग मीटर मालाबार हिल प्लॉट की नीलामी लोगों के एतराज़ की वजह से कैंसिल कर दी गई, हालांकि एक नए सबस्टेशन के लिए इसकी ज़रूरत है। एक सिविक अधिकारी ने कहा कि ऐसी प्रॉपर्टीज़ को लीज़ पर देने से होने वाली कमाई का इस्तेमाल चल रहे सिविक प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 18:20:14 +0530</pubDate>
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