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                <title>"If - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : मनोज जरांगे की चेतावनी, 'मुंबई में एक भी युवक का खून बहा तो...'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे के अनशन का आज (07 सितंबर) दसवां दिन है. इस बीच जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ढिलाई और लापरवाही बरत रही है, जिससे मराठा समाज का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. उन्होंने सरकार को 12 सितंबर तक का समय दिया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51744/mumbai-manoj-jaranges-warning-if-even-one-youths-blood-is"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-08t121911.351.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे के अनशन का आज (07 सितंबर) दसवां दिन है. इस बीच जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ढिलाई और लापरवाही बरत रही है, जिससे मराठा समाज का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. उन्होंने सरकार को 12 सितंबर तक का समय दिया है. उन्होंने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुंबई में एक भी युवक का खून बहा तो 10 मिनट के भीतर महाराष्ट्र बंद हो जाना चाहिए. जरांगे ने उस दिन सभी मराठा समाज के लोगों से अंतरवाली सराटी पहुंचने की अपील की है.</p>
<p> </p>
<p>मनोज जरांगे ने कहा, “सरकार जानबूझकर ढिलाई और लापरवाही कर रही है. मराठा समाज का आक्रोश बढ़ रहा है. मराठा समाज को खत्म करने के लिए जानबूझकर लापरवाही की जा रही है. हमने सरकार को 12 तारीख तक का समय दिया है. सभी मंत्रियों ने कहा था कि आपको अनशन करने की नौबत नहीं आएगी. मार्च और फरवरी में प्रसाद लाड ने कहा था कि हमें बुलाइए. उन्होंने कहा था कि देवेंद्र फडणवीस मराठों की मांगें पूरी करेंगे. इसलिए लाड को बुलाया गया था, लेकिन एक साल में उन्होंने कुछ नहीं किया.”</p>
<p><strong>एकनाथ शिंदे और सीएम फडणवीस की मिलीभगत- मनोज जरांगे</strong><br />जरांगे ने आगे कहा, “एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की यह मिलीभगत है. हमें जानकारी मिली है कि शिंदे के दो मंत्री और दो प्रवक्ता आंदोलन को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. मुंबई की ओर निकलने के बाद हमला कर फडणवीस को बदनाम करने की सरकार की साजिश है. बावनकुले और उनके लोगों की भी यही गतिविधियां चल रही हैं. पिछले दो-तीन दिनों में कुछ पत्रकारों से सलाह ली जा रही है कि आंदोलन को कैसे खत्म किया जाए. मुंबई जाने के बाद यदि हमला हुआ तो इसे समझ लेना चाहिए. अगर मुंबई जाते समय हमें रोका नहीं गया तो समझेंगे कि हमें सही जानकारी नहीं मिली थी.”</p>
<p><strong>10 लोग भी होंगे तो मुंबई जाएंगे- मनोज जरांगे</strong><br />मनोज जरांगे ने 12 सितंबर को बड़ी संख्या में मराठा समाज से अंतरवाली सराटी पहुंचने की अपील की. उन्होंने कहा, “12 तारीख को सभी मराठा भाई अंतरवाली आएं. सांगली, सोलापुर, पुणे, कोल्हापुर, सातारा, सिंधुदुर्ग, रायगढ़, मुंबई, नगर और नाशिक जिले के हर गांव से मराठा समाज के लोग अंतरवाली आएं. सभी लोग व्यक्तिगत रूप से आएं. अब आंदोलनकारी नहीं भी आएं तो चलेगा, लेकिन 12 तारीख को जरूर आएं. 10 लोग भी होंगे तो हम मुंबई की ओर जाएंगे.”</p>
<p><strong>मनोज जरांगे ने सरकार को दी चेतावनी</strong><br />इस दौरान जरांगे ने मुंबई में संभावित स्थिति का जिक्र करते हुए चेतावनी दी. उन्होंने कहा, “मुंबई में अगर एक भी युवक का खून बहा तो 10 मिनट के भीतर महाराष्ट्र बंद हो जाना चाहिए. अगर सीएम फडणवीस ने साजिश रचकर हमला कराया तो 10 मिनट के भीतर महाराष्ट्र ठप हो जाना चाहिए, पूरी तरह बंद हो जाना चाहिए. अगर पुलिस हमला करे तो भागना मत, क्योंकि भगदड़ मच सकती है. हथियार कुछ नहीं कर सकते. अगर लड़कों ने उन्हें पकड़ लिया तो वे हिल भी नहीं पाएंगे. मुंबई में सतर्क रहो और स्वसंरक्षण के लिए तैयार रहो. अगर सरकार को यह बात समझ में नहीं आ रही है तो फिर मजबूरी है.” </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 12:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई: बीएमसी पर सख्त हाईकोर्ट; पूछा - इंदौर साफ हो सकता है तो मुंबई क्यों नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50774/mumbai-high-court-came-down-hard-on-bmc-and-asked"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/1200-675-27155933-1055-27155933-1784123579205.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया। </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या मुंबई में भी मोशी जैसा हादसा हो सकता है?</strong><br />अदालत ने पुणे जिले के मोशी में हाल ही में हुए कचरा संयंत्र भवन हादसे का भी जिक्र किया और कहा कि मुंबई में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं, इसलिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।<br /><strong>किस मामले की सुनवाई के दौरान हुई यह टिप्पणी?</strong><br />न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ उपनगर कांजुरमार्ग स्थित डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में प्रदूषण, लगातार फैल रही दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।<br /><strong>मोशी हादसे में क्या हुआ था?</strong><br />अदालत ने 8 जुलाई को पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में हुए हादसे का भी उल्लेख किया। भारी बारिश के बाद वर्षों से जमा अनुपचारित ठोस कचरे और औद्योगिक अपशिष्ट का विशाल ढेर अचानक खिसक गया और पास की दो मंजिला इमारत पर गिर पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी।<br /><strong>हाईकोर्ट ने मुंबई को लेकर क्या चिंता जताई?</strong><br />खंडपीठ ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर हैं। यहां भी ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। अदालत ने माना कि समस्या केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है। इच्छाशक्ति की कमी के कारण शहर की सड़कों पर कचरा फैला रहता है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।<br />नागरिकों को लेकर अदालत ने क्या कहा?<br />हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को भी जागरूक बनाने की जरूरत है ताकि वे सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें और घरों से निकलने वाले कचरे का अलग-अलग वर्गों में पृथक्करण (सेग्रिगेशन) करें। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मुंबई में किसी भी नागरिक को सार्वजनिक सड़क पर कचरा फेंकने की छूट नहीं है। <br />थूकने की आदत पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी क्यों?<br />अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी कड़ी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने टिप्पणी की, 'हमारे देश में थूकना मानो राष्ट्रीय शौक बन गया है।' कोर्ट ने कहा कि थूकने पर वर्तमान 200 रुपये का जुर्माना बेहद कम है और इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाना चाहिए ताकि लोगों में डर पैदा हो और इस आदत पर रोक लग सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली : मौखिक टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाने पर हाईकोर्ट ने लगाई मीडिया को फटकार, कहा- ऐसा रहा तो बातचीत बंद कर देंगे  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली हाइकोर्ट ने न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार मनीषा पांडे से जुड़ी मौखिक टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सनसनीखेज सुर्खियां बनाने पर कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रति कड़ी नाराज़गी जताई। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर पेश किया गया जिससे पत्रकार के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाए गए। जस्टिस सी. हरि शंकर ने कहा कि अदालत का मनीषा पांडे के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन अदालत की टिप्पणी को अलग पोस्टर के रूप में सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ हजारों नफरत भरे संदेश आए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47205/delhi-high-court-reprimands-the-media-for-sensationalizing-verbal-comments"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-11t125929.084.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>दिल्ली : </strong>दिल्ली हाइकोर्ट ने न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार मनीषा पांडे से जुड़ी मौखिक टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सनसनीखेज सुर्खियां बनाने पर कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रति कड़ी नाराज़गी जताई। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर पेश किया गया जिससे पत्रकार के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाए गए। जस्टिस सी. हरि शंकर ने कहा कि अदालत का मनीषा पांडे के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन अदालत की टिप्पणी को अलग पोस्टर के रूप में सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ हजारों नफरत भरे संदेश आए।</p>
<p> </p>
<p>सुनवाई के दौरान जस्टिस हरि शंकर ने कहा, “कल की सुनवाई में कुछ कड़ी टिप्पणियां की गईं लेकिन हमारा उद्देश्य उस पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई करना या उनके करियर को नुकसान पहुंचाना नहीं था। हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हम मनीषा पांडे के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का इरादा नहीं रखते।” यह मामला टीवी टुडे समूह की ओर से दायर उस अपील से जुड़ा है, जिसमें न्यूज़लॉन्ड्री पर मानहानि और कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया गया। टीवी टुडे के स्वामित्व में इंडिया टुडे और आज तक जैसे समाचार चैनल आते हैं। इस मामले में न्यूज़लॉन्ड्री ने भी क्रॉस अपील दायर की। इस सुनवाई में जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला भी पीठ का हिस्सा थे। </p>
<p>पिछली सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि टीवी टुडे, न्यूज़लॉन्ड्री की आलोचना को लेकर जरूरत से ज्यादा संवेदनशील रवैया अपना रहा है और जिन 75 वीडियो को आपत्तिजनक बताया गया, उनमें से केवल एक ही वीडियो प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक प्रतीत होता है। इसी वीडियो को लेकर, जिसे मनीषा पांडे ने एंकर किया था, अदालत की कुछ टिप्पणियां मीडिया में व्यापक रूप से रिपोर्ट की गईं। इन रिपोर्टों का जिक्र करते हुए जस्टिस हरि शंकर ने कहा, “हम मीडिया की आवाज दबाना नहीं चाहते और न ही यह कह रहे हैं कि अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग न की जाए। लेकिन रिपोर्टिंग करते समय उसके परिणामों को भी ध्यान में रखना चाहिए। कल की सुनवाई का एक पैरा अलग निकालकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसके बाद हजारों नफरत भरे संदेश आए। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं बनना चाहता, जिसके कारण नफरत फैले।” उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग से यह धारणा बन जाती है कि जज किसी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले हैं या लोगों की नौकरी जाने वाली है। अगर इसका यही नतीजा रहा तो अदालत को वकीलों से संवाद करना बंद करना पड़ सकता है। </p>
<p>जस्टिस हरि शंकर ने यह भी कहा कि उनके कुछ सहकर्मी जजों ने अब बिल्कुल भी मौखिक टिप्पणी न करने का फैसला कर लिया। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम फिर दोहराते हैं कि पत्रकार मनीषा पांडे के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का हमारा इरादा नहीं है। वह एक अच्छी पत्रकार हो सकती हैं। संबंधित बयान एक अपवाद भी हो सकता है। उनसे कहा जा सकता है कि उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।” हाइकोर्ट की इस टिप्पणी को न्यायिक कार्यवाही और मीडिया रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 16:48:28 +0530</pubDate>
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